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बहुत शानदार रहा है ये सफ़र ( जे .जे . के साथ बिताये जो पल )

Posted On: 9 Apr, 2012 Others में

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लाये थे मांगकर जिंदगी में चार दिन

दो याहू में कट गए दो फेसबुक में ||

जून 2011 , मैं इधर उधर घूम रहा था नेट पर कि कहीं कोई बढ़िया साईट मिल जाए जिस पर मैं अपने मन की बात को खुलकर और लोगों के साथ साझा कर सकूं ! मेरे वरिष्ठ सहयोगी एक प्रोफ़ेसर साब ने जागरण जंक्शन के बारे में बताया ! मैंने खोला ! नया नया खिलाडी था इस मैदान में ! पहली पोस्ट यहाँ इस मंच पर प्रस्तुत करी , सिर्फ एक कमेन्ट मिला ! ये ऐसा ही था जैसे किसी नए बल्लेबाज ने अपने पहले मैच में सिर्फ एक ही रन बनाया हो , और आउट हो जाये ! फिर दूसरी पोस्ट डाली लेकिन परिणाम वही , एक दो , एक दो कमेन्ट ! लगातार 10 -12 पोस्ट तक यही रहा ! लगता था कि इस विद्वता के क्षेत्र में पाँव जमाना तो क्या खड़े रह पाना भी मुश्किल होगा ! लेकिन मन में एक विश्वास था, तो लगे रहे ! और लोगों को पढ़ा , तो पाया कि यहाँ तो परम आदरणीय निशा मित्तल जी भी हैं , ज्ञान की प्रतिमूर्ति ! उनका जब सराहना भरा कमेन्ट आया तो मन खुश हुआ और फिर नई उर्जा मिलने लगी ! जब लगातार जे. जे. पर रहा तो एक से एक विद्वान और गुणी लोगों के लेख और रचनायें पढने को मिली ! श्री शशिभूषण जी की रचनायें और उनकी लेखन शैली खुद ही सिखाती है ! डॉ. सूर्या बाली जी की गज़लें आनंदित करती हैं , श्री प्रदीप कुशवाहा जी का लेखन विशिष्ट होता है ! ऐसे लोगों के संपर्क में आकर और उनका सानिध्य पाकर अपने आपको तैयार किया कि और बेहतरीन लिखना है ! परम आदरणीय श्री आर .एन . शाही ( जो अब दिखाई नहीं देते इस मंच पर ) का राजनीतिक विषयों पर लेखन इस मंच की शोभा बढ़ा रहा था ! परम प्रिय श्री आकाश तिवारी जी की कवितायेँ अनूठी और मौलिकता का जो भाव दिखाती हैं , काबिल-ए तारीफ़ था ! धीरे धीरे समझ आ रहा था कि बेटा जब तक तुम दूसरों को प्रतिक्रिया नहीं दोगे , तुम्हें कोई क्यों अपना समय देगा ? तो पहले और गुणी जनों को पढना शुरू किया और उन पर अपनी राय भी दी ! इसका तो बड़ा बढ़िया परिणाम सामने आने लगे ! अब कमेन्ट कि संख्या 10 -20 से बढ़कर 40 -50 तक पहुँच गई ! इस मंच पर श्री रक्ताले जी के दिशा दिखाते लेख , श्री आस्तिक जी की प्रशंशनीय प्रतिक्रियाएं और अलीन जी की भावनाओं में डूबी हुई रचनायें अभिभूत करती हैं ! आदरणीय राजीव कुमार झा की कवितायेँ , राजेश दुबे जी के लेख अपने आप में अतिविशिष्ट होते हैं ! श्री संतोष कुमार जी का मूरख मंच और उसी से मिलता जुलता श्री विक्रमजीत सिंह जी का साहित्य कुछ देर के लिए हँसा जाता है ! और क्या चाहिए इस जिंदगी को ? आदरणीय श्री कृष्ण जी की शुद्ध हिंदी की रचनायें इस मंच को और शोभायमान करती हैं ! अब लगभग एक साल इस मंच पर होने को है , लगता ही नहीं कि इतना समय बीत गया ! लिखते लिखाते ! कभी ठंडा कभी गरम ! हर एक स्वाद इस मंच पर मौजूद है ! हर व्यंजन मौजूद है ! साहित्य की हर विधा मौजूद है और हर विधा के माहिर , बड़े बड़े गुणी लोग यहाँ अवतरित हैं ! आदरणीय तमन्ना जी का बिना लाग लपेट के अपनी बात कहने का अंदाज़ , सोनम की मासूमियत, दीप्ति जी के बोल , सरिता जी की गहरी बातें और श्री सतीश जी के बहुत ही सरल भाषा में लिखे लेख , बरबस ही अपनी तरफ आकर्षित करते हैं ! तेजवानी जी के राजस्थान के हाल चाल और विकास मेहता जी की अन्ना की टीम को शीशा दिखाती रचनायें , मनोज जी की विविधता , आनंद प्रवीण भाई की अपनी शैली , अजय कुमार पाण्डेय की बाल्यावस्था शैली ; अजय कुमार देवरिया वालों के अपने अंदाज़ ! वाह !

परम आदरणीय अलका गुप्ता जी जो विदेश में रहकर भी हिंदी की सेवा कर रही हैं , आदरणीय अब्दुल रशीद जी जिनके आशीर्वाद मात्र से कोई लेखक प्रमाणित हो सकता है , श्री जलालुद्दीन जी , श्री संजय दिक्सित जी , आदरणीय यमुना पाठक जी , आदरणीय मिनाक्षी जी , आदरणीय विनीता शुक्ल जी , श्री भ्रमर साब , श्री राकेश त्रिपाठी जी अपना कीमती समय देकर इस मंच की लगातार शोभा बनाये हुए हैं ! श्री वाधवा जी और श्री रूद्र जी, श्री सुमित जी , श्री जय प्रकाश मिश्र जी , श्री गाफिल साब , माता प्रसाद जी कभी कभार इस मंच की सैर करने आते हैं और अपनी उपस्थिति मात्र से इस मंच को और शोभायमान करते हैं ! अगर तोशी जी के विषय में ना लिखूं तो बात पूरी कैसे होगी ? एक मासूम सी जापानी गुडिया ( अपने लेखों के हिसाब से ) ! श्री बी के राय साब के दिशा दिखाते लेख , चन्दन राय जी की एक ही तरह की प्रतिक्रिया देने की कला , योगेश कुमार जी की कभी कभी की जुगाली , श्री सत्यशील अग्रवाल जी का लेखन , आदरणीय साधना ठाकुर जी का विश्लेषण , विश्लेषक जी से भी तुलना करवा देता है ! इस मंच पर प्रवीन मलिक जैसी हस्ती भी हैं जो एक बार जिस लेख पर सहमती दिखा दें वो स्वतः ही प्रमाणित हो जाता है ! आदरणीय अमिता नीरव जी के लेख , कमल कुमार जी के कार्टून , आचार्य जी की स्पष्टवादिता , पंडित आर के राय का अध्यात्म , कौशिक जी का कहना सुनना सब कुछ है यहाँ ! श्रीमती पुष्पा पाण्डेय जी , कुमार गौरव जी का कभी कभी का लिखना , लेकिन दमदार लिखना आदरणीय श्री जवाहर जी की उर्जा देती प्रतिक्रियाएं , शक्ति सिंह जी का अपना अलहदा अंदाज़ , पन्त साब का प्रतिक्रिया देने में कंजूसी का अंदाज़ , कानाफूसी जी का अद्रश्य रहना , आदरणीय ओम दीक्षित जी की सटीक बातें , गजेन्द्र प्रताप जी की लिखने की कला इस मंच पर सभी को बनाये रखती है बल्कि बांधे रखती है ! आदरणीय महिमा जी और रेखा जी की घर परिवार के किस्से कहानियां , सीमा जी कि किस्सा गोई , मीनू झा का कभी कभी अपनी बोली में बतियाना , टिम्सी मेहता का एकदम से गायब होना और फिर धमाके के साथ वापसी , श्री पारीक साब की लेखनी , डॉ.अलोक रंजन की महाभारत , परम आदरणीय श्री अबोध्बलक जी के शालीनता भरे लेख , विकास कुमार जी की रचनायें , बिरजू जी के कभी कभी के दर्शन इस मंच को महकाए रखते हैं !

जागरण जंक्शन का ये महान मंच हमें खुलकर बोलने और अपने विचार रखने का जो अवसर देता है वो बड़ी बात है ! व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए तो इस मंच ने पूरा आकाश दे दिया है . कि लिखो जितना लिख सकते हो , यहाँ हर तरह के पाठक हैं ! हर तरह की साहित्य की विधा है ! प्रथम कुछ पोस्ट पर मुझे 100 लोग भी नहीं पढ़ रहे थे , आज आपका प्यार 2700- 2800 तक पहुँच रहा है , ये संख्या कोई मायने नहीं रखती जब तक कि आपका प्यार ना मिले ! अच्छा लगता है जब कोई आपके लेखन को पढता है और उस पर अपने विचार देता है ! ये आप लोग ही हैं जिनके प्यार और आशीर्वाद ने मुझे इस मंच से एक सम्मान दिया है ! बहुत बहुत आभार ! उम्मीद करता हूँ कि हम इस मंच पर और भी ज्यादा खुलकर बोलेंगे , नए नए महारथी आयेंगे अपना कौशल दिखाने और पुराने लोगों से आशीर्वाद मिलता रहेगा !

हजारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पर रोटी है

तब जाकर होता है चमन में दीदावर पैदा ||

जागरण जंक्शन परिवार का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ कि उन्होंने मुझे इस मंच के लायक समझा है और अपना समर्थन लगातार दिया है ! भगवान से प्रार्थना करता हूँ कि यह मंच यूँ ही दिन रात बढ़ता रहे और देश हित और समाजहित में अपनी जिम्मेदारियों का एहसास बनाये रखे ! अब तक अगर कोई गलती हुई हो तो इस मंच के सभी लोगों से करबद्ध क्षमा याचना करता हूँ ! जो नए लोग हैं उनके लिए एक शे’र

किसी के एक आंसूं पर हज़ार दिल धड़कते हैं
किसी का उम्र भर रोना यूँ ही बेकार जाता है ||

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45 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

D33P के द्वारा
April 14, 2012

योगी जी नमस्कार स्वीकार करे ….. कल भी मैंने कमेन्ट पोस्ट करने की कोशिश की पर शायद कुछ गड़बड़ थी जो कमेन्ट नज़र ही नहीं आया ….आपका जागरण जंक्शन का सफ़र शानदार है सच में हर एक स्वाद इस मंच पर मौजूद है ! हर व्यंजन मौजूद है ! साहित्य की हर विधा मौजूद है और हर विधा के माहिर , बड़े बड़े गुणी लोग यहाँ अवतरित हैं ! जिनकी तारीफ पाकर मन प्रफुल्लित और प्रेरित भी होता है और उनके उच्च विचार पढकर मन को तुष्टि मिलती है !आकाशवाणी पर रचनाये प्रसारण के बाद भी इतनी संतुष्टि नहीं मिलती थी जो यहाँ मिलती है ………….आपके इस सफ़र में साथ है सब और आपका साथ सबको अपेक्षित है ….वैसे आजकल जागरण जंक्शन पर आदरणीय डॉ. सूर्या बाली की कमी कुछ खल रही है उनके लिए शुभकामनाओं सहित ….

    yogi sarswat के द्वारा
    April 16, 2012

    आदरणीय दीप्ति जी , सादर नमस्कार ! मैं जो भी कुछ लिख पा रहा हूँ , सब आप जैसे महानुभावों के आशीर्वाद और उनके सहयोग का ही परिणाम है ! उसी भाव को मैंने इस लेख में व्यक्त किया है और आभार व्यक्त किया है ! सच कहती हैं आप डॉ . सूर्य बाली बहुत कम नज़र आते हैं अब इस मंच पर ! ये हमारे जैसे लोगों के लिए गर्व की बात है की वो फ्लोरिडा में रहते हुए भी भारतीय संस्कृति और साहित्य को अपना समय और अपने विचार दे रहे हैं ! उनकी गज़लें तो बहुत प्रभावित करती हैं ! आशा करते हैं जल्दी ही वो इस मंच पर होंगे ! बहुत बहुत आभार !

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
April 14, 2012

योगी जी,अब तक के शानदार सफरनामे पर बधाई! जीवन में भी खट्टे मीठे अनुभव होते रहते हैं.इन्हीं अनुभवों से आगे का सफ़र खुशनुमा होता है.जे.जे के सफ़र पर ले जाने के लिए आभार.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 16, 2012

    आदरणीय श्री राजीव कुमार झा जी , सादर नमस्कार ! आपका आशीर्वाद मिलता रहा है मुझे हमेशा ! यह लेख आपके आशीर्वाद की बदोलत ही संभव हो सका ! आशा करता हूँ ये तारतम्य यूँ ही बना रहेगा ! बहुत बहुत धन्यवाद !

D33P के द्वारा
April 13, 2012

सही कहा योगी जी हर एक स्वाद इस मंच पर मौजूद है ! हर व्यंजन मौजूद है ! साहित्य की हर विधा मौजूद है और हर विधा के माहिर , बड़े बड़े गुणी लोग यहाँ अवतरित है और आनंद भी बहुत है कुछ तृप्ति सी मिलती है ,कुछ साल पहले जब मै आकाशवाणी के उद्घोषक के रूप में काम करती थी और आकाशवाणी के लिए लिखती थी तब भी इतना आनद नहीं आता था जो यहाँ हासिल है फिर सरकारी नौकरी लगते ही वो सब छूट गया और कुछ रिक्तता आ गयी जो यहाँ आकर भर रही है .आप सब के सानिंध्य में …बहुत खूबसूरत सफरनामा केवल आपके दिल का नहीं सबके दिल की बात है ये ….

    yogi sarswat के द्वारा
    April 21, 2012

    आदरणीय दीप्ति जी , सादर ! क्षमा चाहूँगा , देर से जवाब देने के लिए ! आपने अपने विषय में नै बात बताई की आप उद्घोषक भी रह चुकी हैं ! बहुत बढ़िया ! मैंने भी मथुरा आकाशवाणी पर कुछ कविता पाठ किया है और पारिश्रमिक भी उठाया था ! आपके विषय में जानकारी अच्छी लगी ! बहुत गुनी हैं आप !

ajaydubeydeoria के द्वारा
April 12, 2012

मैं देर करता नहीं, देर हो जाती है……….

    yogi sarswat के द्वारा
    April 12, 2012

    बहुत बहुत शुक्रिया , मित्रवर !

yogeshkumar के द्वारा
April 11, 2012

योगी जी नमस्कार .. अपने इस सफ़रनामे में लगभग सबका जिक्र कर डाला… बहुत हसीन रहा आपका ये सफ़र… जब मैं ये कमेन्ट लिख रहा था…तब मैं भूकंप के झटके महसूस कर रहा था अपने कोलकाता आफिस में…. बड़ा हो-हल्ला हो रहा था… खैर अच्छा लगा आपने जो हर किसी का जिक्र उनके लेखन स्वभाव के साथ किया और आपने हर किसी का सटीक विश्लेषण किया… खैर… साधुवाद.. सफ़रनामा जारी रखे ..

    yogi sarswat के द्वारा
    April 11, 2012

    मित्रवर योगेश जी , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा !

मनु (tosi) के द्वारा
April 11, 2012

योगी जी , सादर नमस्कार! आपके लेख मुझे बहुत अच्छे लगते हैं .. न जाने क्यूँ आपके लेख तो मेरे छोटे बच्चे भी पढ़ते हैं .. जिस विषय को भी उठाते हैं आप उसके साथ पूरा न्याय करते हैं ये आपके लेखो की ये खासियत मुझे पसंद है … आप ऐसे ही लिखते रहे और हम उनका आनंद उठाते रहे यही प्रार्थना है आपसे …शुबकामनाएं भविष्य के लिए

    yogi sarswat के द्वारा
    April 11, 2012

    आदरणीय तोशी जी , सादर नमस्कार ! बहुत बहुत धन्यवाद , आपने जो मेरे शब्दों को समर्थन दिया ! आपने लिखा है की आपके बच्चे भी मेरे लेख पढ़ते हैं और आनंद उठाते हैं , सच कहूं तो ये मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है जो आपने मुझे दिया ! बच्चों के दिल में जगह बनाना बड़ा कठिन होता है , ऐसा मैं मानता हूँ ! हालाँकि मेरे बच्चे अभी बहुत छोटे हैं और पढना लिखना अभी नहीं सीख पाए हैं ! तो मैं नहीं कह सकता की मेरे बच्चे कैसे और क्या पसंद करेंगे ? आपके प्यारे प्यारे बच्चों के लिए अपनी तरफ से बस एक छोटा सा उपहार एक कविता के रूप में जल्दी ही इस मंच पर प्रस्तुत करूँगा ! बहुत बहुत आभार !

dineshaastik के द्वारा
April 11, 2012

पहले कई बार कोशिश की प्रतिक्रिया देने की नाकामयाब रहा, आज  कई लोगों देखकर लगता है कि मेरा प्रयास  सार्थक  होगा। अपने अनुभवों को मंच  पर साझा करने के लिये आभार एवं बधाई….

    yogi sarswat के द्वारा
    April 11, 2012

    आदरणीय श्री आस्तिक जी , सादर नमस्कार ! आप लोगों का समर्थन इस मंच को महकाए रखता है ! आपके द्वारा हमेशा मेरा उत्साहवर्धन होता रहा है ! बहुत बहुत आभार !

akraktale के द्वारा
April 11, 2012

योगी जी सादर नमस्कार, आपने तो सबकी नब्ज पकड़ ली है. जिस गति से ब्लोगर संख्या बढ़ रही है बहुत मुश्किल होता है सबको पढ़ पाना. फिर आदरणीय पारीक साहब का कहना भी सत्य लगता है की कई ब्लोगर इतना स्तरहीन लिखते हैं की उस पर कुछ कह पाना भी ठीक नहीं लगता. ऐसे ब्लोगर्स को अन्य अच्छे ब्लोग्स पढ़कर अपने स्तर को सुधारना चाहिए. आपके स्नेह के लिए आभार. आगे भी सहयोग बना रहे यही आशा है. धन्यवाद.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 11, 2012

    आदरणीय श्री रक्ताले जी , सादर नमस्कार ! पारीक साब भले ही कम लिखते हैं लेकिन उच्च कोटि का लेखन है उनका ! शायद ही कोई ऐसा ब्लॉग होगा उनका जो मैंने न पढ़ा हो ! ऐसे लोगों को जानकर, पढ़कर अगर कुछ सीख मिलती है तो कुछ गलत नहीं है ! आप भी इसी श्रेणी के लेखकों में शुमार हैं ! आपका समर्थन , सहयोग हमेशा मिलता रहा है ये मेरे लेखन के लिए बड़ी बात है ! बहुत बहुत आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
April 10, 2012

आदरणीय योगेन जी, सादर ! सुन्दर आनुभविक वर्णन !

    yogi sarswat के द्वारा
    April 11, 2012

    आदरणीय श्री शशिभूषण जी , सादर नमस्कार ! आप बहुत दिनों के बाद इस मंच पर आये हैं , आपका आशीर्वाद मिला ! बहुत बहुत आभार !

alkargupta1 के द्वारा
April 10, 2012

योगी जी , पहले भी आपके इस लेख को पढ़कर मैंने कई बार प्रतिक्रिया देने का प्रयत्न किया था लेकिन कमेन्ट क्लोज्ड थे असफल रही……आज कई कमेन्ट देखे इसलिए पुनः प्रयत्न कर रही हूँ……… आप अपनी सशक्त लेखनी के माध्यम से अति उत्तम लेख प्रस्तुत करते हैं लिखते रहें…… जे जे के साथ अपने अनुभव भी अति सुन्दर तरह से साझा किये हैं ……बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    April 11, 2012

    आदरणीय अलका गुप्ता जी , सादर नमस्कार ! कुछ तकनीकी गड़बड़ी के चलते ऐसा हुआ है ! जहां तक लेखन की बात है , सब आप लोगों से ही सीखा है ! आपका आशीर्वाद इस लेखन को सार्थक कर देता है ! अपना सहयोग और समर्थन यूँ ही बनाये रखियेगा ! बहुत बहुत आभार !

अब्दुल रशीद के द्वारा
April 10, 2012

योगी जी आदरणीय अब्दुल रशीद जी जिनके आशीर्वाद मात्र से कोई लेखक प्रमाणित हो सकता है इस बात को लिख कर आप चाहे जो साबित करना चाहे आप बेहतर जानते समझते होंगे रही बात अब्दुल रशीद की तो मुझमें जितनी योग्यता है मै उस योग्यता को अच्छे से जानता हूँ उपहास और सम्मान का ना तो मुझ पर कभी असर हुआ था न किसी के उपहास से होगा. बाकी मेरा नाम या नाम के साथ सिंगरौली लिख कर गुगल पर सर्च करके देखा जा सकता है. आपने मेरा नाम लिखा आपका बहुत बहुत शुक्रिया सप्रेम

    yogi sarswat के द्वारा
    April 10, 2012

    आदरणीय श्री अब्दुल रशीद जी , सादर नमस्कार ! आपकी प्रेम भरी पाती मिली , हार्दिक आभार ! लेकिन शिकायत भी है आपसे -आप कहते हैं उपहास और सम्मान का ना तो मुझ पर कभी असर हुआ था न किसी के उपहास से होगा.आप ये कैसे सोच सकते हैं की मैं आपका उपहास करूँगा ? आप इस मंच के ना केवल सम्मानित सदस्य हैं बल्कि मेरे जैसे लोगों के मार्गदर्शक भी ! फिर आप कैसे सोच सकते हैं की मैं ऐसी हिमाकत कर सकता हूँ ! मेरे मन में आपके प्रति हमेशा सम्मान ही रहा है ! मैं नहीं समझ पा रहा हूँ की आप मेरे प्रति ऐसा कैसे सोच रहे हैं ! हम यहाँ इस मंच पर खुलकर बोलने की बात करते हैं तो फिर ये पर्दा क्यों ? मैंने ना तो आपके विषय में कभी गलत सोचा है और न ही मेरी ऐसी आदत है ! मैं हमेशा आपका आशीर्वाद चाहता हूँ ! आप mujhe प्रिय भी लिखते हैं , saprem भी लिखते हैं , तो फिर aise shabd kyun upyog करते हैं की मैं आपका उपहास कर रहा हूँ ! मैं आपसे फिर kshama चाहता हूँ !

April 10, 2012

सादर नमस्कार! मैं समझता हूँ कि यदि किसी के साहित्य को समय दे तो हमें उसके बदले में हमारे साहित्य को समय मिले, तो जरुर हम्मे कुछ कमी हैं. परन्तु आपकी बात इस मंच पर सही भी है क्योंकि बहुत लोग यहाँ लेन-देन पर विश्वास करते हैं. मैं तो इसे एक घटिया सोच मनाता हूँ और वही ब्लाग पढ़ता हूँ जो मुझे अच्छा लगता हैं, भले ही वह व्यक्ति मेरा ब्लाग पढ़े या न पढ़े. ऐसे बहुत से ब्लागर हैं जिनकी पोस्टिंग को पढ़ना नहीं भूलता और उनके भावों और भावनाओं का प्रबल समर्थक हूँ. परन्तु उनको मेरी पोस्टिंग बिलकुल पसंद नहीं है या यह कहिये की मेरी बाते उनके समझ के बाहर होती हैं. परन्तु मैं बुरा नहीं मानता क्योंकि मैं उनका समर्थक हूँ. वो मेरे समर्थक नहीं हैं……….और ऐसा ही होना भी चाहिए . आपने एक बेहतरीन और काबिले तारीफ़ आलेख लिखा हैं….इसके लिए बधाई और हार्दिक आभार.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 10, 2012

    श्री अलीन जी , सादर नमस्कार ! आप इस मंच के होनहार और स्थापित लेखक हैं , आपका समर्थन हमेशा मिलता रहा है ! बहुत बहुत आभार !

Kumar Gaurav के द्वारा
April 10, 2012

नीचे अपने ब्लॉग का लिंक लिखने में कुछ छूट गया लगता है इसलिए यहाँ लिख दे रहा हूँ. http://www.kg70.jagranjunction.com

    yogi sarswat के द्वारा
    April 10, 2012

    धन्यवाद !

Kumar Gaurav के द्वारा
April 10, 2012

आदरणीय योगी जी सादर नमस्कार बहुत भावुकता और सच्चाई के साथ आपने अपने ह्रदय की बातें कहीं हैं. बहुत अच्छा लगा. मुझे याद है जब मैंने जागरण जंक्शन पर लिखना शुरू किया था तो आप उन पहले कुछ लोगों में थे जिन्होंने सकारात्मक और उत्साहवर्धक प्रतिक्रियाएं दी थी. आपसे बहुत कुछ सीखने को मिला. आपके लिए मेरे दिल में बहुत सम्मान है. http:/www.kg70.jagranjunction .com

    yogi sarswat के द्वारा
    April 10, 2012

    श्री कुमार गौरव जी , नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! जो कुछ दिल में था , लिख दिया ! आपका दिया हुआ सम्मान मेरे लिए बहुत बड़ी नेमत है , संभल कर रखना चाहूँगा ! बहुत बहुत आभ्हर !

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
April 9, 2012

आदरणीय योगी जी, सादर अभिवादन. भूलने के रोग से ग्रस्त होने पर मैं न तो समीक्षा तिपानी को विस्तार दे पाता हूँ, जहाँ तक विशिष्ट लेखन शैली ये मेरी बीमारी का प्रतिफल है. क्या लिखना क्या लिख जाता हूँ, फिर भी आप साथियों के स्नेह एवं प्रोत्साहन के आधार पर टिका हूँ. आभार प्रकट करता हूँ, स्नेह बनाये रखिये. लाये थे मांगकर जिंदगी में चार दिन दो याहू में कट गए दो फेसबुक में || अब शून्य से कट रहे हैं. बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 10, 2012

    आदरणीय श्री कुशवाहा जी सादर नमस्कार ! आप कहते हैं की आप इस मंच पर बस टिके हैं , सच कहूं तो आप इस मंच की शोभा हैं , आप जैसे महानुभावों से ही इस मंच की गरिमा और महत्व बना हुआ है ! आपका आशीर्वाद किसी भी नए लेखक के लिए संजीवनी का काम करता है ! बहुत बहुत आभार ! आपका आशीर्वाद हमेशा चाहता हूँ !

nishamittal के द्वारा
April 9, 2012

योगी जी आपके सुन्दर सुखद सफ़र के लिए आपको बधाई और शुभकामनाएं.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 10, 2012

    आदरणीय निशा जी मित्तल , सादर नमस्कार ! आपको जागरण जंक्शन के मेरे सफ़र का वर्णन पसन् आया , बहुत बहुत आभार ! आशीर्वाद बनाये रखिये !

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
April 9, 2012

योगी जी , सप्रेम ! आप की लेखिनी की धार पैनी है | आप साधारण भी लिखते हैं तो विशेष हो जाता है | किं बहुना ?

    yogi sarswat के द्वारा
    April 10, 2012

    आदरणीय श्री आचार्य जी , सादर नमस्कार ! आप ही किसी लेख की गुणवत्ता तय कर सकते हैं , मैं तो बस जो मन में होता है , वही लिख देता हूँ ! आपकी नज़र पड़ जाती है तो लेखन सार्थक हो जाता है ! सहयोग बनाये रखें !

yamunapathak के द्वारा
April 9, 2012

योगीजी,यह लेख तो हम पहले ही पढ़ चुके फिर से आज पोस्ट कर दिया आपने.और एक बात आपकी मुझे थोड़ी नागवार गुज़री है की प्रतिक्रया प्राप्त करने के लिए प्रतिक्रया देना मंच से जुड़ने का उद्देश्य पूरा नहीं करता.कुछ लेख बगैर एक भी प्रतिक्रया के ही अत्यंत उच्चा कोटि के होते हैं,ये अलग बात है की उन्हें ‘ज्यादा चर्चित’ज्यादा पठित में स्थान नहीं मिल पाता फिर भी कोशिश करिए की ऐसे लेखों को भी अवश्य पढ़ें बिना प्रतिक्रया देने और पाने की चाह के नाराज़ ना होइए दरअसल मूल्यों की बात करते-करते ये आदत में भी शुमार हो गयी है की “कर्मंयेवाधिकारास्ते माँ फलेषु कदाचन “

    vikramjitsingh के द्वारा
    April 9, 2012

    यमुना जी सादर, अन्यथा मत लीजियेगा, कम से कम श्लोक को तो पूरा लिखिए, ”कर्मंयेवाधिकारस्ते माँ फलेषु कदाचनम…. धर्म संस्थापनाधाये, सम्भवामी युगे युगे…” जय श्री कृष्ण….. सादर, योगी जी, हमने हाजरी लगा दी है……..कमेन्ट तो ‘वही’ रहेगा……..जवाब आपको पता है, धन्यवाद……..

    yogi sarswat के द्वारा
    April 10, 2012

    आदरणीय यमुना जी , सादर नमस्कार ! आपकी लगातार प्रतिक्रिया मिलती रही है , बहुत बहुत आभार ! आपने ठीक कहा की अच्छे लेख किसी के मोहताज नहीं होते ! लेकिन आपने शायद मेरा मंतव्य नहीं समझा , मैं सिर्फ ये कहना छह रहा था -की अगर यहाँ जगह बनानी है तो पहले और लोगों को पढना होगा , उनकी शैली देखनी होगी , उन्हें कमेन्ट देना होगा तभी लोग आपको समझ पाएंगे ! कभी कभी क्या होता है की जो बात आप लेख में नहीं लिख पाते वो प्रतिक्रिया देने में शामिल कर लेते हैं ! इसलिए प्रतिक्रिया देना भी एक कला है , बल्कि लिखने से ज्यादा महत्व्प्पोर्ण है क्योंकि लिखने में आप के अपने विचार होते हैं प्रतिक्रिया में आपको लेख पढना और समझना होता है ! तभी आप सार्थक प्रतिक्रिया दे पाते हैं ! मुझे मजबूरी में यह लेख पोस्ट करना पड़ा क्योंकि पहले वाले लेख पर तकनीकी गड़बड़ी हो गयी थी ! आपकी स्पष्टवादी प्रतिक्रिया का सम्मान करता हूँ ! आगे भी बिना हिचक के अपने विचारों से अवगत कराएं , आपका हार्दिक स्वागत है ! बहुत बहुत आभार !

    yogi sarswat के द्वारा
    April 10, 2012

    मित्रवर विक्रमजीत सिंह जी , नमस्कार ! आपकी प्रतिक्रिया prafullit kar deti hai , manch ko mahaka deti hai ! आपकी haziri mere liye utprerak ka kaam karti hai ! aabhaar ! sahyog banaye rakhein !

satish3840 के द्वारा
April 9, 2012

योगी जी नमस्कार “बहुत शानदार रहा है ये सफ़र ( जे .जे . के साथ बिताये पल ) ” देख कर सुखद अनुभूति हुई / आपने बड़े ही विस्तार व् सहजता से लिखा हें / आपके की सभी रचनाएँ में ध्यान से पढता हु / इस लेख को भी काफी बार पढ़ा हें / ब्लॉग आपका subscribe हें अतः हर पोस्ट को पढ़ने की व उस पर यथासंभव टिपण्णी देने की कोशिश करता हूँ / बहुत अच्छा लिखा हें आपने / आपकी कहानी हर नए ब्लोगर की कहानी हें / आपका ज्ञान व सानिध्य सदा ही हम सब के लिए एक प्रेरणा का कार्य करता हें / आपने एक एक ब्लोगर के बारें में इतने विस्तार व वास्तविकता से लिखा हें जो इस बात को बताता हें कि आप हर ब्लोगर को कितना पढ़ते व समझते हें / मुझे आश्चर्य होता हें जब आपकी इस पोस्ट में सभी ब्लोगरों की नाम व खूबियाँ गिना कर आपने मन मोह लिया /आप वाकई प्रतिभा के धनी हें / व्यग्य , कविता , शायरी , गद्य , पद्य सभी परआपकी भरपूर पकड़ हें / आपने ये पोस्ट दिल से लिखी हें / आपने इसमें अपनी सभी खूबियों को दिखा भी दिया हें / आपकी इस सुन्दर पोस्ट के लिए बहुत बहुत बधाई व शुभकामनाएं

    yogi sarswat के द्वारा
    April 10, 2012

    आदरणीय श्री सतीश जी , सादर नमस्कार ! आपकी सराहना , मुझे नई उर्जा दे जाती है ! मैं इस तारीफ के काबिल नहीं , मैं बस आप लोगों के सानिध्य में रहकर कुछ लिख लेता हूँ और आपका आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है , अन्यथा मैं कोई लेखक या कवी नहीं हूँ ! कुछ दिल के कुछ डायरी के पन्ने हैं , उन्हें यहाँ आपके समक्ष रख देता हूँ ! आपका आशीर्वाद मिल जाता है तो वो फूल खिल उठते हैं और apni khushboo dete rahte हैं ! आपका आशीर्वाद lagatar milta rahe , aisi kaamna karta हूँ !

sanjay dixit के द्वारा
April 9, 2012

योगी जी स्म्रतियों को संजोता हुआ सुन्दर लेख आनंद आया ,और चूंकि मई इस मंच पर नया हूँ तो आप लोगो का जे जे के साथ सफरनामा पढ़कर मुझे काफी जानकारी मिली है इस मंच के अन्य प्रबुद्ध साथियों के बारे में और अंत में मेरा नामोल्लेख करने के लिए धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    April 10, 2012

    shri sanjay ji , saadar namaskar ! aapko mera safarnama pasand aaya , bahut bahut aabhaar ! bas dil mein jo kuchh tha , vo bahar nikaal diya aur aapke saamne rakh diya ! aapko achchha laga , bahut bahut dhanywad !

    Aundre के द्वारा
    October 17, 2016

    Yay google is my world beater aided me to find this outstanding site! . “A tough lesson in life that one has to learn is that not everybody wishes you we.8#&ll221; by Dan Rather.


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