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ज़िन्दगी .....................एक पहेली

Posted On: 26 Mar, 2012 Others में

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हमने पूछा ज़िन्दगी से
बता ए ज़िन्दगी ये ज़िन्दगी क्या है ?
वो बोली मत पूछ बन्दिगी से

कि बता ए बन्दिगी ये बन्दिगी क्या है ||


ज़िन्दगी जवानी है ज़िन्दगी एक कहानी है |

रुक जाये तो बर्फ है बह जाये तो पानी है ||


किसी को सुकून दूं मैं ये मेरी भाषा नहीं है

ये मेरा आगाज़ है , मेरी पूर्ण परिभाषा नहीं है


किसी के लिए काँटा हूँ किसी के लिए फूल हूँ मैं |

किसी के सिर का ताज हूँ किसी के पाँव की धूल हूँ मैं ||


हमने कहा

अच्छा चलें ! ज़िन्दगी जी विदा दीजिये |

( हम ज़िन्दगी से मिलने गए हुए थे )

वो बोली ! कहाँ चले ?
पहले मेरी सहेली ‘ मौत ‘ से तो मिल लीजिये ||


हमने कहा आज जाना ज़िन्दगी क्या है ?
ज़िन्दगी तो एक पहेली है |
आप से तो सुन्दर आपकी सहेली है ||

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81 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sonam thakur के द्वारा
April 22, 2012

योगी जी, जिंदगी के बारे में लिखे गये आपके ये अल्फाज उसकी पूरी परिभाषा समझा रहे है. खुबसूरत भवभ्यक्ति के लिए बधाई ……………

    yogi sarswat के द्वारा
    April 30, 2012

    आदरणीय सोनम ठाकुर जी , सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! अपना आशीर्वाद और सहयोग बनाये रखें ! धन्यवाद

D33P के द्वारा
April 16, 2012

ज़िन्दगी तो एक पहेली है | आप से तो सुन्दर आपकी सहेली है || जिन्दगी तो कभी हंसती है कभी रुलाती है पर सहेली तो केवल सुकून देती है ……सच में बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति

    yogi sarswat के द्वारा
    April 17, 2012

    आदरणीय दीप्ति जी , सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! आशा करता हूँ , आपका सहयोग यूँ ही मिलता रहेगा ! धन्यवाद

    Doll के द्वारा
    October 18, 2016

    Vil mene The Rok;2#8&17cs kælder er for tæt på helvede, og lokalerne for små til at vi kan slippe ud i live. Satser på Vega eller Amager Bio hvis ingen af festivalerne er hurtige

Ritesh Chaudhary के द्वारा
April 13, 2012

बहुत खूब सुन्दर प्रस्तुति 2

    yogi sarswat के द्वारा
    April 16, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद मित्रवर श्री रितेश जी ! आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा !

sonam के द्वारा
April 6, 2012

नमस्कार योगी सर,  आपके जो बीत गया वो ……….लेख में कमेन्ट क्लोस हो गए है इसलिए यहाँ लिख रही हूँ. क्या कहूँ कुछ समझ ही नहीं आ रहा ! आपके इस लेख में अपना नाम पढकर बड़ा happy happy महसूस कर रही हूँ ! धन्यवाद की आपने इतने बड़े बड़े रचनाकारों के बीच में मुझे जगह दी ! Thank you sir.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 6, 2012

    सोनम जी नमस्कार ! बहुत बहुत आभार ! आप सच कह रही हैं , इस पोस्ट पर न जाने क्यों कमेन्ट नहीं आ पा रहे हैं ? मैंने फीडबैक को भी बताया है लेकिन कुछ भी सुधर नहीं हुआ है ! बहुत बहुत आभार !

sanjay dixit के द्वारा
April 5, 2012

सचमुच पहेली ही तो है,बहुत सुन्दर भाव

    yogi sarswat के द्वारा
    April 5, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , श्री संजय जी ! आपने मेरे शब्दों को समय दिया ! आभार

सुरेश कुमार बोहरा के द्वारा
April 5, 2012

बहुत सुदंर है य़ह पहेली - ज़िन्दगी एक पहेली

    yogi sarswat के द्वारा
    April 5, 2012

    श्री सुरेश कुमार जी , आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा !

satya sheel agrawal के द्वारा
April 4, 2012

सुन्दर रचना

    yogi sarswat के द्वारा
    April 4, 2012

    आदरणीय श्री सत्य शील अग्रवाल जी सादर नमस्कार ! आपको रचना पसंद आई , बहुत बहुत आभार ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा !

praveen panwar के द्वारा
April 4, 2012

योगी जी नमस्कार, बहुत अच्छी कविता धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    April 4, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , प्रवीण जी ! आभार !

अब्दुल रशीद के द्वारा
April 4, 2012

सुन्दर रचना सप्रेम अब्दुल रशीद

    yogi sarswat के द्वारा
    April 4, 2012

    आदरणीय श्री अब्दुल रशीद जी , सादर नमस्कार ! आपकी प्रतिक्रिया मिली , हार्दिक आभार ! आशीर्वाद बनाये रखिये ! धन्यवाद !

ajay kumar pandey के द्वारा
April 4, 2012

आदरणीय योगी जी आपको और आपकी तरह सभी ब्लोग्गेर्स को में धन्यवाद देना चाहता हूँ जिन्होंने मेरे लेख को समर्थन दिया में चाहता हूँ की यह लेख जन जन तक पहुचे जिससे सभी लोग नारी के विरुद्ध होने वाले अत्त्याचारों पर आवाज उठाये धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    April 4, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , अजय कुमार जी !

vijay pratap yadav के द्वारा
April 3, 2012

write sir…..paheli na hoti….hr…ensan janam aur mrn ke bich kya hai aur kya hota hai samgh jata i like your poem. Ye poem sir apki lekhani ne kalmbdd kiya hai. but ye Aaapki AATAMA….ki Awaj hai……nice……sir……

    yogi sarswat के द्वारा
    April 4, 2012

    श्री विजय प्रताप जी नमस्कार ! आपकी सराहनीय प्रतिक्रिया मिली , हार्दिक आभार !

sonam के द्वारा
April 3, 2012

नमस्कार योगी सर हमने कहा आज जाना ज़िन्दगी क्या है ? ज़िन्दगी तो एक पहेली है | आप से तो सुन्दर आपकी सहेली है || बहुत खूब सर लेकिन क्या पता मौत जिन्दगी से भी सुंदर हो ही ना! क्योकि अक्सर ऐसा होता है कि हमारे पास जो चीज होती है उसमे हमें कोई खूबी नज़र नहीं आती और जो हमारे पास नहीं होती वह हमें अधिक सुंदर लगती है ! दूर से सब कुछ अच्छा ही लगता है ! सुंदर रचना के लिए बधाई !

    yogi sarswat के द्वारा
    April 3, 2012

    सोनम जी नमस्कार ! बिलकुल जिंदगी भी मौत से बेहतर हो सकती है , इसमें कोई डोरे नहीं ! ये एक कविता मात्र है , जीवन के फलसफे से कोई लेना देना नहीं है इसका ! बस दिल के शब्द थे जो इस मंच पर रख दिए ! एक शे’र याद आ रहा है इस दुनिया में जी नहीं लगता , लगता है हम मर जायेंगे | पर मर के भी जी न लगा तो कहाँ जायेंगे || बहुत बहुत आभार !

    Patience के द्वारा
    October 17, 2016

    Oh yeah, faublous stuff there you!

allindianrightsorganization के द्वारा
April 3, 2012

काँटों में भी फूल खिला कर , सबको हरसाना आता है , फिर तो तुम मानव हो पगले , तुम्हे ईश दिखाना आता है |………१ मै आग सा जीवन लेकर , पानी सा जीवन क्यों खत्म,करूं दूर सही पर आभास आलोक सा , मोती , मछली सा क्यों मै मरूँ…..२ आलोक की चाहत सबमे रहती , अंधकार समेटे क्यों बैठा है , घुट घुट कर आक्रोश सूर्य सा , अंतस तेज बन क्यों ऐठा है , दूर सही पर प्यारा सा लगता , हर सुबह जगाने आता है , आलोक न रहता किसी एक का , सिर्फ मुट्ठी में अँधेरा पाता है …..३ …..इस का कोई मतलब आपको समझ में आ रहा है …..डॉ आलोक चान्टिया

    yogi sarswat के द्वारा
    April 3, 2012

    मित्रवर नमस्कार ! आपकी रचना का हरदी स्वागत करता हूँ ! हालाँकि आपकी ये रचना मुझे मेरी प्रतिक्रिया स्वरुप मिली है किन्तु दिल प्रसन्न हुआ की आपने जीवन बेला की शान में कुछ कहा ! ऐसा नहीं है मित्रवर की मैं जिंदगी से उदास हूँ , बस कुछ शब्द थे वो इस मंच पर प्रस्तुत कर दिए ! बहुत बहुत आभार !

prem kumar के द्वारा
April 2, 2012

योगी जी नमस्कार बहुत ही सुंदर कबिता लिखी है आपने | जिंदगी तो एक पहेली है और मौत उसकी सहेली है |आप इस्सी तरह लिख कर हम सब का ज्ञान बर्धन किया करे | आप का बहुत बहुत धन्यबाद |

    yogi sarswat के द्वारा
    April 3, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , प्रेम कुमार जी ! आपको मेरे शब्द पसंद आये ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद !

y kumar के द्वारा
March 31, 2012

very nice words

    yogi sarswat के द्वारा
    April 2, 2012

    Thank you very much , mr kumar for your valuable comment . please keep it up .

vikramjitsingh के द्वारा
March 29, 2012

योगी जी, सादर, आपकी मेल मिली, लेकिन हम तो ‘दफ्तर के मच्छर’ पोस्ट पर पहले ही नमन कर चुके हैं, हाँ, आपकी इस पोस्ट का, यहाँ आने पर ही पता चला, क्या करें, यार, काम में ही इतना वक़्त निकल जाता है, कि टाइम ही नहीं मिलता, जब फ्री होते हैं तो एक चक्कर जरूर लगाते हैं, खैर, जब आ ही गए हैं तो, आपकी कविता पढ़ी, आनंद आ गया, दिन प्रति दिन निखरते जा रहे हो, बरखुरदार, आपका फलसफा जिंदगी के बारे में कुछ भी हो, लेकिन हमारा तो मान्यवर ये है, सुनो, : ”हमने पूछा, जिंदगी चीज़ है क्या?… हाथ से गिरा ‘जाम’, और टूट गया…….” बस, दो दिन रह गए हैं, फिर खूब गुजरेगी, जब मिल बैठेंगे, तीन यार, आप……….हम……और…… बैगपाईपर……. धन्यवाद……..(आज नहीं कहेंगे ‘अमर रहे’) आप नाराज़ होते हो……..है ना…..

    yogi sarswat के द्वारा
    March 30, 2012

    श्री विक्रम जीत जी नमस्कार ! आपके विचार मुझे हमेशा प्रेरित करते हैं , इसलिए आपके विचार नहीं आते तो लेखन कुछ अधूरा सा लगता है ! आप कहते हैं अमर रहे कहने से मैं नाराज़ हो जाता हूँ , ऐसा मित्रवर कुछ नहीं है ! भगवान ने यही तो एकमात्र गुण दिया है की हमें नाराज़ होना नहीं आता ! इसलिए हम आपसे क्षमा चाहते हैं अगर आपको हमारी किसी बात से हमने आपका दिल दुखाया हो !

    yogi sarswat के द्वारा
    March 30, 2012

    आदरणीय श्री विनीत त्रिपाठी जी , नमस्कार ! आपको कविता पसंद आई , बहुत बहुत आभार ! आपने मुझे मेरी कविता को चोरी होने की सूचना दी , बहुत बहुत मेहरबानी ! मैंने उन्हें मेल कर दिया है और शायद उन्होंने अपनी गलती मान ली है ! आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

MAHIMA SHREE के द्वारा
March 28, 2012

हमने कहा आज जाना ज़िन्दगी क्या है ? ज़िन्दगी तो एक पहेली है | वाह क्या सुंदर भाव है…..योगी सर बहुत-२ बधाई…सुंदर रचना के लिए…..साभार

    yogi sarswat के द्वारा
    March 29, 2012

    आदरणीय महिमा जी , सादर नमस्कार ! आपकी सराहनीय प्रतिक्रिया मिली , हार्दिक आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा !

Bhupesh Kumar Rai के द्वारा
March 28, 2012

सचमुच जिंदगी एक पहेली है इसकी अच्छी-बुरी कई सहेली हैं. अच्छाई के साथ जिन्दगी को जीना कहते हैं बाकी के साथ जिन्दगी तो बस धकेली है.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 28, 2012

    आदरणीय श्री राय जी , सादर नमस्कार ! आपने बहुत सधे हुए और बढ़िया शब्दों में अपना आशीर्वाद दिया है ! बहुत बहुत आभार ! अपने अन्य lekh और रचनाओं पर आपके विचारों का स्वागत करूँगा ! धन्यवाद !

akraktale के द्वारा
March 28, 2012

योगी जी नमस्कार, सुन्दर रचना लम्बी जिंदगी की छोटी कहानी. किन्तु भाई साहब निराशा को क्यों बढ़ावा दे रहे हैं मौत किस तरह बेहतर है. जीवन में आकर ही तो जिन्दगी को जाना है, ऐ मौत ठहर जा ज़रा कोई इन्तजार करता है, कुछ काम आ सकूं उसके, फिर तुझे तो आना है.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 28, 2012

    आदरणीय श्री रक्ताले जी सादर नमस्कार ! नहीं साब , निराशा वाली कोई बात नहीं है , बस कविता है ! बहुत पहले की लिखी हुई है इसलिए हो सकता है जिस वक्त लिखी है उस वक़्त ऐसा कोई भाव रहा हो , लेकिन अब नहीं ! आपकी सराहना लगातार मिल रही है , बहुत बहुत धन्यवाद् !

    Mikel के द्वारा
    October 18, 2016

    Suripisrng to think of something like that

alkargupta1 के द्वारा
March 28, 2012

जी हाँ यह ज़िन्दगी तो वाकई एक पहेली है……… योगी जी बहुत ही बढ़िया सुन्दर शब्दों से सुसज्जित भावाभिव्यक्ति !

    yogi sarswat के द्वारा
    March 28, 2012

    आदरणीय अलका गुप्ता जी सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द और उनका चयन पसंद आये , मेरा लेखन सार्थक हुआ ! बहुत बहुत धन्यवाद !

vinitashukla के द्वारा
March 27, 2012

सुन्दर फलसफा ज़िन्दगी का. अंतिम दो पंक्तियाँ विशेष तौर पर प्रभावी हैं.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 28, 2012

    आदरणीय विनीता शुक्ल जी , सादर नमस्कार ! आपको मेरी रचना पसंद आई बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा !

Jayprakash Mishra के द्वारा
March 27, 2012

अच्छी रचना है योगी जी

    yogi sarswat के द्वारा
    March 28, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद मिश्र जी ! सहयोग बनाये रखियेगा !

    Sunny के द्वारा
    October 17, 2016

    Di;dn#8217&t Rutgers Prep just beat North Hunterdon by 8 or 10 points? I am trying to understand why that had no impact whatsover on the rankings, because NH is still number 2 in the rankings. I expected Somerville or even Voorhees at number 2, What gives?

surendr shukl bhramar के द्वारा
March 27, 2012

किसी के लिए काँटा हूँ किसी के लिए फूल हूँ मैं | किसी के सिर का ताज हूँ किसी के पाँव की धूल हूँ मैं .. खूबसूरत भाव जिन्दगी एक अबूझ पहेली तो है ही योगी जी …सब के साथ न जाने क्यों एक रूप में नहीं ..नहीं ..ये भी बिभिन्नता में एकता …सुन्दर रचना भ्रमर५

    yogi sarswat के द्वारा
    March 27, 2012

    भ्रमर साब , नमस्कार ! आपकी प्रतिक्रिया हमेशा नई उर्जा का संचार करती है ! बहुत बहुत आभार !

nishamittal के द्वारा
March 27, 2012

जिन्दगी की परिभाषा सुन्दर ढंग से प्रस्तुत करने पर बधाई योगी जी.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 27, 2012

    आदरणीय निशा मित्तल जी सादर नमस्कार ! आपकी प्रतिक्रिया मिल जाती है तो स्वतः ही एक प्रकार की उर्जा का संचरण होने लगता है और मन फिर से कुछ लिखने को बेताब हो उठता है ! बहुत बहुत आभार ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा !

jlsingh के द्वारा
March 26, 2012

हमने कहा आज जाना ज़िन्दगी क्या है ? ज़िन्दगी तो एक पहेली है | आप से तो सुन्दर आपकी सहेली है || क्या बात कही है, आपने योगी जी!

    yogi sarswat के द्वारा
    March 27, 2012

    आदरणीय श्री जवाहर जी सादर नमस्कार ! आपको मेरा लेखन पसंद आया , बहुत बहुत शुक्रिया ! अपना आशीर्वाद बनाये रखियेगा !

March 26, 2012

ये तू क्या कहेली हैं, लगता हैं हम सब के बीच, तू नयी नवेली है… पर जैसी भी तू हो, लगता है, अपनी सहेली, ………………….इसीलिए तो सच कहेली है…….हार्दिक आभार.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 27, 2012

    श्री अलीन जी नमस्कार ! आपकी काव्यात्मक प्रतिक्रिया का हार्दिक स्वागत करता हूँ और आशा करता हूँ की आपका सहयोग ऐसे ही मिलता रहेगा ! आभार !

dineshaastik के द्वारा
March 26, 2012

सच, जिन्दगी का कोई भरोसा नहीं, कोई ठिकाना नहीं, मौत निश्चित है, आयेगी, बुलाओ या न बुलाओ। योगी जी, बहुत ही सुन्दर भावायुक्त रचना, बधाई….

    yogi sarswat के द्वारा
    March 27, 2012

    आदरणीय श्री आस्तिक जी सादर नमस्कार ! आपकी सारगर्भित प्रतिक्रिया मिली , हार्दिक स्वागत ! बहुत बहुत धन्यवाद !

    yogi sarswat के द्वारा
    March 27, 2012

    आदरणीय श्री आस्तिक जी नमस्कार ! मेरे शब्दों पर बहुमूल्य विचारों का स्वागत करता हूँ और आगे भी आपके सहयोग की कामना करता हूँ ! धन्यवाद !

omdikshit के द्वारा
March 26, 2012

योगी जी, नमस्कार. बहुत सुंदर भाव.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 27, 2012

    आदरणीय श्री ओम दीक्षित जी सादर नमस्कार !आपकी प्रतिक्रिया मिली , हार्दिक आभार !

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 26, 2012

बहुत सुन्दर….. क्या खूबसूरती से लिखते हैं. धन्य हैं प्रभु, आप तो धन्य हैं. बस ऐसे ही सरस्वती की कृपा बरसती रहे और आप सुन्दर से सुन्दर रचनाओं को हमारे सामने प्रस्तुत करते रहें. और उन्हें पढ़ कर हम भी धन्य होते रहें.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 27, 2012

    नमस्कार अजय जी ! आपकी कृपा मेरे हर लेख और रचना को लगातार मिलती रही है ! आपकी सराहना मिलती रहती है इसलिए ही कुछ लिख पाता हूँ ! आप जैसे महानुभावों का सहयोग और आशीर्वाद मिलता रहा और भगवन की कृपा बनी रही तो लिखूंगा ! बहुत बहुत धन्यवाद !

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
March 26, 2012

हमने कहा आज जाना ज़िन्दगी क्या है ? ज़िन्दगी तो एक पहेली है | आप से तो सुन्दर आपकी सहेली है || बहुत सुन्दर आदरणीय योगी जी, सादर बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 27, 2012

    आदरणीय श्री कुशवाहा जी , सादर नमस्कार !आपकी बधाई को दिल से स्वीकार करता हूँ ! सहयोग बनाये रखियेगा ! आभार !

    Andi के द्वारा
    October 17, 2016

    Tim Vietor21 July 2010John- Please come to Minneapolis as you KNOW we love you so much. I know it is cold up here in Nov/Dec but our LOVE will warm you. Your last time here at The Dakota was THE BEST EVER. But if not I will drive to St Louis. You are worth.the drive. As you are the BEST GUITARIST EVER! Love fr&m0#823o;Tim

minujha के द्वारा
March 26, 2012

सुंदर प्रस्तुति योगी जी वाकई जिंदगी पहेलियों का ही नाम है बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    March 27, 2012

    आदरणीय मीनू जी सादर नमस्कार ! आपकी प्रशंशनीय प्रतिक्रिया मिली , हार्दिक आभार !

Rajesh Dubey के द्वारा
March 26, 2012

वाकई रुकी हुई जिन्दगी बर्फ है और बह जाये तो पानी है. जिंदगी की सुन्दर परिभाषा के लिए बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 27, 2012

    आदरणीय श्री राजेश दुबे जी सादर नमस्कार ! आपको मेरी रचना पसंद आई , बहुत बहुत शुक्रिया ! सहयोग देते रहिएगा !

Tamanna के द्वारा
March 26, 2012

योगी जी.. बहुत सुंदर रचना.. वाकई बहुत खूब लिखा है आपने

    yogi sarswat के द्वारा
    March 27, 2012

    आदरणीय तमन्ना जी , सादर नमस्कार ! आपके विचारों का हार्दिक स्वागत करता हूँ ! सहयोग बनाये रखियेगा ! आभार

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
March 26, 2012

बहुत सुन्दर कविता,योगी जी. हमने कहा आज जाना ज़िन्दगी क्या है ? ज़िन्दगी तो एक पहेली है | आप से तो सुन्दर आपकी सहेली है || क्या खूब पंक्तियाँ हैं.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 27, 2012

    आदरणीय श्री राजीव कुमार झा जी सादर नमस्कार ! आपको पंक्तियाँ पसंद आयीं , मतलब लेखन सार्थक हुआ ! बहुत बहुत आभार !

yamunapathak के द्वारा
March 26, 2012

आपसे तो ……है वाक्य निराशा को दर्शाता है ,पर आपकी कविता का अंदाज़ निराला है बहुत पसंद आयी

    yogi sarswat के द्वारा
    March 27, 2012

    आदरणीय यमुना पाठक जी सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत शुक्रिया ! आभार व्यक्त करता हूँ !


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