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अगर भ्रष्टाचार खत्म हो गया तो ?

Posted On: 7 May, 2012 Others में

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मान के चलिए कि अन्ना हजारे जी के आन्दोलन ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया और लोगों के दिमाग बदलने लग गए | लोगों ने रिश्वत लेना और देना बंद कर दिया और कमीशन से तौबा कर ली ……….| नेताओं और अधिकारियों के मन ने उनको धिक्कारना शुरू कर दिया | घर में रिश्वत के पैसे लाने पर बीवी और बच्चों ने धिक्कारना शुरू कर दिया | मतलब ये कि भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों की आत्मा ने उन्हें कचोटना शुरू कर दिया , उनका जमीर जाग गया तो ……………? सोचिये कितना बड़ा नुक्सान हो जायेगा अगर ऐसा हो गया तो ? फिल्म वालों के लिए वैसे ही कहानी का अकाल पड़ा रहता है हर तीसरी फिल्म तो भ्रष्टाचार पर होती है , भ्रष्टाचार नहीं रहेगा तो फिर कहानी कैसे मिलेगी ? सोचिये उस बेचारे मुसद्दी का जिसने ऑफिस ऑफिस खेलते खेलते अपने बच्चों को पाला और उस को हीरो भी बना दिया | सुनते हैं अब वही मुसद्दी एक फिल्म ” मौसम” भी बना रहा है | आप ही बताइए अगर भ्रष्टाचार नाम का धंधा न रहा होता तो ये बेचारे कैसे जीवन यापन करते ? और अपना वो राम गोपाल वर्मा , जानते तो हैं न ? वो तो कहीं भुट्टा ही बेच रहा होता | फिर भी आप कहते हैं कि इस भ्रष्टाचार को ख़तम करें | काहे भाई ? काहे औरों के पेटों पर लात मार देना चाहते हैं | तनिक उनका भी तो सोचिये जो “कुछ” पाने के चक्कर में नेता जी के इधर उधर लगे रहते हैं ? भले ही दुनिया उन्हें चमचा कहे , मगर उन्हें भी तो अपना घर चलाना है कि नाही ? अगर नेता जी को कहीं से कमीशन या नजराना नहीं मिलेगा तो वो अपने चमचों को क्या देंगे ? अगर चमचों को चासनी नहीं मिलेगी तो वो फिर उधर क्यों मुहं मारने जायेंगे ? और जो वो मुहं मारने वहां नहीं जायेंगे तो नेता जी को पूछेगा कौन ? फिर कैसी राजनीति और काहे के लिए राजनीति ? बिना किसी फायदे के लिए कोई कुछ करता है क्या ? अब वो भगवान श्री कृष्ण तो हैं नहीं कि सोच लें ” कर्म किये जा फल कि इच्छा मत कर |”


इस भ्रष्टाचार के खेल से जाने कितनो के घर चलते हैं | टी.वी. की टी.आर.पी. से रिपोर्टर की तनख्वाह बढती है , अखबार के समाचारों से पत्रकारों का घर चलता है | कुछ नहीं तो कम से कम हम जैसे तुच्छ साहित्यकारों के बारे में ही सोचिये जिन्हें भ्रष्टाचार पर लिखने से कुछ संतुष्टि मिल जाती है |


तो भैया जैसा चल रहा है चलने देने में ही क्या बुराई है ? जब हमारे इतने गुनी और योग्य प्रधानमंत्री को इसमें कोई बुराई नज़र नहीं आती तो आप काहे खामखाँ परेशान होते हैं |

ओम प्रकाश आदित्य जी की एक कविता , इस लेख को कुछ  और बड़ा करने और रोचक बनाने के लिए साथ में दे रहा हूँ !

इधर भी गधे हैं , उधर भी गधे हैं
जिधर देखता हूँ , गधे ही गधे हैं  ||

गधे हँस रहे हैं , आदमी रो रहा है
हिंदुस्तान में ये क्या हो रहा है  ?

ये दिल्ली ये पालम गधों के लिए है
ये संसार सालम गधों के लिए है  ||

मुझे माफ़ करना मैं भटका हुआ था
वो थर्रा था जो भीतर अटका हुआ था !!

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136 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Butterfly के द्वारा
October 17, 2016

Ja, henne kan du virkelig være stolt over på alle områder! En vakker jente! Og ja, virkelig fotogen, det er sikkert!! 3 år er nå enda en stund frem så mye kan skje på den tiden!! Masse lykke til uansett hva livet måtte bringe!! En virkelig vakker hyllest av både mor og datHre!!ta en strålende helg!

sunit mittal के द्वारा
May 23, 2012

ढेचू-ढेचू अगर संसार सारा गधों केिलए है तो गधा ही बन कर देख लेते है।

    yogi sarswat के द्वारा
    May 25, 2012

    बिलकुल ठीक बात है मित्रवर ! प्रतिक्रया के लिए बहुत बहुत आभार !

    Cherlin के द्वारा
    October 17, 2016

    You’re on top of the game. Thanks for shargni.

prabhatkumarroy के द्वारा
May 20, 2012

योगी सारस्वत का अच्छा लेख  है। अब वो भगवान श्री कृष्ण तो हैं नहीं कि सोच लें ” कर्म किये जा फल कि इच्छा मत कर |” सटीक  लिखा है।

    yogi sarswat के द्वारा
    May 20, 2012

    बहुत बहुत आभार , श्री रॉय साब ! आपको लेखन पसंद आया और अपना आशीर्वाद दिया ! सहयोग और समर्थन बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

    Kenisha के द्वारा
    October 17, 2016

    Ayuku: Tak jako já pokud si můžu vybrat, co potáhnu v kufru přes dvě hodiny tam a prodoěpdvabně i zpět, bude to spíš jídlo, nebo tak něco :/Ale podívám se ;) Nebo máš o něco zájem? :D

    Lainey के द्वारा
    October 18, 2016

    I don’t really know what this was about  -  a human interest story to break up the monotony of endless political stories.   His retarded disabled brother has value in his ey2t#&8e30;shats good.   He does not have much value in my eyes.  I didn’t know him or want to know him.   In my life my dogs have value in [...]

ajay के द्वारा
May 17, 2012

ये दिल्ली ये पालम गधों के लिए है ये संसार सालम गधों के लिए है || बहुत सटीक व्यंग्य , योगी जी

    yogi sarswat के द्वारा
    May 17, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद श्री अजय कुमार जी ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार

    Tike के द्वारा
    October 17, 2016

    Same problem as the others!! Error message after snorkling. Card coapmrtment open! but it was not. Not sure if Olympus will honour the warranty but hope so!Has anyone got it to work again after drying it out?

aarti के द्वारा
May 17, 2012

तो भैया जैसा चल रहा है चलने देने में ही क्या बुराई है ? जब हमारे इतने गुनी और योग्य प्रधानमंत्री को इसमें कोई बुराई नज़र नहीं आती तो आप काहे खामखाँ परेशान होते हैं | भ्रष्टाचार ख़त्म नहीं होने वाला है , आप परेशां मत होइए ! बढ़िया लेखन

    yogi sarswat के द्वारा
    May 17, 2012

    हुत बहुत धन्यवाद आरती जी ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार

yamunapathak के द्वारा
May 15, 2012

योगीजी,सन्देश बहुत अच्छा है पर एक अध्यापिका होने के नाते अंतिम पंक्ति से सहमत नहीं हूँ ये गलत सन्देश देगा आज हमें वृक्ष का इंधन के रूप में प्रयोग रोकना है. दरअसल यहाँ आस-पास के गाँव में जाकर हम लोगों को समझाने का काम करते हैं की वे लकड़ी को इंधन के रूप में इस्तेमाल नाकर गोबर ,धान की भूसी,इत्यादि को जला सकते हैं साथ ही गोबर गैस के बात भी समझाई जाती है. परमार्थ के लिए आप एक पंक्ति इस तरह रचिए जिसमें बच्चे अपनी शरारत को भी याद करें मसलन “पत्थर वृक्ष पर फेंकने पर भी वह आपको अपने फल देता है.” बाल मनोविज्ञान से प्रेरित होकर थोडा सा हस्तक्षेप किया है इस रचना में आशा है आप बिलकुल नाराज़ नहीं होंगे. बच्चों की शिक्षा के मामले में मैं कहीं भी समझौता नहीं कर पाती,परिवार के मूल्य और बच्चों की शोक्षा मेरे लिए हमेशा से शोध का विषय रहे हैं. आपकी अगली रचना के इंतज़ार में,पर फिर से एक गुजारिश आप नाराज़ ना होइएगा.o .k ????????????

    yamunapathak के द्वारा
    May 15, 2012

    योगीजी,यह तकनीक गलती हो गयी.यह “यह वृक्ष “ब्लॉग के लिए है.

    yogi sarswat के द्वारा
    May 15, 2012

    आदरणीय यमुना जी , एक बारी मैं भी समझ नहीं पाया की इस ब्लॉग पर आप दूसरे की बात कैसे लिख रही हैं ! ख़ुशी हुई आपकी प्रतिक्रिया मुझे वहां मिली ! आपका समर्थन मेरे लिए हमेशा प्रेरणा दायक होता है ! आभार

    Geraldine के द्वारा
    October 18, 2016

    I’ve ordered Emauel Derman’s “When we make a model involving human beings, we are trying to force the ugly stst2ieper&#8s17;s foot into Cinderella’s pretty glass slipper.”I didn’t read “My Life As A Quant” but I’ve been following his articles and Tweetstream. I’m expecting exceptional insight into Financial pathology.

santosh kumar के द्वारा
May 14, 2012

योगी जी ,.नमस्कार बहुत धारदार व्यंग्य ,..हार्दिक आभार आपका

    yogi sarswat के द्वारा
    May 15, 2012

    श्री संतोष कुमार जी , बहुत बहुत आभार ! आपका सहयोग और समर्थन मिला ! धन्यवाद

y kumar के द्वारा
May 13, 2012

badhiya

    yogi sarswat के द्वारा
    May 14, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , कुमार साब ! सहयोग बनाये रखियेगा !

anuradha chaudhary के द्वारा
May 13, 2012

मंच वालों क्‍या यह मंच कुछ चापलूसों के लिये है। जैसी कबिता पढी चापलूस वाह वाह करने लगे।

    yogi sarswat के द्वारा
    May 14, 2012

    आदरणीय अनुराधा जी , नमस्कार ! आप क्या कहना चाहती हैं , मैं समझा नहीं ! कृपया स्पष्ट करें ! धन्यवाद !

ANAND PRAVIN के द्वारा
May 13, 2012

आदरणीय योगेन जी, सादर प्रणाम क्या खूब लिखा हैं आपने…………………वास्तव में यदि भ्रष्टाचार खत्म हो गया तो क्या होगा निचे कविता पढ़ मजा आ गया………….देर से आने के लिए क्षमा चाहूँगा

    yogi sarswat के द्वारा
    May 14, 2012

    मित्रवर आनंद प्रवीण जी , सादर ! मेरे शब्द आपतक पहुंचे बड़ी बात है ! आपका समर्थन मिल जाता है तो लेखन सार्थक सा लगने लगता है ! आगे भी आपके सहयोग की कामना करता हूँ ! धन्यवाद

    Marylouise के द्वारा
    October 17, 2016

    I can already tell that’s gonna be super heplful.

May 13, 2012

अगर भ्रष्टाचार खत्म हो गया तो ? मेरे ऑफिस में तो लोग कहते हैं कि अन्ना बहुत ही गलत कर रहे हैं……अरे यदि यह ख़त्म हो गया तो हमारे बच्चों का लालन-पालन कैसे होगा इस महंगाई में. यह तो किसी के पेट पे लात मारा जा रहा है भाई. हमारे अधिकारों का हनन हो रहा है. हम इसके खिलाफ बड़े ही पैमाने पर आन्दोलन करेंगे…..इस पर मैं बोला..मैं तो इसके लिए तैयार हूँ बस आप लोग जिंदाबाद और मुर्दाबाद के लिए आदेश करें…….हाँ….हाँ…..हाँ.

    yogi sarswat के द्वारा
    May 14, 2012

    मित्रवर अलीन जी , नमस्कार ! आपके उदगार बिलकुल स्पष्ट और उत्साहवर्धक होते हैं ! बहुत बहुत आभार , अपने विचारों से समर्थन और सहयोग करने के लिए ! धन्यवाद !

anant singh के द्वारा
May 12, 2012

badhiya vyangya yogi g

    yogi sarswat के द्वारा
    May 14, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद !

Piyush Kumar Pant के द्वारा
May 12, 2012

बिना भ्रष्टों के ये देश  डायबिटीज़ के रोगी की बिना चीनी के चाय सा हो जाएगा………. चीनी मिलाये तो जान पर बन आए न मिलाये तो फीकी सी लगे……….. :-)

    yogi sarswat के द्वारा
    May 14, 2012

    पन्त साब सही कहते हैं आप ! मेरे शब्द आपके पास तक पहुंचे और आपका समर्थन मिला , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
May 12, 2012

वाह भाई वाह क्या धारदार व्यंग्य है ? योगी जी,….ढेर सारी बधाइयाँ !! पुनश्च !!

    yogi sarswat के द्वारा
    May 12, 2012

    श्री आचार्य जी , बहुत बहुत आभार ! आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार रहता है मुझे ! धन्यवाद ! सहयोग और समर्थन बनाये रखियेगा !

yamunapathak के द्वारा
May 11, 2012

बहुत मजेदार व्यंग लिखा है.आपने और अंतिम पंक्तियाँ ,सब को गधा बना दिया ,चलो ,”पञ्च कहे गधा तो गधा”ठीक?

    yogi sarswat के द्वारा
    May 12, 2012

    आदरणीय यमुना पाठक जी , सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! कृपया सहयोग और समर्थन बनाये रखियेगा ! बहुत बहुत धन्यवाद

D33P के द्वारा
May 10, 2012

योगी जी नमस्कार जिनके रोम रोम में भ्रष्टाचार समाया हुआ है उनका क्या होगा अगर भ्रष्टाचार समाप्त हो गया तो बेचारे अख़बार वाले मसाला कहाँ से लाएँगे योग्य प्रधानमंत्री को इसमें कोई बुराई नज़र नहीं आती तो आप काहे खामखाँ परेशान होते हैं

    yogi sarswat के द्वारा
    May 11, 2012

    आदरणीय दीप्ति जी नमस्कार ! मैंने भी आपकी बात से सहमति जताई है ! भारत में हर किसी की जिंदगी से जुड़ा हुआ है SAIL अरे नहीं हर किसी की जिंदगी से जुडा हुआ है भ्रष्टाचार ! ये तो हमारी पहिचान है , ऐसा मुझे नहीं प्रधानमंत्री को लगता है ! क्योंकि अब हमें इसमें महारत हासिल है , अब IT या space technology के विशेषज्ञों के साथ साथ हमें corruption के experts को recruit करना शुरू कर देना चाहिए और उनका import भी करना चाहिए ! यहाँ एक शेर कह रहा हूँ क्योंकि जहां भी हमारे corruption के experts जायेंगे वहीँ कमाल दिखायेंगे और विदेशी मुद्रा लेकर आयेंगे ! जहां जायेगा वहीँ रोशनी फैलाएगा किसी चिराग का अपना मकां नहीं होता !! बहुत बहुत आभार ! सहयोग चाहता हूँ आगे भी ! धन्यवाद !

    Winter के द्वारा
    October 17, 2016

    And Ken, who cares about the doniatons and who donated! The main concern is if he filed the lawsuit or not! Reporting the donations means nothing! Did the donations get the job done that they were donated for? If not someone better say why! And again did he file the lawsuit or not?

    yogi sarswat के द्वारा
    May 11, 2012

    नमस्कार राजहंस जी ! सही कहते हैं आप . जब बिना लिए दिए कोई फाइल इधर से उधर नहीं हो सकती तो फिर किस ये भरोसा किया जा सकता है की इस देश से ये बीमारी ख़त्म होगी ? सराहनीय प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

satya sheel agrawal के द्वारा
May 10, 2012

योगी जी ,सुन्दर अभिव्यक्ति ,करीब यही व्यंग पूर्व प्रकाशित मेरे लेख में पढ़िय” भ्रष्टाचार बिन सब सून”में पढ़ सकते हैं .

    yogi sarswat के द्वारा
    May 11, 2012

    आदरणीय श्री सत्य शील अग्रवाल जी , सादर नमस्कार ! मेरे शब्द आपके पास तक पहुंचे , ख़ुशी हुई ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

mparveen के द्वारा
May 10, 2012

योगी जी नमस्कार, अब सब तो आपने कह दिया … मैं क्या कहूँ ??? बहुत बढ़िया अब तो यही कहना पड़ेगा …….. बिना चमचो के खीर कैसे बनेगी ? :(

    yogi sarswat के द्वारा
    May 11, 2012

    आदरणीय परवीन मालिक जी , सादर नमस्कार ! मैंने सरकार के भ्रष्टाचार के रवैया पर ढुलमुल चलने वाली नीतियों के विरोध स्वरुप ये लेख दिया है ! क्योंकि हमारे “गुनी ” प्रधानमंत्री को किसी का भी भ्रष्टाचार नज़र ही नहीं आता ! आपको मेरा लेखन पसंद आया , बहुत बहुत आभार ! सहयोग और समर्थन की आगे भी उम्मीद रखता हूँ ! धन्यवाद !

    mparveen के द्वारा
    May 12, 2012

    योगी जी नमस्कार, काफी समय से हम आपकी ये गलती नोट कर रहे हैं आप हमारे नाम में एक मात्रा ज्यादा लगा देते हैं जो की मलिक न रहकर मालिक बन जाता है …. मलिक तो बहुत हैं दुनिया में पर मालिक एक ही हैं कृपया सुधारें इसे .. धन्यवाद…

    yogi sarswat के द्वारा
    May 12, 2012

    आदरणीय परवीन मलिक जी , सादर नमस्कार ! आपका बहुत बहुत आभार , जो आपने मुझे इस तरफ ध्यान दिलाया ! मैं क्षमा चाहता हूँ , ये टाइपिंग गलती हुई है मेरे से ! आगे से इस तरह की गलती बिलकुल न हो , मैं पूरा ध्यान रखूँगा ! बहुत बहुत धन्यवाद !

चन्दन राय के द्वारा
May 10, 2012

मित्रवर योगी , मुझे लगता है गर भ्रष्टाचार खत्म हो गया तो ? हमे जो आदत हो गई इस वातावरण की तो हमारा तो दम ही घुट जाएगा , हर काम जो रिश्वत से रफ़्तार पकड़ चलता था , धीमा हो जाएगा सुन्दर आलेख

    yogi sarswat के द्वारा
    May 11, 2012

    मित्रवर श्री चन्दन राय जी , नमस्कार ! सही लिखते हैं आप ! भ्रष्टाचार हमारी दिनचर्या में शामिल हो गया है ऐसे मों अगर कैसे भी ये ख़त्म हो गया तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी ! किन्तु ये भी सोचना पड़ेगा की अगर ख़त्म नहीं हुआ तो भारत का बंटाधार भी पक्का है मित्रवर ! आपकी प्रतोक्रिया का हार्दिक अभिनान्नादन करता हूँ ! धन्यवाद

    Amelia के द्वारा
    October 17, 2016

    I just could not go away your web site prior to suggesting that I really enjoyed the standard information anvaiididunl provide in your guests? Is gonna be back regularly to check up on new posts

prem kumar के द्वारा
May 10, 2012

योगी जी नमस्कार सच कहा आपने बहुत बढ़िया |

    yogi sarswat के द्वारा
    May 10, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , श्री प्रेम कुमार जी ! सहयोग और समर्थन बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

pankaj kumar के द्वारा
May 10, 2012

sach kahte hain aap , agar bhrashtachar khatm ho gaya to kaiyon kii dukan band ho jayegi ! lekin bhrashtachar raha to bharat ki lutiya jaroor doob jayegi ! badhiya evam sateek vyangya , yogi g

    yogi sarswat के द्वारा
    May 11, 2012

    श्री पंकज कुमार जी , ये एक व्यंग्य लेख है मित्रवर ! अन्यथा हम सभी चाहते हैं की इस देश से इस बुराई का खात्मा जितना जल्दी हो सके , हो जाये ! आपकी सराहनीय प्रतिक्रिया का हार्दिक स्वागत करता हूँ ! बहुत बहुत धन्यवाद !

vinitashukla के द्वारा
May 10, 2012

सटीक और करार व्यंग्य. विचारों की प्रभावी अभिव्यक्ति. बधाई योगी जी.

    yogi sarswat के द्वारा
    May 11, 2012

    आदरणीय विनीता शुक्ला जी , सादर नमस्कार ! मेरे शब्द आपके दिलो की गहराइयों तक पहुंचे , बहुत बहुत आभार ! सहयोग और समर्थन बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

MAHIMA SHREE के द्वारा
May 10, 2012

आदरणीया योगी जी .. बहुत बढ़िया व्यंग …….. बधाई आपको

    yogi sarswat के द्वारा
    May 10, 2012

    आदरणीय महिमा जी , सादर ! आपका समर्थन और सहयोग मिला , हार्दिक आभारी हूँ ! आगे भी अआपके विचारों का स्वागत करता हूँ ! धन्यवाद !

    Conyers के द्वारा
    October 17, 2016

     » Marie ! Mais comme vous témoignez d’un grand souci de la place de la femme  »Non, y’a que les sous qui l&;ruqosinteressent. La crétine patentée de la Erdéel .

May 10, 2012

योगी जी सादर ! सिर्फ भ्रष्टाचार ही क्यों समाज से अन्य अपराध जैसे हत्या, लूट, बलात्कार, विवाहेतर सम्बन्ध इत्यादि खत्म हो गए तो ये (………..) फिल्म वाले (………) तो सचमुच ही सड़क पर आ जायेंगे. बढ़िया व्यंग.

    yogi sarswat के द्वारा
    May 10, 2012

    श्री कुमार साब , नमस्कार ! सही लिखा आपने , समाज के कलंक को ही तो ये अपना धंधा बनाते हैं ! बहुत सटीक प्रतिक्रिया ! सहयोग और समर्थन के लिए हार्दिक आभार ! कृपा बनाये रखियेगा

alkargupta1 के द्वारा
May 10, 2012

योगी जी , बहुत ही रोचक व्यंग्य ….एक अनुत्तरित प्रश्न.है… क्या भ्रष्टाचार का कभी अंत होगा ? और ख़त्म हो गया तो शायद बहुतों का विलासितापूर्ण जीवन ही समाप्त हो जायेगा….उसके बाद बेचारों का जीवन तो बड़ा ही कठिन हो जायेगा…….बहुत अच्छा व्यंग्य और उसके साथ ओमप्रकाश आदित्य की कविताने इसमें चार चांद लगा दिए……….

    yogi sarswat के द्वारा
    May 10, 2012

    आदरणीय अलका गुप्ता जी , सादर नमस्कार ! सही कहते हैं आप , भ्रष्टाचार यदि ख़त्म हो गया तो इन्हें हार्ट अटैक आ जायेगा , मर जायेंगे ! सहयोग और समर्थन के लिए बहुत बहुत आभार !

praveen panwar के द्वारा
May 10, 2012

इधर भी गधे हैं , उधर भी गधे हैं जिधर देखता हूँ , गधे ही गधे हैं || गधे हँस रहे हैं , आदमी रो रहा है हिंदुस्तान में ये क्या हो रहा है ? ये दिल्ली ये पालम गधों के लिए है ये संसार सालम गधों के लिए है बहुत अच्छी रचना योगी धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    May 10, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , प्रवीण पंवार जी ! सहयोग और समर्थन बनाये रखियेगा !

vikramjitsingh के द्वारा
May 9, 2012

योगी जी…सादर…. आपने बुलाया तो हमें आना ही पड़ा….. अच्छी लेखनी है आपकी….. लेकिन भैया….. जो चीज़ (भ्रष्टाचार) पानी के नल से शुरू होती है…..वो इतनी जल्दी खत्म कैसे हो पाएगी….?????? या फिर उसका खत्म हो पाना मुश्किल है….?????

    yogi sarswat के द्वारा
    May 9, 2012

    श्री विक्रमजीत सिंह जी सादर नमस्कार ! आपको शब्द पसंद आये , बहुत बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद !

munish के द्वारा
May 9, 2012

घोड़ों को मयस्सर नहीं घास देखो गधे खा रहे हैं च्यवन प्राश देखो….. बहरहाल योगी जी, जब कभी कभी मुझे दुस्वप्न आता है की भारत से भ्रष्टाचार समाप्त हो गया …….. तो मेरी तो रूह तक कांप जाती है ………. आखिर रोज़ी रोटी का सवाल है भाई :)

    yogi sarswat के द्वारा
    May 9, 2012

    श्री मुनीश जी , सादर नमस्कार ! फिर तो समझा लुटिया डूब गई हिंदुस्तान की ! जब आप जैसे महान व्यक्तित्व को ऐसे सपने आयेंगे और रूह कांप जाएगी तो फिर उनका क्या होगा जिनकी दूकान बंद हो जाएगी भ्रष्टाचार ख़त्म होने से ! बहुत सटीक प्रतिक्रिया ! अच्ग्छा लगा मुनीश जी , आप मेरे ब्लॉग पर आये ! आगे भी दर्शन देते रहिएगा ! धन्यवाद

susheel sharma के द्वारा
May 9, 2012

sateek evam badhiya lekhan !

    yogi sarswat के द्वारा
    May 9, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद ! सहयोग और समर्थन बनाये रखें !

susheel sharma के द्वारा
May 9, 2012

badhiya evam sateek vyangya !

    yogi sarswat के द्वारा
    May 9, 2012

    Thanx

    Bardo के द्वारा
    October 17, 2016

    I am totally wowed and prpraeed to take the next step now.

susheel sharma के द्वारा
May 9, 2012

बहुत सटीक व्यंग्य ! बढ़िया लेखन

    yogi sarswat के द्वारा
    May 9, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद ! सुशील शर्मा जी ! सहयोग बनाये रखियेगा !

Rajesh Dubey के द्वारा
May 9, 2012

जायज चिंता है. मैं तो इतनी दूर का सोच ही नहीं पाया था. सुन्दर व्यंग रचना.

    yogi sarswat के द्वारा
    May 9, 2012

    आदरणीय श्री राजेश दुबे जी , सादर नमस्कार ! ये एक व्यंग्य लेख है , हर कोई दिल से यही चाहता है की ये भ्रष्टाचार रूप दानव का इस देश से अंत हो ! सिर्फ मनोरंजन और अपने मन की भड़ास निकलने के लिए लेख लिखा ! एक आदमी जब दुखी हो जाता है तो यही सब तो करेगा ! बहुत बहुत आभार ! अपना आशीर्वाद बनाये रखियेगा !

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
May 8, 2012

योगी जी नमस्कार- भ्रष्टाचार ख़तम होना ही चाहिए. कुछ लोगों के चूल्हे अगर बुझते हैं तो बुझने दो, पर भ्रष्टाचार के ख़त्म होने से कितने चूल्हे जल उठेंगे ये सोचो. मनोरंजन की द्रष्टि से आलेख अच्छा है……………………………..मेरी प्रतिक्रिया को अन्यथा मत लेना.

    yogi sarswat के द्वारा
    May 9, 2012

    मित्रवर अंकुर जी , सही कहते हैं आप , भ्रष्टाचार ख़त्म होना ही चाहिए ! हम भी आप जैसा ही सोचते हैं ! लेकिन जब ये हर भारत वासी के खून में समाया हुआ है , तब कैसे इसके ख़त्म होने की उम्मीद करी जा सकती है ? हालाँकि ये गंभीर लेख नहीं है , ये सिर्फ व्यंग्य है ! आपका मेरे शब्दों को समर्थन मिला , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 8, 2012

आदरणीय योगेन जी, सादर ! बहुत धारदार तीखा व्यंग्य ! प्रवाहमय ! आदित्य जी की कविता ने तो चार चाँद लगा दिए ! हार्दिक बधाई !

    yogi sarswat के द्वारा
    May 9, 2012

    आदरणीय श्री शशि भूषण जी , सादर नमस्कार ! आपका आशीर्वाद मिल गया , मैं समझ गया की लेख आपके मन तक के किसी कोने में पहुंचा ! बड़ी बात है मेरे लिए , आपके दिल में अपने शब्दों के माध्यम से जगह बना पाना ! बहुत बहुत आभार !

मनु (tosi) के द्वारा
May 8, 2012

आदरणीय योगी जी नमस्कार ! कई बार कमेन्ट देने की कोशिश की पर आजकल यूपीएस की खराबी से ग्रस्त हूँ … ऐसा जुल्म न कीजिये योगी जी !भ्रष्टाचार खतम होना ही चाहिए । आप इतने अच्छे लेखक हैं । कितने लोग आपका समर्थन करते हैं , मैं भी उनमे से एक हूँ । लेख व्यंगात्मक है … जानती हूँ मै…इसलिए अच्छे लेख हेतु बधाई देती हूँ मैं ….

    yogi sarswat के द्वारा
    May 9, 2012

    आदरणीय तोशी जी , सादर नमस्कार ! सच में ये एक व्यंग्य लेख है , मुझसे गलती ये हुई की मैंने इसमें लिखा नहीं की ये व्यंग्य लेख है ! मेरे सहित अधिकतर हिंदुस्तान के लोग ये मानते हैं की भ्रष्टाचार इस देश से बिलकुल ख़त्म होना चाहिए किन्तु हम सभी जाने अनजाने इस खेल का हिस्सा बन जाते हैं लेकिन अपने को भ्रष्ट नहीं मानते ! इसीलिए इसके ख़त्म होने पर संदेह व्यक्त किया जाता रहा है ! आपका समर्थन और सहयोग मिलता रहा है ! बहुत बहुत आभारी हूँ ! धन्यवाद

ajay kumar pandey के द्वारा
May 8, 2012

योगी जी नमन आपका लेख पढ़ा अच्छा लगा यह तो आपकी कृपा है की आप मुझ ब्लॉगर के ब्लॉग पर आते हैं कृपया मेरी एक पोस्ट भारत देश के नाम एक पत्र और लेख इसको समय दें और अलीन भैया के मंच छोड़ने का दुःख मुझे भी है अच्छा लगता अगर अलीन भैया होते और लेखन करते रहते आप कृपया मुझे ऑनलाइन किताबें पढने का लिंक दे दीजिये जिसमे सारी किताबें एक जगह आ जाए धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    May 9, 2012

    मित्रवर अजय कुमार पाण्डेय जी , नमस्कार ! अलीन सच में अच्छा लिखते हैं और मन की गहराइयों से लिखते हैं ! मैंने उन्हें कहा है की वो मंच छोड़ कर न जायें ! आपके ब्लॉग पर , अवश्य जाऊँगा ! बहुत बहुत आभार !

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 8, 2012

आदरणीय योगी जी, सादर भ्रष्टाचार पर मैं काफी लिख चुका हूँ. ऐसे हालातों के आगे झुक चुका हूँ भ्रष्टाचार पूंछो लोग इंकार करते हैं रस्मों में इसे शिष्टाचार स्वीकार करते हैं बधाई. शायद ये दिन आये.

    yogi sarswat के द्वारा
    May 9, 2012

    भ्रष्टाचार पूंछो लोग इंकार करते हैं रस्मों में इसे शिष्टाचार स्वीकार करते हैं बधाई. शायद ये दिन आये. आदरणीय श्री कुशवाहा जी , सादर नमस्कार ! काश वो दिन आये ! सब यही चाहते हैं ! ये तो एक व्यंग्य मात्र है , दिल से तो यही आवाज़ आती है की भ्रष्टाचार ख़त्म हो ! बहुत बहुत आभार , आपका आशीर्वाद मिला ! धन्यवाद

    Jane के द्वारा
    October 17, 2016

    A minute saved is a minute eaenrd, and this saved hours!

satish3840 के द्वारा
May 8, 2012

योगी ही नमस्कार / आपकी बात सही हें / भ्रस्टाचार को ख़त्म होना ही नहीं चाहिए / सही हें न जाने कितने चूल्हे चल रहें हें / ये खत्म हो गया तो उनकी हाय लगेगी / ये तथा कथित टीम न जाने क्यों इस बेचारे के पीछे पडी हें / लगता हें जैसे इस गरीब ने इनकी कोई भैंस खोल ली हो / आज यदि भ्रस्टाचार नाम का जीव ख़त्म हो गया तो मार्किट में ( जमीन , सोना , मकान , दूकान , गाडी , महगें फोन आदि ) उद्योग में मंदी का डोर आ जाएगा / कोई ही निरा मुर्ख होगा जो अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारेगा / आज इसी की बदोलत महंगे होटल , गाडी आदि चल रहीं हें / नए नए रोजगार पनप रहें हें / अच्छा प्रयास /

    yogi sarswat के द्वारा
    May 9, 2012

    आदरणीय श्री सतीश जी , सादर नमस्कार ! मेरे शब्दों को आपका आशीर्वाद मिला , बहुत बहुत आभार ! आपके विचार हमें और बेहतर लिखने को प्रेरित करते हैं , उर्जा देते हैं ! बहुत बहुत धन्यवाद !

Abhinav Srivastava के द्वारा
May 8, 2012

बढ़िया है योगी जी ….लगे रहिये…… शायद कभी वो दिन आये जब हम-आप बैठ कर याद करेंगे ….क्या दिन थे वो जब हम भ्रष्टाचार पर लिखा करते थे … :-)

    yogi sarswat के द्वारा
    May 8, 2012

    मित्रवर श्री अभिनव जी , हम सभी चाहते हैं की वो दिन जरूर आये जब हम गर्व से कह सकें की हाँ मैं हिदुस्तानी हूँ ! ये तो मित्रवर मात्र एक लेख है , एक व्यंग्य लेख है ! किन्तु मन में जो बात है वो यही है की एक दिन ऐसा आये जब भ्ताश्ताचार का ये दानव यहाँ से ख़त्म हो ! बहुत बहुत आभार ! आपने समय दिया और अपने विचार व्यक्त करे ! सहयोग और समर्थन बनाये रखियेगा ! धन्यवाद !

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
May 8, 2012

बहुत अच्छा व्यंग्य योगी जी और कविता ने तो चार चाँद लगा दिए हैं आलेख में.

    yogi sarswat के द्वारा
    May 8, 2012

    श्री राजीव कुमार झा जी , सादर नमस्कार ! कविता आदरणीय श्री आदित्य जी की है ! केवल शोभा बढ़ने के लिए उपयोग करी है ! आपको लेखन पसंद आया , बहुत बहुत शुक्रिया ! सहयोग और समर्थन बनाये रखियेगा ! धन्यवाद !

    Dahrann के द्वारा
    October 17, 2016

    Your answer lifts the inengliltece of the debate.

akraktale के द्वारा
May 8, 2012

आदरणीय योगी जी नमस्कार, आप नाहक मन की बात पर ना जाएँ, मछली जिस भी पानी में रहती है वही उसे रास आता है आप दुसरे स्वच्छ पानी में डालेंगे तो मर ही जायेगी बेचारी. आप ऐसा जुल्म ना करें. आप ऐसे आलेख लिख कर क्या सरकार गिराना चाहते हैं क्या? बेचारे किसी प्रकार पक्ष विपक्ष या अपने पक्ष में वहां मुंह छुपाकर बैठे हैं कोई बाहर से एक पत्थर फेंकता है तो सब वहां से पत्थरों की बारिश कर देते हैं. क्यों उनसे महफूज जगह छिनना चाहते हैं? बढ़िया व्यंग बधाई स्वीकार करें.

    yogi sarswat के द्वारा
    May 8, 2012

    आदरणीय श्री रक्ताले जी , सादर नमस्कार ! सही कहते हैं आप ! जैसे मेरे जैसे गंवार आदमी को साफ़ सुथरे , एयर कूल्ड , बड़े से ऑफिस में बिठा दिया जाये तो बीमार हो जाऊंगा , उसी तरह अगर भारत वासियों के मन में से भ्रष्टाचार निकल दिया जेए तो आधे से ज्यादा बीमार पड़ जायेंगे ! भाई , एक जरूरी दिनचर्या है घूस खाना तो इस देश में ! जैसे भारत वासी के रोम रोम में राम रहते हैं वैसे ही रोम रोम में भ्रष्टाचार समाया हुआ है ! लेकिन अपना भ्रष्टाचार किसी को नहीं दीखता , दूसरों का ही दीखता है ! श्री राम और भ्रष्टाचार यानि रावण का अजीब संयोग है , दोनो एक ही घर में रहते हैं ! वाह ! लेकिन कुछ भी हो , विचित्र देश है हिंदुस्तान ! एक तरफ हम भगवन की पूजा करते हैं , दूसरी तरफ हम देवियों को क़त्ल ( कन्या भ्रूण हत्या ) करते हैं ! सुबह सुबह हम शायद भगवन से मांगते हैं – हे भगवान् , आज कोई बढ़िया सा मुर्गा भेज देना जिससे अच्छी घूस मिले ! वाह रे हिंदुस्तान ! नाज़ है तुझ पर

nishamittal के द्वारा
May 8, 2012

बहुत आच्छा आलेख कम व्यंग्य योगी जी,भ्रष्टाचार विहीन समाज ही कल्पना से परे हो गया है.

    yogi sarswat के द्वारा
    May 8, 2012

    आदरणीय निशा जी मित्तल , सादर नमस्कार ! जैसे भारत वासी के रोम रोम में राम रहते हैं वैसे ही रोम रोम में भ्रष्टाचार समाया हुआ है ! लेकिन अपना भ्रष्टाचार किसी को नहीं दीखता , दूसरों का ही दीखता है ! श्री राम और भ्रष्टाचार यानि रावण का अजीब संयोग है , दोनो एक ही घर में रहते हैं ! वाह !

dineshaastik के द्वारा
May 8, 2012

कौन कहता है भ्रष्टाचार बुरा है, यह तो हमारे विकास  का प्रतीक  है। भ्रष्टाचार का इतना उच्चस्तरीय होना, हमारी सभ्यता की जीत है।। बन्धु भ्रष्टाचार के मिटने के गम  में आप क्यों सूखे हैं। जो कहते हैं कि हम भ्रष्टाचार  मिटायेंगे, वे झूठे हैं। भ्रष्टाचार तो हमारे रोंम  रोंम  में  समाया है। सच कहूँ मैंने भ्रष्टाचार में अपना ईश्वर पाया है।। देखिये भ्रष्टाचार की है सर्वत्र माया। योगी जी मुझे आपका यह आलेख  बहुत पसंद आया।।

    yogi sarswat के द्वारा
    May 8, 2012

    आदरणीय श्री आस्तिक जी , सादर नमस्कार ! आपकी प्रभावित करती प्रतिक्रिया पाकर दिल प्रसन्न हो गया ! बहुत खूब ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा !

lovely के द्वारा
May 7, 2012

badhiya vyangya

    yogi sarswat के द्वारा
    May 8, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , लवली जी !

jyotsna singh के द्वारा
May 7, 2012

प्रिय योगी जी, नमस्कार,बिचारे सीधे साधे गधों को कहाँ भ्रष्ट- अचारिओं से मिला दिया. यह तो नाक की सीध में चलते जाते हैं .ब्रष्ट आचरण के लिए अक्ल इस्तेमाल करनी पड़ती है . jyotsna

    yogi sarswat के द्वारा
    May 8, 2012

    आदरणीय ज्योत्सना जी सादर नमस्कार ! सच कहूं तो ये कविता , श्री ओम प्रकाश आदित्य जी की है ! और उन्होंने जिस सन्दर्भ में ये कविता कही है बड़ा अच्छा लगता है ! ये दिल्ली ये पालम गधों के लिए है ये संसार सालम गधों के लिए है || जो वहां बैठे हैं , उन्हें आप क्या कहेंगी ! आपका आशीर्वाद एक तरह से संजीवनी का काम करता है ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

rajkamal के द्वारा
May 7, 2012

आपकी चिंताए वाजिब है लेकिन तभी, अगर भ्रष्टाचार इस देश दुनिया से ख़त्म हो जाए …. इस के खात्मे के सपने देख कर खुद को दुखी मत कीजिये इसके ख़त्म हो जाने की सोच कर आपकी सेहत को हो रहे नुक्सान को मद्देनजर मैं आपको पूरा विश्वाश दिलाता हूँ की यह कभी भी ख़त्म नहीं होगा …. बस अब सारी चिंताए छोड़ छाड़ कर खुश हो जाइए

    yogi sarswat के द्वारा
    May 8, 2012

    आदरणीय श्री राजकमल जी , सही कहते हैं आप ! ये दानव ख़त्म नहीं होने वाला ! आपका आशीर्वाद मिल रहा है साब , खुश तो हो ही जाना है बल्कि थोडा सा मुटिया भी गया हूँ ! ३५ किलो से ३६ किलो का हो गया हूँ ! हहाआआअ ! बहुत बहुत आभार , आपका समर्थन और सहयोग मिला ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा !

    Travon के द्वारा
    October 17, 2016

    Is it possible for you to share why does Google drop Page Rank of a site? A 2 yrs old site of mine is seeing a drop in PR after every PR ‘update’. For around 1.5 years it was 4 then last time it came down to 3 and now it is 2!!!Please understand that I am not getting ‘obsessed’ with PR but I have seen that traffic to my site is reducing month after month.FYI… I have never involved in bue/igisyllnng links or paid posts etc.

ajaydubeydeoria के द्वारा
May 7, 2012

योगी भईया, इसी चिंता में तो हम मरे जा रहे हैं ,रातों की नींद हराम हो गयी है. और आप हैं कि पूछ-पूछ कर काम चला रहे हैं…अगर भ्रष्टाचार खत्म हो गया तो ? कुछ आप भी चिंता-विन्ता करिए . आखिर किस बात के भाई हैं…..

    yogi sarswat के द्वारा
    May 8, 2012

    अजय जी देवरिया वाले , सादर नमस्कार ! भाई चिंता हमें ही तो करनी पड़ेगी , अगर भ्रष्टाचार ख़त्म हो गया तो बेचारा राम गोपाल वर्मा तो सड़क पर आ जायेगा ! बेरोजगार हो जायेगा न ! आप को शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार !

    shashibhushan1959 के द्वारा
    May 8, 2012

    धन्य हैं आप दोनों महानुभाव ! इतने दिन से हम लोगों को जगा रहे हैं ! और आपलोग फिर थपकी मार के सुलाने में लग गए ! सब मेहनत पानी में चला गया !

    yogi sarswat के द्वारा
    May 10, 2012

    आदरणीय श्री शशि भूषण जी , सादर नमस्कार ! ऐसा नहीं है , ये केवल एक व्यंग्य लेख मात्र है ! हम तो आप और श्री संतोष कुमार के द्वारा जगाई गई अलख का पूर्ण समर्थन करते हैं ! हम तन और मन से आप की इस भ्रष्टाचार विरोधी मुहीम में कदम से कदम मिलाकर आप के साथ चल रहे हैं ! इस लेख को अन्यथा मत लीजियेगा , ये केवल एक मनोरंजन मात्र है ! मुझे लगता है जब ज्यादा अपच हो जाये तो कुछ हल्का ले लेना चाहिए और बस यही किया है मैंने ! थोडा सा हटकर लिखने की कोशिश की है जो आपको भी अच्छी लगी , बहुत बहुत आभार !

RAHUL YADAV के द्वारा
May 7, 2012

योगी जी प्रणाम…. वास्तव में रचना का स्तर काबिलेतारीफ है रचना के माध्यम से आपने उनकी जीविका के बारे में बता दिया जो भ्रष्टाचार के होने से ही अपना घर चला रहें है।…….सुंदर रचना सराहनीय सोच।

    yogi sarswat के द्वारा
    May 8, 2012

    mitravar rahul yadav ji , namaskar ! ye vyangya lekh , tabhi likha tha jab anna ka nadolan chal raha tha ! ye kewal ek paksh hai , doosara paksh ye hai ki main anna ka bahut bada samarthak hoon ! aapko shabd pasand aate , bahut bahut aabhaar ! sahyog aur samarthan banaye rakhiyega ! dhanywad


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