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क्या इन चुनावों में भ्रष्टाचार सबसे प्रमुख मुद्दे के रूप में अपना असर छोड़ पाएगा?

Posted On: 30 Jan, 2012 में

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भारत में भ्रष्टाचार के कई रूप दिखाई देते हैं मगर हम सिर्फ उन्हीं घोटालों के भ्रष्टाचार को देखते हैं जिनमें लाखों करोड़ों के घपले होते हैं ! दफ्तर में घूस खाना , पुलिस वाले को रिपोर्ट लिखवाने से लेकर रेलवे में तत्काल सुविधा के हेरफेर को हम यूँ ही नज़र अंदाज़ कर देते हैं | इस घोटाले में सरकार या मंत्री शामिल नहीं होते | हम हर रोज़ सुबह से लेकर शाम तक के जीवन में कहीं ना कहीं स्वयं भी इस भ्रष्टाचार के जाल में फंसते हैं , खुद भ्रष्टाचार करते हैं और फिर घर आकर टेलीविजन के सामने बैठकर देश -प्रदेश की सरकार , मंत्रियों और व्यवस्था को पानी पी पीकर कोसते हैं ! और फिर अगले दिन के लिए तैयार हो जाते हैं अपने अलावा सबको कोसने के लिए ! नहीं ? तो फिर क्या हम बस में परिचालक से सही टिकट लेते हैं ? हमें अगर परिचालक 20 रुपये के टिकेट की जगह कहता है कि बस 10 रुपये ही दे दो और वो टिकेट भी नहीं देता , हम भी खुश और वो भी खुश ! हमें 10 रुपये बच गए और उसे भी 10 रुपये मिल गए ! सरकार का क्या हुआ ? सरकार को किसने चूना लगाया , हमने !

राहजन को भी अक्सर रहनुमा ने लूटा है
किसको राहज़न कहिये किसको रहनुमा कहिये ?

अब ज़रा मुद्दे पर आते हैं ! उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग द्वारा चुनाव की घोषणा होने पर सब पार्टियाँ अपने अपने मुद्दों की लिस्ट बनाने में लग गयीं | इस लिस्ट में हर पार्टी ने सबसे ऊपर भ्रष्टाचार का ही मुद्दा रखा हुआ था | बड़े बड़े वादे, बड़ी बड़ी बातें हो रही थीं , भ्रष्टाचार के खिलाफ ! पार्टियाँ तो अलग , अन्ना हजारे की टीम ने भी इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश में जाकर हो हल्ला मचने की कसम खा राखी थी | लग रहा था कि हो ना हो , इस बार भ्रष्टाचार के मुद्दे को उत्तर प्रदेश के चुनावों में मान्यता मिलेगी और उत्तर प्रदेश की जनता इस मुद्दे को ध्यान में रखकर ही अपना मत देगी | ये बात दिसंबर के मध्य में चल रही थीं | दिसंबर 2011 बीतते- बीतते यह बात स्पष्ट सी लगने लगी थी कि भारत की दोनों बड़ी पार्टियाँ , कॉंग्रेस और भारतीय जनता पार्टी , उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर हैं और कम से कम ये दोनों पार्टियाँ साफ़ सुथरी छवि वाले लोगों को ही अपना उम्मीदवार बनायेंगी ! हालाँकि ये बहुत दूर की कौड़ी लगती थी कि 65 वर्षों की धुल धूसरित राजनीति क्या एक झटके में ही इतनी साफ़ हो जाएगी ? आज़ादी के बाद के 65 वर्षों तक जिस प्रदेश की राजनीति अपराध और गुंडई के बल पर चलती रही हो, भ्रष्टाचार जिस प्रदेश की राजनीति के एक अहम् हिस्सा बन गया हो , उस प्रदेश की राजनीति क्या एक चुनाव में ही साफ़ हो जाएगी ? लेकिन कॉंग्रेस पार्टी के महासचिव और भविष्य के भारत के प्रधानमंत्री माने जा रहे राहुल गाँधी का जोश और भारतीय जनता पार्टी का उत्साह चीख चीख कर लोगों को ये बताने को बेताब था कि इस बार हम उत्तर प्रदेश में साफ़ सुथरी सरकार लाने को प्रतिबद्ध हैं | लेकिन , ना जाने कौन सी मजबूरी थी कि जैसे जैसे टिकटों का बटवारा शुरू हुआ हर पार्टी के चेहरे वही दिखाने लगे , वही पुराने चेहरे | हाँ ! कहीं कहीं नाम जरूर बदले यानी चुनाव लड़ने वाले लोगों की सूरत तो बदली मगर सीरत नहीं ! पार्टियाँ ढूंढ -ढूंढ कर ऐसे लोगों को अपने पाले में लाने के लिए आतुर दिखाई देने लगीं जिन पर हजारों करोड़ रुपये के घोटालों के आरोप लगे हुए हैं ! अगर कोई क्षेत्रीय पार्टी इस तरह का कदम उठाती तो कुछ समझ आता है मगर 125 साल पुरानी कॉंग्रेस पार्टी और अपने सिध्हंतों के लिए अपनी पीठ ठोकने वाली भारतीय जनता पार्टी अगर इस तरह का प्रयास करती हुई नज़र आतीं हैं तो निश्चित रूप से निराशा होती है ! भारतीय जनता पार्टी का एकदम सफ़ेद चमकने वाला चेहरा , यकायक तब काला नज़र आने लगा जब उसने केवल जाति को आधार मानकर 5000 करोड़ रुपये के NHRM घोटाले के आरोपी बाबू सिंह कुशवाहा को बा इज्ज़त अपनी पार्टी के मंच से अपनी पार्टी में शामिल करने का ऐलान किया | ये अलग बात है कि ज्यादा हो हल्ला मचने के बाद उनकी सदस्यता निलंबित कर दी गई ! यही कुछ हाल कॉंग्रेस का भी रहा जिसने इन चुनावों को राहुल गाँधी की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखना शुरू कर दिया और चुनावों में जीत हासिल करने के लिए कठोर फैसले लेने की जगह दल बदलुओं और भ्रष्टाचारियों से गठजोड़ किया |


हौले-हौले पाँव हिलाओ जल सोया है छेडो मत

हम सब अपने-अपने दीपक यहीं सिराने आयेंगे |

थोडी आँच बची रहने दो थोडा धुँआ निकलने दो

तुम देखोगी इसी बहाने कई मुसाफिर आयेंगे ||

्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की एक ज़ोरदार आवाज़ उठाने वाले अन्ना हजारे और उनकी टीम भी ना जाने कहाँ गायब से हो गए हैं ! अन्ना हजारे तो चलो बीमार हैं लेकिन उनकी टीम ! जब अन्ना और उनकी टीम जोर शोर से ये चिल्ला रही थी कि वो उत्तर प्रदेश में लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ जाग्रत करेंगे तब कुछ लग रहा था कि चलो शायद अब उत्तर प्रदेश में भी लोगों को ‘ गंगा जल ‘ मिलेगा लेकिन उनके प्रयास भी नाकाफी साबित हुए बल्कि उन्होंने ज्यादा प्रयास ही नहीं किये | अब जब उत्तर प्रदेश के चुनावों की घड़ी बिलकुल नज़दीक आ गई है तब भी अन्ना की टीम के सदस्य गायब से हैं | उन्हें शायद अब ये लगने लगा है कि उनकी बात सुनने वाला ही जब कोई नहीं है तो फिर क्यूँ अपनी नींद ख़राब की जाये ? जो भी है लेकिन ये एक गलत सन्देश है , गलत परंपरा है | क्या अन्ना और उनकी टीम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जो आवाज़ उठाई थी वो सिर्फ मीडिया का attraction पाने तक ही सीमित थी या उसमें देशभक्ति और निः स्वार्थ भावना का सन्देश भी छुपा हुआ था ? अब अन्ना और उनकी टीम को भी संदेह की नज़र से देखा जाने लगा है तो फिर देश में भ्रष्टाचार से लड़ने वाला कौन बचता है ?
निष्कर्ष के तौर पर मैं ये कहना चाहता हूँ कि उत्तर प्रदेश के इस महासमर में राजनीतिक लोगों ने बड़ी चतुराई से एक दूसरे के भ्रष्टाचार को उजागर ना करने की बहुत अच्छी रणनीति अपनाते हुए भ्रष्टाचार के मुददे को बिलकुल किनारे कर दिया है | हर कोई जानता है कि अगर आज वो किसी दूसरी पार्टी के लोगों के खिलाफ आवाज़ उठाते हैं तो कल उनकी पार्टी के लोग भी इस दायरे में आ सकते हैं और सबसे बड़ी बात कि ना जाने किस मोड़ पर किस पार्टी से सरकार बनाने की खातिर गठबंधन करना पड़ जाये, इसलिए कोई भी पार्टी किसी दूसरी पार्टी को इतना दूर नहीं करना चाहती कि गठजोड़ की कोई गुंजाईश ही ना रहे ! हम देखते रहे हैं कि जिन पार्टियों ने चुनाव पूर्व जो गठजोड़ बनाये , चुनाव के बाद वहीँ पार्टियाँ सरकार बनाने की खातिर किसी दूसरी पार्टी की गोद में जाकर बैठ गईं | तो सिधान्तों और चुनाव पूर्व के वादों पर ना बात करी जाये तो ही ज्यादा ठीक रहेगा |

कहाँ तो तय था चरागाँ हर एक घर के लिए |
कहाँ चराग मयस्सर नहीं शहर के लिए ||

इस सब में हम यानि सामान्य जनता भी बराबर के दोषी हैं क्योंकि हम इस बात को सामान्य मान कर चलते हैं और उन्हीं पुराने ढर्रों पर चलना पसंद करते हैं | अगर कोई व्यक्ति भले ही वो कितना बड़ा भ्रष्टाचारी हो , अपराधी हो लेकिन अगर वो हमारी जाति या हमारे मज़हब का है तो उसके सात खून माफ़ बल्कि हर अपराध माफ़ | राजनीतिक लोग अपनी सहूलियत और अपने फायदे के अनुसार मुद्दे चुनते हैं जबकि होना ये चाहिए कि हम यानि कि सामान्य जनता उन्हें अपने मुद्दे उठाने के लिए मजबूर करें |

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171 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Gloriane के द्वारा
October 18, 2016

Dear Sir Mr. Laszlo very nice looking here all of you. and you are very deserving of this development in the DXN business, I am learning & trying to copy your ideas I know you will reap more success in the future. i wish to see you again in Abu DhribWaamest wishes to your continuing success keep in touch always thank you.With best regards from Prakash Sunar DXN Abu Dhabi UAE.

Keisha के द्वारा
October 17, 2016

Thanks, I have just been looking for info about this subject for ages and yours is the greatest I have discovered so far. However, what about the coucinslon? Are you certain concerning the supply?

Madan Mohan saxena के द्वारा
April 27, 2015

योगी जी सुन्दर और सार्थक बहुत कुछ बोलती हुई .आभार कभी इधर भी पधारें

    Ladainian के द्वारा
    October 17, 2016

    Muito bom o texto sobre o Aquy …. realmente é de se suspeitar … apesar que tenho um amigo que ganhou uns 5 mil reais com o sistema no inicio … agora acho que o sistema não tem mais folego … também concordo que o sistema é uma piramide disfdrçaaa .. mas entra quem quer né ??Abraços

March 17, 2012

विजेता होने पर मेरी और से बधाई स्वीकारें.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 20, 2012

    तिम्सी मेहता जी नमस्कार ! आपकी बधाई का हार्दिक स्वागत करता हूँ ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद !

jlsingh के द्वारा
March 17, 2012

योगी जी, विजेता बनने के लिए मेरी तरफ से बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें

    yogi sarswat के द्वारा
    March 20, 2012

    आदरणीय श्री जवाहर जी , आपका आशीर्वाद और आपका सहयोग मिलता रहा है इसलिए ही ये संभव हो सका है ! बहुत बहुत आभार ! आपकी बधाई का हिरदय से स्वागत करता हूँ !

Archana chaturvedi के द्वारा
March 16, 2012

वाह क्या लेख है बहुत बढ़िया योगी जी विजेता बनने की ख़ुशी में बहुत बहुत बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    March 20, 2012

    adarniya archana chaturvedi ji saadar namaskar ! aapki pratikriya aur badhai ke liye aapka bahut bahut aabhaar ! sahyog banaye rakhiye !

    Brandi के द्वारा
    October 17, 2016

    Just suppose someone like me decided to throw a rock through the window of ‘Hold Fast’? Should I write Robdog on the rock?No one knows who the hell I am. I wol&und#8217;t even know where to go since the days Barricade Books lived near the Sarah Sands Hotel.

krishnashri के द्वारा
March 16, 2012

योगी जी , विजेता बनने के लिए मेरी हार्दिक बधाई एवं शुभकामना .

    yogi sarswat के द्वारा
    March 20, 2012

    adarniya shri ji saadar namaskar ! aapki badhai ko dil se sweekaar karta hoon aur ummeed karta hoon aapka aashirwad hamesha kii tarah yun hi milta rahega ! bahut bahut aabhaar !

ANAND PRAVIN के द्वारा
March 16, 2012

आपके सफल सोच का ही यह परिणाम है……………आपको हार्दिक बधाई………….

    yogi sarswat के द्वारा
    March 20, 2012

    श्री आनंद प्रवीण जी सादर ! आपकी बधाई को दिल से स्वीकार करता हूँ ! सहयोग बनाये रखियेगा !

SATYA SHEEL AGRAWAL के द्वारा
March 16, 2012

योगी जी, विजेता बनने के लिए मेरी तरफ से बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें

    yogi sarswat के द्वारा
    March 20, 2012

    आदरणीय श्री सत्य शील अग्रवाल जी सादर नमस्कार ! आपकी बधाई का दिल से स्वागत करता हूँ ! आपका आशीर्वाद मिलता रहा है इसलिए ही ये संभव हुआ है ! आपको भी बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं ! बहुत बहुत आभार !

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 16, 2012

इलेक्शन 2012 ब्लॉग प्रतियोगिता के प्रथम पुरस्कार विजेता: श्री योगेंद्र कुमार सारस्वत जी को मेरा नमस्कार…..हार्दिक बधाई………………..

    yogi sarswat के द्वारा
    March 20, 2012

    नमस्कार ! अजय जी आपकी बधाई का ह्रदय से स्वागत करता हूँ ! बहुत बहुत आभार !

D33P के द्वारा
March 16, 2012

इलेक्शन 2012 ब्लॉग प्रतियोगिता के विजेता होने की बधाई स्वीकार करे

    yogi sarswat के द्वारा
    March 20, 2012

    आदरणीय दीप्ति जी ! आपकी बधाई मिली ! हार्दिक आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा !

ajay kumar के द्वारा
March 4, 2012

मुद्दा भले ही न बना हो योगी जी , लेकिन भ्रष्टाचार लोगों के दिलो दिमाग तक तो पहुँच ही गया है , और उम्मीद करनी चाहिए की आने वाले चुनावों में ये जरूर लोगों को सोचने के लिए मजबूर करेगा ! बहुत बेहतर लेख ! साधुवाद !

    yogi sarswat के द्वारा
    March 5, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , अजय कुमार जी !

biswanath के द्वारा
February 28, 2012

बढ़िया लेख ! योगी जी बहुत बेहतर !

    yogi sarswat के द्वारा
    February 29, 2012

    bahut bahut shukriya , biswanath ji !

s.pal के द्वारा
February 25, 2012

निश्चित रूप से भ्रष्टाचार किसी भी राजनेतिक दल ने अपने घोषणापत्र में नहीं डाला है , सब नूरा कुश्ती खेल रहे हैं !बढ़िया लेख ! देर से प्रतिक्रिया दने के लिए क्षमा चाहता हूँ योगी जी !

    yogi sarswat के द्वारा
    February 27, 2012

    आपकी स्पष्ट और विस्तृत प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ! पल साब ! सहयोग बनाये रखिये !

    yogi sarswat के द्वारा
    February 27, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद ! सहयोग देते रहिये !

shiv के द्वारा
February 24, 2012

क्योंकि भ्रष्टाचार हर पार्टी के नादर भीतर तक मौजूद है तब कोई भी राजनीतिक दल कैसे इसे गंभीरता से ले सकता है ? बढ़िया लेख !

    yogi sarswat के द्वारा
    February 24, 2012

    शिव साब , आपकी प्रतिक्रिया मिली ! हार्दिक धन्यवाद !

aarti singh के द्वारा
February 20, 2012

अगर कोई भी पार्टी भ्रष्टाचार को गंभीरता से मुद्दा बना भी लेगी तो वो किस्सी को भी मुंह दिखने लायक नहीं रह जाएगी क्योंकि हर पार्टी मैं कोई न कोई दागी और भ्रष्टाचारी भरा ही पड़ा है ! बहुत सही और सटीक लिखा गया लेख ! योगी जी बधाई !

    yogi sarswat के द्वारा
    February 21, 2012

    बहुत बहुत शुक्रिया , आरती सिंह जी !

r k diwakar के द्वारा
February 19, 2012

बढ़िया और व्यावहारिक लेख , योगी जी ! साधुवाद !

    yogi sarswat के द्वारा
    February 21, 2012

    दिवाकर जी , बहुत बहुत धन्यवाद !

yash pal के द्वारा
February 19, 2012

उत्तर प्रदेश टोक्य किसी भी राज्य में कोई भी राजनेतिक दल भ्रष्टाचार को मुद्दा नहीं बनाने देगा ! योगी जी बहुत सुन्दर और सार्थक लेख !

    yogi sarswat के द्वारा
    February 21, 2012

    यश पाल जी नमस्कार ! आपकी प्रतिक्रिया मिली ! हार्दिक आभार !

    Carajean के द्वारा
    October 17, 2016

    Me dull. You smart. That’s just what I nedede.

lovely anand के द्वारा
February 18, 2012

योगी जी , निश्चित रूप से इन चुनावों में भ्रष्टाचार का मुद्दा किसी के लिए कोई मायने नहीं रखता ! न तो उत्तर प्रदेश की जनता के लिए , न उम्मीदवारों के लिए और न ही पार्टियों के लिए ! क्योंकि ये ऐसा धंधा है जिसकी हर किसी को जरुरत है और हर कोई इस गंदे नाले में मौका मिलने पर दुबकी लगा लेना चाहता है ! भले ही वो बहार आकर कितना भी इसके खिलाफ भाषण दे ! बहुत सही और स्पष्टता के साथ साथ आपने व्यावहारिक लेख लिखा है ! धन्यवाद !

    yogi sarswat के द्वारा
    February 21, 2012

    लवली जी नमस्कार ! आपकी प्रशंशनीय और यथार्थपरक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार !

anant singh के द्वारा
February 18, 2012

योगी जी नमस्कार ! आपका मेल मिला ! देर से प्रतिक्रिया देने के लिए क्षमा चाहता हूँ !लेकिन मैं ये कहना चाहता हूँ की मुद्दे सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए होते हैं , सुलझाने के लिए नहीं ! अगर मुद्दे ही नहीं रहेंगे तो लोगों के पास चुनाव लड़ने के लिए कुछ भी नहीं बचता और जहाँ तक भ्रष्टाचार की बात है ये हिन्दुस्तानियों की राग राग में घुसा हुआ है , इसे इतनी जल्दी नहीं ख़त्म किया जा सकता !

    yogi sarswat के द्वारा
    February 21, 2012

    अनंत सिंह जी नमस्कार ! आपकी मूल्यवान प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार !

susheel sharma के द्वारा
February 18, 2012

उत्तर प्रदेश के इन चुनावों में भ्रष्टाचार तो क्या सच पूछिए तो कोई भी मुद्दा , लहर के रूप में दिखाई नहीं देता , योगी जी ! आपने सही और बिलकुल सटीक तरीके से इस बात को व्यक्त किया है , मुबारक हो ! आप बहुत बेहतर लेख लिख रहे हैं , योगी जी !

    yogi sarswat के द्वारा
    February 21, 2012

    सुशील जी , बहुत बहुत धन्यवाद !

Dev sharma के द्वारा
February 15, 2012

बिलकुल ठीक कहा आपने , उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में जहां ४० प्रतिशत लोग भूखे सोने को मजबूर हों वहां भ्रष्टाचार अपना क्या रंग दिखा पायेगा ! बहुत सुन्दर तरीके से लिखा है आपने , बधाई !

    yogi sarswat के द्वारा
    February 21, 2012

    देव साब ! बहुत बहुत धन्यवाद !

manoj pandit के द्वारा
February 15, 2012

योगी जी , भ्रष्टाचार का मुद्दा उत्तर प्रदेश तो क्या किसी भी चुनाव में अपनी कोई महत्ता नहीं रखता ! बहुत विश्लेषण से लिखा हुआ लेख ! बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    February 17, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद ! मनोज जी ! आपकी प्रतिक्रिया मिली !

D.K.Saraswat के द्वारा
February 15, 2012

योगी जी को सादर नमस्कार बिलकुल सही कहा योगी जी आपने मैं आप से सहमत हूँ हा़ इन चुनावों में भ्रष्टाचार ही सबसे प्रमुख मुद्दे के रूप में सामने आय़ेगा 

    yogi sarswat के द्वारा
    February 15, 2012

    शुक्रिया , धीरेन्द्र जी ! yogensaraswat.jagranjunction.com

vimlesh shukla के द्वारा
February 15, 2012

योगी जी , आज आपके लेख बस मिल ही गए ! आपने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बड़ा लम्बा चौड़ा लेख लिख मारा है किन्तु नेताओं के कान पर जूं तक नहीं रेंगती !

    yogi sarswat के द्वारा
    February 15, 2012

    शुक्रिया विमलेश जी !

cosmos100 के द्वारा
February 10, 2012

राजनीतिज्ञों से साफ़ सुथरेपन की उम्मीद करना ही अपने आपको धोखा देना है. जहा पर सरकारी महकमो से जुदा हर आदमी या तो भ्रस्टाचार में लिप्त है या फिर चुपचाप रहकर अपने में ही तृप्त है (वैसा ऐसा बहुत कम होता है) वह उन्ही गंदगी फ़ैलाने वालो से सफाई की उम्मीद रखना बेकार है. हाँ, टीम अन्ना और बाबा सरीखे लोगो ने उम्मीद ज़रूर जगाई थी लेकिन अभी तक उन आन्दोलनों के कोई नतीजे सामने नहीं आ सके है. हलाकि इसके दोषी, जैसा अपने कहा, हम भी है तो इसमें भी कोई दो राय नहीं क्योंकि भ्रस्टाचार की आग नीचे से ऊपर तक जाती है, और इस निचले स्तर पर हम में से ही कोई नौकरशाह चतुर्थ श्रेणी, बाबु या अधिकारी होता है, जिनकी जिम्मेदारी किसी योजना की सफलता के लिए पहले बनती है. हम विदेशो में काला धन तो वापस लाना चाहते है, और करोडो के commonwealth और spectrum घोटालो की बात तो करते है, लेकिन देश में ही पकडे जाने वाले निचले दर्जे के नौकरशाहों के घरो से बरामद करोडो की दौलत और पकडे जाने के बाद उनके अंजाम को लेकर कुछ नहीं कहते. क्या फायदा होगा इतनी मशक्कत के बाद विदेशो से काले धन को लेन का जब तक हमारे देश में ऐसे काले मन वाले लोग रहेंगे, कुछ की समय में वो भी विभिन्न नौकरशाहों और मंत्रियो की तिजोरियो की शोभा बदयेंगे. अंत में आपको बहुत की सटीक लेख के लिए धन्यवाद.

    yogi sarswat के द्वारा
    February 10, 2012

    बहुत बेहतर और प्रश्नाश्नीय प्रतोक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार ! आपकी बातें बिलकुल सटीक और विचारनीय हैं किन्तु मुश्किल ये हैं की हम सिर्फ बहस कर सकते हैं और अपने अपने विचार रख सकते हैं , जिन्हें नीतियां बनानी हैं वो इस बारे में कुछ सोचें तो बात बने ! बहुत बहुत धन्यवाद ! http://yogensaraswat.jagranjunction.com/

jagobhaijago के द्वारा
February 8, 2012

महोदय, बिल्कुल सटीक लिखा है आपने ,काश! यदि हम सब सिर्फ अपने को सुधार लेते तो शायद आज देश की तस्वीर कुछ और ही होती। सराहनीय प्रयास …. बहुत कम शब्दों में कुछ इसी तरह के दर्द को मैने भी निम्न शब्द देने की कोशिश की थी हमारे पास केवल अपेक्षायें हैंं, आरोप हैं, सुझाव हैं किन्तु हमे क्या करना चाहिये सिर्फ यही नहीं जानते और जाने भी कैसे क्योंकि जानना ही नहीं चाहते।एक काम बहुत अच्छे ढंग से कर सकते हैं वो है दुसरे को उपदेश देना, तुलसीदास ने भी लि£ा है पर उपदेश कुसल बहुतेरे,,। हमारा सारा समय व्यर्थ की चिन्ता में जाया होता है आत्मचिन्तन के लिये समय की कमी का बहाना है शायद इसीलिये अच्छा वही है जो हमारे लिये अच्छा हो ,जबकि अच्छा तो सार्वभौमिक सत्य होगा इसको जानते हुये भी समझना नहीं चाहते है और यहीं से बु़ि़öजीवियों का रोल शुरु होना चाहिये जो बहुत Ëाीमी गति से ही सही किन्तु शुरु हो चुका है।

    yogi sarswat के द्वारा
    February 9, 2012

    आपकी प्रतिक्रिया का हार्दिक स्वागत करता हूँ ! आप इतना बेहतर लिखते हैं मगर मैंने आपका कहीं कोई ब्लॉग नहीं देखा ? मैदान मैं आइये और अपने साथ साथ और लोगों को भी लाभान्वित करिए ! एक बार फिर से आपका बहुत बहुत शुक्रिया !

abhishek sharma के द्वारा
February 8, 2012

बहुत बेहतर लेख ! योगी साब , शुरू में जब तक चुनाव प्रचार शुरू नहीं हुआ था तब लगा था की पार्टियाँ भ्रष्टाचार को मुद्दा जरूर बनायेंगी लेकिन सब ने अपने अपने हित में इस मुद्दे को दरकिनार करना ही बेहतर समझा ! बढ़िया लेख !

    yogi sarswat के द्वारा
    March 5, 2012

    बहुत बहुत शुक्रिया !

rudra के द्वारा
February 7, 2012

सर जी क्या कहे, आपने जो इस विषय पे धराप्रव्वाह वार किया है वो काबिले तारीफ है. राहजन को भी अक्सर रहनुमा ने लूटा है किसको राहज़न कहिये किसको रहनुमा कहिये ? आपने हर बिन्दुओ को छुवा है. बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    February 7, 2012

    बहुत बहुत शुक्रिया , रूद्र साब ! आखिर आपकी प्रतिक्रिया मिली !

    rudra के द्वारा
    February 7, 2012

    अरे गुरु जी. लेट होने के लिए फिर से माफ़ी चाहता हूँ . http://rudra.jagranjunction.com/2012/02/06/

satish dhar के द्वारा
February 6, 2012

इस लेख में जिन मुद्दॊं को छुआ गय़ा है निस्संदेह विचारञीय़ है॰

    yogi sarswat के द्वारा
    February 7, 2012

    सतीश धर साब , आपने मेरे शब्दों को समय दिया , बहुत बहुत आभार ! अपना आशीर्वाद यूँ ही बनाये रखियेगा ! http://yogensaraswat.jagranjunction.com/2012/01/30

    Lavon के द्वारा
    October 17, 2016

    Beau billet que ce texte consacré à un livre d’amitié. J’ai lu peu d’Anne Philipe (« Le temps d’un soupir ») mais suivi l’oeuvre de Pierrette Fleutiaux (ses &loiso;&nbup;Histoqres &raqua; et quelques autres) que vous me donnez fort envie de lire et de relire.

surjeetkumar के द्वारा
February 6, 2012

योगी साब भ्रष्टाचार हमने और आपने ही शुरू किया है और इसे ख़त्म भी हमें ही करना होगा

    yogi sarswat के द्वारा
    February 6, 2012

    बिलकुल सही कहा आपने !

Manoj Mahori के द्वारा
February 6, 2012

Well said Yogendra . Corruption is like slow poison for any country & in India it’s too much. Indian youth can remove it by taking good decision like 1. Voting to good candidate. 2. Dont give any under table money to any one in any case. 3. Trust on truth. 4. Help every one. & the finally ” If you want to change your nation first change yourself, nation will automatically changed”. Regards

    yogi sarswat के द्वारा
    February 6, 2012

    I fully agree with you that corruption is global problem but in india it has a huge and diminished face . actually the poverty and illiteracy is also may be the root cause of this problem. but we can fight with this problem with determination and zeal . Thanx for your valuable response. mr. Mahori.

shikhar के द्वारा
February 6, 2012

it is well said by mr. yogi . india is needing a needing a step ahead thinking . hope this article will help as a step to understand d lacking point. thnks .

    yogi sarswat के द्वारा
    February 6, 2012

    thanx for your comment.

shaktisingh के द्वारा
February 6, 2012

योगी जी, चुनाव में भ्रष्टाचार का मुद्दा कोई नया नहीं है, यहा मुख्य बात यह है कि इस मुद्दे का निवारण कोई भी पार्टी ढुढ नहीं पाई है.

    yogi sarswat के द्वारा
    February 6, 2012

    शक्ति साब , क्यूंकि हर कोई पार्टी भ्रष्टाचार के दलदल में कम या ज्यादा धंसी हुई है तो ऎसी स्थति में भ्रष्टाचार को प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाना किसी भी पार्टी के लिए मुफीद नहीं होगा ! और वाही हो भी रहा है , सबने इस मुद्दे को side line कर दिया है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद !

    Trish के द्वारा
    October 17, 2016

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lovely anand के द्वारा
February 5, 2012

बहुत सुन्दर लेख .सच कहते हैं योगी साब भ्रष्टाचार कोई एक दिन मैं ख़त्म नहीं होगा इसके लिए हमें और आपको मिलकर ही कोशिश करनी होगी !

    yogi sarswat के द्वारा
    February 6, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , लवली आनंद जी !

कुमार हर्ष के द्वारा
February 5, 2012

great ise bhi pade क्या भारत को फिर कभी अब्दुल कलम जेसा राष्ट्रपति मिलेगा? http://kumarharsh.jagranjunction.com/2012/02/05/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%81/

    yogi sarswat के द्वारा
    February 5, 2012

    धन्यवाद! हर्ष जी

Sunit Mittal के द्वारा
February 3, 2012

हम अपने देश को एक बार फिर गुलाम नही होने देगे

    yogi sarswat के द्वारा
    February 3, 2012

    ऐसा तो नहीं ही होगा , आप बेफिक्र रहिये ! सुनीत जी धन्यवाद !

    Tracen के द्वारा
    October 18, 2016

    It’s a pluarese to find someone who can think so clearly

Sunit Mittal के द्वारा
February 3, 2012

i think this time in election india will rock.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 5, 2012

    धन्यवाद , सुनीत जी !

    Buddy के द्वारा
    October 17, 2016

    I like the one of the younger boy in his patterned shirt, smiling looking straight on at the camera. (P.S. Did the parent(s) know about the Ὄdon‣t have your kid’s portrait taken in a t shirt with a cartoon character or saying on it” rule?)

vijay pratap yadav के द्वारा
February 3, 2012

Hona….to…chahiye…….lekin….etne…..brastachar….ki……..jankari…….village…..ke…..logo……ko..kaun…….btaye…….jisse….saf…suthari…….sarkar…..ka…….chayn…..ho….sake……..

    yogi sarswat के द्वारा
    February 3, 2012

    धन्यवाद , विजय प्रताप जी !

February 2, 2012

बहुत कोशिशें की, तब कहीं जाकर आपका ब्लॉग खुल पाया. पर ये कोशिशें सार्थक हो गयी, इस अति-उच्च कोटि के आलेख को पढ़कर. सचमुच,बहुत स्पष्ट, धारदार, और प्रभावशाली तरीके से आपने अपनी बात रखी है. आपके विचार भी बहुत पसंद आये, और साथ ही, आपकी शैली तो बहुत ही भाई. बहुत-बहुत बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    February 3, 2012

    Timsy mehta जी बहुत बहुत धन्यवाद ! देर आये दुरुस्त आये ! ये तो मेरी अच्छी किस्मत है की मेरा ब्लॉग आपकी पकड़ में आ गया ! धन्यवाद !

gopesh के द्वारा
February 2, 2012

असल में योगी जी ,भ्रष्टाचार मुद्दा बन भी नहीं सकता है क्यूंकि सभी तो भ्रष्ट हैं फिर की मुंह से वो भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएंगे? आपने अत्यंत सार्थक लेख लिखा है इसके लिए आप बधाई के पत्र हैं!

    yogi sarswat के द्वारा
    February 3, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , गोपेश जी ! कम से कम कांग्रेस का मुखोटा तो सुप्रीम कोर्ट ने उतार ही दिया है ! बाकी का उतरना शेष है ! प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार !

omprakash pareek के द्वारा
February 2, 2012

योगीजी, इस चुनावी माहौल में इतना दिलचस्प ब्लॉग लिखने के लिए बधाई. अभी तक तो लगता नहीं की भ्रष्टाचार कोई मुद्दा है . पार्टियों के लिए तो बिलकुल नहीं अलबत्ता आम आदमी अं मौके पर क्या कर बैठे कहना मुस्किल है. अन्ना के दुसमन ओं की बात करिए तो एक फिल्म के खलनायक का वो जुमला याद आता है जिस में वो बात बात पर जोर से बोलता है “मोगाम्बो खुश हुआ”

    yogi sarswat के द्वारा
    February 3, 2012

    आपका लिखने का अंदाज़ जितना प्रभावित करता है , प्रतिक्रिया देने का अंदाज़ भी आपका उतना ही बेहतर और different होता है , पारीक साब ! आप जैसे ब्लॉगर के विचार , जब अपनी प्रतिक्रिया पर मिलते हैं तो स्वतः ही लेखन प्रमाणिक हो जाता है ! बहुत बहुत धन्यवाद !

praveen के द्वारा
February 2, 2012

भ्रस्ताचार चुनाव में कोई मुदा नहीं बन पायेगा धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    February 3, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , प्रवीण जी !

vikasmehta के द्वारा
February 2, 2012

yogi ji bhrshtachariyo ko tiket dene me partiyo ki glti to hai hi lekin janta ki bhi hai chuki yah janta usi ko vot deti hai jiske paas maal ho . kisi imandar bhukhe gareeb ko to hamare desh ki janta bhi nhi poochti

    yogi sarswat के द्वारा
    February 2, 2012

    सही कहते हैं विकास जी , चुनाव लड़ने के लिए धन और बल के अलावा हिम्मत भी तो चाहिए ! विचार व्यक्त karne के लिए dhanywad !

vikasmehta के द्वारा
February 2, 2012

yogi ji …… ham bas me 20 ki jgh 10 kyo dete hai kya isme badhti mahngai ka dosh nhi hai abhi poora lekh padhana baaki hai

    yogi sarswat के द्वारा
    March 5, 2012

    bahut bahut dhanywad , vikas ji !

शिवेष सिंह राना के द्वारा
February 2, 2012

सादर…… आम जरूरते मुद्दा बन जाती है…… भ्रष्टाचार भी ऐसे ही मुद्दों की दौड़ में है….. सुन्दर चिंतन बधाई…….

ANAND PRAVIN के द्वारा
February 1, 2012

योगी जी, हमारे यहाँ तात्कालिक मुद्दे ही हमेसा आगे रहते है और भ्रष्टाचार अभी सबसे बड़ा मुद्दा है पर ये बात आप UP के लिए नहीं कह सकते क्यूंकि UP में तो जात ही सबसे बड़ा मुद्दा है और तब तक रहेगा जब तक हम जाती – पाती नहीं छोर देतें बढ़िया लेख के लिए बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    February 2, 2012

    बिलकुल ठीक कहते हैं आप आनंद जी ! जब तक हम खुद बटे हुए हैं , राज्न्नेतिक दल इस बात का पूरा फ़ायदा उठाते रहेंगे ! आपकी प्रतिक्रिया और आपके विचारों का सम्मान करता हूँ ! धन्यवाद !

Ravinder Kumar के द्वारा
February 1, 2012

Bhrastachar ke mudde par ye sab political parties ek ho jati hain kyonki koi b party isse achuti nahi hai. election ke samay ek dusre par arop lagana start kar dete hain. agar koi normal person iski sikayat karta hai to CBI hai na uske liye bas sare kam chodkar CBI uske piche pad jayegi. Aur congress ko to apni party ya apni sarkar main brastachar najar nahi aata baki sabhi parties bhrastachari najar aati hai. jabki Mahaghotalabaj to inhone upne daman main chupa kar rakhe hain.

    yogi sarswat के द्वारा
    February 2, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , रविन्द्र कुमार जी !

abhinavarun के द्वारा
February 1, 2012

आदरणीय श्री योगी सारस्वत जी आप्पने अच्छा लिखा परन्तु अनुभव यह दिखता है की चूँकि जनता के पास विकल्प का अभाव रहता है अतः वह उन्ही में से तो किसी को वोट degi na ?

    yogi sarswat के द्वारा
    February 1, 2012

    बिलकुल सही कहते हैं आप अभिनव अरुण जी , विकल्पहीनता की वज़ह से हमें न चाहते हुए भी कभी कभी गलत आदमी को भी वोट करना पड़ता है ! बहुत बहुत धन्यवाद !

Rakesh के द्वारा
February 1, 2012

‘जयप्रकाश जी’ को पता था किससे लड़ना है, यहाँ हमें या ‘अन्ना जी’ को किससे किससे लड़ना है, पता ही नहीं. जिसे भी कुर्सी दे दो वही उतपात मचाता है. जाग्रत करने वाला लेख. बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    February 1, 2012

    बहुत -२ धन्यवाद ! राकेश जी

satya sheel agrawal के द्वारा
February 1, 2012

योगी जी , अगर मान लिया जाये की अन्ना का मुद्दा हल्का पड़ गया है तो इसमें हमारी ही गलती मानी जाएगी क्योंकि हम भ्रष्टाचार में मस्त हैं. अतः कभी कभी आवाज तो उठाते हैं परन्तु फिर शांत भी हो जाते हैं. शायद हम लोग आज के नेताओं या आज की व्यवस्था के गुलाम बन चुके हैं, .जब तक हम स्वयं नहीं सुधरेंगे कोई भ्रष्टाचार नहीं मिटा सकता. .फिर यदि कोई व्यक्ति ईमानदारी से भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्य करने वाला भी संदेह की दृष्टि से देखा जाता है तो यह भी हमारी मानसिकता का परिचायक है सार्थक लेख के लिए बधाई .

    yogi sarswat के द्वारा
    February 1, 2012

    सत्य शील अग्रवाल जी प्रणाम ! मैं ये मान के चलता हूँ कि आपकी प्रतिक्रिया जिस लेख पर मिल जाये वो खुद ही प्रमाणित हो जाता है ! अपनी कृपा और आशीर्वाद देते रहिये , हमेशा आपका मार्गदर्शन चाहता हूँ ! बहुत बहुत धन्यवाद !

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
February 1, 2012

जिन पार्टियों ने चुनाव पूर्व जो गठजोड़ बनाये , चुनाव के बाद वहीँ पार्टियाँ सरकार बनाने की खातिर किसी दूसरी पार्टी की गोद में जाकर बैठ गईं | तो सिधान्तों और चुनाव पूर्व के वादों पर ना बात करी जाये तो ही ज्यादा ठीक रहेगा प्रिय योगी जी सार्थक लेख ..सुन्दर मुद्दे ..कहाँ रहा भ्रष्टाचार का मुद्दा सब पी कर– बैठ गए –जो हरदम होता आया है वाही होगा जब सामने आप के सब व्ही खड़े होंगे तो क्या करेंगे राईट तो रिजेक्ट राईट तो रिकाल कहाँ ?? जो एक कहावत है चोर चोर मौसेरे भाई …bas .. jay sri raadhe bhramr 5

    yogi sarswat के द्वारा
    February 1, 2012

    भ्रमर साब, पता नहीं आपकी प्रतिक्रिया देखकर मन प्रसन्न हो जाता है और ऐसे लगता है कि लेखन सार्थक हुआ ! बहुत बहुत शुक्रिया ! अपनी कृपा और आशीर्वाद आगे भी बनाये रखियेगा ! धन्यवाद !

dineshaastik के द्वारा
February 1, 2012

राहजन को भी अक्सर रहनुमा ने लूटा है किसको राहज़न कहिये किसको रहनुमा कहिये ? हौले-हौले पाँव हिलाओ जल सोया है छेडो मत हम सब अपने-अपने दीपक यहीं सिराने आयेंगे | थोडी आँच बची रहने दो थोडा धुँआ निकलने दो तुम देखोगी इसी बहाने कई मुसाफिर आयेंगे || कहाँ तो तय था चरागाँ हर एक घर के लिए | कहाँ चराग मयस्सर नहीं शहर के लिए || शब्द विहीन प्रतिक्रिया……बहुत सुन्दर आलेख…… उचित शब्द नहीं मिल रहे कहने के लिये….. अत्यधिक सराहनीय…….

    yogi sarswat के द्वारा
    February 1, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद ! दिनेश आस्तिक जी !

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
January 31, 2012

आदरणीय योगी जी , सादर अभिवादन. नहीं, आलेख की बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    February 1, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , कुशवाहा जी ! आपकी प्रतिक्रिया उत्साहवर्धक होती है ! धन्यवाद !

vasudev tripathi के द्वारा
January 31, 2012

सारस्वत जी, भ्रष्टाचार यदि इस देश में कभी मुद्दा रह पाया होता तो आज यह रक्तबीज इतने भयावह रूप में न होता! बढ़िया लेख, हार्दिक बधाई!

    yogi sarswat के द्वारा
    February 1, 2012

    सही कहते हैं आप वासुदेव त्रिपाठी जी , प्रतिक्रिया और हौसलाफजाई के लिए धन्यवाद !

vinod kumar के द्वारा
January 31, 2012

अब ज़रा मुद्दे पर आते हैं ! उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग द्वारा चुनाव की घोषणा होने पर सब पार्टियाँ अपने अपने मुद्दों की लिस्ट बनाने में लग गयीं | इस लिस्ट में हर पार्टी ने सबसे ऊपर भ्रष्टाचार का ही मुद्दा रखा हुआ था | बड़े बड़े वादे, बड़ी बड़ी बातें हो रही थीं , भ्रष्टाचार के खिलाफ ! पार्टियाँ तो अलग , अन्ना हजारे की टीम ने भी इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश में जाकर हो हल्ला मचने की कसम खा राखी थी | लग रहा था कि हो ना हो , इस बार भ्रष्टाचार के मुद्दे को उत्तर प्रदेश के चुनावों में मान्यता मिलेगी और उत्तर प्रदेश की जनता इस मुद्दे को ध्यान में रखकर ही अपना मत देगी | ये बात दिसंबर के मध्य में चल रही थीं | दिसंबर 2011 बीतते- बीतते यह बात स्पष्ट सी लगने लगी थी कि भारत की दोनों बड़ी पार्टियाँ , कॉंग्रेस और भारतीय जनता पार्टी , उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर हैं और कम से कम ये दोनों पार्टियाँ साफ़ सुथरी छवि वाले लोगों को ही अपना उम्मीदवार बनायेंगी ! हालाँकि ये बहुत दूर की कौड़ी लगती थी कि 65 वर्षों की धुल धूसरित राजनीति क्या एक झटके में ही इतनी साफ़ हो जाएगी ? आज़ादी के बाद के 65 वर्षों तक जिस प्रदेश की राजनीति अपराध और गुंडई के बल पर चलती रही हो, भ्रष्टाचार जिस प्रदेश की राजनीति के एक अहम् हिस्सा बन गया हो , उस प्रदेश की राजनीति क्या एक चुनाव में ही साफ़ हो जाएगी ? लेकिन कॉंग्रेस पार्टी के महासचिव और भविष्य के भारत के प्रधानमंत्री माने जा रहे राहुल गाँधी का जोश और भारतीय जनता पार्टी का उत्साह चीख चीख कर लोगों को ये बताने को बेताब था कि इस बार हम उत्तर प्रदेश में साफ़ सुथरी सरकार लाने को प्रतिबद्ध हैं | लेकिन , ना जाने कौन सी मजबूरी थी कि जैसे जैसे टिकटों का बटवारा शुरू हुआ हर पार्टी के चेहरे वही दिखाने लगे , वही पुराने चेहरे | हाँ ! कहीं कहीं नाम जरूर बदले यानी चुनाव लड़ने वाले लोगों की सूरत तो बदली मगर सीरत नहीं ! पार्टियाँ ढूंढ -ढूंढ कर ऐसे लोगों को अपने पाले में लाने के लिए आतुर दिखाई देने लगीं जिन पर हजारों करोड़ रुपये के घोटालों के आरोप लगे हुए हैं ! अगर कोई क्षेत्रीय पार्टी इस तरह का कदम उठाती तो कुछ समझ आता है मगर 125 साल पुरानी कॉंग्रेस पार्टी और अपने सिध्हंतों के लिए अपनी पीठ ठोकने वाली भारतीय जनता पार्टी अगर इस तरह का प्रयास करती हुई नज़र आतीं हैं तो निश्चित रूप से निराशा होती है ! भारतीय जनता पार्टी का एकदम सफ़ेद चमकने वाला चेहरा , यकायक तब काला नज़र आने लगा जब उसने केवल जाति को आधार मानकर 5000 करोड़ रुपये के NHRM घोटाले के आरोपी बाबू सिंह कुशवाहा को बा इज्ज़त अपनी पार्टी के मंच से अपनी पार्टी में शामिल करने का ऐलान किया | ये अलग बात है कि ज्यादा हो हल्ला मचने के बाद उनकी सदस्यता निलंबित कर दी गई ! यही कुछ हाल कॉंग्रेस का भी रहा जिसने इन चुनावों को राहुल गाँधी की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखना शुरू कर दिया और चुनावों में जीत हासिल करने के लिए कठोर फैसले लेने की जगह दल बदलुओं और भ्रष्टाचारियों से गठजोड़ किया |

    yogi sarswat के द्वारा
    February 6, 2012

    धन्यवाद !

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
January 31, 2012

बहुत सुन्दर आलेख.सही कहा है योगी जी,भ्रष्टाचार में कहीं न कहीं हम आप भी भागी हैं.

    yogi sarswat के द्वारा
    January 31, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , राजीव झा साब ! आपकी प्रतिक्रिया हमें हमेशा ही आगे बढ़ने और बेहतर लिखने की हिम्मत देती है ! धन्यवाद !

purushottam sarswat के द्वारा
January 31, 2012

योगेश भाईसाब आपने सही कहा bharshthachar के लिए दोषी हम खुद ही है हमें एकजुट होकर आवाज़ uthhani होंगी तभी इस देश में सुशाशन होगा

    yogi sarswat के द्वारा
    January 31, 2012

    आपका बहुत बहुत शुक्रिया , पुरुषोत्तम जी ! आपने मेरे शब्दों को समय दिया ! धन्यवाद !

    Bones के द्वारा
    October 17, 2016

    Comfortabl y, the article is in reality the sweetest on that notable topic. I concur with your cocilusnons and also can eagerly look forward to your coming updates. Just saying thanks definitely will not just be enough, for the fantasti c clarity in your writing. I will ideal away grab your rss feed to stay privy of any updates. De lightful work and much success in your business endeavors!

Deshbakt Nagrik के द्वारा
January 31, 2012

येही सच्चाई है की भ्रष्टाचार हामी लोग शुरू करते है और दोष दुसरो को देते हैं इसे मिटने के लिए हमें भी ये संकल्प लेना होगा की किसी भी परकार का सहियोग भ्रष्टाचार को बढ़ने मं नही देंगे और न किसी को देने देंगे

    yogi sarswat के द्वारा
    January 31, 2012

    बहुत बहुत शुक्रिया ! मेरे शब्दों पर गौर फरमाने के लिए !

allrounder के द्वारा
January 31, 2012

बेहतरीन वैचारिक आलेख पर हार्दिक बधाई योगी जी !

    yogi sarswat के द्वारा
    January 31, 2012

    सचिन देव जी जब तक आपकी प्रतिक्रिया नहीं मिलती , कुछ खालीपन सा रह जाता है ! आप से ही प्रेरणा मिलती है कुछ और बेहतर लिखने की ! बहुत बहुत धन्यवाद !

saurabh के द्वारा
January 31, 2012

बिलकुल सही कहा सर जी आप ने भ्रस्ताचार बिलकुल हम लोगो से ही स्टार्ट होता है .यदि हम लोग इसके प्रति जागरूक रहे तो हो सकता है की ये छोटा छोटा भ्रस्ताचार भी जिसे हम नजर अंदाज कर ते है बंद हो जाये .

    yogi sarswat के द्वारा
    January 31, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , सौरभ ! अपनी कृपा यूँ ही बनाये रखियेगा !

    Betsey के द्वारा
    October 18, 2016

    siiiiii, esos veranos de la infancia, las noches de esos veranos, sin propcueaciones, sin nada feo en la cabeza, salir con mis amigas a caminar, cruzarnos con los chicos que nos gustaban, y nos saludaban, y eran las mejores noches de nuestras vidas sólo con eso, con el saludo del ese chico, de ese amor platónico, de esa idea.

mparveen के द्वारा
January 31, 2012

योगी जी नमस्कार. भ्रस्टाचार भ्रस्टाचार चिल्लाने से कुछ नहीं होने वाला . हम खुद ही इसे बढ़ावा देते हैं . अब नेता तो नेता हैं वो बनते ही खाने के लिए हैं . देश विकास करे न करे . उनका तो विकास हो जाता है . नेता लोग मुद्दा बनाये न बनाये उससे कुछ होने वाला नहीं . क्यूंकि वो आज कुछ कहेंगे और कल क्या होगा वो तो सब जानते हैं . अब सब अपनी अपनी ढपली अपना अपना राग अलाप रहे हैं . वादे हैं वादों का क्या आज करेंगे कल भूल जायेंगे . अपने बहुत अछा लिखा बधाई हो !!!

    yogi sarswat के द्वारा
    January 31, 2012

    हौसलाफजाई और प्रतिक्रिया देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद् ! आपकी प्रतिक्रिया से लगता है कि मेरा लिखना सार्थक हुआ ! धन्यवाद !

    Rope के द्वारा
    October 17, 2016

    Vilken härlig gran! Ville ocksÃ¥ bara ha vitt och silver, men blev nedröstad av resten av familjen Ã¥ter igen.Ljuvligt litet sött pe–ssrkakshup!Ãpnakar dig en riktigt GOD JUL!Kram, Erica

Prem Kumar के द्वारा
January 31, 2012

सही कहा योगीजी आपने भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी बजह आम इंसान है I क्यूकी जब तक आम इंसान नहीं चाहेगा तब तक किसी दो चार आदमी के कहने से कुछ नहीं होगा I अगर सभी लोग यह पर्ण करे की हम भ्रष्टाचारी को वोट नहीं देंगे तब देखिये कौन सी पार्टी इन भ्रष्टाचारी को टिकेट देता है |

Prem Kumar के द्वारा
January 31, 2012

सही कहा योगीजी आपने भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी बजह आम इंसान है I क्यूकी जब तक आम इंसान नहीं चाहेगा तब तक किसी दो चार आदमी के कहने से कुछ नहीं होगा I अगर सभी लोग यह पर्ण करे की हम भ्रष्टाचारी को वोट नहीं देंगे तब देखिये कौन सी पार्टी इन भ्रष्टाचारी को टिकेट देता है |

    yogi sarswat के द्वारा
    January 31, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , प्रेम कुमार जी !

Sandeep Tiwari के द्वारा
January 31, 2012

Anna hajare ne pure desh me bhrastachar k khilaf jung chhed diya tha, magar pahle unko maharastra se bhrastachar hatane k liye ladai karna chahiye, qyonki yaha to her kam k liye dalali hoti hai, jaise ki agar kisi ko makan kiraye pe lena hai to dalal logo ki bat man k hi yaha k log makan kiraye pe dete hain, ye log humare dwara dikhaye gaye parichay patra pe bishwash nahi karenge, lekin wahi parichay patra dalalo k dikhane pe makan kiraye pe de denge, aise yaha pe her kam k liye dalalo ko paisa dena padta hai, to pahle yaha ki dalali band karaye fir pure desh me bhrastachar k khilaf jung lade………………..

    yogi sarswat के द्वारा
    January 31, 2012

    बहुत बहुत शुक्रिया , संदीप तिवारी जी !

nishamittal के द्वारा
January 31, 2012

राजनीति के दुश्चक्र में फंस कर वांछित शायद ही हो पाय योगी जी,शेष भविष्य के गर्भ में है.

    yogi sarswat के द्वारा
    February 6, 2012

    निशा जी , आपका बहुत बहुत शुक्रिया !

akraktale के द्वारा
January 30, 2012

योगी जी नमस्कार, यदि अन्ना टीम मैदान में होती तो अवश्य ही भ्रष्टाचार एक अहम् मुद्दा होता किन्तु ऐसा हो ना सका या की ऐसा होने नहीं दिया गया.एक बढ़िया आलेख.बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    January 31, 2012

    आपका बहुत बहुत शुक्रिया , रक्ताले जी ! कभी न कभी कुछ न कुछ जरूर हिओगा !

y kumar के द्वारा
January 30, 2012

बिलकुल ठीक कहते हैं योगी साब , राजनीतिक लोग कभी नहीं चाहेंगे की भ्रष्टाचार का मुद्दा उत्तर प्रदेश के लोगों के दिल ओ दिमाग में बैठे ! इसीलिए वो इस मुद्दे से ध्यान हटाना चाहते हैं !

    yogi sarswat के द्वारा
    January 31, 2012

    आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

praveen panwar के द्वारा
January 30, 2012

बहुत अच्छा लेख ,योगी जी ! भार्स्त्चार ख़त्म करेन के लिए पार्टियों को एक मत हो कर कोसिएश करनी होगी बाकि चनाव के परिणाम के बाद मालूम चल जायेगा | धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    January 31, 2012

    बहुत बहुत शुक्रिया , प्रवीण जी !

yogi sarswat के द्वारा
January 30, 2012

बिलकुल ठीक कहते हैं आप | भ्रष्टाचार हमारे देश के चुनावों में कभी भी प्रमुख मुद्दा नहीं बन पाया है ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत शुक्रिया !

abodhbaalak के द्वारा
January 30, 2012

योगी जी चुनाव बहुत सारे कारणों से जीते जाते हैं, और इन में भर्ष्टाचार अब किस नंबर पर आता है और इसका क्या असर होता है ये तो आने वाले चनाव का रीज़ल्ट भी बतायेगा, वैसे मेरी अपनी राय है की ये बहुत अधिक असर नहीं डालता है. सराहनीय लेख http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    pushkar के द्वारा
    January 30, 2012

    भैस के आगे बीन बजाये भैस करे पगुरायी,जब तक हम शिक्षा का स्तर ऊँचा नही करेंगे, और सभी शिक्षित नही होंगे तब तक जनता से यह उम्मीद रखना की वह मुद्दों की सार्थकता के प्रति संवेदन शील होगी बेवकूफी है.


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