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क्या डॉ. मनमोहन सिंह अक्षम प्रधानमंत्री हैं ?

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भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने सन् 2004 में जब सत्ता संभाली थी , तब भारत में एक उम्मीद की किरण जगी थी | लगता था कि वित्त मंत्री रहते हुए डॉ. सिंह ने जो बेहतर काम किए , वो उन्हें उसी रफ़्तार से आगे बढ़ाएँगे | उन्होने ऐसा किया भी | उन्होने अपने पहले कार्यकाल में अमेरिका से परमाणु संधि के मुद्दे पर वामपंथियों के आगे घुटने ना टेक कर अपनी मजबूती का भी परिचय दिया | उन्होने सन् 2008 की विश्व व्यापी आर्थिक मंदी से भी भारत को मजबूती से निकल दिया , जो उनके अच्छे आर्थिक शास्त्री होने का सबूत देता है | ये सब बेहतर काम डॉ. सिंह ने तब किए जब उन्हें अपने आपको साबित करना था | उनके उपर दबाव भी था , उन्हें परफॉर्म भी करना था जो उन्होने किया भी | अब जब वो अपने आपको साबित कर चुके हैं तब इस कार्यकाल में, जो 2009 से शुरू हुआ है , वो इतना कमज़ोर क्यों नज़र आते हैं ? अपने पहले कार्यकाल में 64 सांसदों वाली वामपंथी पार्टियों के आगे ना झुकने वाले , अपनी सरकार को ताक पर रख देने वाले प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार के मुद्दे पर 14 सांसदों की डी. एम. के. पार्टी के सामने क्यों कमज़ोर नज़र आते हैं | क्या उन्हें एक झटके में ही राजा या दयानिधि मारन को अपने मंत्रिमंडल से बाहर नही कर देना चाहिए था ? इससे ना केवल उनकी इज़्ज़त में इज़ाफ़ा होता बल्कि देश की इज़्ज़त और पैसा भी बचता | क्या डॉ. मनमोहन सिंह को पी. चिदंबरम से ये नही कहना चाहिए था कि अभी आप मंत्री मंडल से इस्तीफ़ा देकर अदालत से ‘पवित्र’ होने का प्रमाणपत्रा लेकर आइए , तब आपको वापस जगह दे दी जाएगी | क्या डॉ मनमोहन सिंह को अन्ना हज़ारे के आंदोलन में खुद शामिल होकर जनता को ये संदेश नही देना चाहिए थे कि हाँ ! हम भी देश में व्याप्त भ्रष्टाचार से लड़ना चाहते हैं | इसके उलट उनकी सरकार और उनके मंत्रियों ने बेकार में ही ये सोचना और साबित करना शुरू कर दिया कि कांग्रेस और सरकार भ्रष्टाचार को इस देश से ख़त्म ही नही करना चाहती ? चिदंबरम को सिर्फ़ कांग्रेस के दबाव की वज़ह से बचाया गया , खैर अभी हिन्दुस्तान में अदालत जिंदा है | चिदंबरम का फ़ैसला अदालत करेगी , और अगर कैसे भी फ़ैसला चिदंबरम के खिलाफ आ गया तो कांग्रेस मुँह दिखाने के लायक नही रह जाएगी | डॉ. मनमोहन सिंह जी परिवार के मुखिया को परिवार के भले के लिए कड़े फ़ैसले भी लेने होते हैं |

हर रोज़ ऐसे ऐसे घोटालों के बारे में पढने और देखने , सुनने को मिलता है जिससे लगता है जैसे दुनिया के सारे भ्रष्टाचारी यहाँ , इसी सरकार में आकर बैठ गए हैं ! जबकि सच में ऐसा नहीं है , यहाँ एंटनी और श्री प्रणव मुखेर्जी जैसे ईमानदार लोग भी बैठे हैं किन्तु सरकार के ऊपर बदनुमा दाफ इतने हैं कि उनकी अच्छाइयों कि कोई बात भी नहीं करता ! सच कहा जाये तो झूठ की दुनिया के आगे सच्चाई और ईमानदारी कही सिर ढके , मुंह के बल पड़ी हुई है ! एक घोटाला ख़त्म नहीं होता तब तक दूसरे -तीसरे की आहट आने लगती है ! मनमोहन सिंह जी ना जाने किस तरह नींद लेते होंगे ? अभी २ग़ का राग पूरा भी नहीं हुआ कि कोयला घोटाला , सेना में भ्रष्टाचार , कैसी कैसी खबरें इस देश को हिलाने को तैयार बैठी हैं और सरकार है कि अन्ना और उनके साथियों पर ही अपना पूरा ध्यान लगाये हुए है !

इस बात में कोई शक नहीं कि डॉ. मनमोहन सिंह बहुत ही ईमानदार व्यक्ति है लेकिन उनकी ईमानदारी से हमें क्या फायदा ? वो ना तो इस ईमानदारी कि वज़ह से देश को ईमानदार बना रहे हैं और ना ही ईमानदार व्यक्तियों को रक्षा मिल पा रही है , फिर ऐसी ईमानदारी और ऐसी सज्जनता किस काम की ! प्रधानमंत्री को ना केवल मन से मजबूत होना चाहिए बल्कि शारीरिक रूप से भी स्वस्थ होना चाहिए ! एक गार्ड की नौकरी के विज्ञापन में हम देखते हैं कि उम्मेदवार को हष्ट पुष्ट होना चाहिए तो भारत के गार्ड को हस्त पुष्ट नहीं होना चाहिए ? जब सब कुछ लुटता जा रहा हो और आप ईमानदार बने बैठे रहो , ये कहाँ की न्यायप्रियता और ये कैसी व्यवस्था ? डॉ. सिंह के पास पूरा मौका था कि वो इस कार्यकाल में अपने आपको पूरी तरह मजबूत होकर दिखाते मगर इसे विडम्बना ही कहा जायेगा कि डॉ. मनमोहन सिंह भारत के 120 करोड़ लोगों के प्रधानमंत्री नहीं बल्कि 10 जनपथ के प्रधानमंत्री ही नज़र आते हैं !

समर शेष है , नहीं पाप का भागी केवल व्याध
जो तटस्थ हैं , समय लिखेगा उनका भी अपराध
||

( Not just criminal is responsible for crime . Time will speak for truth .

whoever is neutral , Time will decide his / her fate and role in crime )

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118 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

satyavrat shukla के द्वारा
April 30, 2012

बहुत ही अच्छा योगी जी

    yogi sarswat के द्वारा
    May 1, 2012

    श्री शुक्ल जी , नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग और समर्थन देते रहिएगा ! धन्यवाद

ajay kumar pandey के द्वारा
April 10, 2012

योगी जी नमस्कार कृपया ३ अप्रैल का दैनिक जागरण देखकर बताइयेगा की क्या मेरी पोस्ट सामाजिक रूढ़ीवाद का चक्रवात छपी थी धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    April 11, 2012

    मित्रवर श्री अजय कुमार पाण्डेय जी , नमस्कार ! आज ३ अप्रैल का दैनिक जागरण देखा , उसमें आपकी पोस्ट नहीं है ! उसमें आदरणीय प्रियंका राठोर और श्री एस . पि . सिंह की पोस्ट प्रकाशित हुई हैं ! आभार !

rajhans के द्वारा
April 10, 2012

नमस्कार योगी जी! आपने लाख टके का सवाल उठाया है, इसलिए नहीं कि इसका उत्तर कठिन है, इसलिए कि ये भारत में हर दिन, सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल है. मेरा जवाब है कि भारत में आज की तारीख में कोई भी प्रधान-मंत्री नहीं है, वो केवल एक चरण-पादुका है, जिसे पहनने वाले का नाम हम सबको पता है. लोकतंत्र की गरिमा है कि हम कह नहीं सकते कि भारत का प्रधान-मंत्री भी किसी का प्राइवेट सेवक हो सकता है, पर आगे…सबकी अपनी अपनी इक्छा है.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 10, 2012

    आदरणीय श्री राजहंस जी , सादर नमस्कार ! ये सवाल सिर्फ मेरा या आपका ही नहीं सम्पूर्ण हिंदुस्तान का है ! हर आम भारतीय का है की आज देश में प्रधानमंत्री है या नहीं ! आपकी सराहनीय प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा !

    yogi sarswat के द्वारा
    April 10, 2012

    namaskar ! bahut bahut dhanywad mitravar !

mlsbhagia के द्वारा
April 9, 2012

खुद को इमानदार बनना चाहिए ,देश तो इमानदार है ही, उसको प्यार करना है तो खुद में झंकना होगा ,दूसरों की गलतिया निकलना ही ठीक नहीं होगा.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 9, 2012

    नमस्कार मित्रवर ! सही कहते हैं आप , लेकिन यहाँ डॉ मनमोहन सिंह की व्यक्तिगत बात नहीं है , यहाँ प्रधानमंत्री के पद की गरिमा का सवाल है ! और गर मैं गलत नहीं हूँ तो एक मजबूत देश के प्रधानमंत्री को मजबूत होना ही चाहिए , शारीरिक रूप से हो न हो , निर्णय लेने में जरूर मजबूती दिखनी चाहिए !

ajay kumar pandey के द्वारा
April 8, 2012

योगी जी नमस्कार कृपया पुष्पा पाण्डेय जी के ब्लॉग में जाकर जागरण चालीसा जरुर पढ़े और अपने सशक्त विचार प्रकट करे धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    April 9, 2012

    श्री अजय कुमार जी सादर नमस्कार ! आपकी प्रतिक्रिया मिली , हार्दिक आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा !

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
April 7, 2012

जे.जे पर बिताए पलों को साझा करने के लिए धन्यवाद योगी जी.कई दिनों की कोशिश के बाद भी कमेन्ट नहीं हो पाया.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 9, 2012

    आदरणीय श्री राजीव कुमार झा जी , सादर नमस्कार ! मैं जानता हूँ की आप लोगों को बहुत परेशानी हुई है प्रतिक्रिया देने में , लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकता था ! जागरण को भी पत्र लिखा लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ ! मैं आप के माध्यम से सब मित्रजनो का आभार व्यक्त करता हूँ जिन्होंने मुझे मेरे लेख ” जो बीत गया वो ” पर अपने विचार रखने की कोशिश की लेकिन किसी कारण वश मुझे नहीं मिल पाए ! सभी मित्रगणों का ह्हर्दिक आभार एवं धन्यवाद !

    yogi sarswat के द्वारा
    April 9, 2012

    आदरणीय अनुराधा चौधरी जी , सादर नमस्कार ! इसमें कोई दो राय नहीं की गाँधी परिवार ने हमेशा से इस देश के भोले भले लोगों को बेवकूफ बनाया है और अपना उल्लू सीधा किया है ! मैं नकली गांधियों ( जिन्होंने लाभ लेने के लिए गाँधी नाम अपनाया ) की बात कर रहा हूँ ! सब जानते हैं की कहीं न कहीं दाल में काला है और इसी लिए सरकार स्विस बैंकों में रखे धन और उससे जुड़े व्यक्तियों के विषय में बताना भी नहीं चाहती ! बाबा रामदेव , अकेले लोहा ले रहे हैं , एक परम शक्तिशाली और लुटेरे परिवार से !

satish3840 के द्वारा
April 6, 2012

जो बीत गया है वो….. ( जे.जे .पर बिताये जो पल ) अच्छा लगा दिल छू गया पर समय समाप्त होने के कारन कोई पर्तिकिर्या नहीं दी जा रही हें आशा हें आप झमा करेंगें /

    yogi sarswat के द्वारा
    April 9, 2012

    आदरणीय श्री सतीश जी , सादर नमस्कार ! हाँ ! इस लेख पर कुछ तकनीकी समस्या आ गई थी जिसकी वज़ह से प्रतिक्रियाएं नहीं आ प् रही थीं , कोई बात नहीं ! आशा करता हूँ आपका स्नेह ऐसे ही लगातार मिलता रहेगा ! आभार !

alkargupta1 के द्वारा
April 6, 2012

योगी जी , अति उत्तम समीक्षात्मक आलेख प्रस्तुत किया है…..इन प्रधान मंत्री जी का तो अपना कोई वजूद ही नहीं है केवल कठपुतली मात्र हैं……आलेख के टॉप ब्लॉग में आने के लिए हार्दिक बधाई ! आपकी नयी पोस्ट पर कमेन्ट आर क्लोज्ड लिखा हुआ आ रहा है कृपया ठीक करें…. मेरा कमेन्ट उस पर नहीं जा रहा है …धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    April 6, 2012

    आदरणीय अलका गुप्ता जी सादर नमस्कार ! आपने बिलकुल सही कहा की प्रधानमंत्री कठपुतली मात्र हैं , लेकिन जो इस के पीछे है उसे परदे से निकलकर आना चाहिए क्योंकि डॉ. मनमोहन सिंह को बेकार में ही आलोचना झेलनी पड़ रही है !

Bhupendra singh Litt के द्वारा
April 6, 2012

सोनिया गाँधी इस देश की एक सांसद है | तो क्या भारत के प्रधानमंत्री जनता को बता सकते है कि सोनिया जी ने किस हैसियत से १८५० करोड़ रुपये विदेश यात्रा में किस मद के लिए खर्च किये है |

    yogi sarswat के द्वारा
    April 6, 2012

    आपका सवाल बिलकुल सही है! अगर इसी तरह हर सांसद पैसे खर्च करता रहा तो जनता कहाँ जाएगी ? सोनिया को पता नहीं कुछ लोग महारानी की तरह मानते आये है ! और ये लोग कौन हैं , बताने की जरुरत नहीं ! बहुत बहुत आभार !

abhi के द्वारा
April 4, 2012

मेरी एक बात समझ में नहीं आती की सोनियाजी मनमोहनजी के कंधे में रखकर बन्दूक क्यों चलती है ? जब हर फैसला १० जनपथ में ही लिया जाता है तो वह क्यूँ त्याग की मूर्ती बनी बैठी है ?

    yogi sarswat के द्वारा
    April 5, 2012

    मित्रवर नमस्कार ! बिलकुल सही बात कही आपने ! लेकिन वो त्याग की मूर्ति नहीं बल्कि देश को पागल बना रही हैं और खूब लूट रही है !

yamunapathak के द्वारा
April 4, 2012

congrates 4 d article being selected as top blog

    yogi sarswat के द्वारा
    April 5, 2012

    thank you very much ! yamuna ji

अब्दुल रशीद के द्वारा
April 4, 2012

ऊँगली उठाना आसान है भाई. आप ज़रा ईमानदारी से सोंचना के आप जिस आप जिस मनमोहन सिंह कि क्षमता पर सवाल खड़े कर रहे हों क्या आपकी योग्यता इतनी है की इस बात का आकलन कर सको. या आप को ऐसा लगता है की ब्लाग लिख लेने से कोई इतना योग्य हों जाता है के देश के गरीमामयी पद पर बैठा ऐसे व्यक्ति जो अर्थशास्त्र का ऐसा ज्ञाता है जिसको कोई नही नकार सकता उसको अक्षम कह सके. सिर्फ कमेंट प्राप्त करने के लिए ऐसा लिखना किया ठीक है? नकारत्मक लिखने से कमेंट तो मिल सकता है लेकिन क्या लिखने का मकस्द सिर्फ इतना ही होना चाहिए? मेरा उद्देश्य आपको हतास करना या आपको ग़लत साबित करना कतई नहीं. सिर्फ यह कहना है कि नकारात्मक सोच से बाहर निकल कर जरा दुनिया देखिए कांग्रेस जाएगा भाजपा आएगा क्या बदल जाएगा सिर्फ मुखौटा होगा वही जो हों रहा है. हाँ बदलाव आएगा जब हम जागरुक हों और आम जनता को जागरुक कराने में योगदान दे. सप्रेम अब्दुल रशीद http://www.aawaz-e-hind.in

    yogi sarswat के द्वारा
    April 4, 2012

    आदरणीय श्री अब्दुल रशीद जी सादर नमस्कार ! आपकी बात से मैं पूर्ण सहमत हूँ की मनमोहन सिंह जी जैसे व्यक्ति जिस गरिमामई पद पर हैं उसके लिए सम्मान ही दिखाना चाहिए ! लेकिन मैं विनम्रता के साथ कुछ पूछना चाहता हूँ – निश्चित है की श्री मनमोहन सिंह जी अर्थशास्त्र के विद्वान हैं , मैंने लिखा भी है तो क्या ये जरूरी है की वो देश चलाने में भी विद्वान होंगे ? एक क्षेत्र का आदमी जरूरी नहीं की हर जगह विद्वान हो ? मैंने श्रीमान ऐसा कुछ नहीं कहा की भाजपा आनी चाहिए ! क्या आपको लगता है , अपने मन की गहराइयों से सोचकर बताइए क्या इतना बुरा हाल हिंदुस्तान का पहले कभी हुआ है ? इतनी बदनामी कभी हुई है इस पवित्र देश की ? मैं किसी भी दल के सदस्य की बात नहीं कर रहा हूँ क्या एक सच्चा हिन्दुस्तानी आज बहार जाकर सीना चौड़ा करके कह सकता है की मैं उसी देश का वासी हूँ जहां राम रहीम ने जन्म लिया ? क्या आपको नहीं लगता की इस देश को डॉ मनमोहन सिंह नहीं कोई और ही चला रहा है ?

    dineshaastik के द्वारा
    April 5, 2012

    आदरणीय रशीद जी,    क्या एक  गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. अच्छा इंजीनियर भी हो सकता है, वह भी इसलिये कि वह अच्छा डॉ. है इसलिये अच्छा इंजीनियर भी  हो सकता है। अब राहुल  जी की ही बात  ले लीजिये। क्या गाँधी एवं नेहरू परिवार का व्यक्ति ही काँग्रेस  में प्रधानमंत्री पद  का योग्य दावेदार हो सकता है। शायद यह अनुत्तरित  प्रश्न  नहीं है।

    yogi sarswat के द्वारा
    April 5, 2012

    श्री आस्तिक जी , आदरणीय श्री रशीद जी के अपने विचार हैं ! हमें उनके सवालों और उनके विचारों का भी सम्मान करना चाहिए ! वो पूरी तरह से गलत नहीं हैं! आपने इस चर्चा में समय दिया , आपका बहुत बहुत आभार !

    अब्दुल रशीद के द्वारा
    April 5, 2012

    नकारत्मक लिखने से कमेंट तो मिल सकता है लेकिन क्या लिखने का मकस्द सिर्फ इतना ही होना चाहिए? मेरा उद्देश्य आपको हतास करना या आपको ग़लत साबित करना कतई नहीं. सिर्फ यह कहना है कि नकारात्मक सोच से बाहर निकल कर जरा दुनिया देखिए कांग्रेस जाएगा भाजपा आएगा क्या बदल जाएगा सिर्फ मुखौटा होगा वही जो हों रहा है. हाँ बदलाव आएगा जब हम जागरुक हों और आम जनता को जागरुक कराने में योगदान दे. भाई लगता है आपने कोई और मतलब निकाल लिया बात यह है की जब आज इंटरनेट विचारोँ का शस्क्त माध्यम बन रहा है तो क्यों ना इसका उपयोग पाजिटीव सोच बनाने के लिए किया जाए. रही बात दिनेश जी का तो यही बात सब पे लागू होता है. क्या एक गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. अच्छा इंजीनियर भी हो सकता है, वह भी इसलिये कि वह अच्छा डॉ. है इसलिये अच्छा इंजीनियर भी हो सकता है। आम जनता को हक़ है सरकार चुनने का तो जब आम जनता जागरूक हगी तभी यह संभव है कि बेहतर सरकार आम जनता चुन सके ना की सिर्फ आलोचना कराने से. मै इस आर्टीकल को पढने के लिए आमंत्रित किया गाया था माननीय ब्लागर के द्वारा ना की अपने आप. अर्थात उनको अपने लेख पर मेरे विचार जानना था ना की बात को ग़लत रुख देकर कांग्रेसी साबित करने के लिए. बहरहाल मुझे सवालो के दायरे में लाकर यदि देश का भविष्य गौरवपूर्ण हों सकता है तो अच्छी बात है. मेरे विचार पर उंगली उठाना आपका अधिकार है लेकिन शायद बिना विचार जाने क्या ठीक है. http://www.janokti.com/sansad-political…/दोराहे-पर-खड़ी-जनता/

    yogi sarswat के द्वारा
    April 5, 2012

    आदरणीय श्री अब्दुल राशिद जी , मुझे ऐसा आभास हो रहा है की शायद आप मेरी बात को गलत समझ रहे हैं ! मैं आपको बहुत विद्वान और बढ़िया ब्लोग्गर मानता हूँ ! आपका आशीर्वाद मेरे लिए बहुत मायने रखता है , इसलिए आप ये बिलकुल न समझें की मैं आपकी किसी बात का विरोध कर रहा हूँ ! बहुत विनम्रता के साथ , हाथ जोड़कर आपसे प्रार्थना करना चाहता हूँ की कृपया इस बात को दिल से न लगायें ! आपका आशीर्वाद मेरे लिए सब कुछ है ! अगर किसी विशेष लेख पर एक दूसरे के विचार नहीं मिलते हैं तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं है , ये तो अच्छा है जिससे और ज्यादा जानकारी मिलती है ! मैं बहुत तुच्छ लेखक हूँ , और आपके आशीर्वाद से ही आगे बढ़ रहा हूँ और आगे भी आपका आशीर्वाद चाहता हूँ ! मैं आपसे क्षमा चाहता हूँ अगर मैंने किसी वज़ह से आपको दुःख पहुँचाया हो ! मेरा आपको कांग्रेस्सो सिद्ध करना या अगर आप कांग्रेसी हैं तो इस बात को गलत नहीं लेना चाहता था ! ये स्वतंत्र देश है और हम सभी को ये अधिकार है की हम जिस पार्टी को चाहें उसे समर्थन कर सकते हैं ! मैं हमेशा आपका आशीर्वाद चाहता हूँ इसलिए ही मैं आपको अपने ब्लॉग पर आमंत्रित करता रहा हूँ , आगे भी आपको सम्मान सहित अपने ब्लॉग पर आमंत्रित करता रहूँगा ! मैं नहीं समझ पा रहा हूँ की इस छोटी सी बात से इतना बड़ा झमेला खड़ा हो जायेगा ! आप मेरे बड़े भाई जैसे हैं , इसलिए अगर मुझसे अनजाने कोई गलती हुई है तो मैं आपसे क्षमा प्रार्थी हूँ ! और उम्मीद करता हूँ की आप भी मुझे कश्म करेंगे ! आगे से आपसे वायदा करता हूँ की आपको शिकायत का मौका नहीं मिलेगा ! लेकिन आपको भी एक वायदा करना पड़ेगा – आपका आशीर्वाद मुझे हमेशा मिलेगा ! मैं यहाँ आप सब का प्यार पाने आया हूँ , झगडा करने के लिए नहीं ! आज जब मैं आपको अपनी बात लिख रहा हूँ तो सच मानिए मेरी आँखों में आंसूं हैं क्योंकि मैंने कभी नहीं सोचा था की मैं किसी को दुखी भी कर सकता हूँ ! आज अनजाने में ही न जाने क्यों ऐसा कुछ हो रहा है जो नहीं होना चाहिए था ! आप जैसे सम्मानित ब्लोगर का आशीर्वाद बहुत बड़ी बात है ! एक बार सिर्फ एक बार खुल कर हंसिये और मुझे माफ़ करिए ! लेकिन आशीर्वाद हमेशा चाहूँगा ! बहुत बहुत आभार !

    अब्दुल रशीद के द्वारा
    April 5, 2012

    मेरे पास सीमित समय और सीमित साधन है और जिम्मेदारी भी इतना के बायाँ नहीं कर सकता ऐसे में वक्त कि किल्लत रहती है और शायद यही वज़ह है की जागरण मंच पर समय नही देने का, अफसोस तो है. खैर यह आपके लिए जानकारी भी होगा और मेरा जवाब भी कि सच्चा मुसलमान किसी से 3 दिन से ज्यादा किना रखता है तो वह मुसलमान नहीं. किना का मतलब होता है नाराजगी. और आपको तो मैंने भाई कहकर संबोधित किया है. मेरे लब कब मुस्कुराएंगे मेरे अशक कब थमेंगे मुझे पता होता तो यकीनन बता देता जब भूख से बिलखते मासूम को देखता हूँ तो ख़ुद से क्या वचन कर लेता कुपोषित के मौत का सिलसिला कब थमेंगा मेरे पास दवा होता तो यकीनन बचा लेता मेरे लब कब मुस्कुराएंगे मेरे अशक कब थमेंगे मुझे पता होता तो यकीनन बता देता सप्रेम अब्दुल रशीद

    jlsingh के द्वारा
    April 6, 2012

    आदरणीय रशीद भाई और योगी जी, आप दोनों को हार्दिक अभिवादन! आप दोनों की प्रतिक्रिया और परत पर्तिक्रिया पढ़ी. अंत में जान कर सकून हुआ कि रशीद भाई अपनी रंजिश या कहें कि योगी जी के प्रति कोई दुराग्रह नहीं है. विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए यह मंच है. हमें आपसी मतभेद से बचना चाहिए! रशीद भाई का आलेख दोराहे पर खड़ी जनता भे पढ़ा और उनके विचारों से भी अवगत हुआ. वास्तव में हम सभी किंकर्तव्यविमूढ़ हैं. सभी राजनीतिक पार्टियाँ कमोबेश एक जैसी ही हैं, हमलोग ब्यर्थ में उलझ जाते हैं. जबतक हम सबमे चेतना नहीं आयेगी और अच्छे लोग राजनीति में नहीं आएंगे, स्थिति कमोबेश वैसी ही बनी रहेगी. योगी जी ने अपने नवीनतम आलेख – जो बीत गया है वो.. पर कोमेंट close कर दिए हैं इसीलिये इस आलेख पर आया तो आपलोगों का दीदार हुआ! मेरा आपदोनों से आग्रह होगा कि अपनी बात जरूर रखें. किसी को चोट पहुँचती है तो माफी मांग लेने में कोई हर्ज नहीं है….. आप दोनों का आभार!

    yogi sarswat के द्वारा
    April 9, 2012

    आदरणीय श्री जवाहर जी , सादर नमस्कार ! मैंने अपने लेख ” जो बीता गया वो ” पर लेख बंद नहीं किये बल्कि किसी तकनीकी खराबी की वज़ह से बंद हो गए हैं , मैं नहीं जानता कैसे ! लेकिन मुझे आपका प्यार मिला , बहुत बहुत शुक्रिया ! अपना आशीर्वाद यूँ ही बनाये रखें ! आभार !

ashokkumardubey के द्वारा
April 4, 2012

योगी सारस्वत जी आपने आखिर में पूरी बात का निचोड़ लिख दिया है “समर शेष है , नहीं पाप का भागी केवल ब्याध ” जो तटस्थ हैं , समय लिखेगा उनका भी अपराध ” जैसा आपने मनमोहन सिंह को एक कमजोर प्रधानमंत्री एवं मजबूर बताया है और उनको अन्न हजारे के आन्दोलन में जाकर जनता के सम्क्छ घोसना करने का विचार ब्यक्त किया है “भ्रष्टाचार की लडाई में वे अन्ना के साथ हैं ” यह आपने एक अतिशयोक्ति लिख दी है पीएम मनमोहन जी के विषय में . अब जनता को मालूम हो गया है की मनमोहनसिंह पीएम की नौकरी करते हैं पीएम हैं नहीं ! ऐसा एक नहीं सैकड़ो बार मौका आया जब देश ताकता रहा की इतने घोटाले और भ्रष्टाचार के खुलासे आ रहे हैं आखिर अपने पीएम कब अपना मुह खोलेंगे और कोई कार्रवाई की घोषणा करेंगे . पीएम तो एक घोटाला सामने आया नहीं की दुसरे का इन्तेजार करते रहे और दोषियों को और मौका देते रहे के बाकि कुछ न छोडो वो कहावत है न “बासी बचे! न कुत्ता खाए ” बस यही जनता देखती रही और इस देश की जनता भी तो मूक दर्शक ही बन गयी है वर्ना इतना तेज आन्दोलन होना चाहिए की सर्कार में बैठे लोगो को समझ आये यूँ जनता के साथ जुल्म वे नहीं धा सकते पर विरोध भी अब वैसा नहीं जैसा शुरुआत में अन्ना के आह्वान पर हुवा था लोगों का जोश ठंढा पड़ता जा रहा है और सर्कार भी एन कें प्रकारेण अपना बाकि का कार्यकाल बीता देना चाहती है आज तो कांग्रेस पार्टी और सर्कार दोनों अलग अलग भूमिका निभा रहे हैं दोद्नो के कार्यशैली में कोई मेल नहीं जिसका कारन है कोई शख्त कानून भी नहीं बन पा रहा जैसा जन्लोक्पल में सुझाया गया हमरे सर्वोच्च न्यायलय भी कई बार जल्दी मुकदमों को नहीं निपटा पाती वर्ना दोषी जो जेल में डाले गए उनपर कोई फैसला आता और दो चार को सजा होती तो शायद यह गोरख धन्धा कम होता क्यूंकि यह पूर्णतया बंद तो होगा नहीं कोई कानून ला दो क्यूंकि जनता के बीच भी कई लोग ऐसे हैं जो अपने कम को अपने मुताबिक या अपने फैदे के लिए करवाने के लिए अधिकारीयों और कर्मचारियों को पैसों की लालच देते रहते हैं और बात भी सुविधा शुल्क तो देना ही पड़ता है अब देखना सिटिजन चार्टर कितना कारगर सिद्ध होता है , एक अच्छा लेख साभार

    yogi sarswat के द्वारा
    April 4, 2012

    आदरणीय श्री अशोक कुमार दुबे जी , नमस्कार ! आपकी सहमती , आज सच में ज्यादातर हिन्दुस्तानियों की आवाज है ! लेकिन ये आवाज़ या तो सतानाशीनों तक पहुँच नहीं रही या फिर इसे अनसुना कर दिया जा रहा है ! लेकिन इतिहास गवाह है की जब जब इस तरह यानी की अवाम की आवाज को दबाया गया है वो और ज्यादा तेज हुई है ! बहुत बहुत आभार !

cbsingh के द्वारा
April 3, 2012

इस बात में कोई शक नहीं कि डॉ. मनमोहन सिंह बहुत ही ईमानदार व्यक्ति है लेकिन उनकी ईमानदारी से हमें क्या फायदा ? वह बहुत से चोरों  के मुिखया हैं ।

    yogi sarswat के द्वारा
    April 4, 2012

    नमस्कार ! सिंह साब , आपका कहना बिलकुल सही है , ऐसी ईमानदारी का हमें क्या फायदा ! बहुत बहुत आभार !

Sumit के द्वारा
April 3, 2012

मनमोहन जी सफल प्रधान मंत्री है,,,मगर कुछ कारणों से उनके हाथ बंधे हुवे है … http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/04/02/उफ़-ये-हाई-सोसाइटी/

    yogi sarswat के द्वारा
    April 4, 2012

    श्री सुमित जी , नमस्कार ! आप मनमोहन सिंह जी को सफल प्रधानमंत्री कह रहे हों , कैसे मुझे समझ नहीं आया ? हाथ बंधे हुए हैं तो फिर इस पद का क्या महत्व ? बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा !

    dineshaastik के द्वारा
    April 5, 2012

    सुमित  जी एक  और आश्चर्य  सबसे भ्रष्ट सरकार के मुखिया को  आप सफल  प्रधानमंत्री बता रहे हैं। कहीं टिकिट इकिट की सेटिक तो नहीं है मित्र(मजाक  में)।

    yogi sarswat के द्वारा
    April 9, 2012

    आदरणीय श्री आस्तिक जी ,सादर नमस्कार ! आपने अपने विचार इस लेख पर दिया और चर्चा में खुलकर हिस्सा लिया बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा !

Subhash Wadhwa के द्वारा
April 3, 2012

महाभारत में ऐसा प्रसंग आत्ता है की धृतराष्ट्र ने कृषण जी से कहा की तुम चाहो तो युद्ध टल सकता है विनाश रुक सकता है | कृषण ने जवाब दिया मेरे चाहने या ना चाहने से कुछ नहीं हो सकता | मैंने तो कभी नहीं चाह था द्रोपदी का चीर हरण हो मैंने तो नहीं चाह था पांड्वो बनवास /अज्ञातवास हो | फिर भी हुआ | होनी बलवान है सब कुछ उसी के अनुसार होता है | मनमोहन सिंह जी ने कभी भ्रष्टाचार नहीं किया कभी चाह भी नहीं की उसके सहयोगी (मंत्री ) भ्रष्टाचार करे \लेकिन उनके चाहने या ना चाहने से क्या होता है | होनी (सोनिया ) बलवान है सब कुछ उसी की चाह के अनुसार होता है | इस लिए मन मोहन जी को कुछ मत कहिये

    yogi sarswat के द्वारा
    April 4, 2012

    आदरणीय श्री वाधवा जी , सादर नमस्कार ! आप सही कह रहे हैं जो होनी ( सोनिया ) को मंजूर होगा , वाही तो करेंगे श्री मनमोहन सिंह जी ! बहुत बहुत आभार ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा !

satish3840 के द्वारा
April 2, 2012

नमस्कार योगी जी आप की बात सही हें ऐसी इमानदारी किस बात की / संस्कृत में एक श्लोक था जिसका अर्थ ये हें कि यदि घड़ी के मुह पर शहद लगा और अन्दर विष भरा हो तो बड़ा खतरनाक होता हें / सिंह साहब उसी घड़े पर लगे शहद के समान हें / बहुत अच्छा विचार

    yogi sarswat के द्वारा
    April 2, 2012

    आदरणीय श्री सतीश जी सादर नमस्कार ! आपने मेरे शब्दों से सहमति जताई , बहुत बहुत आभार ! आपने बहुत सुन्दर उदहारण दिया है ! हार्दिक धन्यवाद !

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
April 1, 2012

मैं आपके विचारों से सहमत हूँ,योगी जी.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 2, 2012

    आदरणीय श्री झा साब , सादर नमस्कार ! बहुत बहुत आभार , आपका ! सहयोग बनाये रखियेगा !

yamunapathak के द्वारा
April 1, 2012

बेहद सूचनापरक लेख

    yogi sarswat के द्वारा
    April 2, 2012

    आदरणीय यमुना जी , नमस्कार ! बहुत बहुत धन्यवाद , मेरे लेख पर अपने विचार देने के लिए ! क्रिपया सहयोग बनाये रखियेगा !

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
April 1, 2012

आप के विचोरों से मैं भी सहमत हूँ , योगी जी !………. समय लिखेगा उनका भी अपराध | आपके विचारों से मैं भी सहमत हूँ ! विपंचात्मक आलेख के लिए बधाई !

    yogi sarswat के द्वारा
    April 2, 2012

    आदरणीय श्री आचार्य जी , सादर नमस्कार ! मेरे शब्दों से सहमती जताने के लिए आपका बहुत बहुत आभार ! आशा करता हूँ आपका आशीर्वाद यूँ ही लगातार मिलता रहेगा ! धन्यवाद !

Rajesh Dubey के द्वारा
April 1, 2012

इस गरीब देश के बारे में जिसकी समझ नासमझी भरी हो, उसका पढ़ा-लिखा इस देश के लिए तो बेकार ही है. मनमोहन सिंह बड़े अर्थ शास्त्री है,लेकिन देश संचालन में इनका सारा अर्थ शास्त्र गड़बड़ा जाता है. अक्षम प्रधानमंत्री का ताज इनके सर पर डाल देना उचित है. लेकिन इस अक्षमता का भी श्रेय मैडम सोनिया को जायेगा. थोडा लिखना, ज्यादा समझना.बस

    yogi sarswat के द्वारा
    April 2, 2012

    आदरणीय मित्रवर श्री राजेश दुबे जी सादर नमस्कार ! आपका थोडा लिखा हुआ भी बहुत है , समझने की जरूरत है ! बहुत बहुत आभार !

minujha के द्वारा
April 1, 2012

योगी जी बहुत अच्छा प्रश्न और बहुत अच्छा आलेख मेरे हिसाब से अपनी विद्वता से ,समझ-बूझ से,और पद से सक्षम होने के बाद भी इंसान अपना निर्णय लेने के लिए पराश्रित है तो वो उसकी अक्षमता ही कहलाएगी बधाई अच्छे-सार्थक लेखन के लिए

    yogi sarswat के द्वारा
    April 2, 2012

    आदरणीय मीनू जी , नमस्कार ! आपके विचार बिलकुल सटीक हैं , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा !

y kumar के द्वारा
April 1, 2012

bahut sahi article likha hai aapne yogi ji . pradhanmantri ko aisa to nahi hi hona chahiye jaise man mohan singh hain

    yogi sarswat के द्वारा
    April 2, 2012

    नमस्कार , श्री कुमार साब ! आपको मेरा लेखन पसंद आया , बहुत बहुत आभार !

dineshaastik के द्वारा
March 31, 2012

आदरणीया पुष्पा जी,यह सच है मंत्रीमण्डल की सामूहिक जिम्मेदारी होती है। लेकिन यह मंत्रीमण्डल विचित्र है। प्रधानमंत्री अन्य मंत्रियों के भ्रष्टाचार से अपना पल्ला झाण लेते हैं। प्रधानमंत्री किसी भी मंत्री को त्याग पत्र देने के लिये कह सकता है। यदि वह त्याग पत्र नहीं देता , तो मंत्री मण्डल भंग कर दुवरा मंत्री मण्डल बना सकता है। किन्तु इस स्थिति में लोकसभा भंग करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यही व्यवस्था इगलैण्ड में भी है आदरणीय योगी जी, यह हमारा भ्रम है कि डॉ. सिंह प्रधानमंत्री हैं। प्रधानमंत्री तो दस जनपथ में रहते हैं। मनमोहन सिंह जी तो उप प्रधानमंत्री की तरह हैं और वह भी अकेले नहीं हैं। इस सरकार में कई उप प्रधानमंत्री हैं।

    yogi sarswat के द्वारा
    April 2, 2012

    मनमोहन सिंह जी तो उप प्रधानमंत्री की तरह हैं और वह भी अकेले नहीं हैं। इस सरकार में कई उप प्रधानमंत्री हैं। आदरणीय श्री आस्तिक जी , आपकी बात से सहमत हूँ ! बहुत अभूत आभार ! सहयोग बनाये रखें ! धन्यवाद !

vaidya surenderpal के द्वारा
March 31, 2012

योगी जी नमस्कार , डा. मनमोहनसिँह के बारे में बिल्कुल सही समीक्षा की है आपने । वे सोनिया के यसमैन ही सिद्ध हुए हैँ ।

    yogi sarswat के द्वारा
    April 2, 2012

    श्री सुरेन्द्र पाल जी सादर नमस्कार ! आपकी प्रथम प्रतिक्रिया का स्वागत करता हूँ ! आप मेरे मंच पर आये और अपने विचार दिए , बहुत बहुत आभार ! आगे भी आपके आशीर्वाद की कामना करता हूँ ! धन्यवाद !

March 31, 2012

अच्छी प्रस्तुती, समाधान की बात की जाए, तो आप क्या कहेंगे..!

    yogi sarswat के द्वारा
    April 2, 2012

    आदरणीय टिम्सी मेहता जी सादर नमस्कार ! समाधान भी आसान है , श्री प्रणव मुखर्जी जैसा व्यक्तित्व हमारे पास है ! बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

March 31, 2012

सादर नमस्कार! सुन्दर समालोचनात्मक आलेख के लिए बधाई स्वीकार करे……..!

    yogi sarswat के द्वारा
    April 2, 2012

    आदरणीय श्री अलीन जी , सादर नमस्कार ! आपकी प्रतिक्रिया मिली , हार्दिक आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद !

Bhupesh Kumar Rai के द्वारा
March 31, 2012

योगी जी! जो बात मेरे भी दिल में थी वो आप ने लिख दी.न जाने क्यों इतना झुकने पर मजबूर हैं देश के सबसे बड़े सुरक्षा गार्ड.ज्यादा झुकना किसी का सम्मान नहीं बल्कि कायरता कहलाती है.आपकी अंतिम दो पंक्तियों ने काफी कुछ कह दिया.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 2, 2012

    आदरणीय श्री बी . के . राय साब , सादर नमस्कार ! आपने बिलकुल सही कहा , ज्यादा झुकना कायरता ही है ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार !

    Lorrie के द्वारा
    October 17, 2016

    credo che la risposta di Beccaria sia coerente con la qualitá dealr#39;info&mlzione offerta: in sostanza ha ammesso che é una panzana, mancava solo che aggiungesse "e li contatteró con il mio computer invisibile" (battuta presa in prestito da un episodio de "I Simpson"). Complimenti a Beccaria per il rispetto che riserva ai lettori.

jlsingh के द्वारा
March 31, 2012

योगी जी, नमस्कार! मनमोहन सिंह का आपने बहुत ही गुणगान का दिया आप महानपुरुष हैं इसीलिये सम्मानसूचक शब्दों का प्रयोग करते हैं.- डॉ. मनमोहन सिंह भारत के 120 करोड़ लोगों के प्रधानमंत्री नहीं बल्कि “10 जनपथ” के “प्रधानमंत्री” ही नज़र आते हैं ! लगता है आपका नाम भी ‘भारत रत्न’ की सूची में आने वाला है! भाई जी इस सम्मान समारोह में हम लोगों को भी याद करियेगा!!!! पर अंतिम पंक्तियाँ आपकी लाजवाब है. समर शेष है , नहीं पाप का भागी केवल व्याध जो तटस्थ हैं , समय लिखेगा उनका भी अपराध !!

    yogi sarswat के द्वारा
    April 2, 2012

    आदरणीय श्री जवाहर जी , सादर नमस्कार ! आप मेरे शब्दों से सहमत हुए , बहुत बहुत आभार ! श्रीमान आपका आशीर्वाद मिलता रहे , यही मेरे लिए पुरस्कार है , और ज्यादा की कामना नहीं करता ! और उम्मीद करता हूँ आपका आशीर्वाद हमेशा मिलता रहेगा ! आभार !

yogi sarswat के द्वारा
March 31, 2012

श्री चन्दन राय जी सादर नमस्कार ! बहुत बहुत धन्यवाद !

    Lyza के द्वारा
    October 18, 2016

    +1.3251782 Fax: +1.3251782 305 W Broadway Suite 118 New York, NY 10013 USNote that the address included is different from what is provided in the mailer. I wonder if it is invalid too, let’s see, 305 W Broadway is a UPS Store which sells mailbox space.Well, I checked with The UPS Store and ListingCorp does indeed rent the mailbox called ‘Suite 118′ at 305 W Br.yowaadI’ll check back to see if the valid phone number will be posted or if the site goes down.Good day all!

चन्दन राय के द्वारा
March 31, 2012

आदरणीय आपने हर महत्वपूर्ण बिंदु को छुआ है और उसका आंकलन किया है ! बहुत सटीक विश्लेषण और बिलकुल ठीक विचार ! बहुत बेहतर

    yogi sarswat के द्वारा
    April 2, 2012

    श्री चन्दन राय जी सादर नमस्कार ! आपकी सराहनीय प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखें ! धन्यवाद !

smtpushpapandey के द्वारा
March 31, 2012

आदरणीय सारस्वत जी में आपकी इस बात से सहमत हूँ की मनमोहन सिंह जी एक अच्छे अर्थशास्त्री है लेकिन आपने कहा है की वर्त्तमान में वह कमजोर साबित हो रहे हैं यह कहना उचित नहीं है क्योंकि राजनीती का यह नियम है की मंत्रिमंडल के सदस्य एक साथ तैरते हैं और एक साथ डूबते हैं यदि वह किसी भी मंत्री की बुरे सामने लाकर उसको इस्तीफा देने से मजबूर कर दे तो पूरी लोकसभा भंग करनी पड़ेगी परिणामस्वरूप मध्यावधि चुनाव करने पड़ेंगे चूँकि देश मंदी के दौर से गुजर रहा है ऐसे में चुनाव का आर्थिक बोझ देश वह देश की जनता पर पड़ेगा जो देश और देश की जनता के लिए हितकर नहीं है इसलिए मनमोहन सिंह जी मौन साढ़े हुए है वह कमजोर नहीं सक्षम प्रधानमंत्री है धन्यवाद श्रीमती पुष्पा पाण्डेय

    yogi sarswat के द्वारा
    March 31, 2012

    आदरणीय श्री पुष्प पाण्डेय जी सादर नमस्कार ! आपने लिखा है की अगर डॉ मनमोहन सिंह गद्दी छोड़ते हैं तो मध्यावधि चुनाव होंगे और पैसा खर्च होगा ! आपकी ही बात से शुरू करते हैं – क्या कांग्रेस में उनके अलावा और कोई योग्य आदमी नहीं है ? श्री प्रणव मुखर्जी के बारे में क्या कहेंगे ? दूसरी बात मध्यावधि चुनाव की , अगर हमारे देश में लोकसभा चुनाव होते हैं तो खर्च आता है 80 हज़ार करोड़ ! अब ज़रा ध्यान दें – २ G घोटाला 170000 करोड़ , राष्ट्रमंडल खेल घोटाला – 70 ,000 करोड़ , कोयला घोटाला -135000 करोड़ , ये कुछ नमूना है ! अब आप अंदाज़ा लगायें , मध्यावधि चुनाव बेहतर या की घोटाले बेहतर ?

ajaykumarji के द्वारा
March 31, 2012

आदरणीय योगी जी मनमोहन सिंह जी के बारे में में गलत बात तो नहीं कह सकता क्योंकि मनमोहन सिंह जी एक इमानदार व्यक्ति है वोह गन्दी राजनीती में खिलते कमल की तरह है इंदिरा गाँधी भी उनका सम्मान करती थी अन्ना हजारे भी मनमोहन सिंह की इज्जत करते है स्वामी रामदेव भी इज्जत करते है यह जो आपको समर्थन में बुराइयाँ मनमोहन सिंह जी की देते है आपने उनका ही आभार प्रकट कर दिया है खेर जब देश मनमोहन सिंह जी के जाने के बाद मंदी पर आएगा तब आप समझेंगे की मनमोहन सिंह कितने सही आदमी है खेर आप मेरी पोस्ट मेरे प्यारे भाई अलीन के लिए जरुर पढ़े और अपने सशक्त विचार प्रकट करे धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    March 31, 2012

    अजय कुमार जी सादर नमस्कार ! आप शायद गलत समझ रहे हैं मित्रवर ! डॉ मनमोहन सिंह जी निश्चित ही बहुत योग्य व्यक्ति हैं लेकिन इस पद के काबिल नहीं है ! ये जरूरी तो नहीं की जो व्यक्ति अच्छा अर्थशास्त्री हो , वो अच्छा प्रध्गंमंत्री भी होगा ? आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार !

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 30, 2012

योगी जी नमस्कार, नाहक ही प्रधानमंत्री जी पे झल्लाते है. अब हमारे प्रधानमंत्री जी बूढ़े हो गए हैं तो जाहिर सी बात है कि उनके अन्दर कमजोरी आ जानी है. सो कमजोर हो गए हैं. ऊपर से आज के गांधियों ने हमारे महात्मा के तीनों बंदरों के गुण इनको प्रदान कर दिए हैं. जब से इन गुणों की प्राप्ति हुई है तब से प्रधानमंत्री जी ने देखना,सुनना,बोलना भी बंद कर दिया है. जीवन भर तो आज्ञा का पालन करते रहें हैं, अब इस उम्र में उनसे क्यों अवज्ञा कराने पर तुले हैं.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 31, 2012

    ऊपर से आज के गांधियों ने हमारे महात्मा के तीनों बंदरों के गुण इनको प्रदान कर दिए हैं. जब से इन गुणों की प्राप्ति हुई है तब से प्रधानमंत्री जी ने देखना,सुनना,बोलना भी बंद कर दिया है. जीवन भर तो आज्ञा का पालन करते रहें हैं, अब इस उम्र में उनसे क्यों अवज्ञा कराने पर तुले हैं. बहुत सही कहते हैं आप , श्री अजय जी ! धन्यवाद !

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
March 30, 2012

प्रिय योगी जी सार्थक लेखा आँखें खोलता हुआ एक आदमी कितना भी योग्य क्यों न हो लेकिन जब करे ही न कुछ सार्थक तो हम अक्षम क्यों न करार दें ये तो अच्छा है की हम बहुत सहनशील हैं नहीं तो … इस बात में कोई शक नहीं कि डॉ. मनमोहन सिंह बहुत ही ईमानदार व्यक्ति है लेकिन उनकी ईमानदारी से हमें क्या फायदा ? वो ना तो इस ईमानदारी कि वज़ह से देश को ईमानदार बना रहे हैं और ना ही ईमानदार व्यक्तियों को रक्षा मिल पा रही है जय श्री राधे भ्रमर ५

    yogi sarswat के द्वारा
    March 31, 2012

    श्री भ्रमर साब , सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! आशा करता हूँ , आपका आशीर्वाद मिलता रहेगा ! धन्यवाद !

vikramjitsingh के द्वारा
March 30, 2012

योगी जी, नमस्कार, ये ‘झल्लुनाथ’ अक्षम ही, नहीं, चापलूस, निकम्मा और बेशर्म भी है, एक बात समझाना, अगर आपको पता हो, इस गाँधी परिवार की औरतों को सरदार ही क्यों अच्छे लगते हैं, इंदिरा ने ज्ञानी जैल सिंह को सर पे बिठाया था, और इस सोनिया ने मनमोहन झल्लू को, पता लगे तो बताना………

    yogi sarswat के द्वारा
    March 31, 2012

    आदरणीय श्री विक्रमजीत सिंह जी सादर नमस्कार ! आपने बहुत कड़े शब्दों का प्रयोग किया है , सच है ! आज की तारिख में डॉ . मनमोहन सिंह के प्रति बहुत ज्यादा गुस्सा है देशभर में ! बहुत बहुत आभार !

    Trinity के द्वारा
    October 17, 2016

    If my problem was a Death Star, this article is a photon tooedpr.

yogeshkumar के द्वारा
March 30, 2012

योगी जी नमस्कार, इसमें कोई सोचने की बात नहीं ..ये पूरी तरह से जग जाहिर हो गया है कि प्रधानमंत्री एक अक्षम, निकम्मे और आलसी आदमी है… वो प्रधान मंत्री के नाम पर धब्बा हैं… कांग्रेस कि पुरानी परम्परा या कहें गाँधी परिवार कि पुरानी परम्परा उच्च पदों पर अपने निकम्मे और चापलूस चमचों को बैठाने कि इसके उदहारण है… प्रतिभा देवी सिंह ..महाराष्ट्र में पृथ्वीराज चव्हान और अभी हाल ही में उत्तराखंड में विजय बहुगुणा… गाँधी परिवार हमेश से बिना किसी जनाधार के नेता को उच्च पदों पर आसीन करता आया है अपने स्वार्थ को चलते…. देश कि कोई फ़िक्र नहीं है…. ये गाँधी परिवार के लोग शिक्षा के लिए जाते है बाहर ..इलाज कराने जाते हैं… बाहर …मौज मस्ती करने जाते हैं बाहर …. और लूट का पैसा जमा करने जाते हैं बाहर ….और राज करते हैं.. भारत में.!!!!!! इसमें साथ देते हैं इनके चम्चें … आप कहतें है मनमोहन सिंह ईमानदार हैं…. अगर ईमानदार होते तो अब तक इस्तीफा देकर घर बैठ जाते …सत्ता का मोह बुड्ढे को….

    yogi sarswat के द्वारा
    March 31, 2012

    योगेश जी नमस्कार ! आपके जैसा ही गुस्सा आज लगभग हर भारतवासी की जुबान और चेहरे पर नज़र आता है , लेकिन हम अभी चुप हैं ! आप देख रहे हैं – जो प्रधानमंत्री अपने मंत्रियों पर लगाम नहीं लगा सकता वो क्या कर सकता है ! बहुत बहुत धन्यवाद ! सहयोग बनाये रखियेगा !

akraktale के द्वारा
March 30, 2012

योगी जी नमस्कार, सक्षम अक्षम तो बाद की बात है पहले तो हम यह तय करलें की वह प्रधानमन्त्री है भी की नहीं.क्योकि प्रधान मंत्री तो बोलता है और सब मंत्री सुनते हैं यहाँ तो उलटा है सब बोलते है और यह महाशय सुनते हैं आजादी से आज तक के शासनकाल के सबसे घटिया और बेशर्म प्रधान मंत्री हैं ये.

    vikramjitsingh के द्वारा
    March 30, 2012

    अशोक जी, सादर, हम आपसे पूरी तरह सहमत हैं, योगी जी, प्रणाम, ‘महान राष्ट्र भारत के ‘रिमोट’ प्रधानमन्त्री को बहुत बढ़िया आइना दिखाया आपने…… धन्यवाद……..

    yogi sarswat के द्वारा
    March 31, 2012

    आदरणीय श्री विक्रमजीत सिंह जी , बहुत सही नाम दिया आपने , रिमोट प्रधानमंत्री ! लेकिन ये रिमोट सिर्फ १० जनपथ का ही कहा मानता है , वही करता है जो वहां से आदेश आता है ! तभी तो सोनिया मैडम विश्व की सबसे अमीर महिला नेता बनी हुई है ! बहुत बहुत आभार !

    yogi sarswat के द्वारा
    March 31, 2012

    आदरणीय श्री रक्ताले जी , सादर नमस्कार ! बहुत बहुत आभार ! आपने सही कहा , ये शायद भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं , जो सिर्फ सुनते हैं , बोलते नहीं ! आभार !

    Sable के द्वारा
    October 17, 2016

    The exrtseipe shines through. Thanks for taking the time to answer.

shaktisingh के द्वारा
March 30, 2012

योगी जी, यह सवाल पूछ कर ऐसा लगता है जैसे की जनता के साथ धोखा किया जा रहा हो. आज हरेक हिन्दुस्तानी मनमोहन सिंह के रग-रग से वाकिफ हो चुका है.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 31, 2012

    श्री शक्ति सिंह जी सादर नमस्कार ! आपने बिलकुल ठीक कहा , मनमोहन सिंह जी अब देश के लोगों का भरोसा बिलकुल खो चुके हैं ! आपका बहुत बहुत धन्यवाद ! आपने मेरे विचारों को पढ़ा !

    Lizabeth के द्वारा
    October 17, 2016

    le sondage prouve surtout que 75% des sondés tiennent mieux l’alcool que ceux qui vont &lunqo; moyen&absp;» pour cause de picole !

Ashish के द्वारा
March 30, 2012

ha वोह है. जो aadmi etani bare desh ka malik है. वोह कहता है की मेरे पास कोई जादू की छरी नहीं है, मै इस करप्सन को, इस गरीबी को एक झटके में खत्म नहीं कर सकता हु, उनके नाक निचे उनके कैबिनेट के मंत्री करप्सन में लिप्त है, और वह इमानदार का तमगा लिए फिर रहे है, मै कहता हुए उन्होंने चुप रहने के पैसे लिए है, या वह इस पद की गरिमा के लायक नहीं है. इन्हे संसद की गरिमा का ख्याल है, लोगो की भावनाओ और उम्मीदों का नहीं. मै आप योगी जी के माध्यम से परधानमंत्री जी से पूछना चाहुगा की क्यों जनता के आवाज उठाने के बाद इनको करप्सन के लिए कानून बनाने की याद आई, बना भी रहे है तो वह भी लंगरा कानून . इसके पहले नजाने कितने घोटाले हो गए है की वह तो भगवन को ही मालूम है. भला हो इस कम्प्यूटर का सारे राज को आपने मेमोरी में रखता है , हमको आपको ज़ोरे रखता है. और बहुत बहुत धन्यवाद् आन्ना हजारे और बाबा रामदेव जिन्होंने हमें जगाया और बताया की हमें मूक दर्शक बनकर अपने देश को लुटते हुए देखना देश के साथ गद्दारी है.ये चाहे थोरे सायमी न हो. पर इनका मकसद नेक और सवार्थ रहित है .

    yogi sarswat के द्वारा
    March 30, 2012

    श्री आशीष जी नमस्कार ! बिलकुल सही कहते हैं आप , इस सरकार को घोटालों से कुछ लेना देना नहीं है ! यहाँ जनता के पास रोटी नहीं है , सेना के पास लड़ने को हथियार नहीं हैं और कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गाँधी विश्व की सबसे अमीर चौथी राजनेता बनी बैठी है ! हम मित्र खुद बंटे हुए हैं इसलिए इस सोनिया गाँधी को मौका मिल रहा है देश लूटने का !

    anuradha chaudhary के द्वारा
    April 6, 2012

    आशीस जी बहुत पुरानी कहावत है अंधेर नगरी धमधूषण राजा टकासेर भाजी टका सेर खाजा।

    yogi sarswat के द्वारा
    April 9, 2012

    आदरणीय अनुराधा जी , आपकी बात सिरोधार्य ! बहुत बहुत धन्यवाद ! आपने अपने विचार दिए !

    Sunshine के द्वारा
    October 18, 2016

    Don’t you think that the more you read customer feedback on sites like toptable, the more confused you get about where to go for dinner? I’m not sure that more inotmrafion is always helpful. Don’t you think that less is more when it comes to reviews..?

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
March 30, 2012

वे केवल प्रधान मंत्री हैं . आदरणीय योगी जी सादर अभिवादन के साथ.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 30, 2012

    आदरणीय श्री कुशवाहा जी सादर नमस्कार ! आपकी सारगर्भित प्रतिक्रिया मिली , हार्दिक आभार ! आशीर्वाद बनाये रखें !

    B S NEGI के द्वारा
    March 31, 2012

    सर , बिलकुल सत्ये है , अच्छा लेख है

    yogi sarswat के द्वारा
    April 2, 2012

    आदरणीय श्री नेगी जी , सादर अभिवादन ! आपकी प्रतिक्रिया मिली , हार्दिक आभार ! कृपया सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद !

    Marilee के द्वारा
    October 18, 2016

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