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धरती जो सबसे पावन ......

Posted On: 29 May, 2012 Others में

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धरती जो सबसे पावन वो धरती हिंदुस्तान की |
लेते वीर जन्म जहाँ वो माटी हिंदुस्तान की ||


कितने हमले हुए यहाँ , खोने ना पाई इसकी शान
मात्रभूमि की रक्षा को यहाँ करता बच्चा बच्चा जां कुर्बान ||


मात्रभूमि की रक्षा को ही यहाँ नारी ने तलवार उठाई थी
करोड़ों लोग आ गए पीछे जब गाँधी ने आवाज़ लगाईं थी ||


मत भूल अशफाक की कुर्बानी को मत भूल भगत के जोश को
फिरंगियों को वापस भगाया , तू भूल गया क्या उस बोस को ? ||


आजाद सरीखे वीरों के दम पर ही अंग्रेजों ने जंग हारी थी
भूल गया क्या उस ऊधम को जिसने डायर को गोली मारी थी ||


इन सब वीरों को भारत की आज़ादी का अरमान था
लड़ा जो हिंद के लिए वो हर वीर महान था ||


उनका ही वंशज है तू , और है भारत वासी
लगता है जन्मभूमि है फिर से कुछ बलिदानों की प्यासी ||


भारत माँ की रक्षा को अपना शीश कटा ले तू
मात्रभूमि पर निछावर होकर कुछ पुण्य कमा ले तू ||

( UNICEF द्वारा राजीव गाँधी नेशनल युवा कवि पुरस्कार -1998 , नई दिल्ली से पुरस्कृत रचना )

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104 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Magdelina के द्वारा
October 17, 2016

Your’s is a point of view where real inntlligeece shines through.

bebakvichar, KP Singh (Bhind) के द्वारा
July 6, 2012

वीर रस से परिपूर्ण सार्थक उद्देश्य परक रचना लिखने के लिए योगी जी आपको धन्यवाद। आशा करते हैं ऐसे ही आप समाज को दिशा देते रहेंगे।

    yogi sarswat के द्वारा
    July 9, 2012

    श्री सिंह जी , बहुत बहुत आभार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , धन्यवाद !

rajanidurgesh के द्वारा
June 27, 2012

वीर रस की सुन्दर कविता.

    yogi sarswat के द्वारा
    June 28, 2012

    आपको रचना पसंद आई , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा , धन्यवाद

jyotsnasingh के द्वारा
June 20, 2012

आदरणीय योगी जी,इस प्रतिक्रिया वाले भाग को मुझ से कोई दुश्मनी लगती है तीसरी बार कोशिश कर रही हूँ पर अब ये ओरिगिनल प्रतिक्रिया नहीं रही,बचपन में खूब लड़ी मर्दानी,पारा था अंग्रेजों की मुठी में आकर फिसल गया ,कभी दरया रुके भी हैं कहीं परबत झुके भी हैं जैसी कविताये मेरी फवोरेट थीं आज भी है पर क्या हम अब देर तक अपनी आज़ादी की रक्षा देर तक कर पायेंगे ? ज्योत्स्ना.

    yogi sarswat के द्वारा
    June 21, 2012

    आदरणीय ज्योत्सना जी , सादर नमस्कार ! आपकी प्रतिक्रिया में लिखी आपकी आखिरी पंक्ति से बात शुरू करता हूँ -क्या हम अपनी आज़ादी को बचाए रख पाएंगे ? अगर हम अब के हालात देखें तो ऐसा लगता है जैसे आज़ादी धीरे धीरे हमसे दूर जा रही है ! बहुत सही और सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक आभार !

    Xexilia के द्वारा
    October 17, 2016

    Just cause it’s simple doesn’t mean it’s not super helpufl.

yogeshkumar के द्वारा
June 20, 2012

जनाब ….आपने कविता तो मेहनत से लिखी है मगर कुछ ऐसा लगता है कि जैसे पक्तियों में शब्द कुछ कम ज्यादा हो गए हैं…. इसलिए पढ़ते समय एक सुर पैदा होना चाहिए वो नहीं हुआ…. बुरा मत मानिये… मगर लगे रहिये अच्छी कोशिश…….

    yogi sarswat के द्वारा
    June 21, 2012

    श्री योगेश कुमार जी , सादर नमस्कार ! आपके विचारों का दिल से स्वागत करता हूँ ! संभव है ऐसा रहा हो , इसी लिए तो इस मंच पर हूँ की कुछ सीख सकूं और अपनी गलतियों को समझ सकूं ! आगे भी आपसे ऐसे ही स्पष्ट विचारों की आशा करता हूँ ! बहुत बहुत धन्यवाद !

y kumar के द्वारा
June 20, 2012

nice words

    yogi sarswat के द्वारा
    June 21, 2012

    बहुत बहुत शुक्रिया कुमार साब ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

s.p. singh के द्वारा
June 20, 2012

योगी जी वस्तव में शारीर में उत्साह भर देने वाली वीर रस की कविता एक नहीं अनोकों पुरुष्कारों के लायक है वधाई स्वीकार करे. धन्यवाद.

    yogi sarswat के द्वारा
    June 20, 2012

    आदरणीय श्री सिंह साब , सादर नमस्कार ! मेरे शब्दों को आपकी उत्साहित करने वाली प्रतिक्रिया मिली , बहुत बहुत आभार आपका ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

parveenpanwar के द्वारा
June 20, 2012

योगी जी , बहुत अच्छी वीर रस परिपूर्ण कविता आप को हार्दिक सुभकामना धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    June 20, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , प्रवीण जी ! सहयोग बनाये रखियेगा !

parveenpanwar के द्वारा
June 20, 2012

योही जी , बहुत अच्छी वीर रस परिपूर्ण कविता आप को हार्दिक सुभकामना धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    June 20, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , प्रवीण जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

    Bison के द्वारा
    October 17, 2016

    It’s good to get a fresh way of loiokng at it.

chaatak के द्वारा
June 18, 2012

स्नेही योगी जी, राष्ट्र प्रेम से भरी हुई इन पंक्तियों के लेखन पर हार्दिक बधाई!

    yogi sarswat के द्वारा
    June 19, 2012

    आदरणीय श्री चातक जी , सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये और आपका आशीर्वाद मिला , अच्छा लगा ! बहुत बहुत आभार !

pradeepkumarshukla के द्वारा
June 17, 2012

सारस्वत जी, नमस्कार | आपकी रचना सुन्दर लगी | वीर रस से ओत-प्रोत एक प्रभावी रचना | समय की पुकार भी है| कविता के लिए बधाई | नमस्कार

    yogi sarswat के द्वारा
    June 18, 2012

    श्री प्रदीप कुमार शुक्ला जी , सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत अच्छा लगा ! सहयोग बनाये रखियेगा ! बहुत बहुत आभार !

pritish1 के द्वारा
June 15, 2012

नमस्ते……सारस्वत जी अपने लेखन मैं विलम्ब के लिए क्षमा चाहूँगा मैंने अपनी रचना ऐसी ये कैसी तमन्ना है…..का दूसरा भाग प्रकाशित किया है आप कहानी के पहले भाग से परिचित हैं………..मेरी कहानी पढें और अपने विचारों से मुझे अवगत करायें…….आशा करता हूँ आपको अच्छा लगेगा……. धन्यवाद..!

    yogi sarswat के द्वारा
    June 18, 2012

    प्रतिष् जी नमस्कार ! अवश्य आपके ब्लॉग पर जाऊंगा ! आपने मेरे शब्दों को समय दिया , बहुत बहुत आभार !

rajhans के द्वारा
June 13, 2012

आपकी प्रतिक्रिया देखी, बहुत दिनों बाद वापस आया था| धन्यवाद! आपकी रचना पढ़ रहा हूँ! बहुत सुंदर! देशभक्ति की कविताओं की परंपरा ही ख़तम होने लगी थी| सीधे छंदों में एक मिठास है और एक प्रेरणा भी|

    yogi sarswat के द्वारा
    June 13, 2012

    मित्रवर राजहंस ही , सादर ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! आगे भी आपके सहयोग की कामना करता हूँ ! धन्यवाद

ajay kumar pandey के द्वारा
June 12, 2012

योगी जी नमस्कार मैंने अपने dashboard पर आपकी प्रतिक्रिया देखि आपका हार्दिक आभार पर पता नहीं क्यों मेरे ब्लॉग पर यह प्रतिक्रिया दर्शाई नहीं गयी है मैंने अभी अभी dashboard पर देखा वैसे इनाम और रूचि मैडम की तारीफ से बढ़कर आपकी प्रतिक्रिया है मेरे लिए धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    June 13, 2012

    आपका दिया हुआ सम्मान ,सर आँखों पर ! बहुत बहुत शुक्रिया

ajay kumar pandey के द्वारा
June 11, 2012

योगी जी नमस्कार कृपया मेरी पोस्ट अम्मा जरा देख तो उप्पर जरुर देखिये और अपना मार्गदर्शन दीजिये आपके प्रतिक्रिया रुपी आशीर्वाद के बिना मेरे को अपना लेखन कही न कही कुछ सार्थक नहीं लग रहा है पता नहीं क्यों आप बीमार होकर ही ठीक हुए है कृपया अपना मार्गदर्शन दें धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    June 13, 2012

    जरूर ,मित्रवर अजय पांडे जी ! धन्यवाद

ajay kumar pandey के द्वारा
June 9, 2012

योगी जी नमस्कार यह जानकर ख़ुशी हुई की आप ठीक हैं इस मंच पर आपसे मिला था तो बढ़िया अनुभव हुए थे वैसे इतनी कम उम्र में लेखन आसान नहीं होता समय भी निकालना होता है आपको आपके स्वस्थ होने की बधाई सहित धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    June 13, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद !

yamunapathak के द्वारा
June 8, 2012

योगीजी,आपके स्वास्थय की खबर दुसरे ब्लॉग से जान पायी.अब आप कैसे हैं? आपकी इस कविता के लिए बहुत-बहुत बधाई. आपने इस बार बहुत अंतराल पर रचना पोस्ट की तभी मुझे लगा कुछ बात है. इस मंच पर वैचारिक जुड़ाव बहुत मायने रखता है. टेक वैरी गुड केयर फॉर yourself

    yogi sarswat के द्वारा
    June 11, 2012

    आदरणीय यमुना जी , सादर नमस्कार ! आपको मेरी कविता पसंद आई , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

ajay kumar pandey के द्वारा
June 4, 2012

योगी जी नमस्कार क्या हाल चाल हैं बुखार ज्यादा हाई तो नहीं है अगर हाई बुखार है तो डॉक्टर को दिखा लीजियेगा क्या है की आजकल dengue बुखार भी फेल रहा है जागरूकता रखिये अभी आप पूरा आराम करें जब ठीक हो जायेंगे तब आप अपनी बेजोड़ कृतियों से हमें रूबरू karwaiyega गर्मी भी बहुत है आराम करें और ठीक होकर अपने ब्लॉग पर लोटें धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    June 4, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , मित्रवर अजय जी !

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
June 2, 2012

इन सब वीरों को भारत की आज़ादी का अरमान था लड़ा जो हिंद के लिए वो हर वीर महान था || उनका ही वंशज है तू , और है भारत वासी लगता है जन्मभूमि है फिर से कुछ बलिदानों की प्यासी || जोश भारती देश भक्ति से लवरेज रचना ..सुन्दर योगी जी .जय श्री राधे ..भ्रमर ५

    yogi sarswat के द्वारा
    June 4, 2012

    श्री भ्रमर साब ! सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत धन्यवाद ! सहयोग की कामना करता हूँ ! जय श्री राधे

ajay kumar pandey के द्वारा
June 1, 2012

योगी जी नमस्कार आपको लगता है की में अच्छा लेखन करता हूँ यह सब आप सभी के आशीर्वाद से है में जब जागरण मंच में आया था तो येही सोचकर आया था की मेरा इस मंच में विद्वान् साथियों से मिलन होगा और इस मंच पर आप जैसे विद्वान् साथियों का आशीर्वाद मिला आप कृपया मेरी दो रचनाओं त्विले धारो बौला म्योर मोतिया बलदा रे और भारत बंद अर्थव्यवस्था डामाडोल और देश को हानियाँ यह पोस्ट देखें आप सब ब्लोग्गेर्स के आशीर्वाद से ही अच्छा लिखता हूँ धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    June 4, 2012

    अजय कुमार जी , धन्यवाद ! अभी थोडा अस्वस्थ हूँ ! आपकी सभी पोस्ट अवश्य पढूंगा !

ajay kumar pandey के द्वारा
June 1, 2012

योगी जी नमस्कार आपकी हर रचना बेजोड़ होती है और हर कृतियाँ बढ़िया होती हैं मुझे आपकी हर रचना अच्छी लगी है और यह रचना बढ़िया देशभक्ति से ओतप्रोत है बधाई लें धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    June 1, 2012

    मित्र अजय कुमार पाण्डेय जी , आप भी बहुत अच्छा लेखन करते हैं ! सच कहूं तो इस उम्र में इतना बेहतरीन लेखन , आसान नहीं होता ! इससे ज़ाहिर होता है की आप में आगे चलकर अच्छा लेखक बनाने के पूरे गुण मौजूद हैं ! आपकी सराहना मेरे लेखों को भी लगातार मिल रही है , बहुत बहुत आभार ! यूँ ही सहयोग बनाये रखियेगा !

vinitashukla के द्वारा
May 31, 2012

बहुत ही सुन्दर और ओजपूर्ण उदगार. बधाई एवं शुभकामनाएं.

    yogi sarswat के द्वारा
    June 1, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , आदरणीय विनीता शुक्ला जी ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा !

vasudev tripathi के द्वारा
May 31, 2012

सारस्वत जी, नमस्कार। UNICEF द्वारा पुरस्कृत कविता है तब तो आपने बचपन में लिखी होगी? अच्छी कविता, अंत की पंक्तियों का संदेश बड़ा ही जीवट है।

    yogi sarswat के द्वारा
    June 1, 2012

    प्रिय मित्रवर श्री वासुदेव त्रिपाठी जी , सादर नमस्कार ! बचपन तो नहीं , हाँ कुछ मूंछों पर के बाल आने लगे थे ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखें ! धन्यवाद

Ajay Kumar Dubey के द्वारा
May 31, 2012

योगी जी नमस्कार. देश भक्ति से ओत प्रोत कविता, बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    June 1, 2012

    मित्रवर श्री अजय कुमार दुबे जी , सादर नमस्कार ! आपकी प्रतिक्रियाएं मुझे हमेशा प्रेरित करती हैं ! बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

y kumar के द्वारा
May 30, 2012

bahut sundar shabd shri yogi ji

    yogi sarswat के द्वारा
    June 1, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , मित्रवर कुमार साब ! सहयोग बनाये रखियेगा !

May 30, 2012

आपके देशभक्ति के जज्बे को सलाम योगी जी………बहुत-बहुत बधाई……….

    yogi sarswat के द्वारा
    June 1, 2012

    बहुत बहुत आभार मित्रवर श्री कुमार गौरव अजीतेंद्रू जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

vikramjitsingh के द्वारा
May 30, 2012

योगी जी….नमस्कार.. इतिहास गवाह है कि…”मर कर कोई जंग नहीं जीती जाती…. अगर जंग जीतनी ही है….तो दुश्मन को मार कर ही जीती जाती है…” समझे बंधू….

    yogi sarswat के द्वारा
    June 1, 2012

    मित्रवर विक्रमजीत सिंह जी , सादर नमस्कार ! सही कहते हैं आप , कोई भी जंग जीतने के लिए जिंदगी होना बहुत जरूरी है ! बहुत बहुत आभार आपका , सार्थक प्रतिक्रिया देने के लिए !

ajay kumar pandey के द्वारा
May 30, 2012

योगी जी नमस्कार देशभक्ति और देश के बलिदानियों को समर्पित बढ़िया रचना बधाई लें धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    June 1, 2012

    श्री अजय कुमार पाण्डेय जी , आपका बहुत बहुत आभार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये ! आपकी प्रतिक्रियाएं मुझे मेरे लेखन पर लगातार मिलती रहती हैं , बहुत बहुत धन्यवाद !

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
May 30, 2012

सारस्वत जी, सप्रेम ! बलिदानियों को समर्पित अच्छी रचना ! आज के युवा को प्रेरित करती कविता के लिए हार्दिक आभार ! पुनश्च !

    yogi sarswat के द्वारा
    June 1, 2012

    आदरणीय आचार्य जी , सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

alkargupta1 के द्वारा
May 30, 2012

योगी जी , देश भक्ति की भावनाओं से ओतप्रोत आपकी इस रचना को मेरा नमन ! निश्चित ही पुरस्कार के योग्य थी यह रचना…..पुरस्कार प्राप्ति के लिए बधाई स्वीकार करें !

    yogi sarswat के द्वारा
    June 1, 2012

    आदरणीय अलका गुप्ता जी , सादर नमस्कार ! आपकी बधाई को दिल से स्वीकार करता हूँ ! आपका आशीर्वाद मिलना भी मेरे लिए एक पुरस्कार की तरह होता है ! बहुत बहुत आभार ! आशीर्वाद बनाये रखें ! धन्यवाद

May 30, 2012

सादर नमस्कार! धरती जो सबसे पावन वो धरती हिंदुस्तान की | लेते वीर जन्म जहाँ वो माटी हिंदुस्तान की ||………………………बहुत खूब…………….!

    yogi sarswat के द्वारा
    June 1, 2012

    मित्रवर अलीन जी , सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! बहुत बहुत धन्यवाद !

    Estella के द्वारा
    October 17, 2016

    I’m so glad I found my soliuton online.

rekhafbd के द्वारा
May 30, 2012

योगी जी ,सादर नमस्ते , मात्रभूमि की रक्षा को ही यहाँ नारी ने तलवार उठाई थी करोड़ों लोग आ गए पीछे जब गाँधी ने आवाज़ लगाईं थी || देश भक्ति से ओत प्रोत कविता ,बधाई भारत माता की जय |

    yogi sarswat के द्वारा
    June 1, 2012

    आदरणीय रेखा जी , सादर नमस्कार ! मेरे शब्दों को आपका आशीर्वाद मिला , ख़ुशी हुई ! सहयोग का आकांक्षी हूँ ! साभार , धन्यवाद !

आर.एन. शाही के द्वारा
May 30, 2012

देशभक्ति को समर्पित बेहतरीन रचना योगी जी. बधाइयां.

    yogi sarswat के द्वारा
    May 31, 2012

    आदरणीय श्री शाही जी , मेरे शब्दों को आपका आशीर्वाद मिला , बहुत ही अच्छा लगा ! सहयोग और आशीर्वाद बनाये रखियेगा ! बहुत बहुत आभार !

मनु (tosi) के द्वारा
May 30, 2012

वाह क्या रिदम है !!! वाह ! ये रचना  सचमुच पुरस्कारके योग्य है … योगी जी ,,,, बधाई लीजिये सादर

    yogi sarswat के द्वारा
    May 31, 2012

    आदरणीय तोशी जी , सादर नमस्कार ! आपकी बधाई दिल से स्वीकार करता हूँ ! सहयोग बनाये रखियेगा ! बहुत बहुत धन्यवाद !

VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
May 30, 2012

नमस्कार योगी जी | जबरदस्त दमदार रचना | जय भारत | जय भारत के सपूत |

    yogi sarswat के द्वारा
    May 31, 2012

    श्री विवेक जी , आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

umesh shukla के द्वारा
May 30, 2012

पढ़ कर रोम रोम में सिहरन सी उठने लगी सच्ची कविता धन्यवाद् ऐसे लेखन के लिए

    yogi sarswat के द्वारा
    May 31, 2012

    मेरे शब्द आपके मन तक पहुंचे , अच्छा लगा ! श्री उमेश शुक्ला जी आपका बहुत बहुत आभार !

sadhna srivastava के द्वारा
May 30, 2012

बहुत सुन्दर प्रस्तुति योगी जी लेकिन दुःख इस बात का है कि अब हिन्दुस्तानी पाश्चात्य सभ्यता का अनुकरण कुछ ज्यादा ही कर रहे हैं…..

    yogi sarswat के द्वारा
    May 31, 2012

    आदरणीय साधना जी , सही कहती हैं आप ! किन्तु आप देखिएगा एक दिन भारतीय संस्कृति ही सर्वश्रेष्ठ रहेगी ! आपकी सार्थक प्रतिक्रिया मिली , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 30, 2012

देश प्रेम की सुन्दर भाव पूर्ण रचना. जोश जगाती. बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    May 31, 2012

    आदरणीय श्री प्रदीप कुशवाहा जी , सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत धन्यवाद ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा !

jlsingh के द्वारा
May 30, 2012

adarneey yogee jee, namaskaar! nishchay hee yah rachna puraskaar ke layak thee ! par aaj hame kya ho gaya hai? ham sab khule aam lut rahe hain …..

    yogi sarswat के द्वारा
    May 31, 2012

    आदरणीय श्री जवाहर जी , मेरे शब्दों पर आपका आशीर्वाद मिला , ख़ुशी हुई ! सहयोग बनाये रखियेगा ! बहुत बहुत धन्यवाद !

anoop pandey के द्वारा
May 30, 2012

योगी जी ये कृति तो वास्तव में पुरस्कार के योग्य है.

    yogi sarswat के द्वारा
    May 31, 2012

    श्री अनूप जी , सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा

dineshaastik के द्वारा
May 30, 2012

देश भक्ति के भावों को अभिव्यक्त रचना की प्रस्तुति के लिये  बधाई……

    yogi sarswat के द्वारा
    May 31, 2012

    बहुत बहुत आभार ! आदरणीय श्री दिनेश आस्तिक जी ! सहयोग बनाये रखियेगा !

चन्दन राय के द्वारा
May 29, 2012

योगी मित्र , मत भूल अशफाक की कुर्बानी को मत भूल भगत के जोश को फिरंगियों को वापस भगाया , तू भूल गया क्या उस बोस को ? || देशभक्ति भावना को जगाती बेहतरीन कविता , कुछ कहने लायक बचा ही नहीं , आपकी पुरस्कार प्राप्त कविता अपने आप में सब कुछ कह रही है

    yogi sarswat के द्वारा
    May 31, 2012

    मित्रवर श्री चन्दन राय जी , नमस्कार ! आपके विचार मुझे मेरी हर रचना पर मिल रहे हैं , बहुत बहुत आभार व्यक्त करता हूँ आप जैसे सुधि पाठक का ! बहुत बहुत धन्यवाद ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

Rajkamal Sharma के द्वारा
May 29, 2012

Aadrniy योगी जी ….. सादर अभिवादन ! हमार यह देश सिर्फ कुछेक गद्दारों की बेईमानी के कारण ही इतने सालो तक गुलाम रहा …. कितना अच्छा होता की अगर हमे 1857 में ही आजादी मिल गई होती ?…… इस देश में देशभक्तों की कमी नहीं है यह हमने कारगिल युद्ध के समय में देख और परख ही लिया है ….. इस पुरस्कर्त रचना को सांझा करने के लिए आभार जय श्री कृष्ण जी :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-)

    yogi sarswat के द्वारा
    May 31, 2012

    आदरणीय श्री राज कमल जी , सादर नमस्कार ! सही कहते हैं आप की कितना बढ़िया होता की हमारा देश 1857 में ही आजाद हो जाता ! कुछ बचता फिर ? अभी नमक हरामों ने 65 वर्ष में खोखला कर दिया है ! वैसे इस संदार्ब में एक कहानी सी याद आती है – कहें तो सुनाऊं ! एक कोई महात्मा थे ! ये 1857 की ही बात है ! वो घड़े से पानी पी रहे थे तभी उधर से एक अँगरेज़ गुज़र रहा था ! उसने उन महात्मा का घड़ा फोड़ दिया ! तब बाबा ने उसे कहा था की तुझ में इतना जो घमंड है एक दिन उतर जायेगा और हिंदुस्तान आज से ठीक ९० साल बाद आजाद होगा ! बहुत बहुत आभार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये ! सहयोग बनाये रखें !

akraktale के द्वारा
May 29, 2012

योगी जी सादर नमस्कार, बहुत सुन्दर रचना. खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी. देशभक्त वीरों पर लिखी रचना के लिए आप बधाई के पात्र हैं.

    yogi sarswat के द्वारा
    May 31, 2012

    आदरणीय श्री रक्ताले जी , आपकी बधाई सर आँखों पर ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा !

    Lavinia के द्वारा
    October 18, 2016

    Hmm it seems like your site ate my first comment (it was super long) so I guess I’ll just sum it up what I had written and say, I’m thoroughly enjoying your blog. I as well am an aspiring blog writer but I’m still new to the whole thing. Do you have any remnimeodatcons for beginner blog writers? I’d really appreciate it.

nishamittal के द्वारा
May 29, 2012

देश भक्ति के भावों से परिपूर्ण रचना सदा मेरी प्रिय होती हैं,योगी जी बहुत अच्छी रचना आपकी साथ ही पुरस्कार हेतु बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    May 31, 2012

    आपकी रूचि की कविता इस मंच पर दे सका , ख़ुशी हुई ! बहुत बहुत आभार आदरणीय निशा जी मित्तल ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा !

Santosh Kumar के द्वारा
May 29, 2012

योगी जी ,.सादर नमस्कार भाव भरी प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई आपको

    yogi sarswat के द्वारा
    May 31, 2012

    बहुत बहुत आभार , श्री संतोष कुमार जी ! सहयोग बनाये रखियेगा !

MAHIMA SHREE के द्वारा
May 29, 2012

आदरणीय योगी जी .. देश भक्ति के भाव को प्रस्तुत करती रचना के लिए बधाई आपको

    yogi sarswat के द्वारा
    May 31, 2012

    आपकी बधाई को दिल से स्वीकार करता हूँ आदरणीय महिमा जी ! बहुत बहुत धन्यवाद

Mohinder Kumar के द्वारा
May 29, 2012

योगी जी, भारत के महान सपूतों की याद में लिखी एक सारपूर्ण रचना के लिये बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    May 31, 2012

    श्री मोहिंदर कुमार जी , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद


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