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yogi sarswat


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Travelling with Mr.Yamraaj in Delhi Metro

Posted On: 17 Nov, 2015  
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चन्दरु की दुनिया -II

Posted On: 5 May, 2015  
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चन्दरु की दुनियाँ

Posted On: 1 Apr, 2015  
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ट्रेन चली छुक छुक छुक छुक

Posted On: 7 Jul, 2014  
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दिस इस यमराज कॉलिंग फ्रॉम ………

Posted On: 30 Jun, 2014  
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“आप” के बहाने ही सही ………राजनीतिक समालोचना (कांटेस्ट)

Posted On: 27 Jan, 2014  
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राति माछर नैं खाइ लई रे …..

Posted On: 24 Oct, 2013  
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खान चाचा

Posted On: 18 Oct, 2013  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

योगी जी सबसे पहले मैं आपके आपकी कहानी के लिए साधुवाद कहता हूँ , फिर कुछ गिला शिकवा भी, की इस बुजुर्ग की याद नहीं आई आपको इतने अर्से के बाद भी ! मेरी एक मजबूरी रही की मैं जागरणजंक्शन पेज से दूर रहा ! आज पेज खोलते ही आपका लेख नजर आया, सोचा इस गली से दुवा सलाम करता चलूँ ! आपकी कहानी ने उन बहुत से मासूमों के चेहरों से रूबरू करवा दिया जिन्होंने अपने माँ बाप देखे ही नहीं और होश सँभालते ही मजदूरी करना और गाली खाना अपनी किस्मत बना दिया ! समाज में आज बहुत से चंद्रू हैं जो दुनिया में आते हैं मार डंडे गाली खाते खाते संसार से रुख्शत हो जाते हैं ! योगी जी सम्पर्क बनाए रखी, इस मंडल में कुछ ही इन गिने लोग हैं जिन्हे पढ़ सुनकर अपने पन का आभाष होता है ! शुभ कामनाओं के साथ !

के द्वारा: harirawat harirawat

योगी जी सबसे पहले मैं आपके आपकी कहानी के लिए साधुवाद कहतक गुण, फिर कुछ गिल्वक शिकवा भी, की इस बुजुर्ग की याद नहीं आई आपको ! मेरी एक मजबूरी रही की मैं जागरणजंक्शन पेज से दूर रहा ! आज पेज खोलते ही आपका लेख नजर आया, सोचा इस गली से दुवा सलाम करता चलूँ ! आपकी कहानी ने उन बहुत से मासूमों के चेहरों से रूबरू करवा दिया जिन्होंने अपने माँ बाप देखे ही नहीं और होश सँभालते ही मजदूरी करना और गाली खाना अपनी किस्मत बना दिया ! समाज में आज बहुत से चंद्रू हैं जो दुनिया में आते हैं मार डंडे गाली खाते खाते संसार से रुख्शत हो जाते हैं ! योगी जी सम्पर्क बनाए रखी, इस मंडल में कुछ ही इन गिने लोग हैं जिन्हे पढ़ सुनकर अपने पन का आभाष होता है ! शुभ कामनाओं के साथ !

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आदरणीय श्री सद्गुरु जी , सादर अभिनन्दन ! आपने दुखती रग को छेड़ दिया ! आपने बिलकुल सही कहा की ज्यादातर पुराने लोग , जिनके लेख और कविताएं इस मंच की जान और शान हुआ करती थीं , आज इस मंच पर या तो दीखते नहीं हैं या फिर यदा कदा दीखते हैं ! इससे नए लिखने वालों को बहुत नुक्सान होता है , एक तो उन्हें मार्गदर्शन नहीं मिल पाटा और निश्चित रूप से हौसला अफ़ज़ाई भी नहीं हो पाती , लेकिन इसके लिए बहुत हद तक जागरण ही जिम्मेदार है जिसने गणमान्य लेखकों , ब्लॉगरों की बात पर कभी कान नहीं दिए ! आपकी चिंता , मेरी भी चिंता है ! इसी मंच ने मुझे एक प्लेटफार्म , एक थोड़ी सी पहिचान दी है ! उम्मीद है सब पहले जैसा होगा , हालाँकि आसरा बहुत काम है ! मेरे शब्दों तक आने और हौसलाफजाई के लिए आपका हार्दिक अभिनन्दन श्री सद्गुरु जी !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

आदरणीय योगी जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! बहुत बहुत बधाई ! आपकी रचना बहुत रोचक और होंठो पर मुस्कान लाने वाली है ! संतजन कहते हैं कि जो मृत्यु का उपहास उड़ा सके,वहो सच्चा योगी है ! बहुत दिनों के बाद आपने इस मंच पर कुछ लिखा है और सबके मन को गुदगुदाया भी है ! आप इस मंच पर सबको आपस में जोड़ने वाली एक कड़ी भी हैं ! आपने ने भी महसूस किया होगा कि अब पहले की तरह से किसी भी पोस्ट के लिए सौ डेढ़ सौ कमेंट नहीं होते हैं,क्योंकि बहुत से साहित्यकार मंच छोड़ चुके हैं ! उन्हें रोकने के लिए इस मंच के संचालकों के द्वारा कोई गंभीर प्रयास भी नहीं किया गया ! ये मंच अभी भी अपने पुराने घिसे-पिटे ढर्रे पर ही चल रहा है,जबकि समय के साथ-साथ इसमें कुछ ऐसा परिवर्तन होना चाहिए था,जो मंच छोड़कर जाने वालों को इस मंच के साथ बांधे रखने में सफल होता ! अब भी यदि इस पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो रचनाओं पर कमेंट करने वाले नहीं मिलेंगे और बिना कमेंट के रचनाओं का परिमार्जन और श्रृंगार अधूरा है ! आप महीने में कम से कम दो पोस्ट तो इस मंच पर लिखिए ! अपनी हार्दिक शुभकामनाओं सहित !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

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के द्वारा: jagojagobharat jagojagobharat

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आदरणीय योगी जी,सादर हरिस्मरण.बहुत अच्छी राजनितिक समीक्षा आप ने की है.अपने लेख में आपने बहुत सही कहा है- भारत में 2013 के शुरू में अरविन्द केजरीवाल ने ‘आप ” के माध्यम से निश्चित रूप से एक नयी बहस को जन्म दिया है ! हम अरविन्द के चाहे कितने भी बड़े विरोधी हों लेकिन हम इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि उनकी वजह से ही आज राजनीती में ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को एक पहिचान मिल रही है ! जिस तरह से आज विकास और स्वच्छ और बेहतर शासन का पर्याय नरेंद्र मोदी हैं उसी तरह ईमानदारी की पहिचान अरविन्द भी बन रहे हैं ! नरेंद्र मोदी या अरविन्द केजरीवाल अपने मकसद में कितने कामयाब होते हैं या ये कहा जाए जनता उनकी नीतियों का और उनका कितना समर्थन करती है ये एक अलग विषय हो सकता है लेकिन इस बात में कोई दोराय नहीं है कि जाति और धर्मों में बँटी भारतीय राजनीती को इन दौनों ने विकास और ईमानदारी की परिपाटी पर ला खड़ा किया है ! राजनीती में इन दौनों विशेषताओं पर बात होने लगी है आप को बहुत बहुत बधाई.कांटेस्ट के लिए मेरी ओर से आपको बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनायें.

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के द्वारा: Sonam Saini Sonam Saini

आदरणीय योगी जी, सादर अभिवादन! काफी दिनों बाद आप एक सशक्त विषय लेकर उपस्थित हुए हैं. आपका हार्दिक अभिनदन! धर्म चाहे कोई हो ..कभी यह इजाजत नहीं देता कि आप दूसरे धर्मावलम्बियों को तंग करें. धर्म कभी यह भी इजाजत नहीं देता कि आप अपने ही धर्मावलम्बियों को तंग करें. जलाकर मार देनेवाली घटनाएं, बलात्कार या सामूहिक बलात्कार को कोई कैसे जायज ठहरा सकता है. धर्म के अलावा कानून भी तो है अपने अपने राष्ट्र का ...घृणित अपराध चाहे धर्म के नाम पर हो या देश के नाम पर हो या किसी बहाने हो कभी भी कहीं भी जायज नहीं ठहराया जा सकता ... पर अपराध तो हो रहे हैं रुकने का नाम ही नहीं ले रहे चाहे विदेश हो या अपना देश ... धर्म और कानून दोनों ही अक्षम साबित हो रहे हैं ...ऐसे में अंतिम वाक्य वही है जो आपने उद्धृत किया है - देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान कितना बदल गया इनसान सूरज न बदला चांद न बदला ना बदला रे आसमान- स्वर्गीय प्रदीप जी की आत्मा आज भी रो रही होगी. हम सबको यह प्रार्थना करनी ही चाहिए ... कितना बदल गया इनसान ऐ मालिक तेरे बन्दे हम ऐसे हों हमारे करम नेकी पर चले और बदी से टले, ताकि हंसते हुए निकले दम! सादर योगी जी!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीय योगी जी , देखिये कैसी विडम्बना है , कि पाकिस्तान में सताये गये यह लोग वैधानिक तरीके से  भारत आते हैं और वैधानिक तरीके से भारत की नागरिकता के लिये आवेदन करते हैं और इतने वर्षों के बाद  भी वे आज तक विदेशी नागरिक हैं । जब की बांग्लादेश से लाखो विदेशी नागरिक गैर कानूनी रूप से भारत  आते हैं । आज वह सब भारतीय नागरिक हैं । उनके पास भारत का राशन कार्ड , वोटर आई डी कार्ड सब कुछ  हैं । क्यों । क्या भारत मे अवैधानिक रास्ते सरल और वैधानिक रास्ते जटिल हैं । क्या इस लिये ही यहां  अवैधानिक कार्यो की भरमार है। यह कैसा शासन है । यह कैसी राजनीति है।  योगी जी आपसे सहमत हूँ  कि भारत धर्मनिरपेक्ष है , क्यों कि हम हिन्दू हैं ।एक अत्यन्त कटु एवं करुण सत्य प्रस्तुत करने के लिये  साधुवाद।

के द्वारा: anilkumar anilkumar

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के द्वारा: DR. SHIKHA KAUSHIK DR. SHIKHA KAUSHIK

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के द्वारा: Acharya Vijay Gunjan Acharya Vijay Gunjan

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अब आते हैं इस बात पर कि कैसे हिंदी को सम्मान और सही स्थान दिया जा सकता है या दिलाया जा सकता है ! सबसे पहली जरुरत है खुद में बदलाव लाने की ! जहां जरुरत न हो वहां अंग्रेजी का उपयोग न करा जाए बल्कि मातृभाषा बोलें ! अपने घर में हिंदी में बात करें , अपने बच्चों से हिंदी में बात करें लेकिन उन्हें ये भी कहें कि अंग्रेजी सीखना भी बहुत जरुरी है ! आप आज के समय में सिर्फ हिंदी से काम नहीं चला सकते ! कुछ लोगों को हिंदी के आज के स्वरुप से चिंता होने लगी है, स्वाभाविक है ! किन्तु अगर हिंदी को जन जन की भाषा बनाना है तो आपको इसके आधुनिक रूप को स्वीकार करना ही होगा ! अगर आज शहर में कोई योग को योगा कहता है या मन्त्र को मंत्रा कहता है तो कोई इस पर आपात्ति क्यूँ करे ? क्यूंकि उसे ऐसा कहना आसान और अच्छा लगता है लेकिन ये अंग्रेजी से तो नहीं आये , हैं तो मूलरूप से हिंदी के ही ! इसलिए मुझे लगता है हिंदी को व्यवहारिक होना ही होगा ! yogi ji aapne bahut sahi baat kahi ki hindi ko samradh banaane ke liye apne aapko samradh aur majboot karna hoga

के द्वारा:

योगी जी, अपने सही बात लिखी है.हिंदी हमारी जन्मजात भाषा है ज़ाहिर है कि हम प्राकृतिक रूप से वही बोलते हैं ..ये ठीक है कि वैश्वीकरण के साथ समायोजन करने के लिए इंग्लिश आना ज़रूरी है क्योंकि इंग्लिश जानने वाला किसी भी भाषा बोलने वाले देश में खुद को communicate कर सकता है.(communicate की हिंदी "सम्पर्कित" है.जिसे प्रयोग करना मुझे अव्यवहारिक सा लगा )..लेकिन उसके लिए हिंदी भूलना तो कोई शर्त नहीं.. साधारण सी बात है लेकिन बहुत दुखद है कि आज बच्चे हिंदी की गिनती तक नहीं जानते हैं. मैं ने कोशिश कर के अपने घर के बच्चों को 100 तक की पूरी गिनती हिंदी में सिखाई है लेकिन वो बोलते नहीं हैं कहते हैं कि बाहर कोई नहीं समझता.....

के द्वारा: sinsera sinsera

कभी कभी हिंदी को लेकर दक्षिण में जो कुछ दिखाई देता है असल में वो असली नहीं है वो पैदा किया हुआ होता है ! क्यूंकि अगर वो पैदा नहीं होगा तो वोट बटोरने की मशीन ख़त्म हो जायेगी और मुझे ये गलत भी नहीं लगता ! गलत यानी कि ये की उन पर हिंदी थोपी जाए ? आखिर क्यूँ थोपी जाए दक्षिण में हिंदी ? हिंदी भारतीय भाषाओँ की बड़ी बहन जैसी है और मुझे लगता है उसे छोटी बहनों को भी प्यार करना चाहिए ! हिंदी , क्यूंकि बड़ी बहन है तो उसे और दूसरी भाषाओँ को भी सम्मान और उचित स्थान देना चाहिए ! ekdam sahi , bharat azad desh है और मुझे लगता है हर किसी को अपनी भाषा बोलने का हक़ है ! हम हिंदी को किसी पर थोप नहीं सकते लेकिन इसके सौंदर्य से औरों को प्रभावित कर सकते हैं ! बेहतरीन लेख योगी जी

के द्वारा:

हम अंग्रेजी आर्टिकल को केवल ख़त्म करना चाहते हैं , पढना चाहते हैं किन्तु उससे जुड़ नहीं पाते ! लेकिन जब हम हिंदी ब्लॉग पढ़ते हैं , अपने आपको उससे जुड़ा हुआ महसूस करते हैं ! हसी की बात पर हँसते हैं , गंभीर बात पर गंभीर होते हैं ! मतलब अगर एक लाइन में कहूँ तो जहां अंग्रेजी ब्लॉग या अंग्रजी आर्टिकल पढने के दौरान आपका चेहरा भावहीन रहता है जबकि हिंदी या अपनी मात भाषा के ब्लॉग पढने का समय आपका चेहरा हर वो बात कहता है जो आप समझ रहे हैं , जो आप पढ़ रहे हैं ! जो आप महसूस कर रहे हैं ! योगी जी , ऐसा हर अपनी भाषा में होता है की जिसे आप जन्म से पढ़ते आये हैं , बोलते आये हैं वो हर तरह से अच्छी लगने लगती है ! हिंदी क्यूंकि अधिकांश भारतियों की भाषा है इसलिए इसका बोलबाला निश्चित रूप से होना ही है लेकिन अंग्रेजी आज के समय की भाषा है , उसे इग्नोर नहीं किया जा सकता ! आपके लेख हमेशा ही बेहतरीन और पठनीय होते हैं , इसमें कोई शक नहीं !

के द्वारा:

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना । हिंदी है हम वतन हैं हिंदोस्ता हमारा ।। हिंदी किसी एक समाज, जाति अथवा राष्ट्रम की भाषा नहीं है । वह पूरे हिंदुस्तापन की भाषा है । वह सभी भाषा – भाषी के बीच सम्पर्क स्थापित करने वाली सरल, सहज भाषा है । यह आज आम लोगों की जरूरत बन गयी है । आज इसका विकस हो रहा है , यह विकास ही है कि हम कंप्यूटर पर हिंदी लिपि में साहित्य की रचना कर रहे हैं आदि । पर कुछ लोग हिंदी की रोटी खाकर विदेशी भाषा में बोलना अपनी शान समझते है । पर यह शत प्रतिशत सत्य हैं चाहे कितना ही अंग्रेजी आप बोलिए आपको अंग्रेज अपनाएंगे नहीं इंडियन ही बोलेगे ‍। धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का । अत: सभी भाषा जानना जरुरी है पर अपनी भाषा की अवहेलना करके नहीं ।

के द्वारा: udayraj udayraj

वाह वाह योगी जी, वाह जितनी भे प्रशंशा की जाय कम है .... आपने वो हर पहलू की चर्चा की है जिससे हिंदी का सम्मान बढ़ा है और आगे भी बढ़ेगा... सिर्फ बढ़ेगा ही नहीं बल्कि सम्मान के अधिकार की मांग होने लगेगी. आपने माननीय अटल बिहारी के साथ अमिताभ बच्चन, मनोज बाजपेयी, आशुतोष राणाऔर प्रकाश झा की चर्चा की निश्चित ही और नाम जोड़े जा सकते हैं , सबका आशय यही है की हिंदी गरीबों के साथ साथ अभिजात वर्ग की भी भाषा है और इसके प्रयोग में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है ... हम तन मन धन से हिन्दीके लिए समर्पित हैं ... मन समर्पित तन समर्पित और यह जीवन समर्पित चाहता हूँ मातृ-भू तुझको अभी कुछ और भी दूँ ॥ माँ तुम्हारा ऋण बहुत है मैं अकिंचन किन्तु इतना कर रहा फिर भी निवेदन थाल में लाऊँ सजाकर भाल जब स्वीकार कर लेना दयाकर यह समर्पण गान अर्पित प्राण अर्पित रक्त का कण-कण समर्पित ॥

के द्वारा:

के द्वारा: seemakanwal seemakanwal

तेरे घर के द्वार बहुत हैं ... इस ब्लॉग में बात बहुत है किस किस को अपनाऊँ मैं! वाह योगी जी, क्या कहने हैं आपके - उस दिन के विषय में सोचिये जिस दिन भारत के हर गाँव और हर घर में इन्टरनेट होगा , तब हिंदी ब्लॉग्गिंग अपने सुनहरे दौर में होगी ! ... और तब सुखिया के स्वर का लोकगीत और हरखू का विरहा भी हम ब्लॉग में पढ़ सकेंगे ... खेतों में किसानों का आल्हा और बैलों के गले की घुँघरू के स्वर भी सुन सकेंगे. जुम्मन चाचा के मुंह से मनगढ़ंत किस्से भी पढ़ सकेंगे. फिर कैसे नहीं होगा हिंदी ब्लॉग्गिंग का स्वर्णिम भविष्य. वाह मजा आ गया ... भुट्टा भूनने के खुशबू आ रही है ... देखता हूँ, गरम गरम नरम नरम मकई के दाने क्या कहते हैं कोर्न फ्लेक्स ... न मकई ही रहने दीजिये 'मक्के की रोटी और सरसों की साग'!!!!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: nishamittal nishamittal

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योगी जी, सादर नमस्कार. देश और देश वासियों को लेकर आपकी चिंता उचित ही है. लेकिन हमारे नेताओं को इसके लिए फुर्सत ही कहाँ है ? सोचने की बात है जो सरकार अपने किये घोटालों को निपटाने में लगी हो ; वो देश के बारे में क्या सोचेगी ? रही बात शहीदों की, उन्होंने अपना कर्तव्य पूरा किया और चले गए. अब हमारी बारी है. हम इन नेताओं की तरफ देखें ही क्यों ? हम अपना कर्तव्य पूरा करें और देश को आगे बढ़ाएं. फिर इसका परिणाम चाहे निलंबन हो या स्थानान्तरण . योगी जी आपके लेख में व्यंग्य का पुट अच्छा लगा. आपको शुभकामनाएं. आपकी पंक्तियों को पढ़ कर मुझे भी कुछ पंक्तियाँ याद आ रही है. जिन्हें यहाँ प्रस्तुत करने के सुख से मैं वंचित नहीं होना चाहता. शहीद तेरी मौत ही तेरे वतन की जिंदगी तेरे लहू से जाग उठेगी इस वतन की जिंदगी खिलेंगे फूल जहाँ तू जहाँ शहीद हो योगी जी, नमस्कार.

के द्वारा: Ravinder kumar Ravinder kumar

आप की इस बात में कटु सत्य है कि "बच्चे तो संभाल के तभी रखेंगे जब तुम इसे छोड़ जाओगे संभालने लायक ?" पर फिर भी हमें अपने देश को इस भंवर से निकाल है. मेरे स्वर्गीय पिता एक ऐसे स्वतंत्रता सैनानी थे जो १९२० से १९४७ तक बराबर गांधीजी के एक सिपाही बन बीसों बार जेल गए पर जब देश आज़ाद हो गया तो अपने दुसरे साथियों कि तरह वो कांग्रेस से चिपके नहीं रहे वरन अलग हो साहित्य में लग गए और लगभग १९९४ बिना किसी लोभ के अपना योगदान देश के लिए करते रहे. पर कौन पूछता है उन जैसे सैनानियों को. बावजूद इन बातों के हमें इन्हीं मुश्किलों से अपनी नई राह निकालनी है. ये देश इस समय बहूत कठिन परिस्थितियों से गुज़र रहा है अगर हम मिल कर और एक जुट नहीं चलेंगे तो हमारे दुश्मन इस नष्ट करने कि कोई कसार नहीं छोड़ेंगे. सुभकामनाओं के साथ ..रवीन्द्र

के द्वारा: Ravindra K Kapoor Ravindra K Kapoor

के द्वारा: Nikhil Nikhil

वाह क्या खूब बघिया उखाड़ी है आपने ऊंची ऊंची कुर्सी पर बैठने वालों ऊंची नाक वालों की, जिनको पता ही नहीं है की वे कितने भ्रष्ट और गरीबी के अम्बार पर अपनी कुर्सी टिकाये हुए हैं और कुर्सी बेचारी आफत की मारी आपके बढ़ते हुए वजन से दल दल में धंसती चली जा रही है ! जिस मंत्री को देखो इनके लडके लड़कियों को देखो कद की जगह वजन बढ़ा रहे हैं, और पापा मम्मी अपने बच्चों के बढ़ते वजन पर स्वयं फूल कर कुप्पा हो रहे हैं ज्यादा से ज्यादा रिश्वत ले रहे हैं, घोटाला कर रहे हैं, १५ अगस्त को जन गण मन का गाना गा कर प्रधान मंत्री के पीछे खड़े होकर अपने बढे हुए पेटों को जनता को दिखा कर अपनी उपलब्धियां गिना रहे हैं ! लेकिन योगी जी एक दिन जरूर आएगा जिस दिन गरीबी हट जाएगी और इन पेट वालों के पेट फट जाएंगे, वोट बैंक धरासाही हो जाएंगे, अरे जब रावण, कुम्भकरण, कंस, ताड़का, त्रिजटा द्रूमुखी, सुर्पंखान नहीं रहे तो ये मंत्री नेता किस खेत की मूली हैं, यमदूत आएँगे इन्हें अपनी बोरी में भर कर ले जाएंगे ! राम राम सत हो जाएगी ! शुभ शुभ बोलेंगे, शुभ शुभ सोचेंगे क्यों की हम जनता हैं, हम आम आदमी हैं !

के द्वारा: harirawat harirawat

सारस्वत जी आपने कितने सही ढंग से आंकड़े देकर इन बेसुरे, अंधे काणे राजनेताओं को भारत की बहु संख्या जनता पर होने वाले अत्याचार की ओर ध्यान दिलाने की कोशीश की है, संयुक्त राष्ट्र में उन गरीब लाचार अपाहिज पाकिस्तान से आये बेघर किये गए हिन्दुओं की दुर्दशा पर सरकार चर्चा करावे, मानव अधिकार आयोग के नुमायंडे, गुलछरे उड़ाने वाले भारत में पकडे गए आतंकवादियों की पैरवी करने वाले जनता की खून पशीने पर पलने वाले क्या इन्हें अल्प संख्यकों में केवल भारत के मुसलमान ही नजर आते हैं पाकिस्तान में दासता की जंजीरों में जकड़े अल्प संख्यक हिन्दू नजर नहीं आते ? सारस्वत जी जब मुलायम, ममता, मायावती, नीतिस कुमार, लालू प्रशाद ही हिन्दू होते हिन्दू नहीं है फिर कोई मुसलिम या इसाई हमारी क्यों सुनेगा ! हम तो हिंदूं कहने पर साम्प्रदायिक हो जाते हैं धार्मिक हो जाते हैं और ये धर्मनिरपेक्ष बन जाते हैं ! हम स्वतंत्र देश में विदेशी के गुण गाते हैं !

के द्वारा: harirawat harirawat

तेरी आरजू , तेरी जुस्तजू , तेरा इंतज़ार ओह ! हमें कितना काम है आजकल । एक जेल में और एक ‘ बेल’ में नेताओं का कितना नाम है आजकल ॥ छत पर एक झंडा लगा लिया जाए पार्टियों के झंडे का क्या दाम है आजकल ? काम से फुर्सत पाकर तुझे ही ढूँढता हूँ तेरी जुल्फों के तले ही मेरी सुबहे-शाम है आजकल ॥ चलो इन उसूलों को कूड़े में डाल दें इस मुल्क में सोच गुलाम है आजकल ॥ हुकूमत से कोई उम्मीद लगाना छोड़ दो चोरों के हाथ में मुल्क का निजाम है आजकल ॥ अदीब-ओ-अमन के पैरोकार कहाँ गए निठल्लों के हाथ में कलाम है आजकल ॥ अब छोड़ दी जाएँ ‘ योगी ‘ ज़मीर -ओ- ईमान की बातें हिन्द में बस ताकत को सलाम है आजकल ॥ वाह! वाह! क्या ग़ज़ल कही है योगी जी आपने मज़ा आ गया बहुत बहुत बधाई !...

के द्वारा: AJAY KUMAR CHAUDHARY AJAY KUMAR CHAUDHARY

के द्वारा: Shweta Shweta

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

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इतनी सार्थक और विस्तृत प्रतिक्रिया पढ़कर हर्ष हुआ ! हम बहुत बात कर लेते हैं इस मंच पर ! हम मतलब ब्लोगर्स ! लेकिन कभी उनकी जिंदगी के करीब जाएँ तो लगता है जैसे वो नाक्साली कुछ भी गलत नहीं कर रहे ! कब तक आप उनको समाज से काट कर रखियेगा ? कब तक उनको मूलभूत जरूरतें पूरी करने के लिए तड़पते हुए देखिएगा ! हम उनकी गरीबी देखें तो समझ आ जायेगा की लोग ऐसे भी रहते हैं ? हम छोटी से छोटी समस्याओं पर आन्दोलन रत हो जाते हैं लेकिन जिनके पास कुछ नहीं है वो कैसे आन्दोलन करें ? बहुत बहुत आभार श्री अमन कुमार जी ! कहाँ तो तय था चिराग़ाँ हर एक घर के लिए कहाँ चिराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए यहाँ दरख़तों के साये में धूप लगती है चलो यहाँ से चलें और उम्र भर के लिए न हो कमीज़ तो पाँओं से पेट ढँक लेंगे ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सफ़र के लिए ख़ुदा नहीं न सही आदमी का ख़्वाब सही कोई हसीन नज़ारा तो है नज़र के लिए आभार !बहुत सुन्दर

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आदरणीय योगी जी, सादर अभिवादन! काफी देर के बाद मेरी नजर आपके इस भाव प्रधान रचना पर गयी. इसके लिए मुझे आप क्षमा करेंगे, क्योंकि आप तो मुझे हर जगह ढूढ़ लेते हैं, मैं ही न जाने कहाँ खो जाता हूँ. आपकी-हमारी चिंता जायज है और नीचे हरीश रावत जी की कविता भी मार्मिक है! सरकारों को उनकी ​याद नहीं उनको भी इनसे आस नहीं ऊँची -ऊँची दीवारों के पीछे की मैं बातें सयानी लिखता हूँ !! आप की हर पंक्ति लाजवाब है. पर हल सरकार के ही पास है .. अब भी समय है. बहुत सारे निर्दोषों के साथ कुछ नेता भी मारे जा रहे हैं और इस बार की बर्बरता का चेहरा जो समाचारों में आया है निश्चित ही चिंतनीय है. हमारे नीति निर्धारक अभी भी आईपीएल पर ही झूठे तर्क देकर एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं, जैसे वे इसके दोषी नहीं हैं. सारे अपराध की जड़ में कहें तो आर्थिक विषमता का हिमालय और हिन्द महासागर है. जबतक हमारे नीति निर्धारक स्वयम ईमानदार नहीं होंगे इसी प्रकार की नक्सलवाद और आतंकवाद मुंह बाए निर्दोषों का खून करती रहेगी. हमारी न्याय ब्यवस्था भी वैसी ही जटिल और सुस्त है कि क्या कहने एक अपराधी को सजा देने में वर्षों बीत जाते हैं और अपराध दिन प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे हैं. एक अंतहीन सिलसिला चला आ रहा है, जो न जाने कब ख़त्म होगा! मैंने भी बहुत भाषण दे दिया.... आपने नक्सली के दर्द को महसूस किया और कराया इसके लिए आप बधाई के पात्र हैं! सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

लेखक जी, लेख अच्छा हे पर कभी कभी अपने बदन का भैस भी देखा करो जी, आप बंधे अछे हो, देशप्रेम भी अच्छा ही, पर क्या हे की कभी आपने यह समझने की कोसिस की कैसा लगता होगा जब यही चीज आपके लोग कोई दूसरी छिमेकी देसके साथ ऐसा करते हो? वह के देस वासियों जो अपने रास्त्र को प्रेम करते हे कैसा लगता होगा? क्या कभी अपने कलम चलाई हे? क्यों भारत गौतम बुद्धा को अपने देश में पैदा नहीं होते हुए भी होने की गलत प्रचार प्रसार कर रहा हे? क्यों वो नेपाल को ७२ से भी ज्यादा स्थान में सीमा अत्रिक्रमण कर रहा हे? क्यों वो अपने राव और कोई वि इंटेलिजेंस की मद्दद से दुसरे छिमेकी डेस्क अमन चैन को छीन ते आया हे? क्यों वोह लस्कर इ तोएबा जैसे अपराधिक संस्थान को आतंरिक तौर से सहयोग दे रहा हे? कही यो हतियार का ट्रेड तो नहीं हे? अपनी एंटी-वायरस बेचने के लिए वायरस बनान जैसा ही आजके दिन सरकारे टेररिज्म का बढावा कर रहे हे.

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योगी जी सबसे पहले आपको मानवता के लिए इतना अच्छा लेख लिखने के लिए धन्यवाद देता हूँ सचमुच इस्लाम और मुसलमानों का इतिहास रहा है की बाप को जन से मरकर बीटा राजगद्दी पर बैठता है और मुग़ल काल में ऐसा देक्खने को मिला इतिहास गवाह है जब जिनकी बुनियाद ही हिंसा पर है जिनका वजूद ही हिंसा पर है वे मानवता का क्या अर्थ समझेंगे किस विषय पर तो विश्व भर के देशों को सोचना होगा मानव अधिकार की संस्था में कार्यरत्त लोग न जाने किस मानवता की रक्षा के लिए बैठे हैं जब मानवता रोज मरती है पाकिस्तान में हिन्दुओं की हालत कैसी है यह तो वहां से तीरथ करने के नाम पर आये यात्रियों को देखकर पता चलता ही है जब दिल्ली में पाकिस्तान आये करीब ५० लोगों का परिवार पाकिस्तान वापस जाना ही नहीं चाहता वे कहते हैं हम जान दे देंगे पाकिस्तान नहीं जायेंगे और हमारी भारत सरकार ने एक बार उनकी तरफ सहानुभूति का शब्द भी नहीं कहा फर्क क्या है दोनों देशों में

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

योगी जी नमस्कार आपका लेख '' वहाँ जिन्दगी ....'' पढ़ा । योगी जी एक बात बताइए क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि स्त्रियों की इज्जत की दशा भारत और पाकिस्तान में एक जैसी ही है । आज हमारी लडकियाँ न तो भारत में ही सुरक्षित हैं न ही पाकिस्तान में । सच पूँछा जाये और भारत के शहर की बात तो क्या करें तो आज भारत की राजधानी में ही हम या हमारी बेटियाँ सुरक्षित नहीं हैं । जबकि हम नारियों के आरक्षण की बात करते हैं मुझे लगता है कि भारत में नारियों को जितनी ज्यादा सुरक्षा की जरूरत है उतनी आरक्षण की नहीं । सच बताइए क्या आपको ऐसा नहीं लगता आज शायद कोई नागरिक ऐसा होगा जो दिल्ली में रहना चाहता हो । अब बात करें नेताओं और जनता की उनके बारे में तो लिखना ही बेकार है । नेता मतलबपरस्त हो गये हैं और जनता की दशा भैंस के सामने बीन बजाने जैसी है । इतना ही कह सकते हैं -- कलयुग है भाई क्या भारत और क्या पाकिस्तान

के द्वारा: Manisha Singh Raghav Manisha Singh Raghav

आज शायद दुनिया को कुछ लोग जितना खूबसूरत बना देना चाहते हैं , ये धर्मों के ठेकेदार उसी दुनिया को बदबूदार , खतरनाक और कुरूप करने में लगे हुए हैं ! कल्पना करिए उन लोगों के बारे में , उनकी जिंदगी के बारे में जो हर पल मौत को देखते होंगे ! जो हर पल अपनी बहन बेटियों की इज्ज़त लुट जाने के डर से सहमे सहमे से रहते होंगे ! कल्पना करिए उन मासूमों की जिंदगी की जिनकी आँखों में सुनहरे कल के सपने होंगे और जिन्हें अनायास ही , अकस्मात ही मौत अपने आगोश में ले लेती होगी ! जहां जिन्दगी पल पल और कदम कदम रोती होगी ! ओह ! क्या धर्म जरुरी है ? और अगर जरुरी है तो क्या ऐसा धर्म जरुरी है मानव के लिए ? आदरणीय योगी जी, सादर अभिवादन! मैंने भी पाकिस्तान से आये कुछ हिन्दुओं की दास्तान टी वी पर देखी/सूनी थी. मुझे भी दर्दनाक लगा था. हमारी सरकारें और हिंदूवादी राष्ट्र/ ताकतें मानवाधिकार वाले लोग क्यों इसे देख कोई कदम नहीं उठाते? सबसे ज्यादा कट्टर कोई धर्म अगर है तो वो है इस्लाम! और सबसे ज्यादा अन्धसमर्थक भी इसी धर्म में हैं. इस्लामी संगठन आज विश्व के लिए चुनौती बना हुआ है, क्या संयुक्त राष्ट्र संघ भी इनके बारे में कुछ नहीं कर रहा है? आपका शोधपरक आलेख सोचने पर मजबूर करता है! अंत में आपके द्वारा स्वर्गीय प्रदीप की पंक्तियाँ मैं भी दुहराता हूँ- देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान कितना बदल गया इनसान सूरज न बदला चांद न बदला ना बदला रे आसमान कितना बदल गया इनसान

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: Madan Mohan saxena Madan Mohan saxena

आज शायद दुनिया को कुछ लोग जितना खूबसूरत बना देना चाहते हैं , ये धर्मों के ठेकेदार उसी दुनिया को बदबूदार , खतरनाक और कुरूप करने में लगे हुए हैं ! कल्पना करिए उन लोगों के बारे में , उनकी जिंदगी के बारे में जो हर पल मौत को देखते होंगे ! जो हर पल अपनी बहन बेटियों की इज्ज़त लुट जाने के डर से सहमे सहमे से रहते होंगे ! कल्पना करिए उन मासूमों की जिंदगी की जिनकी आँखों में सुनहरे कल के सपने होंगे और जिन्हें अनायास ही , अकस्मात ही मौत अपने आगोश में ले लेती होगी ! जहां जिन्दगी पल पल और कदम कदम रोती होगी ! ओह ! क्या धर्म जरुरी है ? और अगर जरुरी है तो क्या ऐसा धर्म जरुरी है मानव के लिए ? आदरणीय योगी जी सादर अभिवादन. धर्म के नाम पर इन्सानिय का क़त्ल हो रहा है. सार्थक लेख हेतु बधाई.

के द्वारा: PRADEEP KUSHWAHA PRADEEP KUSHWAHA

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

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के द्वारा: Shweta Shweta

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