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रात सुहानी .....झील किनारा

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रात सुहानी झील किनारा ,पानी में दो पीले पाँव |
चाँद ख़ुशी से चूम रहा है गोरी के चमकीले पाँव ||


सागर तट पर प्रिय से मिलकर जाने वाली सुन

खोल न दें भेदी बनकर , तेरा भेद कहीं ये गीले पाँव ||


तेरे आने की आहट सुनकर ठहर गया है दरिया का पानी

तू कल फिर आएगी ? तेरी राह तकेंगे ये रेतीले पाँव ||


मुमकिन है तेरे ख्वाबों में कोई और ही बसता हो जालिम

तेरे दर पे आते आते , हो गए हैं पथरीले पाँव ||


तेरे दिल में मेरी खातिर लाख नफरत है तो नफरत ही सही

फिर भी उम्मीद ये करता हूँ , एक दिन मेरे घर आयेंगे तेरे ये शर्मीले पाँव ||


एक मैं ही नहीं अकेला जहाँ में, दीवाने हजारों बैठे हैं

जब चलते हैं , क़यामत ढाते हैं , तेरे ये मस्त नशीले पाँव ||


जब झूम झूम कर चलती हो , लाखों की जान निकलती है

जाने कितनों को घायल कर जाते हैं ये कोमल -2 जोशीले पाँव ||


जब जोर- ए- जवानी होता है सबकी इज्ज़त होती है
जब हो जाओगी उम्रदराज़ तो पड़ जायेंगे ये ढीले पाँव ||


( यह ग़ज़ल मैंने बहुत साल पहले कहीं पढ़ी थी , अब आपके लिए प्रस्तुत कर रहा हूँ )

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118 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Wednesday के द्वारा
October 17, 2016

Liverpoolban 3-4 éve odalépett hozzám a buszon zakós, vasalt inges frissen borotvált ötvenes úr, tisztelettel elkérte a jegyem, megköszönte és további jó utat kívánt. Nem akartam elhinni, hogy itt ilyen a bkv elrlÅn‘e.Vigyázz Andris azért mindentÅ‘l ne ájulj el, akkor lesz frankó a blogod ha a szar dolgokat is megírod. Az is van bÅ‘ven in england.

Jaishree Verma के द्वारा
August 15, 2013

बहुत सुंदर श्रृंगार रस से परिपूर्ण कविता योगी सारस्वत जी !

    yogi sarswat के द्वारा
    August 16, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय जय श्री वर्मा जी ! सहयोग बनाये रखियेगा , धन्यवाद

PARVEEN के द्वारा
October 14, 2012

बहुत बढ़िया अति सुंदर रचना योगी जी आप को बहुत -२ धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    October 16, 2012

    शुक्रिया प्रवीण पंवार साब !आपका साथ मिला इस सफ़र में ! हाथ मिलते रहिएगा

'राही अंजान' के द्वारा
May 11, 2012

बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ हैं योगी जी !! आनंद आया….पढ़कर !! :)

    yogi sarswat के द्वारा
    May 12, 2012

    श्री राही जी सादर नमस्कार ! आपको शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग और समर्थन बनाये रखियेगा ! धन्यवाद !

pankaj kumar के द्वारा
May 10, 2012

bahut sundar gazakl yogi gi ! bahut khoob

    yogi sarswat के द्वारा
    May 10, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

alkargupta1 के द्वारा
May 10, 2012

योगी जी ,व्यक्तिगत व्यस्तातावश नेट पर न आने के कारण आपकी यह पोस्ट नहीं देख पाई काफी दिनों बाद मेल बाक्स खोला और वहीँ से आपके लिंक पर पहुंची बहुत बढ़िया ग़ज़ल को पढवाने के लिए हार्दिक आभार !

    yogi sarswat के द्वारा
    May 10, 2012

    आदरणीय अलका गुप्ता जी , सादर नमस्कार ! आपका आशीर्वाद मिला , बहुत बहुत आभार ! सहयोग और समर्थन देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

susheel sharma के द्वारा
May 9, 2012

तेरे आने की आहट सुनकर ठहर गया है दरिया का पानी तू कल फिर आएगी ? तेरी राह तकेंगे ये रेतीले पाँव || bahut sundar panktiyan yogi g !

    yogi sarswat के द्वारा
    May 9, 2012

    नमस्कार ! आपकी प्रतिक्रिया मिली , हार्दिक धन्यवाद !

मनु (tosi) के द्वारा
May 8, 2012

********शुभकामनाएँ ********* वाह !वाह ! अति सुंदर !बेहतरीन योगी जी आपकी कलम को सलाम ! 

    yogi sarswat के द्वारा
    May 9, 2012

    तोशी जी , सादर नमस्कार ! सच कहूं तो आपका इंतज़ार था मुझे मेरे ब्लॉग पर आने का ! आपका समर्थन और सहयोग मिलता रहता है इसलिए उम्मीद और भी बढ़ जाती है ! बहुत बहुत आभार !

anant singh के द्वारा
May 7, 2012

nice words

    yogi sarswat के द्वारा
    May 8, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद् ! आगे भी आपके सहयोग और समर्थन की कामना करता हूँ !

    Brandy के द्वारा
    October 17, 2016

    Glad I’ve finally found somtnhieg I agree with!

Abhinav Srivastava के द्वारा
May 7, 2012

सुन्दर ग़ज़ल प्रस्तुत करने के लिए बधाई …योगी जी…!

    yogi sarswat के द्वारा
    May 8, 2012

    मित्रवर श्री अभिनव जी , सादर नमस्कार ! आपको शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! आशा करता हूँ आगे भी आपका सहयोग और समर्थन मिलता रहेगा ! धन्यवाद !

narayani के द्वारा
May 7, 2012

नमस्कार योगी जी सुंदर भाव पूर्ण गजल से रूबरू करवाने के लिए बहुत धन्यवाद . नारायणी

    yogi sarswat के द्वारा
    May 8, 2012

    आदरणीय नारायणी जी , सादर नमस्कार ! आप मेरे ब्लॉग पर आये , आपका हार्दिक अभिनन्दन ! अपना सहयोग और समर्थन देने के लिए , अआप्का बहुत बहुत आभार !

Bhupesh Kumar Rai के द्वारा
May 7, 2012

योगी जी नमस्कार, बहुत सुन्दर ! एक सुन्दर रचना पढने के लिए उपलब्ध कराने के लिए आपका धन्यवाद.

    yogi sarswat के द्वारा
    May 7, 2012

    श्री राय साब , सादर नमस्कार ! मेरे द्वारा लिखे गए शब्दों को आपका सहयोग और समर्थन मिला , बहुत बहुत आभार ! आशा है आगे भी आपका समर्थन और आशीर्वाद यूँ ही मिलता रहेगा ! बहुत बहुत धन्यवाद !

vasudev tripathi के द्वारा
May 6, 2012

योगी सारस्वत जी, श्रंगार की सुन्दर अभिव्यक्ति! पुरानी गजल को आपने याद रखा और यहाँ पर लिखा, धन्यवाद!!!

    yogi sarswat के द्वारा
    May 7, 2012

    श्री वासुदेव जी , नमस्कार ! ये ग़ज़ल मुझे अच्छी लगी थी , मुझे पसंद आई तो सोचा आप लोगों के लिए प्रस्तुत करता हूँ ! आपको अच्छी लगी , बहुत बहुत आभार ! सहयोग और समर्थन बनाये रखियेगा !

praveen panwar के द्वारा
May 5, 2012

योगी जी बहुत अच्छी ग़ज़ल आप को बार -२ धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    May 5, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , मित्रवर !

satya sheel agrawal के द्वारा
May 5, 2012

योगी जी,कविता के रूप में श्रृंगार की सुन्दर अभिव्यक्ति की है आपने.

    yogi sarswat के द्वारा
    May 5, 2012

    आदरणीय श्री सत्यशील अग्रवाल जी , सादर नमस्कार ! आपकी शब्द पसंद आये , बहुत बहुत शुक्रिया ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा !

    Disney के द्वारा
    October 17, 2016

    I think it is all tied into societal bonding, practicing how to live in the adult world and finding ones role within it, combined with the defensive agnisservegess to protect family, community and nation that we naked apes use to survive.

praveen panwar के द्वारा
May 5, 2012

योगी जी बहुत अच्छी ग़ज़ल | बस युही लिक्ठे रहो धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    May 5, 2012

    बहुत अभूत धन्यवाद , प्रवीण जी ! आगे भी आपके विचारों का इन्तेज़र रहेगा !

motibhagia के द्वारा
May 5, 2012

सुंदर भावना अंतिम पंक्ति ढीले पांव बदल दो लिखो पूजा के पांव

    yogi sarswat के द्वारा
    May 5, 2012

    नमस्कार मोती भगिया जी , आपने मेरे शब्दों को समय और अपने विचार दिया , बहुत बहुत आभार ! आपकी बात का सम्मान करता हूँ कोशिश करूँगा की आपकी सलाह पर खरा यत्र सकूं ! आगे भी आपके सहयोग और समर्थन की कामना करता हूँ ! धन्यवाद !

D33P के द्वारा
May 4, 2012

तेरे दर पे आते आते , हो गए हैं पथरीले पाँव || एक दिन मेरे घर आयेंगे तेरे ये शर्मीले पाँव… बहुत खूब योगी जी प्रिय के इंतज़ार का इतना खूबसूरत वर्णन ……. पर इंतज़ार से आहत होकर यही भाव आये है – जब जोर- ए- जवानी होता है सबकी इज्ज़त होती है जब हो जाओगी उम्रदराज़ तो पड़ जायेंगे ये ढीले पाँव |

    yogi sarswat के द्वारा
    May 5, 2012

    आदरणीय दीप्ति जी , सादर नमस्कार ! आप मेरे ब्लॉग पर आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग और समर्थन बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

सुभाष वाधवा के द्वारा
May 4, 2012

अच्छी है कहानी ” रात सुहानी–” “झील किनारा” -डूबे न दिल तुम्हारा हर पीली चीज सोना नहीं होती इस बात का रखना तुम ध्यान ज़ख़्म कर देती है तलवार बिन म्यान जैसे सुंदर शब्दों से सजी है ग़ज़ल तुम्हारी ऐसे खुशिओं से भरी रहे जिंदगी तुम्हारी सुभाष वाधवा ,फरीदाबाद

    yogi sarswat के द्वारा
    May 4, 2012

    आदरणीय श्री वाधवा जी , सादर नमस्कार ! आपकी प्रतिक्रिया का अंदाज़ बहुत पसंद आया ! आप इस मंच पर आये और मेरे शब्दों को समय एवं विचारो से नवाज़ा , आपका बहुत बहुत आभार !

yamunapathak के द्वारा
May 4, 2012

अच्छी ग़ज़ल

    yogi sarswat के द्वारा
    May 4, 2012

    आदरणीय यमुना जी , सादर नमस्कार ! आपको शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग और समर्थन की कामना करता हूँ ! धन्यवाद

birju के द्वारा
May 4, 2012

योगी जी वाह ! ……शानदार ग़ज़ल के लिए …हार्दिक धन्यवाद …..

    yogi sarswat के द्वारा
    May 4, 2012

    आदरणीय श्री बिरजू जी , नमस्कार ! आप मेरे ब्लॉग पर आये और शब्दों को समर्थन दिया , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद !

jlsingh के द्वारा
May 4, 2012

योगी जी, सादर अभिवादन! इतने रोमांटिक गजल मत पेश करिए कही चोरी न हो जाय, पांव सहित भारी पांव ! इन्हें जमीन पर मत उतारिये, मैले हो जायेंगे!

    yogi sarswat के द्वारा
    May 4, 2012

    आदरणीय श्री जवाहर जी सादर नमस्कार ! कभी कभी तो रोमांटिक होने दीजिये लोगों को ? क्या पता रिचार्ज हो जायें ? बहुत बहुत आभार , आपने मेरे ब्लॉग पर आये और समय के साथ साथ अपने विचार दिए ! सहयोग बनाये रखियेगा !

Lovely anand के द्वारा
May 3, 2012

बहुत खूब , योगी जी ! बहुत सुन्दर भावों से सजी ग़ज़ल दी आपने इस मंच को ! बहुत बढ़िया शेर ! और शब्द

    yogi sarswat के द्वारा
    May 4, 2012

    लावली जी , नमस्कार ! आपको शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! कृपया सहयोग बनाये रखियेगा !

y kumar के द्वारा
May 3, 2012

बहुत सुन्दर ग़ज़ल , योगी जी ! जिसने भी लिखी है पूरे मनोयोग से लिखी है , और आप इसे इस मंच पर लाये , बहुत बहुत धन्यवाद !

    yogi sarswat के द्वारा
    May 4, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , कुमार साब ! सहयोग बनाये रखियेगा !

munish के द्वारा
May 3, 2012

आपके पाँव देखे बहुत हसीं हैं इन्हें ज़मीन पर मत रखियेगा मैले हो जायेंगे ……………! आदरणीय योगी जी पैरों को बहुत अच्छे ढंग से चित्रित किया आपने ….. हालांकि कुछ पंक्तियों में सुधार की गुंजाइश मुझे लगती है ज़रा गौर कीजियेगा खास तौर पर हर पहरे की दूसरी पंक्ति पर

    yogi sarswat के द्वारा
    May 4, 2012

    आदरणीय मुनीश जी , सादर नमस्कार ! स्पष्ट कहना चाहता हूँ की ये शब्द मेरे अपने नहीं हैं ! जैसे मुझे पत्रिका में दिखे वैसे ही यहाँ प्रस्तुत कर दिए हैं ! आपकी बात का सम्मान करता हूँ और अपनी आगे की रचनाओं में इस बात का ख्याल रखूँगा ! आप मेरे ब्लॉग पर आये और अपने विचार दिए , बहुत बहुत आभार ! कृपया आगे भी समर्थन और सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

minujha के द्वारा
May 3, 2012

इतनी अनूठी और अच्छी गज़ल ,वो भी शरीर के सबसे उपेक्षित अंग पर ,लिखने वाले के साथ साथ प्रस्तुत करने वाले को भी ढेरों बधाईयां,बहुत सुंदर

    yogi sarswat के द्वारा
    May 4, 2012

    आदरणीय मीनू झा जी सादर नमस्कार ! आपको ये शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! आगे भी आपके सहयोग और समर्थन की कामना करता हूँ !@ धन्यवाद

MAHIMA SHREE के द्वारा
May 3, 2012

रात सुहानी झील किनारा ,पानी में दो पीले पाँव | चाँद ख़ुशी से चूम रहा है गोरी के चमकीले पाँव || सागर तट पर प्रिय से मिलकर जाने वाली सुन खोल न दें भेदी बनकर , तेरा भेद कहीं ये गीले पाँव ||……. आदरणीय योगी जी … बहुत सुंदर गजल ….. बधाई आपको … उपरोक्त पंक्तियाँ मुझे बहुत अच्छी लगी ..

    yogi sarswat के द्वारा
    May 4, 2012

    आदरणीय महिमा श्री जी , सादर नमस्कार ! आप को शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! आपके समर्थ और सहयोग की आगे भी उम्मीद रहेगी ! शुक्रिया !

ajay kumar pandey के द्वारा
May 2, 2012

योगी जी नमस्कार आपकी यह गजल अच्छी लगी आपने बहुत खूब लेखन किया है और आपका यह लेखन बढ़िया लगा जब पता चला की आप आकाशवाणी में भी उद्घोषक रहे तो अच्छा लगा गजल अच्छी है बहुत खूब योगी जी ऐसे ही मुझपर अपनी कृपा बनाये रखें आप मेरे ब्लॉग पर यह पोस्ट देखें एक मजदूर की जिंदगी का महत्त्व धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    May 3, 2012

    श्री अजय कुमार पाण्डेय जी , सादर नमस्कार ! आपको ये शब्द पसंद आये , बहुत अच्छा लगा ! नहीं मित्रवर मैं आकाशवाणी में उद्घोषक नहीं रहा , मैंने अपनी कवितायेँ आकाशवाणी केंद्र पर उनका पाठ किया है तीन चार बार ! आपने मेरे शब्दों को समय दिया और अपने विचार रखे , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा !

sanjay dixit के द्वारा
May 2, 2012

वाह बहुत खूब योगी जी ,आनन्द आ गया इन पंक्तियों को पढ़कर

    yogi sarswat के द्वारा
    May 3, 2012

    श्री संजय दीक्षित जी , सादर नमस्कार ! आपको पंक्तियाँ अच्छी लगीं , मेरा मकसद सफल हुआ ! बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद !

chaatak के द्वारा
May 2, 2012

योगी जी, सादर अभिवादन, इन खूबसूरत पंक्तियों को मंच तक लाने का धन्यवाद!

    yogi sarswat के द्वारा
    May 2, 2012

    श्री चातक जी सादर नमस्कार ! आपको ये अल्फाज़ पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग और समर्थन देते रहिएगा ! धन्यवाद

div81 के द्वारा
May 2, 2012

मंच में गजल को सभी के साथ साझा करने के लिए आप का आभार

    yogi sarswat के द्वारा
    May 2, 2012

    आदरणीय दिव्या जी , नमस्कार ! आपको ये अल्फाज़ पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग और समर्थन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

vinitashukla के द्वारा
May 2, 2012

सुन्दर गजल से रूबरू कराने के लिए आभार.

    yogi sarswat के द्वारा
    May 2, 2012

    आदरणीय विनीता शुक्ला जी , सादर नमस्कार ! आपको ये अल्फाज़ पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग और समर्थन देते रहिएगा !

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 2, 2012

javani ke din 4 yaar. snehi yogi ji saadar. paanv jamin par mat rakho maele ho jayenge. aakhiri line maen dhamki kyon de di. badhai.

    yogi sarswat के द्वारा
    May 2, 2012

    आदरणीय श्री प्रदीप कुशवाहा जी , सादर नमस्कार ! ये मेरे शब्द नहीं हैं , इसलिए धमकी कैसे दूंगा ? लेकिन कुछ हकीकत सी तो लगती है ! आपको अल्फाज़ पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! एक बात और , आप बहुत दिनों से लिख नहीं रहे हैं ?

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
May 2, 2012

मुमकिन है तेरे ख्वाबों में कोई और ही बसता हो जालिम तेरे दर पे आते आते , हो गए हैं पथरीले पाँव बहुत सुन्दर, योगी जी.

    yogi sarswat के द्वारा
    May 2, 2012

    आदरणीय श्री राजीव कुमार झा जी , सादर नमस्कार ! आपको अल्फाज़ पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग और समर्थन बनाये रखियेगा ! धन्यवाद !

alokmohan के द्वारा
May 2, 2012

मुमकिन है तेरे ख्वाबों में कोई और ही बसता हो जालिम तेरे दर पे आते आते , हो गए हैं पथरीले पाँव || वाह वाह वाह

    yogi sarswat के द्वारा
    May 2, 2012

    मित्रवर श्री अलोक मोहन जी , सादर नमस्कार ! आपका मेरे ब्लॉग पर हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ ! आपको शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! आगे भी आपके समर्थन की कामना करता हूँ ! धन्यवाद !

satish3840 के द्वारा
May 2, 2012

योगी जी आप प्रतिभा के धनी हें / आप कवी भी हें , लेखक भी हें और व्यग्कार भी / जब जोर- ए- जवानी होता है सबकी इज्ज़त होती है जब हो जाओगी उम्रदराज़ तो पड़ जायेंगे ये ढीले पाँव || सही हें उगते सूरज , खिलते फ़ूल को सभी सलाम करते हें /

    yogi sarswat के द्वारा
    May 2, 2012

    आदरणीय श्री सतीश जी , सादर नमस्कार ! आपका सहयोग और समर्थन लगातार मिल रहा है , बहुत बहुत धन्यवाद ! ये सब आपके आशीर्वाद से ही संभव हो पा रहा है की मैं थोडा कुछ लिख पा रहा हूँ ! आपको अल्फाज़ पसंद आये , बहुत बहुत आभार !

akraktale के द्वारा
May 2, 2012

योगी जी सादर नमस्कार, यादों के खजाने से निकली सुन्दर रचना. बधाई. तेरे दिल में मेरी खातिर लाख नफरत है तो नफरत ही सही फिर भी उम्मीद ये करता हूँ , एक दिन मेरे घर आयेंगे तेरे ये शर्मीले पाँव || घर दूर और राह कठिन है गौरी सम्भल सम्भल कर रखना पाँव. दूर किनारा राह बेगानी भय अनजाना और लुटेरे चोरों का गाँव. क्षमा करें मैंने आपकी सुन्दर रचना में आपकी अनुमति के बिना थोड़ा अपना व्यंग भी शामिल कर दिया है.

    yogi sarswat के द्वारा
    May 2, 2012

    आदरणीय श्री रक्ताले साब , सादर नमस्कार ! ये तो आपने इस ग़ज़ल में अपना खूबसूरत अंदाज़ जोड़कर इसकी शोभा को और भी बढ़ा दिया ! बहुत बहुत धन्यवाद !

dineshaastik के द्वारा
May 2, 2012

तेरे आने की आहट सुनकर ठहर गया है दरिया का पानी तू कल फिर आएगी ? तेरी राह तकेंगे ये रेतीले पाँव || योगी जी बहुत ही् खूबसूरत पंक्तियाँ…बधाई……

    yogi sarswat के द्वारा
    May 2, 2012

    श्री आस्तिक जी , सादर नमस्कार ! आपको अल्फाज़ पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

jalaluddinkhan के द्वारा
May 2, 2012

“रात सुहानी झील किनारा ,पानी में दो पीले पाँव | चाँद ख़ुशी से चूम रहा है गोरी के चमकीले पाँव ||” ज़ोरदार पंक्तियों से आपने शुरुआत की.कविता का सारा हुस्न सिमट कर इन दो पंक्तियों में आ गया.सुन्दर.

    yogi sarswat के द्वारा
    May 2, 2012

    श्री जलालुद्दीन खान साब , सादर नमस्कार ! आपको ये अल्फाज़ पसंद आये , मेरा लेखन सार्थक हुआ सा लगता है ! बहुत बहुत आभार ! सहयोग और समर्थन बनाये रखें ! धन्यवाद

rajkamal के द्वारा
May 1, 2012

अगर मिल जाए वोह कहीं गोद में उठाये उन्हें घूमता रहूँ मैले होने के डर से ज़मीं पर पाँव रखने ना दू उन्हें कभी (पता नहीं आपकी उस जादू की पुड़िया (डायरी ) में और कौन -२ सी कयामते शेष है ?

    yogi sarswat के द्वारा
    May 2, 2012

    आदरणीय श्री राजकमल जी , सादर नमस्कार ! आप इतना बेहतर लिखते हैं , आप से ही सीखकर . आपको गुरु द्रोणाचार्य मानकर , और स्वयं को एकलव्य मानकर साहित्य साधना कर रहा हूँ ! सफल हो जाये – आशीर्वाद देते रहिये ! जादू की पुडिया में सर , कयामतें तो नहीं , हाँ छोटे -मोटे आइटम जरूर हैं ! एक एक करके आपकी अनुमति से प्रस्तुत करता रहूँगा ! लेकिन आशीर्वाद चाहिए होगा आपका ! बहुत बहुत आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 1, 2012

आदरणीय योगेन जी, सादर ! मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा है कि यह रचना आपने पोस्ट की ! न गद्य में – न पद्य में ! कम से कम आपको इनका उचित संशोधन तो कर ही देना चाहिए था ! इतने अच्छे भाव ! मुझे लगता है मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए ! क्षमा !

    yogi sarswat के द्वारा
    May 2, 2012

    आदरणीय श्री शशि भूषण जी , सादर नमस्कार ! आप मुझसे क्षमा मांगकर मुझे शर्मिंदा कर रहे हैं ! आपका एक एक शब्द मेरे लिए बहुत मायने रखता है , इसलिए आप ने जो लिखा है बहुत सोचकर ही लिखा होगा ! मैंने बस इसी वज़ह से इसे पोस्ट किया क्योंकि मुझे इसके अशआर अच्छे लगे थे और सोचा की इस खूबसूरत ग़ज़ल को आप लोगों तक पहुंचाऊं ! बस यही मकसद था ! आपका यहाँ तक आना और अपने विचार प्रस्तुत करना मेरे लिए बड़ी बात है ! एक बात स्पष्ट करना चाहता हूँ – मैं आपसे सीख रहा हूँ और आपसे अनुरोध करता हूँ की आप मेरे लेख / ग़ज़ल /कविताओं पर बिना हिचकिचाहट के अपने विचार प्रस्तुत करें जिससे मेरे लेखन में सुधर हो सके ! मुझे पूरा विश्वास है की आप मुझे अपना आशीर्वाद अवश्य देंगे !

ajaydubeydeoria के द्वारा
May 1, 2012

योगी जी नमस्कार , आपके ये पाँव बड़े नाजुक हैं, इन्हें जमीं पे न रखियेगा वरना मैले हो जायेंगे. आपने चाहें जहाँ से भी ली हो लेकिन ग़ज़ल बहुत ही सुन्दर है, जैसे गोरी के चमकीले पाँव. बधाई………

    yogi sarswat के द्वारा
    May 2, 2012

    मित्रवर अजय दुबे जी , सादर नमस्कार ! मेरे पाँव अब नाज़ुक नहीं रह गए हैं क्योंकि चप्पल घिसते घिसते राह के कंकड़ पैरों तक भी पहुच गए थे ! आपका समर्थन लगातार मिल रहा है जिससे लिखने का उत्साह और भी बढ़ जाता है ! बहुत बहुत आभार ! सहयोग की कामना करता हूँ !

nishamittal के द्वारा
May 1, 2012

योगी जी रस की वर्षा और साथ में सन्देश जब हो जाओगी उम्रदराज़ तो पड़ जायेंगे ये ढीले पाँव ||

    yogi sarswat के द्वारा
    May 2, 2012

    आदरणीय निशा जी मित्तल , सादर नमस्कार ! स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूँ की ये मेरे शब्द नहीं हैं ! मैंने बहुत सालों पहले ये ग़ज़ल पढ़ी थी , मुझे पसंद आई तो लिख ली और अब आपके लिए हाज़िर कर दी ! आपको मेरा ये प्रयास पसंद आया , बहुत बहुत आभार ! अभी असल में यूनिवर्सिटी के एक्साम चल रहे हैं तो ज्यादा वक्त नहीं दे पा रहा हूँ इसलिए स्वरचित रचना नहीं पोस्ट करी ! आपकी प्रतिक्रिया मिली , हार्दिक धन्यवाद

vikramjitsingh के द्वारा
May 1, 2012

योगी जी….प्रणाम…. अच्छा जी, तो आप ये ‘काम’ भी करते हो….. आपके इस नए रंग के तो बलिहारी जाने को दिल करता है…. ”कुर्बान जाऊं आपकी इस चाल-ढ़ाल के….. रख दूं कदम-कदम पे कलेजा निकाल के……”

    yogi sarswat के द्वारा
    May 2, 2012

    मित्रवर श्री विक्रमजीत सिंह जी , नमस्कार ! आपने काम को परिभाषित नहीं किया , मैं समझ नहीं पाया ! मित्रवर ये तो आपका बड़प्पन है जो आप इस लायक समझते हैं हमें ! बहुत बहुत आभार !

vikasmehta के द्वारा
May 1, 2012

vah kya gajal hai ati sundr yah ek lain sabhi ko yad rakhni chahiye जब जोर- ए- जवानी होता है सबकी इज्ज़त होती है जब हो जाओगी उम्रदराज़ तो पड़ जायेंगे ये ढीले पाँव |

    vikasmehta के द्वारा
    May 1, 2012

    यह गजल महिलाओ के लिए है अथवा उन्ही पर बनी है तो उन्हें ही इन लाइनों को जीवन भर याद रखना चाहिए ! जब जोर- ए- जवानी होता है सबकी इज्ज़त होती है जब हो जाओगी उम्रदराज़ तो पड़ जायेंगे ये ढीले पाँव |

    yogi sarswat के द्वारा
    May 2, 2012

    मित्रवर श्री विकास जी , नमस्कार ! आपको ये शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा

    yogi sarswat के द्वारा
    May 2, 2012

    श्री विकास जी , नमस्कार ! ग़ज़ल कार पता नहीं कब क्या लिखे , हाँ ये जरूर है की जब वो अल्फाज़ लिखता है तो उसके दिमाग में कोई सूरत /कोई मूरत जरूर होती है !

कुमार गौरव के द्वारा
May 1, 2012

योगी जी सादर. बड़ी रंगीन गजल प्रस्तुत की आपने| बधाई….

    yogi sarswat के द्वारा
    May 1, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , मित्रवर गौरव जी ! सहयोग और समर्थन बनाये रखियेगा ! आभार

sadhna के द्वारा
May 1, 2012

बहुत सुन्दर…. मज़ा आया पढ़ कर…. :)

    yogi sarswat के द्वारा
    May 1, 2012

    बहुत बहुत आभार , साधना जी ! सहयोग बनाये रखियेगा !

sinsera के द्वारा
May 1, 2012

योगी जी, …आदत से मजबूर हूँ….हाथ कुलबुला रहे हैं…लिखूंगी तो ज़रूर चाहे जान चली जाये…. …..अर्ज़ है.. “इतना न इतराओ गोरी सोच समझ कर राह चलो, पछताओ गी रोवो गी जब हो जायें गे हो जायें गे भारी पाँव.” बहुत प्यारी रोमांटिक कविता की वाट लगाने केलिए क्षमा चाहती हूँ ….

    yogi sarswat के द्वारा
    May 1, 2012

    आदरणीय सरिता जी नमस्कार ! आप कह रही हैं की आपने अच्छी खासी रचना की बाट लगा दी ? मैं तो इसे आपका समर्थन और स्नेह मानकर चलता हूँ की आप इस ब्लॉग पर आये और अपने विचार दिए ! आभार

    vikasmehta के द्वारा
    May 1, 2012

    sisera ji vat nhi gajal apne or bhi adhik chmka di इतना न इतराओ गोरी सोच समझ कर राह चलो, पछताओ गी रोवो गी जब हो जायें गे हो जायें गे भारी पाँव.

    yogi sarswat के द्वारा
    May 2, 2012

    श्री विकास मेहता जी नमस्कार ! सही कहा आपने , आदरणीय सरिता जी ने बहुत बढ़िया शे’र लिखकर इस ग़ज़ल को और भी खूबसूरत बना दिया है !

rekhafbd के द्वारा
May 1, 2012

आदरनीय योगी जी ,अति सुंदर प्रस्तुति फिर भी उम्मीद करता हूँ एक दिन मेरे घर आयें गे तेरे ये शर्मीले पाँव बहुत बहुत बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    May 1, 2012

    आदरणीय रेखा जी , सादर नमस्कार ! आपकी बधाई दिल से स्वीकार करता हूँ ! आभार

mparveen के द्वारा
May 1, 2012

योगी जी नमस्कार बहुत अच्छी ग़ज़ल है जिन किसी ने लिखी उनका भी धन्यवाद और आप हमारे बीच लाये आपको डबल धन्यवाद .

    yogi sarswat के द्वारा
    May 1, 2012

    आदरणीय प्रवीण मालिक जी , सादर नमस्कार ! आपका बहुत बहुत धन्यवाद , आप इस ब्लॉग पर आये और अपने विचार दिए ! आभार

Mohinder Kumar के द्वारा
May 1, 2012

योगी जी, सुन्दर भावों की अभिव्यक्ति की है आपने अपने गीत में. शब्दों का समायोजन भी सटीक बन पडा है.

    yogi sarswat के द्वारा
    May 1, 2012

    श्री मोहिंदर कुमार जी , नमस्कार ! ये असल में किसी और के शब्द हैं , मेरे नहीं ! लेकिन किसके हैं मैं भी नहीं जानता ! अच्छे लगे तो आपके लिए हाज़िर कर दिए ! आपको पसंद आये बहुत बहुत आभार

ANAND PRAVIN के द्वारा
May 1, 2012

आदरणीय योगी जी, सादर प्रणाम लाजवाब गजल पढ़ कर आनंद आ गया……………..किन्तु आखिर में यह पढ़ कर की यह आपने सुनी थी शंका हो रही है की यह आपकी है या नहीं कृपया समाधान करें……………और यदि किसी और की है तो नाम जानने की उत्सुकता लगी रहेगी…………जो भी हो एक खुबसूरत नगमा हमारे बिच लाने ले लिए आपका धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    May 1, 2012

    मित्रवर आनंद प्रवीण जी , ये ग़ज़ल मैंने करीब ८-१० वर्ष पहले किसी पत्रिका में पढ़ी थी , इसलिए लेखक का नाम याद नहीं है ! हाँ , मुझे अच्छी लगी थी तो मैंने अपनी डायरी में लिख ली थी और आज आपके समक्ष प्रस्तुत कर दी ! आपको पसंद आई , बहुत बहुत आभार !

चन्दन राय के द्वारा
May 1, 2012

योगी भाई , मुझे भी आपकी प्रस्तुत गजल पढ़कर पाँव पर कही बात याद आ गई , आपके पैर देखे , बहुत खुबसूरत है इन्हें जमीन पर ना रखियगा मैले हो जायेंगे , भाई आपका भी जबाब नहीं !

    yogi sarswat के द्वारा
    May 1, 2012

    मित्र चन्दन राय जी , आपकी कृपा बरस रही है बस ! और क्या चाहिए ! आगे भी कृपा द्रष्टि बनाये रखिये तो हौसला अफजाई बनी रहेगी !

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
May 1, 2012

pad jayenge peeke panv ! ek-ek sher damdar, yogee jee! badhai !!

    yogi sarswat के द्वारा
    May 1, 2012

    श्री आचार्य जी , नमस्कार ! आपको ये शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग और समर्थन बनाये रखियेगा !


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