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दफ्तर के मच्छर ( व्यंग्य लेख )

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बड़े बाबू ने दफ्तर आते ही ऑर्डर फैंका -बेमन सिंह एक कप चाय पिलाओ ! बेमन सिंह , जी सा’ब कहते हुए तुरंत बाहर निकल गया और थोड़ी देर के बाद चाय की केतली हाथ में थामे हाज़िर हुआ | जी सा’ब और कुछ लेंगे ? नहीं………कहते हुए जब बड़े सा’ब की नज़र फाइल पर से हटकर बेमन सिंह के चेहरे पर पड़ी तो जैसे वो चौंक गए और बोले -अरे बेमन ! ये तुम्हारा चेहरा लाल कैसे हो रहा है ? जी सा’ब , कल दफ्तर में मच्छर ने काट लिया था | क्या कह रहे हो बेमन ? हमारे दफ्तर में मच्छर ? इतना साफ़ सुथरा होते हुए भी हमारे दफ्तर में मच्छर कैसे आ गए ? बड़े बाबू ऐसे चिंतित हो रहे थे जैसे दफ्तर में मच्छर नहीं आतंकवादी घुस आये हों ? कैसे हैं मच्छर ? मोटे मोटे या पतले , मलेरिया वाले या डेंगू वाले , काले या ………..? बेमन तुम वर्मा जी को बुलाओ ! वर्मा जी हाज़िर हुए तो बड़े साब ने वर्मा जी को मच्छर पकड़ने के लिए नगर निगम को पत्र लिखने का आदेश दिया और वर्मा जी ने आदेश का पालन करते हुए तुरंत पत्र लिख दिया |

बेमन सिंह ! दफ्तर का सबसे पुराना कर्मचारी | आठ साल से यहीं था | वो बेचारा कभी मान सिंह हुआ करता था लेकिन कुछ वर्ष पूर्व आये एक अंग्रेज़ीदां अफसर ने उनका नाम ” मान सिंह” से ” मन सिंह ” कर दिया | क्योंकि ” मन सिंह ” ने कभी कोई काम ” मन से ” नहीं किया इसलिए किसी भाई ने उसका नाम ही बेमन सिंह रख दिया और यही नाम आजतक उनकी शोभा बढ़ा रहा है !

पत्र मिलने के लगभग एक सप्ताह के बाद नगर निगम के कर्मचारी अपने लाव लश्कर के साथ बड़े बाबू के दफ्तर पहुंचे | लेकिन वो मच्छरों को नहीं पकड़ पाए , तब ये मामला राज्य पुलिस को सौंप दिया गया मगर जब पुलिस भी नाकाम रही तब ये केस भारत सरकार के गृह मंत्रालय को ‘ रेफ़र ‘ कर दिया गया | गृह मंत्री ने तुरत- फुरत बयान जारी किया – ” हमें हमारे ख़ुफ़िया सूत्रों से पता चला है कि भारत में पांच -छः मच्छरों के आत्मघाती दस्ते ने प्रवेश किया है , हम हालात पर लगातार नज़र रखे हुए हैं | हमने पूरे देश में रेड अलर्ट जारी कर दिया है | ” और इस तरह से यह मामला गृह मंत्रालय की फाइलों में पहुँच गया |

और उधर एक दिन बेमन सिंह ने ‘ मन से ‘ काम करते हुए रद्दी की फाइलों से सभी मच्छरों को मार गिराया | गृह मंत्रालय में यह मामला अभी भी विचाराधीन है |

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103 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Torn के द्वारा
October 17, 2016

Created the greatest arlteics, you have.

steroid patch के द्वारा
October 19, 2013

Yogensaraswat.jagranjunction.com पर यह लेख मेरी राय में योग्य बुकमार्क है . यह भविष्य में संदर्भ के लिए बचाने के लायक है . यह चिंतन के लिए कई वैध अंक के साथ आकर्षक पढ़ रहा है . मैं इस लेख के भीतर बने लगभग हर बात पर सहमत करने के लिए है .

dharmendra के द्वारा
April 5, 2012

आदरणीय भाई साहब नमस्कार, में आपसे माफ़ी चाहूँगा की मेने आपका ब्लॉग दफ्तर के मच्छर को मेरे ब्लॉग में पस्त किया मेरा उद्देश्य केवल मात्र यही था की में आपके उस व्यंग्य लेख को पाठको तक पहुचाऊ मुझे आपका ये ब्लॉग बहुत सुंदर लगा .मेरी तरफ से एक भूल हुई है की मेने ब्लॉग के अंत में द्वारा योगी सारस्वत नहीं लगाया इस भूल का में अपराधी हु बड़े भाई समझ कर माफ़ करे में इस तरह की पुनरावर्ती नहीं करूँगा .पुन:में आपसे माफ़ी चाहूँगा .मुझे आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वाश है की आप छोटा भाई समझ कर माफ़ कर देंगे . सधन्यवाद माफ़ी के साथ

    yogi sarswat के द्वारा
    April 6, 2012

    मित्रवर , अब ये अध्याय बंद हो चूका है ! आपने अपनी गलती का एहसास किया और अपनी भूल मानी , येही बहुत है ! लेकिन आगे से उम्मीद करता हूँ की आप इस तरह की गलती नहीं करेंगे !

dharmendra के द्वारा
April 5, 2012

yogi ji namaskar, mene aapka blog दफ्तर के मच्छर apne blog me lagaya tha meri mansha yah nahi thi ki me use apne naam se lagau mujhe aapka blog bahut bhaya to me use pathako tak pahuchana chah raha tha mujhse bhool yahi hui hai ki mene paste karte vakt by yogi sarswat nahi likha me tahe dil se maafi chahta hu aap chhota bhai samjh kar chhama kare mera is or dhyan hi nai gaya tha mere dushre blog dekh sakte hai mene unme jinse liye hai unka naa lagaya hai me aapse dubara maafi chahunga

    yogi sarswat के द्वारा
    April 6, 2012

    its ok ! now this chapter has closed ! I hope that you will not be engaged in this type of fake act.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 5, 2012

    धन्यवाद मित्र , आपने अपनी सूचना खुद ही प्रेषित कर दी ! आभार

praveen panwar के द्वारा
April 2, 2012

thanks for your artical . yogi ji

    yogi sarswat के द्वारा
    April 3, 2012

    Thanks for you valuable comment , mr praveen ! keep visiting to my blog .thanx

praveen panwar के द्वारा
April 2, 2012

bhaut accha yogi ji

    yogi sarswat के द्वारा
    April 3, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद !

y kumar के द्वारा
April 1, 2012

wow, very nice article yogi g . u r one of the most versatile blogger

    yogi sarswat के द्वारा
    April 2, 2012

    thank you very much mr. kumar for your appreciation to my words !

Kumar Gaurav के द्वारा
March 31, 2012

सादर प्रणाम योगी जी बहुत सुन्दरता से आपने झोल-झाल वाली सरकारी व्यवस्था पर कटाक्ष किया है. बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 2, 2012

    श्री कुमार गौरव जी सादर नमस्कार ! आपको मेरा लेखन पसंद आया , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद !

yamunapathak के द्वारा
March 30, 2012

बहुत खूब, बात-बात पर जांच बिठाने पर कडा व्यंग .योगी जी धन्यवाद .

    yogi sarswat के द्वारा
    March 30, 2012

    आदरणीय यमुना जी सादर नमस्कार ! आपको लेखन पसंद आया , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा !

satya sheel agrawal के द्वारा
March 30, 2012

योगी जी,उक्त लेख में आपने सुन्दर कटाक्ष किया हमारी शासन की कार्य प्रणाली पर धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    March 30, 2012

    आदरणीय श्री सत्य शील अग्रवाल जी सादर नमस्कार ! आपका प्रोत्साहन मिलता रहता है तो कुछ लिख लेता हूँ ! आपका आशीर्वाद हमेशा मिलता रहेगा , ऐसी कामना करता हूँ ! आभार !

omdikshit के द्वारा
March 29, 2012

बहुत अच्छा वर्णन ,सरकारी तौर-तरीके का.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 30, 2012

    आदरणीय श्री ओम दीक्षित जी सादर नमस्कार ! आपको मेरा लेखन पसंद आया , बहुत बहुत आभार !

pankaj के द्वारा
March 29, 2012

बदलो को पर्करना हमारी आदत नहीं मुघे पता नहीं था की हर कोए आप सा बन्दर nahi

    yogi sarswat के द्वारा
    March 30, 2012

    धन्यवाद !

MAHIMA SHREE के द्वारा
March 29, 2012

आदरणीय योगी जी नमस्कार, क्या बात है…..छोटी सी बात से हास्य परिहास के साथ आपने पुरे हिन्दुस्तान के दफ्तरी काम काज और मिजाज दोनो के दर्शन करवा दिए……..बहुत खूब सर बहुत-२ बधाई…

    yogi sarswat के द्वारा
    March 30, 2012

    आदरणीय महिमा जी सादर नमस्कार ! ये एक हलकी सी कोशिश करी थी व्यंग्य लिखने की ! आपको ये कोशिश पसंद आई , बहुत बहुत आभार !

rekhafbd के द्वारा
March 28, 2012

योगी जी ,बहुत बढिया,अच्छे लेख पर बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    March 29, 2012

    adarniya , rekha ji saadar namaskar ! aapko lekh pasand aaya , bahut bahut aabhaar ! aashirwad banaye rakhiyega !

anupammishra के द्वारा
March 27, 2012

सरकारी कार्यशैली पर बढ़िया लेख…

    yogi sarswat के द्वारा
    March 28, 2012

    आदरणीय श्री अनुपम मिश्र जी सादर नमस्कार ! आपको लेखन पसंद आया , बहुत बहुत आभार ! सहयोग देते रहिएगा !

prem kumar के द्वारा
March 27, 2012

वाह योगी जी क्या खूबसूरत बाते कही है हमारे सरकारी महकमो के बारे मे |हर सरकारी ऑफिस मैं ऐसे ही होता है सब अपना काम दुसरे पर थोपते है |

    yogi sarswat के द्वारा
    March 27, 2012

    श्री प्रेम कुमार जी आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया मिली , हार्दिक धन्यवाद !

yogi sarswat के द्वारा
March 26, 2012

Thanx dear for your comment ! but its not a joke , it is an article written on a serious issue in light mood language !

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
March 25, 2012

चुभता हुआ चुटीला व्यंग्य ! योगी जी , बधाई !

    yogi sarswat के द्वारा
    March 26, 2012

    श्री आचार्य जी , सादर नमस्कार ! आपकी प्रतिक्रिया मिली , हार्दिक आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा !

Sumit के द्वारा
March 24, 2012

बहुत ही खूब कहा ………………वैसे नाम में क्या रखा है,,,कर्म बड़े होने चैये ………… http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/03/22/आखिर-क्यों/

    yogi sarswat के द्वारा
    March 26, 2012

    shri sumit ji namaskar ! bahut sahi kaha aapne , naam se kuchh nahi hota , karm bade hone chahiye ! aabhaar !

Hemant के द्वारा
March 24, 2012

Good Joke.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 26, 2012

    मित्रवर ! आपकी प्रत्लिक्रिया मिली , हार्दिक आभार !

D33P के द्वारा
March 24, 2012

सबसे पहले धन्यवाद आपको कि मेल पर आपके ब्लॉग ने दस्तक दी ,दस्तक मिलते ही दरवाजा खोला तो आपके इस खूबसूरत व्यंग अभिवक्ति के दर्शन हुए …आज की सरकारी महकमों की कार्य प्रणाली पर व्यंग करती हुई रचा पढकर आनंद आ गया !बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    March 26, 2012

    आदरणीय दीप्ति जी सादर नमस्कार ! सच कहूं तो आपकी प्रतिक्रिया मुझे हमेशा ही प्रोत्साहित करती है इसलिए जब तक आपके विचार नहीं मिलते , अपनी रचना को पूर्ण नहीं मानता ! बहुत बहुत आभार !

    Fanny के द्वारा
    October 18, 2016

    Shannon – I absolutely LOVE them Tomme!!! I cod8nu&#l217;t have asked for a better time. Even though it rained, you managed to capture our love PERFECTLY! I cannot wait to get my hands on the rest of the pictures!!! *SQUEALS!*

March 23, 2012

यह व्यंग्य है, कटाक्ष, या सच्चाई! हाहा.. बहुत खूब..! नव-संवत्सर, एवं पावन नवरात्रि हेतु शुभकामनाएं स्वीकारें, सादर.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 24, 2012

    टिम्सी मेहता जी सादर नमस्कार ! ये सच में हमारी व्यवस्था पर एक कटाक्ष ही है जिसे व्यंग्य के रूप में लिखा है मैंने ! आपको पसंद आया , बहुत बहुत आभार !

    yogi sarswat के द्वारा
    March 24, 2012

    श्री मनोज जी , नमस्कार ! मैंने क्रिशन चंदर की ये वाली कृति नहीं पढ़ी है किन्तु उनकी एक कृति ” गधे की आत्मकथा ” जरूर पढ़ी है ! अवश्य पढूंगा ! ऑनलाइन नहीं तो खरीद लूँगा ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार !

yamunapathak के द्वारा
March 23, 2012

aatmaghaatee machar bahut hee prateekaatmak prayog rahaa aapke lekhon mein ek baat jo barbas dhyaan khinchatee hai vo hai ’sheershak’ har vidhaa ko chune vaalee aapkee lekhanee hamein bahut kuch seekhaa jaatee hai

    yogi sarswat के द्वारा
    March 24, 2012

    आदरणीय यमुना पाठक जी सादर नमस्कार ! ये मेरे लिए बड़ी बात है कि आपको मेरा लेखन पसंद आ रहा है ! बहुत बहुत आभार !

y kumar के द्वारा
March 23, 2012

योगी जी , बेमन तो बेचारा खामखाँ ही बदनाम हो गया जबकि उसने इतना बेहतर काम किया की घुसपैठिये मार गिराए ! यही आज की व्यवस्था है और यही ईनाम ! आप तो एक में अनेक निकले , आज व्यंग्य की कला भी देख ली आपकी , और बहुत खूब लिखा है आपने ! बधाई !

    yogi sarswat के द्वारा
    March 24, 2012

    आदरणीय कुमार जी सादर नमस्कार ! ये मेरे लिए बड़ी बात है कि आपको मेरा लेखन पसंद आ रहा है ! बहुत बहुत आभार ! आपकी बधाई दिल से स्वीकार करता हूँ ! आभार

ग़ाफ़िल के द्वारा
March 23, 2012

वाह! क्या बात है!!! सरकारी फ़रमान और फ़रमाबरदार दोनों एक से…बहुत सुन्दर

    yogi sarswat के द्वारा
    March 24, 2012

    आदरणीय गाफिल जी सादर नमस्कार ! ये मेरे लिए बड़ी बात है कि आपको मेरा लेखन पसंद आ रहा है ! बहुत बहुत आभार ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा !

    Rangle के द्वारा
    October 17, 2016

    Short, sweet, to the point, FRace-xEEtly as information should be!

sanjay dixit के द्वारा
March 23, 2012

नमस्कार योगी जी ,सटीक व्यंग्य ,बहुत अच्छा लिखा है

    yogi sarswat के द्वारा
    March 24, 2012

    श्री संजय जी नमस्कार ! आपकी प्रतिक्रिया मिली ! हार्दिक धन्यवाद !

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
March 23, 2012

बहुत सुन्दर व्यंग्य,योगी जी.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 23, 2012

    राजीव कुमार झा साब , नमस्कार ! आपको व्यंग्य पसंद आया , मतलब मेरा लेखन सार्थक हुआ ! आभार

chandanrai के द्वारा
March 22, 2012

Bahut khoob yogi ji, maja aa gaya , your thoughts on http://chandanrai.jagranjunction.com/Mere lahoo

    yogi sarswat के द्वारा
    March 22, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , चन्दन राय जी ! आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया मिली ! आभार !

mparveen के द्वारा
March 22, 2012

योगी जी आलेख के शुरू में आपने लिखा क्यूँ नहीं की हंसने पर जुरमाना लगेगा और न हंसने पर डबल लगेगा …. :) :) :) :) :) …….

    yogi sarswat के द्वारा
    March 22, 2012

    आदरणीय परवीन जी सादर नमस्कार ! इसका मतलब आपको मेरा ये व्यंग्य लेख पसंद आया ! हार्दिक धन्यवाद ! आभार !

sonam के द्वारा
March 22, 2012

Very well done sir. बधाई स्वीकार करें।

    yogi sarswat के द्वारा
    March 22, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , सोनम जी ! आपकी प्रतिक्रिया मिली ! आभार !

vikaskumar के द्वारा
March 22, 2012

इतना सुन्दर व्यंग्य लिखा है कि क्या कहने । व्यवस्था की कमजोरियों को बड़ी कुशलता से आपने प्रकट किया है । एक बात तो माननी होगी कि आप साहित्य की हर विधा बड़े अच्छे तरीके से लिखते हैं ।

    yogi sarswat के द्वारा
    March 22, 2012

    श्री विकास कुमार जी सादर नमस्कार ! लेखन पसंद आया आपको ! मतलब मेरी कोशिश सार्थक हुई ! बहुत बहुत आभार !

jlsingh के द्वारा
March 22, 2012

योगी जी, प्रणाम! बहुत ही सटीक ब्यंग्य आज की ब्यवस्था पर! .. आपने मुझे भी आत्मबल प्रदान किया है इस विषय पर लिखने को! कभी पेश करूंगा! फिलहाल बधाई स्वीकारें!

    yogi sarswat के द्वारा
    March 22, 2012

    आदरणीय श्री जवाहर जी सादर नमस्कार ! आपको मेरा लेखन पसंद आया , हार्दिक आभार ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा !

jalaluddinkhan के द्वारा
March 22, 2012

व्यवस्था पर एक सटीक रचना,चाहे “बेमन” से लेकिन है ज़ोरदार.इससे पता यह भी चला की “मन” से कम कर के हम अपना कम खुद कर सकते हैं.किसी और के भरोसे रहे तो फाइल धूल चाटती रहेगी और हम व्यवस्था को कोसते रहेंगे.बधाई.

    jalaluddinkhan के द्वारा
    March 22, 2012

    भाई,जहाँ कम लिखा है,उसे काम समझिएगा.इस अशुद्धि के लिए खेद है.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 22, 2012

    आदरणीय श्री खान साब , सादर नमस्कार ! आपके विचारों का स्वागत करता हूँ ! आपके विचार हमें प्रोत्साहित करते हैं ! बहुत बहुत आभार ! सहयोग देते रहिएगा !

alkargupta1 के द्वारा
March 21, 2012

योगी जी , इस व्यंग्य में बहुत ही पते की बात कह दी ही…..बहुत ही बढ़िया लिखा है….

    yogi sarswat के द्वारा
    March 22, 2012

    आदरणीय अलका गुप्ता जी सादर नमस्कार ! पहला व्यंग्य है मेरा आदरणीय अलका जी , आपको पसंद आया , बड़ी बात है ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा !

minujha के द्वारा
March 21, 2012

योगी जी नमस्कार बाहर गई थी,आते ही मुखपृष्ठ पर आपको विजेता बना देख खुशी हुई देर से ही सही बधाई स्वीकार करें,आपका ये व्यंग भी बहुत रोचक है इसकी भी बधाई देना चाहुंगी,बहुत अच्छा लिखा है आपने.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 22, 2012

    आदरणीय मीनू झा जी सादर नमस्कार ! आपकी बधाई को दिल से स्वीकार करता हूँ ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग देते रहिएगा !

vikramjitsingh के द्वारा
March 21, 2012

क्या बात है, योगी जी, बड़े मूड में हो आजकल, इरादे क्या हैं जनाब के, यार, इतना बुरा तो नहीं हमारा गृह मंत्रालय, कभी-कभी भूल हो जाती है, बेचारे क्या करें, इतना बड़ा देश संभालना आसान तो नहीं……और तो और,…संसद पर भी तो मच्छरों ने हमला किया था, क्या हुआ, आज तक ‘मच्छर’ नहीं मसला गया इनसे, हम तो यही कहते हैं, काश, भारत के हर सरकारी महकमे में, दो-चार ‘बेमन सिंह’ हों, तो मच्छरों की हिम्मत न पड़े इस देश में घुसने की………………बेमन सिंह जिंदाबाद……योगी जी अमर रहे…..

    yogi sarswat के द्वारा
    March 22, 2012

    विक्रमजीत सिंह जी नमस्कार ! आपके विचारों से सहमत हूँ ! ऐसे बेमन की जरुरत तो रहेगी , लेकिन सिर्फ मच्छर मारने के लिए ही नहीं बहुत कुछ और भी करने के लिए ! आभार ! विक्रम जी आपने मुझे ” अमर ” बना दिया ! हहहाआआआअ इतनी जल्दी दुनिया से मत विदा करिए मित्रवर !

abodhbaalak के द्वारा
March 21, 2012

:) क्या बात है योगी जी, क्या कह गए हंसी हंसी में आप … सुन्दर http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    yogi sarswat के द्वारा
    March 21, 2012

    आदरणीय अबोधबालक जी सादर नमस्कार ! आपके विचार हमेशा उर्जा से भरे होते हैं जो मुझे भी प्रफुल्लित करते हैं और बेहतर लेखन की प्रेरणा देते हैं ! बहुत बहुत आभार !

March 21, 2012

सादर नमस्कार! सरकारी नीतियों की पोल खोलती हुई हास्य-व्यंग्य आलेख………विचारणीय.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 21, 2012

    अलीन जी सादर ! आपकी व्यावहारिक प्रतिक्रिया मिली , हार्दिक आभार ! सहयोग बनाये रखें !

dineshaastik के द्वारा
March 21, 2012

योगी जी व्यंग विधा पर अच्छी पकड़ है आपकी। बधाई…. http://dineshaastik.jagranjunction.com/author/dineshaastik/

    yogi sarswat के द्वारा
    March 21, 2012

    आदरणीय श्री आस्तिक जी , सादर नमस्कार ! प्रथम व्यंग्य लेख दिया है यहाँ , आपका उत्साह वर्धन करने के लिए बहुत बहुत आभार !

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
March 20, 2012

सरकारी कार्य की आज कल यही प्रणाली है. बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 21, 2012

    आदरणीय श्री कुशवाहा जी , सादर नमस्कार ! आपकी बेशकीमती प्रतिक्रिया मिली , बहुत बहुत आभार ! आशीर्वाद बनाये रखिये !

akraktale के द्वारा
March 20, 2012

योगी जी नमस्कार, सरकारी कार्य की गति पर सुन्दर व्यंग किया आपने.बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 21, 2012

    आदरणीय श्री रक्ताले जी सादर नमस्कार ! आपकी प्रतिक्रिया मिली , हार्दिक धन्यवाद ! आशीर्वाद बनाये रखिये ! आभार

मनु (tosi) के द्वारा
March 20, 2012

योगी जी ! नमस्कार लेख काफी रोचक है । खूब मज़ा आया … अच्छा व्यंग अच्छी रचना के लिए हार्दिक बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    March 21, 2012

    आदरणीय तोशी जी सादर नमस्कार ! माफ़ करें मैं आपको मनु नहीं तोशी ही लिखूंगा क्योंकि इस नाम में अलग बात है ! आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया मुझे मेरे पोस्ट पर हमेशा मिलती रही है बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा !

sinsera के द्वारा
March 20, 2012

बहुत सुन्दर व्यंग्य योगी जी, बधाई… और आप को कॉन्टेस्ट जीतने की बधाई देने में भी देर हो गयी इस के लिए क्षमा चाहती हूँ. मुझे पता नही था कि आप मेकेनिकल इंजिनियर हैं. इस के साथ ही आप की साहित्यिक अभिरुचि+टेक्नोलॉजी का अनूठा संगम देख कर अच्छा लगा .

    yogi sarswat के द्वारा
    March 21, 2012

    आदरणीय सरिता जी सादर नमस्कार ! आपकी प्रतिक्रिया और आपकी बधाई को दिल से स्वीकार करता हुए आपका आभार व्यक्त करता हूँ ! आप सब लोगों के सहयोग से ही ये संभव हो पाया ! आदरणीय सरिता जी , हम जैसे लोग चाहकर भी साहित्य की सेवा नहीं कर पाते क्योंकि दो वक्त की रोटी का इन्तेजाम पहले सोचना पड़ता है इसलिए mechanical engineer हूँ नहीं बनाया गया हूँ , क्योंकि मुझे मालुम है की सिर्फ साहित्य से रोटी कमाना बड़ा मुश्किल होता है ! साहित्य पढ़ लेता हूँ और उसको पढ़कर कुछ लिख लेता हूँ जिसे आप जैसे गुणी लोग पढ़ लेते हैं तो थोडा और विश्वास आ जाता है और फिर कुछ लिख लेता हूँ ! बहुत बहुत आभार !

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 20, 2012

योगी जी नमस्कार, फाइल और तारीख, इन्ही के सहारे हमारा देश चल रहा है. हमारे देश की बाबूगिरी चल रही है. अकेले ‘बेमन’ कितना काम करेगा. एक तो अकेले काम नहीं कर पायेगा, दूसरे हमारे बाबू लोग काम करने नहीं देंगे. सुन्दर व्यंग….. http://ajaydubeydeoria.jagranjunction.com

    yogi sarswat के द्वारा
    March 21, 2012

    श्री अजय जी सादर नमस्कार ! बिलकुल सही कहते हैं आप ! आपके विचारों का स्वागत करता हूँ और आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

Bhardwaj Mishra के द्वारा
March 20, 2012

बहुत खूब योगी जी ………बढ़िया व्यंग बधाई !

    yogi sarswat के द्वारा
    March 21, 2012

    आदरणीय मिश्र जी सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार !

satish3840 के द्वारा
March 20, 2012

योगी जी देश फ़ाइल में ही रन कर रहा हें / काम की बात कोई नहीं करता / मतलब आये थे हरी भजन को ओटन लगे कपास / काम आम आदमी ही करता हें / ऊपर से नीचे तक तो बस-’ बीट अबाउट दी बुश “हो रहा हें / ब्बत का बतंगड़ , बाल की खाल निकाल रहें हें /

    yogi sarswat के द्वारा
    March 21, 2012

    आदरणीय श्री सतीश जी सादर नमस्कार ! आपके व्यवहारिक विचारों का स्वागत करता हूँ ! आप हमेशा सटीक और व्यावहारिक प्रतिक्रिया देते रहे हैं , ये भी बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि ज्यादातर लोग प्रतिक्रिया देना , फोर्मलिटी समझते हैं और कहीं कुछ भी कह देते हैं ! बहुत बहुत आभार ! उम्मीद करता हूँ आपका आशीर्वाद हमेशा यूँ ही मिलता रहेगा ! आभार !

nishamittal के द्वारा
March 20, 2012

दुर्भाग्य है,हमारा हमारे पास ये तो सूचना होती है,कि देश में आतंकवादी घुसे हैं,परन्तु कैसे घुसे और उनको पकड़ने से चूक जाते हैं हम.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 21, 2012

    आदरणीय निशा मित्तल जी सादर नमस्कार ! आपके विचार मुझे हमेशा ही प्रोत्साहित करते हैं ! आपके विचारों से नई उर्जा मिलती है ! बहुत बहुत आभार !


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