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रिक्त स्थान

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गाँव से लेकर शहर तक
बस में , ट्रेन में
नौकरी और पढाई में
बस भीड़ भारी है |


छोटे – ऊंचे
काले -गोरे
हिन्दू -मुस्लिम
सब कतार में हैं
बस जगह मिल जाये ||


मैं भी चला आया
बढ़ चला उधर
जिधर
कतार चली |


कभी स्कूल में भरता था
या अखबार में देखता था
आज उसी रिक्त स्थान में
स्वयं को भरने
कतार में खड़ा हूँ मैं !!

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98 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

lovely के द्वारा
April 27, 2012

very nice words, mr yogi

    yogi sarswat के द्वारा
    April 30, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , लावली जी ! सहयोग बनाये रखियेगा !

mparveen के द्वारा
April 26, 2012

कितने कम शब्दों में आपने इतनी बड़ी समस्या को व्यक्त कर दिया …..

    yogi sarswat के द्वारा
    April 30, 2012

    आदरणीय प्रवीण मालिक जी , सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद !

ग़ाफ़िल के द्वारा
April 24, 2012

वह ऐसा स्थान है जनाब! जो न भरे कभी

    yogi sarswat के द्वारा
    April 30, 2012

    नमस्कार श्री गाफिल साब ! आपने बिलकुल सटीक कहा ! बहुत बहुत आभार , आपने मेरे शब्दों को समय दिया ! आगे भी आपके समर्थन की कामना करता हूँ ! धन्यवाद !

sadhna के द्वारा
April 24, 2012

Yogi ji am reading your poem thrice…. but i don’t know why am not getting it’s “last para”…… will you please elaborate it lil bit…

    yogi sarswat के द्वारा
    April 24, 2012

    आदरणीय साधना जी , नमस्कार ! आपने मेरे शब्दों को पढ़ा , बहुत बहुत आभार ! असल में ये शब्द मैंने बढाती हुई जनसँख्या को ध्यान में रखकर लिखे हैं , यही मेरा मकसद था ! इतनी जनसँख्या है की आप कहीं भी जायें , आपको कतार ही मिलेगी ! आपको शब्द पसंद आये , बहुत बहुत धन्यवाद ! कृपया सहयोग बनाये रखियेगा !

gopalkdas के द्वारा
April 24, 2012

आज उसी रिक्त स्थान में स्वयं को भरने कतार में खड़ा हूँ मैं !! वह योगी जी, आज की बढती शिक्षित बेरोजगारी को आपने बखूबी ढंग से कविता का रूप दिया है बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 24, 2012

    आदरणीय श्री गोपाल जी , सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! कृपया सहयोग बनाये रखिये ! धन्यवाद !

sonam thakur के द्वारा
April 23, 2012

योगी जी,,, बहुत ही सरल शब्दों में आपने अपने विचारो को व्यक्त कर दिया…इस तेज भागती दुनिया में लोग किस तरह से थोड़ी सी जगह बनाने की कोशिश करते है..ये बात हर वो इन्सान जनता है जो किसी कतार में खडा होकर अपनी बारी का इन्तेजार करता है….अति सरल भावाभ्यक्ति .!!!!!!!

    yogi sarswat के द्वारा
    April 24, 2012

    बिलकुल ! आदरणीय सोनम ठाकुर जी , आपने सही कहा ! हमें अपनी आधी जिंदगी सिर्फ कतारों में खड़े होकर ही गुजर देनी पड़ती है ! आपने मेरे शब्दों को समय दिया बहुत बहुत आभार ! समर्थन देते रहिएगा ! धन्यवाद

prabhatkumarroy के द्वारा
April 23, 2012

बहुत अच्छी रचना

    yogi sarswat के द्वारा
    April 24, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , श्री रॉय साब ! आपका आशीर्वाद मिला ! आगे भी आपका समर्थन चाहूँगा ! धन्यवाद

birju के द्वारा
April 23, 2012

आ० योगी जी एक उत्क्रिस्ट काव्य रचना ……बधाई ……

    yogi sarswat के द्वारा
    April 23, 2012

    आदरणीय श्री बिरजू जी , सादर नमस्कार ! आपका स्नेह मिला , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

praveen panwar के द्वारा
April 23, 2012

योगी जी बहुत अच्छी कविता आप सफल रहे धन्यवाद!

    yogi sarswat के द्वारा
    April 23, 2012

    श्री प्रवीण जी , नमस्कार ! अपनी कविता पर आपके विचारों का स्वागत करता हूँ ! सहयोग बनाये रखिये ! धन्यवाद !

jalaluddinkhan के द्वारा
April 22, 2012

बहुत गहरे अर्थ रखती कविता.अच्छा प्रयास.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 23, 2012

    आदरणीय श्री जलालुद्दीन साब , नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत शुक्रिया ! उम्मीद है आगे भी आपका समथन ऐसे ही मिलता रहेगा ! धन्यवाद !

jlsingh के द्वारा
April 22, 2012

कभी स्कूल में भरता था या अखबार में देखता था आज उसी रिक्त स्थान में स्वयं को भरने कतार में खड़ा हूँ मैं !! कम से कम शब्दों में गंभीर बात! चुनौती!…… योगी जी नमस्कार! ‘बाबा’(रामदेव) के मंत्रिमंडल में भी अभी रिक्तियां हैं प्रतीक्षा सूची भी लम्बी है, लग जाइये लाइन में!…….

    yogi sarswat के द्वारा
    April 23, 2012

    आदरणीय श्री जवाहर जी , आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! आपके आशीर्वाद की लालसा हमेशा रहती है ! आशा है इसमें कभी कमी नहीं आएगी ! स्नेह बनाये रखियेगा !

sanjay dixit के द्वारा
April 21, 2012

धन्यवाद योगी जी,बहुत सार्थक लिखा है,बेरोजगार होने की पीड़ा,आह मुझे अपने दिन याद आ गए

    yogi sarswat के द्वारा
    April 21, 2012

    श्री संजय जी , नमस्कार ! आपको शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा !

ajay kumar pandey के द्वारा
April 21, 2012

योगी जी नमस्कार आपके ब्लॉग पर अपनी एक पोस्ट का प्रचार करने आया हूँ वो मेरी एक पोस्ट है ढोंगी बाबाओं की असलियत को बताती फिल्म बाबा रम्सा पीर फिल्म समीक्षा में चाहता हूँ की सभी ब्लोग्गेर्स इस पोस्ट को देखे और आप भी इस पोस्ट को समय दें आशा है की आपका मार्गदर्शन मिलेगा धन्यवाद आपका मित्र अजय पाण्डेय

    yogi sarswat के द्वारा
    April 21, 2012

    अवश्य मित्रवर !

satya sheel agrawal के द्वारा
April 21, 2012

योगी जी ,बहुत सुन्दर रचना लिख लेते हैं आप .साधुवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    April 21, 2012

    आदरणीय श्री सत्यशील अग्रवाल जी , सादर नमस्कार ! आपका आशीर्वाद है ! आपने मेरे शब्दों को समय दिया और मेरा उत्साहवर्धन किया , बहुत बहुत आभार ! आशीर्वाद बनाये रखिये !

D33P के द्वारा
April 20, 2012

कितनी ख़ूबसूरती से सरल शब्दों में आपने बेरोजगारी का दर्द शब्दों में पिरोया है …….जो हर युवा मन मे बसता है ……..आभार

    yogi sarswat के द्वारा
    April 21, 2012

    आदरणीय दीप्ति जी , सादर ! आपके विचार मुझे मेरी रचनाओं पर लगातार मिलते रहे हैं , बहुत बहुत आभार ! ये एक कोशिश है बढती हुई जनसँख्या और कम होते संसाधनों के प्रति कुछ कह पाने की ! आपको कोशोश पसंद आई , बहुत बहुत धन्यवाद ! सहयोग बनाये रखिये !

jai... के द्वारा
April 20, 2012

सुन्दर पक्तियां………….. 

    yogi sarswat के द्वारा
    April 21, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , मित्रवर ! सहयोग बनाये रखियेगा !

vikramjitsingh के द्वारा
April 20, 2012

योगी जी, नमस्कार, चिंता मत करो बंधू, बहुत जल्दी समय आने वाला है….फिर आप भी यही कहोगे……. ”हम जहाँ खड़े होते है, लाइन वहीँ से शुरू होती है……” बेहतर प्रस्तुति……

    yogi sarswat के द्वारा
    April 21, 2012

    श्री विक्रमजीत जी , नमस्कार ! कहाँ थे भाई इतने दिनों ? बहुत दिनों के बाद दर्शन हुए हैं ! आपको शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा !

    Lore के द्वारा
    October 18, 2016

    Off:Szia, mar sokszor meg szerettem volna kerdezni a koovektzet: A profilodban szerepel, hogy szereted a fozeleket, de eddig sajnos meg egy fozelekes posztot sem lattam. Ha esetleg van valamilyen kulonleges fozeleked, posztolnad? :) agi

Ritesh Chaudhary के द्वारा
April 20, 2012

कभी स्कूल में भरता था या अखबार में देखता था आज उसी रिक्त स्थान में स्वयं को भरने कतार में खड़ा हूँ मैं !! बहुत खूब

    yogi sarswat के द्वारा
    April 21, 2012

    श्री रितेश जी , नमस्कार ! आपको शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा !

subhash wadhwa के द्वारा
April 20, 2012

प्रिय योगी, नर हो मत निराश करो मन को जल्दी तुम खुद को पायोगे अफसरों की कतार में और सामने होगी रिक्त स्थान को भरने वालो की कतार सुभाष वाधवा

    yogi sarswat के द्वारा
    April 21, 2012

    आदरणीय श्री वाधवा जी , सादर नमस्कार ! आपका आशीर्वाद मिलते रहेगा तो अवश्य ही कुछ संभव बन पायेगा ! आपका आशीर्वाद मेरी रचनाओं को लगातार मिलता रहा है ! बहुत बहुत धन्यवाद !

www.ashuyadav.in के द्वारा
April 20, 2012

बहुत अच्छा यार ……………….. please visit on http://www.ashuyadav.in

    yogi sarswat के द्वारा
    April 20, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद मित्रवर !

Bhupender S Negi के द्वारा
April 20, 2012

बड़ी सरल भाषा में आपने बड़ी अच्छी बात कही है -बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    April 20, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद श्री नेगी जी ! अपना सहयोग बनाये रखियेगा !

yamunapathak के द्वारा
April 19, 2012

अच्छी भावाभिव्यक्ति

    yogi sarswat के द्वारा
    April 20, 2012

    आदरणीय यमुना पाठक जी , सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! कृपया सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद !

चन्दन राय के द्वारा
April 19, 2012

योगी मित्र , मित्र बहुत ही सरल शब्दों में बहुत ही गंभीर बात कह गए , आप बहुयामी प्रतिभा के धनी हैं आपकी इस कविता को पढ़कर मन आपकी प्रतिभा पर नाज करता है

    yogi sarswat के द्वारा
    April 19, 2012

    मित्रवर श्री चन्दन राय जी , नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! आपकी सराहना भरे शब्द प्रफ्फुलित करते हैं ! धन्यवाद !

कुमार गौरव के द्वारा
April 19, 2012

बहुत बढ़िया रचना योगी जी. बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 19, 2012

    मित्रवर श्री कुमार गौरव जी , नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखें ! धन्यवाद

    कुमार गौरव के द्वारा
    April 27, 2012

    योगी जी सादर ! आप मेरे नेता जी से मिलने नहीं आये ! मिल लीजिये अन्यथा कहीं वो नाराज हो गए तो सीबीआई…हा…हा…हा…

    yogi sarswat के द्वारा
    April 30, 2012

    श्री कुमार गौरव साब , नमस्कार ! अवश्य , आपके नेता जी के दर्शन अवश्य करने जायेंगे !

dineshaastik के द्वारा
April 19, 2012

आज उसी रिक्त स्थान में स्वयं को भरने कतार में खड़ा हूँ मैं !! योगी जी बहुत सुन्दर…

    yogi sarswat के द्वारा
    April 19, 2012

    आदरणीय श्री दिनेश आस्तिक जी , सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखिये !

alkargupta1 के द्वारा
April 18, 2012

रिक्तता की पूर्ति केलिए ही हर दिन दौड़ भाग करते रहते हैं……… अति उत्तम गहन भाव व्यक्त किये हैं योगी जी

    yogi sarswat के द्वारा
    April 19, 2012

    आदरणीय अलका गुप्ता जी , सादर नमस्कार ! बिलकुल सही कहा आपने , रिक्त स्थान की पूर्ती करने में उम्र गुज़र जाती है ! बहुत बहुत आभार ! आगे भी सहयोग की कामना करता हूँ !

April 18, 2012

मेरी तो यही दुआ है, की अब रिक्त स्थान की भी भीड़ बढे. बहुत हो गयी कशमकश.. बढ़िया प्रस्तुती हेतु बधाई, सादर.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 19, 2012

    आदरणीय टिम्सी मेहता जी , हर कोई यही चाहता है जैसा आप सोचती हैं किन्तु मुश्किल बहुत है ! सुन्दर विचार ! मेरे शब्दों को अपने विचार देने के लिए बहुत बहुत आभार ! आगे भी सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद !

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
April 18, 2012

बहुत सुन्दर कविता,योगी जी. कभी स्कूल में भरता था या अखबार में देखता था आज उसी रिक्त स्थान में स्वयं को भरने कतार में खड़ा हूँ मैं सुन्दर पंक्तियाँ.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 19, 2012

    आदरणीय श्री राजीव कुमार झा जी , सादर नमस्कार ! मेरे शब्दों को अपने विचार देने के लिए बहुत बहुत आभार ! आगे भी सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद !

abhii के द्वारा
April 18, 2012

शानदार रचना

    yogi sarswat के द्वारा
    April 19, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , मित्रवर अभि ! सहयोग बनाये रखिये !

vasudev tripathi के द्वारा
April 18, 2012

आज उसी रिक्त स्थान में स्वयं को भरने कतार में खड़ा हूँ मैं !!…. बहुत ही सटीक शब्द आपके योगी जी, यही आज देश की वास्तविकता बन गई है। सराहनीय पंक्तियाँ।

    yogi sarswat के द्वारा
    April 19, 2012

    मित्रवर श्री वासुदेव जी , नमस्कार ! मेरे शब्दों पर अपने बहुमूल्य विचार रखने के लिए आपका तहेदिल से शुक्रिया ! सहयोग बनाये रखिये !

ajay kumar pandey के द्वारा
April 18, 2012

योगी जी नमस्कार आपकी कविता अच्छी लगी में यह कहना चाहता हूँ की मेरे लेखो को पढ़कर सभी माने हुए संगठनो ने मुझे अपना सदस्य बना लिया है और एक संगठन मेरा उत्तराखंड ने एक निमंत्रण भेजा है carrier guidance कैंप का उन्होंने मुझे पौरी गढ़वाल बुलाया है वो मेरी प्रोफाइल facebook में है तो मुझे कई संगठनो ने खुद ही जोड़ लिया है यह मेरा उत्तराखंड भी उन्ही में से एक है इसने मुझे पौरी गढ़वाल आने को कहा है और मेरा लेख आतंकवाद मानवता का भक्षक नैनीताल समाचार के बच्चो के कोउलम में प्रकाशित हुआ है समर्थन देने का हार्दिक आभार धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    April 19, 2012

    मित्र अजय कुमार जी , आप में प्रतिभा है ! आपके लेख और आपका लेखन इसकी गवाही देता है ! आप जो लिख रहे हैं वो इस छोटी सी उम्र में बड़ी बात है ! आपको अगर कहीं से बुलावा आता है तो जाना चाहिए ! बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं !

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
April 18, 2012

स्वयं को भरने कतार में खड़ा हूँ मैं !! वर्तमान में desh ko avashykta है एक अच्छे नेत्रत्व की, और आप कतार में क्यों..?

    yogi sarswat के द्वारा
    April 19, 2012

    आदरणीय श्री प्रदीप कुशवाहा जी , सादर नमस्कार ! इतने हैं सर , एक से एक महारथी तो कतार में ही लगना पड़ेगा ! आपका आशीर्वाद मिला , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा !

akraktale के द्वारा
April 18, 2012

यागी जी सादर नमस्कार, जीवन की भाग दौड़ में खुद को ही ढूंढते हम. सुन्दर भावाभिव्यक्ति. और भाई साहब अब १२१ करोड़ में तो यही हाल होगा. बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 18, 2012

    आदरणीय श्री रक्ताले जी सादर नमस्कार ! बिलकुल सही कहा आपने , १२१ करोड़ में यही नहीं शायद इससे भी बुरा हाल होगा ! बहुत बहुत आभार ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा !

minujha के द्वारा
April 18, 2012

योगी जी फिर से एक नायाब पेशकश,जिंदगी की शून्यता जो निरंतर हमारे साथ होती है,पर अक्सर हम उसे परे ऱखकर जी लेते है ,खुश हो लेते है,बहुत सुंदर

    yogi sarswat के द्वारा
    April 18, 2012

    आदरणीय मीनू झा जी सादर नमस्कार ! बिलकुल ! आपके विचारों का स्वागत करता हूँ ! बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा !

MAHIMA SHREE के द्वारा
April 18, 2012

आज उसी रिक्त स्थान में स्वयं को भरने कतार में खड़ा हूँ मैं !! वाह बहुत गहरी बात कही आपने रिक्त स्थान तो है…पर उसके लिए लम्बी कतार भी है …जीवन के हर मोड़ पे हर उम्र में हमेशा नया रिक्त स्थान मिलता है और उस कतार में खड़ा जो सबसे सबल होता है वो सफल कहलाता है…पर फिर नया रिक्त स्थान पैदा हो जाता है ..कई अर्थो को समेटे है आपका ये रिक्त स्थान …बहुत-२ बधाई आपको …

    yogi sarswat के द्वारा
    April 18, 2012

    आदरणीय महिमा श्री जी , सादर नमस्कार ! आपके विचारों ने दिल प्रफ्फुल्लित कर दिया ! असल में इतने गहरे अर्थ मैंने भी नहीं निकले थे अपने शब्दों के ! बहुत बहुत आभार !

Bhupesh Kumar Rai के द्वारा
April 18, 2012

योगी जी नमस्कार , छोटी सी कविता से बड़ी बात कह दी आपने.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 18, 2012

    आदरणीय श्री राय साब , नमस्कार ! आपको कविता पसंद आई , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखिये ! धन्यवाद

April 18, 2012

जीवन के सूनेपन को दर्शाती हूँ रहस्यात्मक कृति जो दर्शाती है कि बहुत चीज पाने कि कोशिश में कही कोई एक जगह छुट जाती है जो अत्यंत ही महत्वपूर्ण होती है और जीवन भर उस रिक्त स्थान कि पूर्ति के लिए दौड़ भाग करते है. परन्तु हकीकत तो यह है कि इस रिक्त स्थान कि पूर्ति कि चाहत में हम इस जहाँ में एक रिक्त स्थान छोड़ के चले जाते है……..यक़ीनन जीवन का सबसे बड़ा सत्य इसी रिक्त स्थान को होना है…..

    yogi sarswat के द्वारा
    April 18, 2012

    मित्रवर श्री अलीन जी , नमस्कार ! आपकी विस्तृत , सटीक एवं उत्साहजनक प्रतिक्रिया का हार्दिक स्वागत करता हूँ ! कृपया सहयोग और मार्गदर्शन बनाये रखिये ! बहुत बहुत आभार !

Rajesh Dubey के द्वारा
April 18, 2012

रिक्त स्थान के बहाने आपने पुरे जीवन का दर्शन ही इस कविता में उड़ेल दिया है. सुन्दर कविता.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 18, 2012

    श्री राजेश दुबे जी , सादर नमस्कार ! आपकी उत्साहवर्धन करती प्रतिक्रिया मिली , हार्दिक धन्यवाद ! सहयोग बनाये रखें ! आभार

vinitashukla के द्वारा
April 17, 2012

जीवन की कशमकश का सटीक चित्रण. बधाई एवं साधुवाद.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 18, 2012

    आदरणीय विनीता शुक्ला जी सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

y kumar के द्वारा
April 17, 2012

nice words

    yogi sarswat के द्वारा
    April 18, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , कुमार साब ! सहयोग बनाए रखिएगा

nishamittal के द्वारा
April 17, 2012

सार्थक ,संक्षिप्त ,सुन्दर अभिव्यक्ति योगी जी.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 18, 2012

    आदरणीय निशा जी मित्तल , सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! आशीर्वाद बनाये रखें !

ANAND PRAVIN के द्वारा
April 17, 2012

योगी जी, सादर प्रणाम काफी छोटा बम फोड़ा है आपने …………बहुत ही अर्थों को अपने में समेटे हुए है यह…….. किन्तु कुछ कमी सी लग रही है सर…….आप अपने है ..अन्यथा ना ले

    yogi sarswat के द्वारा
    April 18, 2012

    आदरणीय श्री आनंद प्रवीण जी , सादर नमस्कार ! आपको ये छोटा बम पसंद आया , बहुत बहुत आभार ! मित्र आपने कुछ कमी की तरफ इशारा किया है , कृपया बताएं , आपके विचारों का हार्दिक स्वागत करूँगा ! आपका स्नेह मिलता रहेगा , ऐसी आशा करता हूँ ! मित्रवर मैं परिपूर्ण नहीं हूँ , कभी कभी आप लोगों को देखकर लिख लेता हूँ इसलिए कृपया मार्गदर्शन करते रहे ! बहुत बहुत आभार

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
April 17, 2012

achhee abhivyakti |saraswat jee, badhai !!

    yogi sarswat के द्वारा
    April 17, 2012

    आदरणीय आचार्य जी , सादर नमस्कार ! बहुत बहुत आभार मेरे शब्दों पर समय देने के लिए ! सहयोग बनाये रखिये

sinsera के द्वारा
April 17, 2012

योगी जी नमस्कार, ये कविता आपकी थोड़ी रहस्यात्मक लगती है…ये संसार भी तो रिक्त स्थान है…स्पेस …हम ने कहीं से आकर इस को भर दिया और फिर ख़ाली करके चले जायें गे…लेकिन एक बात है.. रहें न रहें हम , महका करें गे, बन के कली, बन के सबा, बाग़े वफ़ा में….

    yogi sarswat के द्वारा
    April 17, 2012

    आदरणीय सरिता जी नमस्कार ! आपने ठीक कहा , ये दुनिया भी तो रिक्त स्थान है ! आपने मेरे शब्दों को समय दिया , बहुत बहुत धन्यवाद ! सहयोग बनाये रखें

ajaydubeydeoria के द्वारा
April 17, 2012

सबकी कहानी……,आपकी जुबानी………

    yogi sarswat के द्वारा
    April 17, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , मित्रवर श्री अजय जी ! सहयोग की अपेक्षा है ! आभार

satish3840 के द्वारा
April 17, 2012

सही बात हें योगी जी / नमस्कार बचपन से लेकर जवानी तक स्कुल से कोलिज तक हम सब रिक्त स्थान भर भर इतने थक गए हें कि आज रिक्त स्थान में खुद ही खुद को भरने का प्रयास कर रहें हें

    yogi sarswat के द्वारा
    April 17, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , आदरणीय श्री सतीश जी ! आपका आशीर्वाद मिला , आभार !


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