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भारत का भविष्य हैं नरेन्द्र मोदी - jagran junction forum

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गंगा और जमुना की श्यामल गौर धाराएँ
सींचती है जिस धरा को वोह हिंदुस्तान है !

कश्मीर से मुखमंडल पर हिमालय सा ताज जिसके
सागर जिसके पग पखेरे वोह हिंदुस्तान है !!


गुजरात राज्य के वडनगर, मेहसाना जिला ( तब बॉम्बे राज्य हुआ करता था ) में 17 सितम्बर 1950 को जन्मे नरेन्द्र मोदी का पूरा नाम नरेन्द्र दामोदर दास मोदी है ! मध्यम वर्गीय श्री मूलचंद दामोदर दास मोदी और हीराबेन के छः संतानों में तीसरे नंबर पर आने वाले नरेन्द्र मोदी ने राजनीति शास्त्र से परा स्नातक किया है ! बचपन से ही देश सेवा के प्रति समर्पित श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध में भारतीय सैनिकों की खूब सेवा की ! नरेन्द्र मोदी ने बचपन में अपने अपने बड़े भाई के साथ मिलकर चाय की दूकान भी चलाई और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के साथ साथ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के सदस्य भी रहे ! अपने विश्वविद्यालय के समय में ये आर .एस .एस . के प्रचारक रहे और शकर सिंह वाघेला के साथ मिलकर गुजरात में संघ को मजबूत किया ! वाघेला उस वक्त गुजरात के बड़े नेता माने जाते थे और नरेन्द्र मोदी को रण नीति विशेषज्ञ ! भारतीय जनता पार्टी के नेता लाल कृष्ण आडवानी ने उनकी प्रतिभा को पहिचाना और गुजरात के साथ साथ हिमाचल का भी कार्यभार उनके कन्धों पर डाल दिया जिसे उन्होंने बखूबी निभाया !


सन 2001 से लगातार गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेन्द्र भाई मोदी में आज भारत देश की जनता अपना भविष्य टटोल रही है ! भारत की जनता को पिछले कुछ वर्षों में इतना लूटा गया है कि अँगरेज़ भी अपने आपको शर्मिंदा महसूस करते होंगे ! आज भारत का सर्वाधिक काला धन बाहर के देशों में छुपा के रखा हुआ है लेकिन लाने की कोई हिम्मत नहीं करता , लाये भी कैसे उनके आकाओं का जो है ! ये भारत देश का दुर्भाग्य है कि इसे ज्यादातर ऐसे प्रधानमंत्री मिले जो इस देश को अपनी बापोती समझते रहे और गरीबी हटाओ गरीबी हटाओ के चक्कर में अपना बैंक बैलेंस बढाते रहे ! ये कैसी विडम्बना है कि भारत में लोकतंत्र होते हुए भी एक ही परिवार के तीन तीन प्रधानमन्त्री बन जाते हैं और चौथा अपने आप को इस पंक्ति में खड़ा पाता है ( लेकिन मुश्किल होगा ) ! ऐसा क्या वो वरदान लेकर आते हैं ? वरदान नहीं वो भारत की जनता को मुर्ख बनाते आये हैं और अपना उल्लू सीधा करते आये हैं ! अगर जांच कराइ जाए तो उसी परिवार का सबसे ज्यादा काला धन विदेशों की बैंक में मिलेगा ! इन्होने अपने स्वार्थ की खातिर ही एक नेक इंसान और सीधे साधे डॉ . मनमोहन सिंह को बलि का बकरा बनाते हुए प्रधान मंत्री की कुर्सी पर बैठा दिया जो ना कुछ बोलता है और ना कुछ करता है ! ऐसे विद्वान , देखने में ही अच्छे लगते हैं ! प्रधान मंत्री की कुर्सी को इन्होने एक खिलौना बना दिया ! लेकिन इसमें दोष हमारा भी है क्योंकि हम ही उनकी चालों को नहीं समझ पाते हैं और लगातार उन्हें वोट देते आये हैं लेकिन अब परिस्थतियाँ बदल रही हैं ! चाटुकार अब समझ रहे हैं कि ऐसे ज्यादा दिन नहीं चल सकता इसलिए बोरिया बिस्तर बाँधने का समय आ गया है !


नरेन्द्र मोदी के रूप में भारत को एक सक्षम , ईमानदार और तेज़ तर्रार प्रधानमन्त्री मिलने को है ! सही कहूं तो एक शेर आने को है जिसके डर से चूहों की फूंक सरक रही है और उसे रोकने के लिए सारे अश्त्र शाश्त्र का उपयोग किया जा रहा है लेकिन महा ठगिनी को ये नहीं मालूम कि ये वही नरेन्द्र मोदी है जिसकी तारीफ अमेरिका भी करता है ! कॉरपोरेट के महारथी जिसके गुजरात के विकास के गीत गाते हैं , जनता जिसे लगातार अपने सिर आँखों पर बिठाये हुए है ! ऐसे नरेन्द्र मोदी की ही आज के भारत को जरूरत है ! महाठगिनी को ये डर है कि अगर मोदी प्रधान मंत्री की कुर्सी तक पहुँच गए तो उसके सारे पते ठिकाने ढूंढ लिए जायेंगे और वो बच नहीं पायेगी ! कभी कभी देश को ठगों से बचाने के लिए एक तानाशाही शाषक की जरूरत भी होती है और नरेन्द्र मोदी में वो सारे गुण परिलक्षित होते हैं जो एक शासक में होने चाहिए ! मुझे लगता है नरेन्द्र मोदी भारत के भविष्य हैं ! श्री हरिओम पंवार साब के शब्दों में :


मैं दरबारों के लिए अभिनन्दन गीत नहीं गाता
मैं ताजों के लिए समर्पण गीत नहीं गाता
गौण भले ही हो जाऊ मौन नहीं हो सकता मैं
पुत्र मोह में शस्त्र त्याग कर गुरु द्रोण नहीं हो सकता मैं
कितने ही पहरे बैठा दो मेरी क्रुद्ध निगाहों पर
मैं दिल्ली से बात करूँगा भीड़ भरे चौराहों पर
मैंने भू पर रश्मि -रथी का घोड़ा रुकते देखा है
पांच तमेंचो के आगे दिल्ली को झुकते देखा है
मैं दिल्ली का वंसज दिल्ली को दर्पण दिखलाता हूँ
इशलिये मैं अज्ञान -गंधा गीत सुनाता हूँ !!


नरेन्द्र मोदी पर ये आरोप लगता रहा है कि वो गोधरा कांड के आरोपी हैं ! रोने वाले सिर्फ एक समुदाय के नहीं हैं ! जिन्हें ना मालूम हो उनके लिए बताना चाहता हूँ की नरेन्द्र मोदी के मुख्य मंत्री के कार्यकाल में जितने दंगे हुए उससे ज्यादा कॉंग्रेस के शासनकाल में हुए हैं ! कौन भूल सकता है अहमदाबाद में 1987 में हुए दंगों को ? अब ज़रा गोधरा की बात कर लेते हैं ! मगरमच्छ के आंसूं बहाने वालों से पूछना चाहता हूँ कि गोधरा के स्टेशन पर ट्रेन में आग किसने लगाईं और क्यूँ लगाईं ? क्या सिर्फ इसलिए कि वो अपने आराध्य श्री राम के मंदिर निर्माण के लिए प्रण लेने गए थे ? ये उनका दोष था ? कहाँ से आया इतना पेट्रोल कि बोगियां की बोगियां जला डाली गयीं ? उनके जान नहीं थी ? उनके बीवी बच्चे नहीं थे ? उनको जलन नहीं होती ? वो इंसान नहीं थे ? या सिर्फ वो हिन्दू थे इसलिए उनको जलाकर मार डाला गया और जब इसका प्रतिवाद आया तो सबकी त्योरियां चढ़ गयीं ? क्यों ? क्या हिन्दुओं को इस देश में जीने का हक नहीं है ? उनका क्या दोष था ? क्या उनको मारना , ट्रेन को जलाना pre planning नहीं थी ? याद करिए राजीव गाँधी के शब्द जब इंदिरा जी की हत्या हुई थी ! याद आया ? उन्होंने कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो जमीन हिल ही जाती है और इसी को आधार बनाकर हजारों निर्दोष सिखों को लूटा गया और मौत के घाट उतारा गया ! तब कहाँ थी साम्प्रदायिकता की बात करने वाली ज़मात ? तब कहाँ थे धर्म निरपेक्षता का दंभ भरने वाले ? मैं बहुत छोटा था उस समय , लेकिन मेरे पिता बताया करते थे कि जो लोग दिल्ली में काम करते थे वो लगभग दूसरे तीसरे दिन बहुत सारा माल लेकर आया करते थे और जब पता पड़ा कि उन लोगों ने सिखों की दुकानों को लूट कर माल इकठ्ठा किया है तब कहाँ चली गयी मानवता ? वो भी उस समाज के प्रति जो हमारा ही एक अंग था , जिसने भारत की आज़ादी में पूरा साथ दिया ! उस समाज के साथ ये सलूक ? जब गोधरा में प्रतिवाद हुआ तब सब को लगा कि ये तो गलत हुआ , वो जो 57 कार सेवक मारे गए , निर्ममता से जलाये गए उनका किसी को कोई दुःख नहीं हुआ ? जब एक इंदिरा जी की हत्या के बदले हजारों सिखों को बर्बाद किया गया तब कुछ नहीं , जब अयोध्या से लौट रहे 57 निर्दोष कार सेवकों को जला दिया गया तब कुछ नहीं मगर जब इसका प्रतिवाद हुआ तो सब जैसे कब्र में से उठ खड़े हुए !


ज अगर देश को चोरों और महा ठगों से बचाए रखना है तो नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुँचाना ही होगा अन्यथा हम अपने किये हुए पर पछताने के अलावा और कुछ नहीं कर पाएंगे और लूटने वाले देश को और ज्यादा लूटेंगे ! सुधि पाठक जानते हैं कि रूपया का क्या हाल हुआ पड़ा है , अभी और भी देखते जाइये ! ये महा ठगिनी इस देश के लोगों को जीने लायक नहीं छोड़ेगी ! इतने घोटाले होंगे और यही हाल रहेगा तो कोई भी यहाँ पैसा लगाने हिंदुस्तान में नहीं आएगा और फिर युवा वर्ग को नौकरियों के लाले पड़ जायेंगे ! भुखमरी होगी , अभी भी है और ज्यादा हो जाएगी ! देखते रहिये ! लूटने वाले लूट कर भाग जायेंगे और हम दाने दाने को मोहताज़ हो जायेंगे ! अब हजारों का घोटाला नहीं होता लाखों करोड़ का घोटाला होता है और प्रधानमंत्री कहता है कि कहीं कुछ नहीं हुआ ! ऐसा प्रधानमंत्री चाहिए था हमें ? चोरों का सरदार चाहिए था हमें ? एक रिमोट से चलने वाला प्रधानमंत्री चाहिए था हमें ? लल्लू और महाठगिनी को अपना बॉस मानने वाला प्रधानमंत्री चाहिए था हमें ? ये भारत के लोगों को सोचना होगा कि उन्हें देश का प्रधान मंत्री चाहिए या 10 जनपथ का आज्ञाकारी नौकर ?


नरेन्द्र मोदी को केवल एक पार्टी का नेता ना समझ कर देश का भविष्य माना जाये तो ज्यादा उचित होगा ! वो ना केवल भारतीय जनता पार्टी के खेवन हार हैं बल्कि भारत के उज्जवल भविष्य के प्रतीक भी हैं ! अभी मौका है भारत की जनता के पास कि आने वाले चुनावों में अपने विवेक का पूरा उपयोग करते हुए देश के गद्दारों से कुर्सी खींचकर देश हित सोचने वाले नरेन्द्र मोदी के हाथों में देश की बागडोर सौंपकर भारत के भविष्य को उज्जवल और चमकदार बना सके !


कर गयी पैदा तुझे उस कोख का एहसान है
सैनिकों के रक्त से आबाद हिन्दुस्तान है !!


जय हिंद ! जय हिंद की सेना !



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150 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

RAJA के द्वारा
January 28, 2014

mujhe aap ye btao ki jab kisi job vacency me ye nahi pucha jata ki are u a victim of 1984 riots to intelligence beoru ke ka form me ye option kiyu hai “are u a victim of gujrat 2002 riots”

yogi sarswat के द्वारा
October 14, 2013

आप शायद समझने में नाकाम रहे हैं मित्रवर आर्यन जी ! मैंने हमेशा ही इस ब्लॉग में स्पष्ट रूप से आपके द्वारा उठाये गए मुद्दों पर बात करी है ! बहुत बहुत आभार आपका , आपने अपना समय और कीमती पक्ष रखा

Aaryan Panday के द्वारा
October 14, 2013

सेमी सेक्युलर जी आप गुजरात riots की बात करते हो लेकिन गोधरा बर्निंग ट्रेन के बारे मे नही. कश्मीर ब्रामिन किल्लिंग पर नहि. मुज़फर नगर मे आज़म का ऑर्डर की जो हो रहा हे होने दो ओर किसी मुस्लिम की गिरफ्तारी नही… क्या हे ये सब सर???? क्या ये ईमानदारी हे???

    yogi sarswat के द्वारा
    December 11, 2013

    बहुत बहुत धन्यवाद आपका

December 8, 2012

कभी कभी देश को ठगों से बचाने के लिए एक तानाशाही शाषक की जरूरत भी होती है…..हिटलर की तानाशाही ने ही आज जर्मनी को विश्व शक्ति बनाया है……और दूसरी बात आज़ाद भारत के सभी दंगों को “गुजरात दंगों” में अटकाने वालों से एक सवाल……क्या भारतीय इतिहास में सिर्फ एक ही दंगा हुआ ?? क्या 1984 के दंगों के सिखों को न्याय मिला ?? सोचिए जरा !

    yogi sarswat के द्वारा
    December 10, 2012

    बिलकुल सही फ़रमाया आपने मित्रवर आनंद जी ! सम्प्रदिकता के नाम पर कांग्रेस बहुत राज कर चुकी इस देश में और अब सही समय आ रहा जब सही मायने में हिदुस्तानियों और हिंदुस्तान की बात करने वाला कोई प्रधानमंत्री आये ! बहुत बहुत आभार

Pankaj के द्वारा
December 5, 2012

ऐसा नहीं लगता कि नरेन्द्र मोदी को इतना बढ़ा-चढ़ा के लिया जा रहा है | नरेन्द्र मोदी एक अच्छा इंसान हो सकता है, लेकिन इस बात की प्रमाणिकता क्या है… गुजरात में बहुत कुछ ऐसा भी हुआ है जो अमानवीय था … कट्टरपन से पेश आना अच्छा उदाहरण हो ही नहीं सकता इसके लिए एक निरपेक्ष सूच भी होनी चाहिए.. वर्ना ये तो वाही हुआ की एक गुंडे को भागने के लिए दूसरे को ले आये ….

    yogi sarswat के द्वारा
    December 6, 2012

    पंकज जी , आपके विचारों का स्वागत करता हूँ ! लेकिन आप शायद भूल रहे हैं की जितने लोग आज मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में देखने को व्याकुल हैं वो सिर्फ हिन्दू ही नहीं हैं बल्कि मुस्लिम भी चाहते हैं की मोदी प्रधानमंत्री बनें ! आप कहेंगे , ऐसा हो ही नहीं सकता ! गुजरात अपने विकास के साथ साथ अपने दंगों के लिए भी जाना जाता है ! वहां मोदी के मुख्यमंत्री बनाने से पहले भी दंगे हुए हैं बल्कि सबसे ज्यादा वहीँ हुए हैं लेकिन मोदी के ऊपर ये लांछन लगा दिया जाता है की वो बड़े निर्दयी हैं ! अब क्यूँ नही होता वहां दंगा ? २००२ के बाद क्यूँ नहीं ? क्यूंकि रोज़ रोज़ से अच्छा है की एक बार मर लिया जाए ! इसलिए उस मानसिकता को भूलना होगा और नए भारत के निर्माण के लिए , भारत की अस्मिता बचाए रखने के लिए मोदी का आना जरुरी है प्रधानमंत्री के रूप में अन्यथा आप धीरे धीरे देखते जाएँ – इस देश का क्या हाल हो जायेगा !

    Aaryan Panday के द्वारा
    October 14, 2013

    सेमी सेक्युलर जी आप गुजरात riots की बात करते हो लेकिन गोधरा बर्निंग ट्रेन के बारे मे नही. कश्मीर ब्रामिन किल्लिंग पर नहि. मुज़फर नगर मे आज़म का ऑर्डर की जो हो रहा हे होने दो ओर किसी मुस्लिम की गिरफ्तारी नही… क्या हे ये सब सर???? क्या ये ईमानदारी हे???

    yogi sarswat के द्वारा
    October 14, 2013

    आभार आपका

jalaluddinkhan के द्वारा
July 12, 2012

योगी जी ,मैं आपका यह चेहरा देखकर हैरान हूँ.सच कहूं तो आपके बहाने इंसानियत,मानवता के बड़ी-बड़ी बात करने वाले तमाम चेहरों से नकाब उतर गया.हैरानी होती है की हम कैसे दोहरे चरित्र के साथ जी रहे हैं.मेरा मानना है की लेखक समाज का मार्गदर्शक होता है.जिस तरह एक डॉक्टर सिर्फ डॉक्टर होता है,हिन्दू-मुसलमान नहीं उसी तरह लेखक भी खुद को हिन्दू-मुसलमान के खाने में बाँट नहीं सकता.मज़हब के आधार पर गलत को सही नहीं कह सकता.यह काम राजनीतिज्ञों का है.अगर आप राजनीतिज्ञ हैं तो ठीक है,वरना यह विचार आपको शोभा नहीं देते.आप अपने आलेख में खुद भ्रमित हो रहे हैं.सिख विरोधी दंगों का आप गम मना रहे हैं,लेकिन उसी को आधार बनाकर मोदी को क्लीन चिट दे रहे हैं.सिखों के साथ जो हुआ गलत था और गुजरात में जो हुआ वह भी गलत है.जब बड़ा पेड़ गिरता है तो जमीन हिलती ही है,न सही था,न हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है,सही है.हमें राजनीति नहीं करनी है.मानवता की जब हत्या होगी,हमारा पहला धर्म है की इंसाफ की आवाज़ बुलंद करें.यह न देखें/पूछें की हिन्दू मरा की मुसलमान,हम यह देखें की इन्सान मरा और नाहक मरा,तो हमारी लेखनी निष्पक्षता के साथ उसकी आवाज़ बने.जब हम बंटवारा करने लगेंगे तो राजनीति करने वाले क्या करेंगे? आपका यह लेख पढ़ कर बहुत दुःख हुआ.हालाँकि आपने लेख की शुरुआत अच्छी की.लेकिन मोदी के दावे को सही ठहराने के लिए आप आगे चल कर रास्ते से भटक गए.लाल रंग में आपने जो कुछ लिखा वह आपकी अनकही है,जो आप संकोच वश आज तक नहीं कह पाए थे.आपका रवैया इस लेख में शुद्ध राजनितिक नज़र आया. अब लेखक भी निष्पक्षता छोड़कर राजनीति के चश्मे से देश को देख रहे हैं.मैं इस विषय पर अधिक बहस नहीं करना चाहता.लेकिन यह ज़रूर स्पष्ट करना चाहता हूँ कि आपके लेख पर हो रही बहस में जिस तरह बहुसंख्यक मुस्लिम विरोधी मानसिकता देखने को मिली,उससे ज़ाहिर हो गया कि मुसलमान वास्तव में अल्पसंख्यक है,उसका पक्ष रखने कोशिश करने वाले भी अल्पसंख्यक (जैसे अलीन जी )हैं.यही हाल है पूरे देश का. अंत में– तू है सबका प्यारा , तू है सबसे महान कोई पढ़े गीता यहाँ , कोई पढ़े कुरआन पूजे जब हर कोई तुझको तो ये हिन्दू -मुस्लिम का अंतर क्यों है ? यह प्रश्न आपका था ,और शायद आपको अब अपने लेख से उत्तर भी मिल गया होगा .

    yogi sarswat के द्वारा
    July 13, 2012

    आदरणीय श्री जलालुद्दीन जी , सादर नमस्कार ! निश्चित रूप से मैं कोई राजनीतिज्ञ नहीं हूँ और न ही कोई नहुत बड़ा लेखक हूँ ! आपने बहुत सही लिखा है की एक लेखक को निष्पक्ष होकर लिखना चाहिए , बिलकुल ! आपकी बात से सौ प्रतिशत सहमत हूँ ! अगर मैं व्यक्तिगत बात करूँ ( करना नही चाहता लेकिन विषय मजबूर करता है ) तो मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं की कौन हिन्दू है या कौन मुसलमान ! मेरी ज्यादातर उच्च शिक्षा मुस्लिम संसथान में ही हुई है , तो मैं बहुत बेहतर तरीके से समझ सकता हूँ ! और मेरे गहरे दोस्त भी मुस्लिम हैं , तो व्यक्तिगत बात तो हो जाती है ख़त्म ! एक और बात भी है – श्री जलालुद्दीन भाई , अगर मैं निष्पक्ष नहीं होता तो शायद मैं उर्दू नहीं सीखता , अगर मैं निष्पक्ष नहीं होता तो मैं अफगानिस्तान की “पश्तो भाषा ” के लिए जामिया मिल्लिया इस्लामिया नहीं गया होता , अगर मैं निष्पक्ष नहीं होता तो इस्लाम से सम्बंधित किताबें अपने घर में नहीं रखता ! मेरा ये मानना है की इंसान यहाँ इंसान के रूप में रहे ! कोई फर्क नहीं पड़ता की वो किस धर्म या किस जाती से है ! यहाँ सब एक निश्चित समय के लिए आये हैं और वो समय अगर वो इंसान बनकर ही गुजार सकें तो बेहतर बात होगी और ये दुनिया ही स्वर्ग हो जाएगी ! अब आते हैं नरेन्द्र मोदी के नाम पर ! श्री जलालुद्दीन जी , आप एक बार सोचें , आज देश के क्या हालात हैं ? क्या हमने ऐसे ही देश की कल्पना करी थी ? क्या हम ऐसा ही शाशन चाहते थे ? क्या यही लूट और खसोट कराने के लिए हमने आज़ादी की लड़ाई में अपने सैकड़ों वीरों को खोया , वो हिन्दू भी थे , मुसलमान भी थे ! क्या यही देश था हमारे सपनो का ? की कोई एक परिवार आएगा और इस देश को मुहम्मद गोरी की तरह लूट लूट कर स्विस बैंको को भर डालेगा ? यहाँ जनता भूखी रोटी है और उधर स्विस बैंक भरे पड़े हैं ! क्या भूखों में मुसलमान नहीं ? भाई जी , जब पेट की भूख लगाती है तो वो हिन्दू और मुसलमान दोनो को सताती है ! क्या आप को नहीं लगता की आज़ादी के ६५ वर्षों के बाद भी हम भूखे हैं ? हम कब तक हिन्दू और मुसलमान का भेद करते रहेंगे और कब तक भूखे मरते रहेंगे ? इसी भेद में लुटेरों ने पहले भी हमें लूटा है और अब भी लूट रहे हैं और एक हम हैं की हिन्दू हिन्दू , मुस्लिम मुस्लिम करते करते लूटे जा रहे हैं ! हम लड़ रहे हैं , वो मौज कर रहे हैं ! कब तक , आखिर कब तक ! क्या अब हमें एक ऐसा चेहरा नहीं चाहिए जो देश की सही मायनो में सेवा कर सके ? क्या अब हमें ऐसा व्यक्ति नहीं चाहिए जो देश के भूखों को दो वक्त की रोटी का इन्तेजाम कर सके ? आपको शायद ये पता ही होगा की नरेन्द्र मोदी को गुजरात के ही मुस्लिम सबसे ज्यादा वोट करते हैं और वहां के मुस्लिम उनके राज्य से खुश भी हैं ! तभी वहां खुशहाली है ! तो आदरणीय श्री जलालुद्दीन भाई विनम्रता के साथ कहना चाहता हूँ कि यही वो देश है जहां अज़हरुद्दीन को मुस्लिम होते हुए भी कप्तान बना दिया जाता है , यही वो देश है जहां कलाम जैसे व्यक्ति को सर पर बिठाया जाता है , यही वो देश है जहां मुसलमान अभिनेता सबसे ज्यादा पोपुलर हैं , यही वो देश हैं जहां हिन्दू भी पीर कि पूजा करते हैं ! तब ये हिन्दू मुस्लिम का अंतर क्यूँ भाई ? क्या देश के भविष्य और अपने बच्चों के भविष्य के लिए हमें नरेन्द्र मोदी जैसा व्यक्तित्व नहीं चाहिए ? या सिर्फ उन्हें दंगों और हिंदूवादी होने के कारण ही ठुकराया जा सकता है ! मैं आज अपना विश्वास बताता हूँ , ये तो वक्त ही बता पायेगा कि मोदी प्रधानमंत्री बन पाते हैं या नहीं लेकिन मुझे इतना भरोसा जरूर है कि नरेन्द्र मोदी अगर प्रधानमंत्री बनते हैं तो न केवल भारत तरक्की करेगा बल्कि मुस्लिम भी उतने ही सुरक्षित रहेंगे जितने आज हैं और उन्हें वाही सम्मान और इज्ज़त भी मिलेगी जितनी मिलती आई है ! आपने एक स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है , बहुत बहुत आभार और शुक्रिया ! आपकी प्रतिक्रिया एक स्पष्ट सन्देश देती है और सार्थक होती है ! बहुत बहुत आभार

yogeshkumar के द्वारा
June 29, 2012

ये लेख चेतन भगत का है….. मुझे लगा इस परिचर्चा में इसे डालना ठीक रहेगा …… इसलिए copy paste कर दिया….. जरूर पढ़ें ….. पिछले हफ्ते मैंने अपने पब्लिक फेसबुक पेज पर यूं ही एक सरल-सा पोल करवाया था। मैंने एक सरल प्रश्न पूछा था : भारत का प्रधानमंत्री किसे बनना चाहिए? विकल्प भी सरल थे : राहुल गांधी, नरेंद्र मोदी और इनमें से कोई नहीं। मेरा इरादा किसी तरह के पक्षपात का नहीं था। पेज पर देशभर के फेसबुक यूजर्स ने छह हजार से अधिक वोट दिए। राहुल गांधी को 5 फीसदी वोट मिले। नरेंद्र मोदी को 76 फीसदी वोट मिले। शेष प्रतिभागियों ने दोनों में से किसी को नहीं चुना। यह एक सार्वजनिक निर्णय था और मैं इसे नियंत्रित नहीं कर सकता था। इसे मेरे पब्लिक फेसबुक पेज http://www.facebook.com/chetanbhagat.fanpage पर देखा जा सकता है। नहीं, मैं यह कहने की कोशिश नहीं कर रहा हूं कि यह देश का फैसला था। वास्तव में यह राष्ट्रीय जनादेश से बहुत अलग भी हो सकता है, क्योंकि फेसबुक का उपयोग करने वालों में युवा, समृद्ध और तुलनात्मक रूप से अधिक शिक्षित भारतीयों की संख्या अधिक है। जैसा कि कहा जाता है, फेसबुक का उपयोग करने वाले अधिकतर लोग तो चुनाव में वोट डालने भी नहीं जाते। वहीं मोदी के भी कुछ उत्साही समर्थक हैं, जो इस तरह के पोल होने पर उनका समर्थन करने पहुंच जाते हैं। बहरहाल, इन आंकड़ों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर देना भी मूर्खतापूर्ण होगा। सायबरस्पेस में नरेंद्र मोदी की हमेशा से ही एक तरह की फैन फॉलोइंग रही है, लेकिन इसके बावजूद 5 के बनाम 76 की बढ़त हासिल करना चौंकाने वाला है। इसका मतलब है कि मोदी के प्रशंसक वर्ग में पिछले दो साल में नाटकीय बढ़ोतरी हुई है। यह केवल गुजरात में चलाया गया सेंपल पोल नहीं था। यह राष्ट्रीय पोल था। नरेंद्र मोदी की तुलना में राहुल गांधी राष्ट्रीय स्तर पर कहीं बेहतर ढंग से पहचाने जाने वाले ब्रांड हैं। वे युवा, सुंदर, सौम्य और कुछ मायनों में आकांक्षापूर्ण भी हैं। फिर देश के युवाओं ने उन्हें क्यों वोट नहीं दिए? और यदि नरेंद्र मोदी वास्तव में ही इतने दोषपूर्ण हैं, जैसा कि उन्हें बताया जाता है, तो लोग उन्हें वोट क्यों दे रहे हैं? नरेंद्र मोदी के उदय की क्या वजह है? और इससे भी अधिक जरूरी बात यह है कि क्या वे गुजरात और सायबर प्रदेश की पसंद होने के साथ ही 28 राज्यों की पसंद भी बन सकते हैं? पहले राहुल गांधी के बारे में बात करते हैं। प्रथम परिवार की अनुकंपा की चाह रखने वाले कांग्रेसजनों और अंग्रेजी मीडिया ने राजनीति में राहुल के प्रवेश का जोर-शोर से स्वागत किया था। राहुल ने अपने पदार्पण पर कई उम्मीदें जगाईं, लेकिन वे एक ऐसे समय परिदृश्य पर उभरे, जब कांग्रेस का मुश्किल दौर चल रहा था। व्यापक पैमाने पर घोटाले हो रहे थे और सरकार दंभ का प्रदर्शन करते हुए भ्रष्टों को बचाने और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों को कुचलने की कोशिश कर रही थी। राहुल ऐसे मौकों पर जनता के सामने नहीं आए। आलोचनाओं के समक्ष मौन धारण कर लेना आमतौर पर एक अच्छी रणनीति होती है, लेकिन केवल तभी, जब आलोचना बेबुनियाद हो। कांग्रेस नैतिक रूप से गलत थी और उसने आरोपों को स्वीकार करने से भी इनकार कर दिया। लोकपाल बिल को भुला दिया गया, सीबीआई ने सरकार का साथ दिया और न्याय प्रक्रिया की धीमी चाल से भी उसे फायदा हुआ। ऐसे में राहुल गांधी से ज्यादा की अपेक्षा करना शायद ज्यादती ही थी। राहुल को भारतीयों के बदलते सांस्कृतिक रुझानों के कारण भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हालांकि भारतीय अब भी वंश परंपरा पर मुग्ध रहते हैं, लेकिन देश का शिक्षित तबका अब अधिकार बोध से जुड़े सवाल उठाने लगा है। कांग्रेस को अपने रवैये पर पुनर्विचार करना होगा। उसे सोचना होगा कि राहुल को मुश्किल हालात से दूर रखने से बेहतर तो यही होगा कि मुश्किल हालात पैदा होने की नौबत ही न आए। दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी का कद निरंतर बढ़ता ही गया है। निश्चित ही अनेक लोग इसका श्रेय गुजरात में हुए विकास को देते हैं, लेकिन किसी व्यक्ति की ‘कल्ट फॉलोइंग’ के लिए विकास का रिकॉर्ड ही काफी नहीं होता। मोदी की लोकप्रियता का राज उनका व्यक्तित्व है। उनमें जिस तरह की त्वरा है, समृद्धि और निर्णयशीलता के प्रति उनके जो आग्रह हैं, वह देश के युवाओं की मानसिकता के अनुरूप हैं। आज अच्छे कॉलेजों में पर्याप्त सीट्स नहीं हैं और अच्छी कंपनियों में पर्याप्त जॉब्स नहीं हैं। युवा चाहते हैं कि इन समस्याओं का समाधान हो और उन्हें लगता है मोदी ऐसा कर सकते हैं। युवाओं को भले ही स्वार्थी कहा जाए, लेकिन सच तो यही है कि वे इतिहास के किसी विवादित अध्याय की अधिक परवाह नहीं करते। जब आपका भविष्य संकट में हो, तब आप किसी और के अतीत की अधिक चिंता नहीं कर सकते। वास्तव में मोदी की लोकप्रियता का एक राज उनकी निरंतर होने वाली आलोचना भी है। कांग्रेस के मोदी-विरोधी आलाप ने मोदी की लार्जर दैन लाइफ छवि बना दी है। एक समय था, जब मोदी का समर्थन करने का मतलब था सांप्रदायिक करार दिया जाना। लेकिन आज मोदी का समर्थन करने का मतलब है कांग्रेस की नीतियों का विरोध करना। और चूंकि लाखों लोग बदलाव चाहते हैं, इसलिए वे मोदी की ओर आकृष्ट हो रहे हैं। लेकिन क्या मोदी को मिलने वाला सायबर समर्थन देश की सड़कों तक पहुंच सकता है? कहना कठिन है। हो सकता है। इंटरनेट अक्सर आगामी घटनाओं की पूर्वसूचना देता है। अन्ना आंदोलन भी सड़कों पर उतर आने से पहले इंटरनेट पर फैल चुका था। यदि मोदी भाग्यशाली साबित हुए, यदि वे विनम्र बने रहे, अतीत की घटनाओं के लिए वास्तव में खेद प्रकट करते रहे और सही कदम उठाते रहे, तो यह उनके साथ भी हो सकता है। मोदी की पार्टी भारतीय जनता पार्टी और उसके गठबंधन सहयोगियों को भी यह समझना चाहिए। उन्हें भी नरेंद्र मोदी पर दांव लगाना चाहिए, जो विवादों के बावजूद लोकप्रियता के सोपान चढ़ते जा रहे हैं। साथ ही उन्हें अंदरूनी कलह पर रोक लगाकर अगला चुनाव जीतने पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए और जनसमर्थन जुटाना चाहिए। यदि वे ऐसा नहीं कर पाए तो उनका प्रधानमंत्री फेसबुक तक ही सीमित रह जाएगा। (लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं।) चेतन भगत …

    yogi sarswat के द्वारा
    June 30, 2012

    श्री योगेश कुमार जी , नमस्कार ! चेतन भगत खुद अपने आप में एक संस्था हैं , उनके लेख और पुस्तकें अपने आप में विचारणीय होती हैं ! आपका आभार की आपने ये पूरा का पूरा लेख यहाँ प्रस्तुत किया ! असल में मोदी के प्रधानमंत्री बनाने में कांग्रेस खुद सहयोग कर रही है ! उसके द्वारा आये दिन किये गए घोटालों का बाहर आना और हर रोज़ महंगाई बढ़ना , मोदी के पक्ष में ही जा रहा है ! उस पर कांग्रेस की असफल नीतिया और मोदी का हमेशा विरोधी के रूप में गुणगान करना कांग्रेस के लिए घातक साबित हो रहा है ! आपकी प्रतिक्रिया का आभार व्यक्त करता हूँ !

munish के द्वारा
June 29, 2012

पूरे फाइव स्टार ……………… ! मैं तो कब से इस इंतज़ार में हूँ की मोदी जी प्रधानमन्त्री बने

    yogi sarswat के द्वारा
    June 29, 2012

    आदरणीय श्री मुनीश जी , सादर नमस्कार ! आपने तो मेरे मुंह की बात कह दी ! बड़ा अच्छा लगा आप मेरे ब्लॉग पर आये ! आभार

bharodiya के द्वारा
June 28, 2012

योगी भाई आप का लेख एकदम सही है । राष्ट्रिय भावना भी भरपूर है । लेकिन अब राष्ट्रिय भावना का कोइ मतलब नही रहा । राष्ट्रिय भावना से बिग बॉस को चीड है । बीग बॉस नही चाहता की कोइ राष्ट्रिय भावना वाला नेता भारत का प्रमुख बने । उसे तो मन मोहन जैसा गुलाम या बाजपाई जैसे कवि-ह्रदय आदमी चाहिए जो ठोस काम करे भी नही करने दे भी नही । वो नही चाहता की शास्त्री जैसा कोइ दूसरा आये और उस की भी हत्या करनी पडे । ये बीग बॉस ईतना शातिर है की विचारकों के आगे अपने को शरीफ बनाये रखने के हर सामान तैयार रखता है । ईन्दिरा को ईस लिए मारा की वो पूरी तरह उन के कबजे में नही आ रही थी । राजीव को ईस लिए मारा की वो भोला था, अगर किसी ने उस में राष्ट्रिय भावना भर दी होती तो राजीव राष्ट्रिय भावना वाले नेता बन जाते । उन की प्लान्ट की हुई सोनिया ही ठीक थी । राजीव के हत्यारे प्यादा मात्र थे । राजीव के हत्यारे के प्रति सोनिया की सहानुभूति नजर अंदाज नही की जा सकती । भारत की जनता को अब तक मालुम ही नही पडा है की आतंकवादी सुपारी किलर मात्र है और सुपारी देनेवाला बीग बोस ही है । भारत की जनता के हाथ अब कुछ नही बचा । जनता का एक भाग बीक गया है, एक भाग का दिमाग बीग बॉस के चरणों की भेंट चड गया है । थोडा भाग बचा है वो लोक्शाही के नाटक में कुछ नही कर सकता ।

    yogi sarswat के द्वारा
    June 28, 2012

    आदरणीय श्री भरोदिया जी , सादर नमस्कार ! हम पता नहीं राह भटकते हुए कहाँ से कहाँ आ पहुंचे हैं ! जब शुरुआत की थी , तब शायद हमारे पुरखों ने सोचा भी नहीं होगा की जिस भारत को हम अपने आने वाली पीढ़ी को इतने मन और उम्मीदों के साथ सौंप रहे हैं वो पीढ़ी उस देश का सत्यानाश ही कर देगी ? आपके विचार बहुत प्रभावित करते हैं ! बहुत बहुत आभार !

anuradh chaudhary के द्वारा
June 27, 2012

अनिल कुमार आलीन का व्‍यवहार उस मानव केसमान है जो ज्‍यादा अच्‍दा दिखाने के चक्‍कर मे पागलो जैसा व्‍यवहार करने लगता है।

    yogi sarswat के द्वारा
    June 28, 2012

    अनुराधा जी , सादर नमस्कार ! हर व्यक्ति की अपनी एक सोच होती है ! उसकी सोच का भी हमें सम्मान करना चाहिए ! बहुत बहुत आभार

anuradh chaudhary के द्वारा
June 27, 2012

आप ने ठीक कहा। यह बात मै कहना चाहती थीा

    yogi sarswat के द्वारा
    June 28, 2012

    आदरणीय अनुराधा जी , सही कहा आपने ! मेरे शब्दों पर आने और अपना समय देने के लिए आपका बहुत बहुत आभार ! आगे भी आपके आगमन की प्रतीक्षा रहेगी ! धन्यवाद

    Almena के द्वारा
    October 18, 2016

    I hope your son is well and that Sycomore somehow made it easiser for you to survive this day. It is the worst time for mum to have a child in a hospital, whatever the reason is. Sending you both positive vinistroba.

pritish1 के द्वारा
June 27, 2012

मित्रवर सप्रेम……… आपके अगले आलेख की प्रतीक्षा में हूँ……… मेरी कहानी का तीसरा सन्सकरण अवश्य पढें ऐसी ये कैसी तमन्ना है……..3 आपके विचारों की प्रतीक्षा में…….

    yogi sarswat के द्वारा
    June 28, 2012

    मित्रवर प्रीतिश जी , जरूर ! आप मेरे ब्लॉग पर आये , आपका बहुत बहुत शुक्रिया ! सहयोग और समर्थन बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

jagojagobharat के द्वारा
June 24, 2012

बहुत ही सुन्दर आलेख आप के द्वारा उठाये गए एक एक विन्दु पर पूर्ण सहमती व्यक्त करता हु

    yogi sarswat के द्वारा
    June 25, 2012

    नमस्कार मित्रवर ! आपको मेरा लेखन पसंद आया , बहुत बहुत आभार ! आगे भी आपके सहयोग और समर्थन की कामना करता हूँ ! बहुत बहुत धन्यवाद

    Chynna के द्वारा
    October 17, 2016

    रोहनशी १००% सहमत… àà† ¤ªà¤²ä¥à¤¯à¤¾à¤•à¤¡à¥‡ कडक शिक्षा हव्या होत्या…… एखादी व्यक्ती असे काहि वागण्याची हिम्मत करू शकते हेच मुळात बंद झाले पाहिजे…..

Avdhesh kumar के द्वारा
June 23, 2012

1बात तो सही है पर कया कया करौ जब बीजैपी की पाटी मै कलह जारी है 

    yogi sarswat के द्वारा
    June 25, 2012

    मित्रवर श्री अवधेश जी , सादर ! सही कहते हैं आप ! आपके विचारों से सहमत हूँ ! मेरे ब्लॉग पर आने और अपने विचार देने के लिए आपका बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

    Sharky के द्वारा
    October 18, 2016

    Mucho meteros con los fucioonarnis y me sacáis todos los números de la revista con los meses a punto de terminar, galopines.Y yo, como la tengo que recibir a través de Correos, que son funcionarios también, pues cuando no llega ya me preocupo…

yogeshkumar के द्वारा
June 23, 2012

बहुत सही आलेख………….

    yogi sarswat के द्वारा
    June 23, 2012

    धन्यवाद !

yogi sarswat के द्वारा
June 23, 2012

मित्रवर अलीन जी , नमस्कार ! आपने जो लिखा है उसका मतलब मैं ये समझूँ की आप कहना चाहते हैं की नरेन्द्र मोदी देश को बांटना चाहते हैं ?> मतलब जो हिंदुस्तान की बात करे वो सांप्रदायिक ? जो सबके हक की बात करे वो साप्रदायिक ?

    vishnu के द्वारा
    June 29, 2012

    मित्र योगी जी, अलीन जी और चन्दन राय जी ये दोनों ही हिन्दुओ को (पूर्वाग्रह) दोषी समघते है शायद इनका दोष नहीं I लिखने और बोलने की स्वतंत्रता हरेक को है I

    yogi sarswat के द्वारा
    June 30, 2012

    आदरणीय श्री विष्णु जी , आपकी बातों से इत्तेफाक रखता हूँ ! आपके विचार मिले , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा

    Isabella के द्वारा
    October 17, 2016

    Thought it woudnl’t to give it a shot. I was right.

Rahul Nigam के द्वारा
June 23, 2012

कुछ जर्राह कहते है लाइलाज बीमारी लग गई है इस देश को, हम कितने जतन कर चुके, पर रोग है जस का तस बना हुआ चलो एक बार यूँही सही, हकीम तो बदल कर देखा जाय………….इक आस इक उम्मीद इसी पर ही तो जी रहे हम सब. मेरे ब्लॉग “आज के राजनीतिज्ञों से उत्कृष्टता की अपेक्षा क्यों?” पर दृष्टिपात जरूर कीजियेगा वैसे खुश रहने को ग़ालिब ये ख्याल ‘भी’ अच्छा है. मोदी जी की विस्तृत जानकारी सरहनीय है.

    yogi sarswat के द्वारा
    June 23, 2012

    श्री निगम साब , सादर नमस्कार ! आपको मेरा लेखन पसंद आया , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
June 22, 2012

प्रिय योगी जी आज देश को एक सशक्त नेता ईमानदार नेता विकास की राह जो देख सके जनता को जो समझ सके उसकी जरूरत है अन्ना जी जैसा भय मोदी जी से भी लोगों को अभी से हो रहा है और वे साम्प्रदायिकता का नारा दे कर उछल कूद करने लगे हैं अच्छी जानकारी …शुभ कामनाएं भ्रमर ५

    yogi sarswat के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय श्री भ्रमर साब , सादर नमस्कार ! इतना बड़ा पद पाने के लिए जब आदमी आगे बढ़ता है तो उसकी राह में रोड़े अटकाए ही जाते हैं ! आपके विचारों का हार्दिक स्वागत करता हूँ ! बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

pritish1 के द्वारा
June 22, 2012

मित्रवर मेरा सहयोग सदैव है….. आपको शुभकामनायें आपके लेख पर……..

    yogi sarswat के द्वारा
    June 23, 2012

    मित्रवर श्री प्रीतिश जी , सादर ! आपका सहयोग मुझे लगातार मिलता रहा है , बहुत बहुत आभार ! आगे भी आपके सहयोग की कामना करता हूँ ! बहुत बहुत धन्यवाद

rekhafbd के द्वारा
June 22, 2012

आदरणीय योगी जी ,आज हमारे देश को एक सशक्त लीडर की जरूरत है और आदरणीय मोदी जी में वो बात दिखाई दे रही है ,उन्हें यह मौका मिलना ही चाहिए ,आपका आलेख विचारने योग्य है ,आभार

    yogi sarswat के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय रेखा जी , सादर नमस्कार ! मेरे शब्दों से अपनी सहमति जताने के लिए आपका बहुत बहुत आभार ! सम्पूर्ण देश आज मोदी में ही अपना भविष्य देख रहा है ! बहुत बहुत धन्यवाद ! सहयोग बनाये रखियेगा

Ravinder kumar के द्वारा
June 22, 2012

योगी जी, नमस्कार, सर्वप्रथम तो आप मेरे ब्लॉग पर आये, उत्साहवर्धन किया उसके लिए धन्यवाद्. योगी जी आप की कलम की जितनी प्रशंसा की जाए कम है. पंवार साहब की पंक्तिया डाल कर तो आप ने कमाल ही कर दिया. श्रीमान जी जितना बुरा इस देश के साथ हो रहा है शायद उससे बुरा कुछ हो नहीं सकता. ऐसी परिस्थिति में यदि मोदी को मौका दिया जाये तो शायद गलत नहीं होगा. लेख के लिए साधूवाद. नमस्ते जी.

    yogi sarswat के द्वारा
    June 23, 2012

    श्री रविन्द्र कुमार जी , सादर नमस्कार ! आपके शब्द , आपके विचार मुझे अपने से लगते हैं ! बहुत बहुत आभार ! आगे भी आपके सहयोग की कामना करता हूँ ! धन्यवाद

    Buckie के द्वारा
    October 17, 2016

    Thanks for spending time on the computer (wiirtng) so others don’t have to.

narayani के द्वारा
June 22, 2012

नमस्कार योगी जी सराहनीय ,विचारणीय आलेख के लिए आपको बधाई. क्या मोदी जी की स्वयं की पार्टी में उनके आगे आने और उनके नेत्रत्व की कामना है..? धन्यवाद नारायणी

    yogi sarswat के द्वारा
    June 22, 2012

    मेरे लेखन पर अपने बहुमूल्य विचार देने के लिए और यहाँ आने के लिए आपका बहुत बहुत आभार , नारायणी जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

Avadhut के द्वारा
June 22, 2012

Wah! Yogi Ji! Dil ki baat ko akshron में likha hua dekh kar sukoon mahasoos karraha hoon. Ishwar aap ki kalam ko takat pradan kare. Parmatama kare Bharat maa ki laaj ko bachaney के jiye Modi ji ek baar pardhan mantri banjayen. Leki jaychandon ki bhut badi jaamat है. पता नहीं इस देश के भगाया में काया बदा है. साधुवाद!!

    yogi sarswat के द्वारा
    June 22, 2012

    श्री अवधूत जी , सादर नमस्कार ! आपके विचारों से पूर्ण सहमति है ! अभी देश को बचाने वाले बहुत बैठे हैं ! बहुत बहुत आभार आपका , सहयोग बनाये रखियेगा

minujha के द्वारा
June 22, 2012

आपके आलेख की विषय वस्तु के बारे में क्या कहुं वो तो अच्छी है ही,साथ ही साथ आपका गद्य-पद्य मिश्रित आलेख लिखने का अंदाज बहुत ही अच्छा है,बधाई व शुभकामनाएं

    yogi sarswat के द्वारा
    June 22, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , आदरणीय मीनू झा जी ! आपके विचारों का हार्दिक अभिनन्दन !

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
June 22, 2012

विचारणीय आलेख,योगी जी.

    yogi sarswat के द्वारा
    June 22, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद श्री राजीव कुमार झा जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

lovely के द्वारा
June 21, 2012

bilkul, aapki baaton aur vicharon sahmat hoon

    yogi sarswat के द्वारा
    June 22, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , लावली जी ! सहयोग बनाये रखियेगा

Mohinder Kumar के द्वारा
June 21, 2012

योगी जी, नमस्कार… सबसे पहले आपके स्वास्थय की मंगल कामना करता हूं जहां तक मोदी जी का सवाल है… वह निर्भीक अवश्य हैं परन्तु साथ ही कट्टर भी हैं… और कोई भी कट्टर व्यक्ति यदि प्रधान मंत्री का पद संभालता है तो देश के हित में नहीं होगा. एक और पाकिस्तान बनने की सम्भावना को बल मिलेगा. ये मेरा व्यक्तिगत विचार है इसे अन्यथा ना लीजियेगा.

    yogi sarswat के द्वारा
    June 22, 2012

    श्री मोहिंदर कुमार जी सादर नमस्कार ! आपके विचारों का स्वागत करता हूँ ! बहुत बहुत आभार , आपने मेरी पोस्ट को समय और अपने विचार दिए ! धन्यवाद

seemakanwal के द्वारा
June 21, 2012

आदरणीय योगेन जी माफ़ कीजियेगा भारत की सारी जनता मुर्ख नहीं है ,मोदी जी योग्य होंगे तो जरुर जनता उन्हें ही प्रधान मंत्री बनाएगी .

    yogi sarswat के द्वारा
    June 22, 2012

    आदरणीय सीमा कंवल जी सादर नमस्कार ! आपके विचारों का हिरदय से स्वागत करता हूँ ! बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

    yogeshkumar के द्वारा
    June 23, 2012

    बिलकुल सही भाई ……………… मुझे तो लग रहा है ये नितीश कुमार की जलन है जो छद्म धर्मनिरेपक्षता का पहनावा ओढ़े हैं…. ये आदमी नाटक कर रहा है….

    yogi sarswat के द्वारा
    June 23, 2012

    बिलकुल सही कहा आपने , मित्रवर श्री योगेश कुमार जी ! सहयोग और समथन के लिए आपका बहुत बहुत आभार ! आगे भी आपके सहयोग की कामना करता हूँ ! धन्यवाद

    Espn के द्वारा
    October 17, 2016

    Je passe par là puisque je n’ai pas trouvé de &lqpao; Contuct&nbsq;&raauo; pour te dire qu’il est impossible de laisser un commentaire sur ton gâteau invisible. On obtient un message d’erreur ! Bon moi je le trouve magnifique et je compte bien le réaliser !

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
June 21, 2012

प्रभावकारी आलेख योगी जी.मेरा विचार है कि प्रधानमंत्री के पद की दावेदारी के सम्बन्ध में कुछ कहना जल्दबाजी होगी.वैसे तो यह किसी भी राजनैतिक दल या गठबंधन पर निर्भर करता है कि वे चुनाव में बहुमत मिलने पर किसे इस पद पर बिठाते हैं,लेकिन हालात और अन्य फैक्टर भी मायने रखते हैं.कई बार नए चेहरे भी सामने आ जाते हैं.

    yogi sarswat के द्वारा
    June 22, 2012

    आदरणीय श्री राजीव कुमार झा जी , सादर नमस्कार ! आपका आशीर्वाद मिला , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

June 21, 2012

जी, लगता है अभी आपकी तबियत ठीक नहीं हुई…………………..! महत्वपूर्ण यह नहीं है कि किसके समय में कितने दंगे हुए ….महत्वपूर्ण यह है कि दंगे हुए और लोग धर्म के नाम पर एक दुसरे का संहार किये …………… गोधरा काण्ड कि हकीकत हमें भी पता है असिलियत बाहर न आये तो ही अच्छा है क्योंकि मैं नहीं चाहता की यह खून की होली फिर से खेली जाए. पहले तो आप यह पता लगाये कि ट्रेन अयोध्या से आ रही थी कि जा रही थी. उसके बाद कुछ और पता लगाये ……और हाँ हो सके तो पहले मानव बनाने की कोशिश करिए क्योंकि हिन्दू और मुस्लिम बनना या होना बहुत बड़ी चीज है ………………..और यह आपके बस की बात नहीं……………………!

    dineshaastik के द्वारा
    June 21, 2012

    अनिल  भाई दोषी न  हम  हैं, और न हैं वह, दोषी है धर्म  जो नहीं बनने देता है हमें इंसान । एक  दूसरे को नहीं इस  धर्म  को मारिये, ये किसीको हिन्दु तो किसी को बनाता है मुसलमान। क्या हम  इंसान बनके खुश  नहीं रह सकते, इस  धर्म  ने कर  दिया इंसान का जीना हराम। भारत सोने की चिड़िया था, विश्व को खजाना था, इस  धर्म  ने बना दिया था हमें विदेशियों का गुलाम।

    yogi sarswat के द्वारा
    June 22, 2012

    मित्रवर श्री अलीन जी , सादर नमस्कार ! आपके विचारों का बहुत बहुत स्वागत करता हूँ ! सहयोग बनाये रखियेगा ! बहुत बहुत धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    June 22, 2012

    आदरणीय श्री आस्तिक जी , सादर नमस्कार ! आपके विचारों का हार्दिक स्वागत है ! आपके विचार मुझे लगातार मिलते रहते हैं , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! बहुत बहुत धन्यवाद !

    Nevea के द्वारा
    October 17, 2016

    Your article was exlcnleet and erudite.

dineshaastik के द्वारा
June 21, 2012

योगी जी, मुझे भी लगता है कि ट्रेन काण्ड के बाद जो हुआ   वैसा होना स्वाभाविक था। उसे रोकना किसी के बस  में नहीं था। अटल  जी भी यदि गुजरात के मुख्यमंत्री होते तो शायद गोधरा हादसा नहीं रोक  सकते थे। मैं इसे कोई काण्ड नहीं कहूँगा।  यह एक  हादसा था। जबकि ट्रेन  का जलाना एक  सुनियोजित  काण्ड था। हाँ इसे भी नहीं झुठलाया जा सकता है कि नरेन्द्र मोदी की उस  समय  की सोच  दंगाईंयों से मिलती थी। उनके अंदर भी उस  काण्ड से आक्रोश  था जिसके कारण  उस  हादसे में भयाभय  रूप ले लिया। लेकिन  अब नरेन्द्र मोदी पहले वाले नरेन्द्र मोदी नहीं रहे। मुझे लगता है कि जनता भी यह बात जानती है। किन्तु फिर भी संशय  है कि अराजक  राजनैतिक  तत्व(दल) नरेन्द्र मोदी की पुरानी छवि या सोच  का लाभ  उठाकर देश  की अस्थिरता को खतरा पैदा न कर दें। क्योंकि इनके पास  काला धन  इतना अधिक  है कि यह ऐसा करने में समर्थ  हैं। नरेन्द्र मोदी की जो छवि बनाई जा रही है वह इसी काले  धन के दम  पर बनाई जा रही है। आज  एनडीऐ में जो विखराव की स्थिति पैदा की जा रही है वह इसी काले धन के दम पर की जा रही है। मैं नरेन्द्र मोदी के संबंध  में बहुत ही दुविधा की स्थिति में हूँ। दिल  तो कहता है कि नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बनना चाहिये, लेकिन  दिमाग  इसकी इजाजत नही ंदेता। हिन्दु होने के नाते यदि सोचता हूँ तो उनका प्रधानमंत्री बनना उचित लगता है, किन्तु जब भारतीय बन कर सोचता हूँ तो आशंकित  हो  जाता हूँ दूरगामी परिणाम  से। नरेन्द्र मोदी की आज  की स्थिति ये यदि सोच  स्थिति देखता हूँ तो उनको प्रधानमंत्री बनाने में कोई आपत्ति नजर नहीं आती, किन्तु यदि उनकी पुरानी  स्थिति पर  विचार करता हूँ तो उनका प्रधानमंत्री के रूप में स्वीकार नहीं कर पाता हूँ। इसके अतिरिक्त आपके आलेख  की सभी बातों से सहमति रखता हूँ।

    June 21, 2012

    यहाँ आपकी बातो से स्पष्ट है कि आप कितना मानव है और कितना मानव बनकर सोचते हैं……………….आपके निष्कर्षों से साफ़ पता चलता हैं कि आप एक हिन्दू बनकर सोचते हैं न कि मानव…………..!

    June 21, 2012

    मैं इसे कोई काण्ड नहीं कहूँगा। यह एक हादसा था। जबकि ट्रेन का जलाना एक सुनियोजित काण्ड था। हाँ इसे भी नहीं झुठलाया जा सकता है कि नरेन्द्र मोदी की उस समय की सोच दंगाईंयों से मिलती थी। उनके अंदर भी उस काण्ड से आक्रोश था जिसके कारण उस हादसे में भयाभय रूप ले लिया।

    yogi sarswat के द्वारा
    June 21, 2012

    आदरणीय श्री आस्तिक जी , सादर नमस्कार ! अब परिस्थतियाँ बदल चुकी हैं इसलिए आपको अपने दिल की तरह दिमाग की ही बात सुनानी होगी ! मेरे लेखन पर समय और अपने विचार देने के लिए आपका बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    June 22, 2012

    अलीन जी नमस्कार ! हादसा क्या होता है ? हादसा वो होता है जो मानवीय गलतियों या मशीन के ख़राब होने के कारण होता है ! गोधरा का काण्ड हादसा नहीं था , ये आप भी जानते हैं ! हादसे में कई लीटर पेट्रोल एक जगह नहीं रखा हो सकता ! ये अलग बात है की आप सब कुछ जानते हुए अपनी आँखें मूँद लें और किसी भी घटना की अपनी तरह से व्याख्या कर लें !

    yogi sarswat के द्वारा
    June 22, 2012

    अलीन जी , सादर नमस्कार ! मैं एक बात कहना चाहता हूँ ! क्या हिन्दू , भारतीय नहीं होता ? अगर कोई सच में राष्ट्र के विषय में सोचता है तो उसे सांप्रदायिक क्यों बता दिया जाता है ? आभार आपका !

    June 23, 2012

    अच्छा तो आप सच में देश के बारे में सोच रहे हैं…………………. अरे भाई साहब …….कहाँ सोये हैं …..आखें खोलिए …………और अब यह तमाशा आप लोग बंद करिए …………………बहुत हो चूका है इस धरती पर जात-धर्म के नाम पर नर-संहार…………आपके कमल-चरण कहाँ हैं……………….प्रभु और मत बाटिये हम मानवों को देश, क्षेत्र, मजहब और जात के नाम पर…………….

y kumar के द्वारा
June 20, 2012

kya baat hai ! modi ka ekdam sahi vishleshan aur utna hi damdaar aapka lekhan

    yogi sarswat के द्वारा
    June 21, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , श्री कुमार साब ! सहयोग बनाये रखियेगा

alkargupta1 के द्वारा
June 20, 2012

योगी जी , वैसे तो राजनेताओं के बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है…… आज की छवि को देखते हुए इतना ही कह सकती हूँ कि अब शायद नरेंद्र मोदी जैसे नेता से ही देश का भविष्य सुधारेगा…….

    yogi sarswat के द्वारा
    June 21, 2012

    आदरणीय अलका गुप्ता जी , सादर नमस्कार ! मेरे लेखन को अपना समय देने और उस पर अपने विचार व्यक्त करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार ! आगे भी आपका आशीर्वाद चाहता हूँ ! धन्यवाद

vikramjitsingh के द्वारा
June 20, 2012

जियो योगी जी जियो…. जब से लिखने लगे हो मित्र….पहली बार कुछ दिल को लगा है…..कसम से…./// हम आपके विचारों से ‘खून की आखिरी बूँद’ तक सहमत हैं……… जियो…मित्र….जियो….

    yogi sarswat के द्वारा
    June 21, 2012

    मित्रवर श्री विक्रमजीत सिंह जी सादर नमस्कार ! मेरे विचारों से अपनी सहमति जताने के लिए आपका हार्दिक आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! बहुत बहुत धन्यवाद

chaatak के द्वारा
June 20, 2012

कर गयी पैदा तुझे उस कोख का एहसान है सैनिकों के रक्त से आबाद हिन्दुस्तान है ! लेख से पूर्ण सहमति व्यक्त करते हुए मैं एक बार फिर अपनी बात दोहराना चाहता हूँ- “मनमोहन सा कठपुतली यदि हिन्दुस्तान का प्रधानमंत्री बन सकता है तो फिर नरेन्द्र मोदी जैसा पुरुषार्थी क्यों नहीं?” अच्छी लेख पर हार्दिक बधाई!

    yogi sarswat के द्वारा
    June 21, 2012

    आदरणीय श्री चातक जी , सादर नमस्कार ! आपके विचारों से सहमत हते हुए आपको बहुत बहुत आभार व्यक्त करता हूँ ! आपकी प्रतिक्रिया एक तरह का संबल प्रदान करती है ! बहुत बहुत धन्यवाद , सहयोग बनाये रखियेगा

MAHIMA SHREE के द्वारा
June 20, 2012

आदरणीय योगी जी , नमस्कार .. आपके विचारों से मेरी सहमती है आज देश को सशक्त नेता की जरुरत है जो दृढ निश्चयी , सबल और दूरदर्शी हो … ये सारे गुण माननीय नरेंद्र मोदी जी में है .. बहुत बधाई आपको .. दमदार और तार्किक आलेख के लिए

    yogi sarswat के द्वारा
    June 21, 2012

    आदरणीय महिमा जी , सादर नमस्कार ! आपको लेखन पसंद आया , बहुत बहुत आभार ! समर्थन और सहयोग की आगे भी कामना करता हूँ ! धन्यवाद

    Janaye के द्वारा
    October 17, 2016

    This forum needed shkiang up and you’ve just done that. Great post!

allrounder के द्वारा
June 20, 2012

नमस्कार भाई योगी जी, वैसे तो मैं राजनीति और राजनीतिज्ञों से कोई आशा नहीं रखता, उनके वर्तमान के कारनामे देख कर फिर भी, मोदी जी के बारे मैं इतना ही कहूँगा की राजनीति अगर तपता रेगिस्तान है तो नरेन्द्र मोदी शायद ….. शायद …. उस तपते रेगिस्तान मैं पानी का एक श्रोत हैं जिससे देश मैं विकाश की गंगा वह सकती है !

    yogi sarswat के द्वारा
    June 20, 2012

    श्री सचिन जी , सादर नमस्कार ! बहुत सटीक और सही प्रतिक्रिया दी आपने , आपके विचारों का हार्दिक स्वागत करता हूँ ! बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा , धन्यवाद

birju के द्वारा
June 20, 2012

बंधुवर आपका ओजपूर्ण विश्लेषण प्रभावित करता है , किन्तु मुझे तत्कालीन प्रधानमंत्रीजी अटलजी का वक्तव्य स्मरण हो रहा है की गुजरात के सन्दर्भ में मोदी जी ने राजधर्म का पालन नहीं किया …..और इसे सहज खारिज नहीं किया जा सकता …….

    yogi sarswat के द्वारा
    June 20, 2012

    श्री बिरजू जी , सादर नमस्कार ! आपने बिलकुल सही कहा , अटल जी ने उस वक्त की परिश्तातियों को देखते हुए ऐसा कहा था किन्तु अब बहुत कुछ बदल चूका है ! आप ने मेरे शब्दों को समय और अपने vichaar diye , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा !

    santosh kumar के द्वारा
    June 20, 2012

    आदरणीय बिरजू जी ,..सादर प्रणाम योगी जी की बात से पूर्णतया सहमत हूँ ,..हम यह भी नहीं मान सकते कि अटल जी ने वह बात बिना किसी दबाव के या उनसे कहवाने का प्रयास किये बिना कहा होगा ,..विदेशी ताकतें बहुत शातिर होती हैं ,..उन्होंने भारत के भविष्य को पहचान कर पहले से ही कमजोर करने का कुत्सित प्रयास किया है ,.. आदरणीय अटल जी पर कोई ऊँगली नहीं उठा रहा हूँ,.. लेकिन सच यही है कि हमारी सरकारें और नेता विदेशिओं प्रभाव में काम करती हैं ,..यहाँ उनके सचिव ब्रजेश मिश्रा का नाम जरूरी हो जाता है ,..उनको कांग्रेसी थिंक टैंक का ही हिस्सा ही माना जाना चाहिए …सादर

    yogi sarswat के द्वारा
    June 21, 2012

    आदरणीय श्री संतोष कुमार जी , सादर नमस्कार ! मैं आपकी बातों का समर्थन करते हुए आदरणीय श्री बिरजू जी की बातों का भी ख्याल रखना चाहता हूँ ! श्री बिरजू जी गलत नहीं हैं , उस वक्त के प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपाई जी ने जो कहा था वो समय की मांग थी और आज समय को मांग ये है की देश को चोरों से बचाने के लिए नरेन्द्र मोदी जैसा ही व्यक्तित्व इस देश को प्रधानमंत्री के रूप में चाहिए ! बहुत बहुत आभार

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 20, 2012

मोदी जी भारत हैं

    yogi sarswat के द्वारा
    June 20, 2012

    आदरणीय श्री प्रदीप कुशवाहा जी , सादर नमस्कार ! आपने दो शब्दों में कितनी बड़ी बात कह दी ! सही कहते हैं ज्ञानी लोग कम कहते हैं किन्तु सटीक कहते हैं ! मेरे शब्दों को आपका आशीर्वाद मिलता रहता है , आभारी हूँ ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

Ashish Kumar Rai के द्वारा
June 20, 2012

बहुत अच्छा और सही एक लाइन मोदी जी के लिए-आप बिचलित नहीं होने आरोपे से -देश की जनता आप के साथ है और देश चाहता है आप नेत्रित्व करे देश की और देश को बचाए घर के गद्दारों से.

    yogi sarswat के द्वारा
    June 20, 2012

    मित्रवर आशीष कुमार राय जी , सादर नमस्कार ! आज भारत देश की जनता , नरेन्द्र मोदी के रूप में अपना भविष्य देख रही है ! आपने मेरे शब्दों को समय और समर्थन दिया , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
June 20, 2012

आदरणीय श्री योगी जी, सादर अभिवादन! इसमें कोई दो राय नहीं है की भारत को मोदी जैसे प्रधान मंत्री की जरूरत है. अगर आज भी प्रधान मंत्री का प्रत्यक्ष चुनाव हो तो मोदी अव्वल आएंगे …. राष्ट्रपति का भी प्रत्यक्ष चुनाव होता तो कलाम अव्वल आते …. पर क्या करें उस विपक्ष का, जो उस महाठगिनी के ही सुर में सुर मिलाने में जुटा हुआ है … मैं मोदी जी के लिए सिर्फ एक लाइन कहूँगा – सम्हल के रहना अपने घर के छुपे हुए गद्दारों से! आपके दमदार आलेख के लिए आपको बधाई!

    yogi sarswat के द्वारा
    June 20, 2012

    आदरणीय श्री जवाहर जी , सादर नमस्कार ! आपकी बातों से सौ प्रतिशत सहमत हूँ ! मेरे लेखन को आपका आशीर्वाद मिला , मतलब लेखन सार्थक हुआ सा जान पड़ता है ! बहुत बहुत आभार ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा !

चन्दन राय के द्वारा
June 20, 2012

योगी मित्रवर , नरेंदर मोदी धर्मनिरपेक्ष छवि बनाने में असफल हुए है ,दुसरे शब्दों में कह सकते उनके प्रयास इस मिथ को और तोड़ते से प्रतीत होते है , मै इसके लिए वंहा के दंगो , SIT की रिपोर्ट ,राहुल भट्ट के वक्तव्य ,और जाकिया जाफरी के हलफनामे को इसका आधार नहीं बनाना चाहता , ———- इसके लिए में समय समय पर सार्वजानिक मंचो पर उनके मुस्लिम विरोधी तहरीरे की तरफ ध्यान ले जाना चाहूंगा , उस दृश्य की तरफ आपका ध्यान खीचना चाहूँगा ,जब सद्भावना दिवस पर इक मुस्लिम इमाम की सद्भावना टोपी को उन्होंने अपने सर पर पहनने से इनकार कर दिया था , ——– देश को ऐसे नेता की जरुरत है ,जो सारे वर्णों ,धर्मो ,जातिओं को इकरूप में देखे ,अतः में इस विषय पर आपसे असहमत हूँ !

    yogi sarswat के द्वारा
    June 20, 2012

    श्री चन्दन राय जी , सादर नमस्कार ! आपके विचारों का खुले दिल से स्वागत करता हूँ ! आज पहली बार आप मेरे शब्दों से सहमत नहीं हुए , इसका मतलब मैं अपनी बात आपके दिल तक पहुंचाने में कामयाब नहीं हो सका , लेकिन ख़ुशी इस बात की है की आपके विचार दिल से निकले हुए हैं ! आपकी असहमति मुझे और बेहतर लिखने को उत्साहित करती है ! बहुत बहुत आभार , आशा करता हूँ आगे भी मुझे आपके इसी तरह के स्पष्ट विचार मिलते रहेंगे ! बहुत बहुत शुक्रिया !

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    June 20, 2012

    चन्दन जी आपका तर्क मुझे हजम नहीं हुआ … कांग्रेस तो ५० सालों से रोज ठोक-२ के कहती हैं की धर्मनिरपेक्ष है इन सालो में इसी ने अपने राजनितिक फायदे के लिए हजारो दंगे करवाएं हैं ..और फिर उस पे अपनी रोटियां सेंकी हैं …. लालू जी ने बिहार में धर्मनिरपेक्ष होकर बिहार को २० साल तक गर्त में डालें रखा …. अगर कोई खुद के परिवार को गाली दे और दुसरो को भी झूठी बात कह गले लगाए .. तो किसी को फायदा नहीं होता .. बल्कि वो मुर्ख बनाया जाता है और सभी तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियाँ यही कर अपना उल्लू सीधा कर रही हैं

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 20, 2012

    वाह चन्दन जी वाह….. 1984 के ज़ख़्म अगर देखने हों तो हमारे पंजाब में आईये……हर शहर-गाँव में मिलेंगे आपको…इस गन्दी और घिनोनी कांग्रेस के शिकार…..जिन को हमदर्दी के तौर पर दिए गए 2-2 लाख रुपये…..क्या इतनी सस्ती थी इन के अपनों की जान…..??? आपको एक ‘टोपी’ की चिंता है……यहाँ एक साथ हजारों ‘पगड़ियों’ को पैरों तले कुचल दिया गया…..और बाद में मूंह बंद करके रोने भी नहीं दिया……गया…./// तब कहाँ गए थे…आपके ये दावे….वर्णों…धर्मों….जातियों….के…..और अब भी कहाँ हैं…??? पूछना चाहते हैं आपसे….क्यों हमेशा ही हम सिखों के साथ ऐसा होता रहा है….??? हमारा सिर्फ 300 साल का इतिहास है….और दुनिया की कोई भी ऐसी नस्ल–जाति–धर्म…अगर कोई भी आपकी निगाह में हो तो बे-धडक बताइए…..जितना खून हम लोगों ने अपना बहाया है…300 साल में इस देश की खातिर…..कोई और बहा सका है…. चन्दन जी…..सिर्फ ये देश ही नहीं…….सारी दुनिया मानती है…..हम पंजाबियों को….हर क्षेत्र में झंडे गाड़े हैं हम ने…….लेकिन हमें मिला क्या…..??? ख़ैर….पंजाबियों ने तो कांग्रेस का मूंह तोड़ दिया है….चुनावों में…..अभी देश बाकी है…..वाहेगुरु ने चाहा तो पूरे देश से उखाड़ फेंकेंगे इस घटिया और मौकापरस्त पार्टी को……. धन्यवाद….

    June 21, 2012

    विक्रम भैया, जानते हैं हमारी समस्या क्या है ? हम या तो हिन्दू, बनकर सोचते हैं या तो मुस्लिम बनकर या फिर सिख बनकर या इसाई बनकर. और हम हरेक बार ही अपनी नज़र में सही होते हैं…….मैं तो न ही कांग्रेस के साथ हूँ और न ही भाजपा के साथ और न ही किसी और अन्य के साथ हूँ……..मैं अपने साथ हूँ और अपने विरोध में भी हूँ…….और एक आम हिन्दुस्तानी हूँ…………! अभी जिस जुबान में योगी जी बोल रहे हैं. ठीक उसी जुबान में जब सिखों का संहार हुआ तो बोला गया था और आज भी सिखों प्रति ऐसा ही बोला जाता हैं. मेरा कहने का मतलब यह है कि कभी भी कोई अपना दोष नहीं देता हैं. मेरे कहने का मतलब है कि जिसकी बाहुल्यता होती है वह अपनी बात सिद्ध करके अल्पसंख्यक को दोषी ठहरता रहता हैं. मेरे कहने का मतलब यह है कि अधिकतर सामाजिक प्राणी रहते हुए शुरुवात बहुसंख्यक ही करेगा और अल्पसंख्यकों के नकारात्मक रूप को सामने रखकर उसे दोषी ठहरा दिया जायेगा. मुझे समझ में नहीं आता कि हिन्दुस्तान में हमेशा हिन्दू ही सही क्यों होते हैं? पाकिस्तान में हमेशा मुस्लिम ही सही क्यों होते हैं और इसराइल में हमेशा इसाई ही सही क्यों होते हैं……कभी सोचियेगा पर एक मानव बनकर ………..! और एक बात और भी भैया………..सुनी -सुनाई बातों पर अब यकीं करना छोड़ दीजिये क्योंकि आप जानते हैं कि कितनी हकीकत होती है उसमे. जब एक ग्राम-पंचायत स्तर की खबर वहां के बहुसंख्यक जाति के अनुसार पेश की जाति है और लोग उसी को हकीकत मानते हैं जबकि सच कुछ और होता है. तो सोचिये जो खबर रास्ट्रीय स्तर पर हो उसमे कितनी सच्चाई है………… मैं यहाँ किसी धर्म- जाति का विरोध या समर्थन नहीं कर रहा…………..परन्तु एक व्यक्ति विशेष की बात कर रहा हूँ जो हमेशा अपनी नज़र में सही होता है, मैं बात कर रहा हूँ मानवीय मानसिकता की. मैं बात कर रहा हूँ आपकी और मैं बात कर रहा हूँ अपनी……………………….आखिर क्यों ? हमेशा आप अपने नजर में सही और मैं अपने नजर में सही……………………और यदि सही हैं नहीं तो हम फिर सही की बात क्यों कर रहे हैं……………..! जय हिंद! …………जय भारत! इन्कलाब………………………………………..!

    dineshaastik के द्वारा
    June 21, 2012

    अहिंसा के पुजारी अनिल जी, मैं आपकी इस  बात से सहमत नहीं हूँ कि हिंसा की पहल  बहुसंख्यक  करता है। प्रथम  तो हिन्दु बहुसंख्यक नहीं है, वह बटा हुआ   है छोटी छोटी जाति और उपजातियों में, यही है मुस्लिम  तुष्टिकरण  की नीति रखने वाले सत्ता पर काविज  हो जाते  हैं। अधिकांश  हिन्दु दूसरे धर्म  का सम्मान करते हैं। हमारा गुलामी के बाद का सारा इतिहास  विदेशियों ने या उनके चाटुकारों ने उनके हिसाब से लिखा है, किसी भी इतिहास कार ने यह नहीं लिखा कि हिन्दु आतताई थे। सभी ने हिन्दुओं की सहनशीलता और सहिष्णुता की तारीफ  की है। मैं यह इसलिये नहीं लिख  रहा हूँ  हिन्दु हूँ, बल्कि जो  सत्य है वही लिख  रहा हूँ। आपको या तो इतिहास  नहीं मालुम  या जानकर अनभिज्ञ  बन रहे हो।

    yogi sarswat के द्वारा
    June 21, 2012

    यहाँ मैं श्री आस्तिक जी की बात का पूर्ण समर्थन करता हूँ ! हिन्दू होना ही अपने आप में बड़ी बात हो जाती है क्योंकि उसके संस्कार या उसका इतिहास उसे कहीं से और कभी भी आतताई नहीं कहता ! हाँ लेकिन वो बटा हुआ जरूर है ! बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय आस्तिक जी !

    yogi sarswat के द्वारा
    June 21, 2012

    मित्रवर अलीन जी सादर नमस्कार ! आपने जो प्रिय मित्र विक्रमजीत सिंह को जवाब लिखा है , बहुत प्रभावित करता है ! आपके विचारों से पूर्णतया सहमत हूँ ! लेकिन कहीं कहीं आपने अति उत्साह में कुछ भ्रम पैदा कर दिया है ! जहां तक मुझे लगता है इस्रायल में यहूदी बहुसंख्यक हैं इसाई नहीं ! दूसरी बात मेरा लेख हिन्दू या मुस्लिम या सिख के विषय में नहीं है बल्कि नरेन्द्र मोदी के प्रधानमन्त्री बनने के सन्दर्भ में है ! मैं सिर्फ ये मानता हूँ की हिन्दू होने पर हमें गर्व है लेकिन उससे भी ज्यादा गर्व इस बात का है की हम हिन्दुस्तानी हैं ! इसलिए जो भी मन में है वो हिन्दुस्तानी होने के कारण है न की हिन्दू होने के कारण ! हिन्दू और किसी विशेष धर्म की बात न करके हमें हिंदुस्तान की ही बात करनी चाहिए ! आभार

    yogi sarswat के द्वारा
    June 21, 2012

    आदरणीय महिमा जी , सादर नमस्कार ! मित्रवर चन्दन राय जी के अपने विचार हो सकते हैं उनका भी हमें सम्मान करना चाहिए ! असल में महिमा जी , हम तकालिक बातों को ध्यान रखते हैं और पिछली बातें भूल जाते हैं ! संभव है कुछ वर्षों के बाद रजा और कलमाड़ी भी महान नेताओं की श्रेणी में आने लगें ! इसलिए मोदी के गुजरात में मुसलमानों और वहां के रहने वालों की तरक्की की कोई बात नहीं करता , सब उनके समय में हुए दंगों को लेकर अपना पसीना पौंछ रहे हैं ! अगर हम लोगों की भूलने की बीमारी इतनी बड़ी नहीं होती तो कांग्रेस कभी दोबारा सत्ता में नहीं आती ! आपके विचार मिले , बहुत अच्छा लगा ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    June 21, 2012

    मित्रवर श्री विक्रम जीत सिंह जी , सादर नमस्कार ! हमें ये सोचकर चलना चाहिए की अगर देश जिन्दा है तो हम जिन्दा हैं , लेकिन आज की तारिख में उल्टा हो रहा है , सोचा ये जा रहा है की हम जिन्दा हैं तो देश जिन्दा है और खुद के जिन्दा रखने के लिए हमने एक दूसरे को मौत के घाट उतरना सीख लिया है ! न तो एक टोपी पहनने से कोई मुसलमान हो जाता है और न कोई तिलक लगाने से हिन्दू बन जाता है ! भारतीय संविधान के अनुसार जब सबको सामान अधिकार हैं तब सिर्फ एक ही पंथ को अल्पसंख्यक होने का फायदा देकर क्या कहना चाहते हैं ये क्षदम धर्म निरपेक्ष ! हमें राष्ट्रीयता को सबसे ऊपर रखकर चलना होगा , तभी देश आगे बढ़ सकता है ! आपकी उत्साहित करने वाली प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार !

    June 22, 2012

    दिनेश भैया, अँधा नहीं हूँ …हाँ पर बहरा जरुर हूँ ……..और आपकी बातो से स्पष्ट पता चलता है कि आप आप बहरे तो नहीं पर अंधे जरुर है……………..आप उस इतिहास की बात कर रहे हैं जो आपने लिखा है मतलब हिंदुस्तान ने लिखा है हरेक व्यक्ति अपनी अच्छा ही लिखता है बुराई नहीं……! महमूद गजनवी को हम एक शैतान समझते हैं पर उसके देश वाले उसे मसीहा समझते हैं……………यदि भारत के इतिहास को जानना है तो दुनिया के नज़र से इतिहास पढ़िए तो आपको पता चलेगा कि हम हिन्दुस्तानी अपनी बहन, बेटियों और बहुओं के साथ-साथ भाइयों, बेटों के साथ क्या-क्या करते आये हैं…..जिसका फायदा बाहरी जरुरत मंदों दे ने उठाया. जब हमें अपने ही भाइयों और बहनों के को लुटाने में शर्म नहीं आई तो फिर दुसरे हमारे साथ किये तो क्या बुरा किये…………….और आज एक बार फिर वही हो रहा है जो कल तक होता रहा है अब धर्म और संप्रदाय के नाम पर एक-दुसरे का शोषण करने में लगे हैं ……. योगी जी, आप कितने हिन्दुस्तानी है और कितना हिंदुस्तान की बात कर रहे हैं. आपके आलेख से स्पष्ट है ……..आप जैसे लोगो की जो विचारधारा और इरादा को मैं १४-१५ वर्ष की उम्र में एक साल RSS के साथ रहकर जान चूका……उदारता, सहनशीलता और सहिष्णुता …………..जो हमारे पूर्वज है उनकी भी…………!

    Janai के द्वारा
    October 17, 2016

    Lo que mas me alucina es la doble moral de algunos mediáticos, que aparte de la falsificación demagógica de datos historicos se dedican a descalificar a la gente que se declara pro paesotina…Vamls, que nada nuevoUn abrazo, Don Rafa, amigo

pritish1 के द्वारा
June 19, 2012

आपके लेख से प्रभावित हूँ…… धन्यवाद……! ऐसी प्रभावकारी रचना के लिए……..

    yogi sarswat के द्वारा
    June 20, 2012

    बहुत बहुत शुक्रिया !

    Nona के द्वारा
    October 17, 2016

    I’m not easily imsrseped but you’ve done it with that posting.

pritish1 के द्वारा
June 19, 2012

सारस्वत जी………. वर्त्तमान राजनीती में जो हो रहा है……..उस आधार पर देखा जय….तो एक मोदी जी ही हैं जिन्होंने गुजरात को एक विकसित राज्य की ओर अग्रसर किया है………यदि नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बनें देश में वर्त्तमान से अच्छा ओर अच्छा अवश्य होगा……….. मैं आपके पक्ष मैं हूँ………प्रीतीश

    yogi sarswat के द्वारा
    June 20, 2012

    प्रीतिश जी सादर ! मेरे शब्दों और विचारों का समर्थन करने के लिए बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

akraktale के द्वारा
June 19, 2012

योगी जी सादर नमस्कार, मै कभी देश में तानाशाह शासक के पक्ष में नहीं रहा हूँ. किन्तु आज जब लोकतंत्र के नाम पर सामूहिक लूट हो रही है. कुछ लोग समूह बना कर देश को लूट रहे हैं तब उनसे बचाने के लिए एक तानाशाह की जरूरत है. और ये हमारी खुशकिस्मती है की यह तानाशाह एक लोकतांत्रिक तरीके से शासन करेगा. ताकि यदि यह निरंकुश हो जाए तो हम इसे पांच वर्षों बाद हटा भी सकते हैं. अभी सिर्फ मोदी के नाम की चर्चा ही हुई है मगर पुरे देश के चोरों में खलबली मच गयी है षडयंत्र शुरू हो गए है ताकि भाजपा मोदी के नाम को बदल कर कोई और नाम सामने लाये और यदि ऐसा हुआ तो यह भाजपा का दुर्भाग्य ही होगा. सटीक जानकारी देता एक सम्पूर्ण आलेख बधाई. जयहिंद!

    yogi sarswat के द्वारा
    June 20, 2012

    आदरणीय श्री रक्ताले जी , सादर नमस्कार ! आपकी बातों का समर्थन करता हूँ ! कभी कभी देश को बचाए रखने की खातिर तानाशाह शासक का आना भी जरूरी होता है ! वैसे मैं नरेन्द्र मोदी को तानाशाह नहीं बल्कि सही और सच्चा शासक समझता हूँ ! आपका आशीर्वाद मिला , बहुत बहुत आभार !

    Staysha के द्वारा
    October 17, 2016

    I completely agree about the fascination of old phtargoophs. Have you ever seen Stephen Poliakoff’s ‘Shooting the Past’? It really captures that sense of nostalgia for something you never knew and I remember being absolutely captivated by it.

    Ryne के द्वारा
    October 17, 2016

    Shiver me timbers, them’s some great intimrafoon.

satish3840 के द्वारा
June 19, 2012

नमस्कार योगी जी / मै मोदी जी के अतीत में जाना नहीं चाहता /पर ये बात जरुर हें कि मोदी के दमदार व्यकितव हें / यदि जनता चाहे तो उसे परधानमंत्री बनने में कोई हर्ज नहीं / आज सभी लोगों को वोट बेंक की चिंता हें इसी लिए ये सेकुलर का सर्टिफिकेट मोदी को देने से डर रहें हें / क्या ये नेता कोई सेकुलर का सर्टिफिकेट देने की इकाई हें / जनता यदि चाहे तो खुद मोदी को ऐसा सेकुलर घोषित कर सकती हें कि इनकी परिभाषा धरी की धरी रह जायेगी / सब मोदी को लेकर अपने भविष्य की चिंता कर रहें हें / बी जे पी को मोदी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार यदि मोदी को घोषित करना हें तो कर देना चाहिए / यदि एन दी ऐ टूटता हें तो टूटे / चुनाव में यदि बी जे पी अपने बूते पर २०० सीट ले आये तो क्या ये मोदी का विरोध कर पायेगें / मुस्लिम आरक्षण की वकालत करें वाले क्या सेकुलर हें /आज सेकुलर की ये कैसी परिभाषा कि हिन्दू को जितना कोई अहित करे वो उतना ही सेकुलर / य्द्दी सेकुलर की ये ही परिभाषा हें तो मोदी उनसे कहीं ज्यादा सेकुलर हें / मोदी देश के एक अच्छे परधानमंत्री सिध्ध हो सकते हें / ये जनता को तय करना हें नेताओं को नहीं कि किसको प्रधानमंत्री बनाना हें

    yogi sarswat के द्वारा
    June 20, 2012

    आदरणीय श्री सतीश जी , सादर नमस्कार ! सही कहते हैं आप , क्षदम धर्म निरपेक्षता दिखने वालों को हो मोदी हिंदुत्व वादी लगते हैं जबकि वो एक विकास पुरुष हैं ! मेरे शब्दों पर अपने विचार देने के लिए आपका बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

    Willie के द्वारा
    October 18, 2016

    Bueno, Ribosoma, si hay merienda igual me lo pienso. Lo que me da miedo es el abrazo en sí, no podría controlar mis emnciooes, estoy seguro. Como bien sabes, necesito el control.

Rajni Thakur के द्वारा
June 19, 2012

दमदार आलेख हेतु बधाई योगी जी.

    yogi sarswat के द्वारा
    June 20, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय रजनी ठाकुर जी , आपने मेरे लेखन को समय और अपने विचार दिए ! आभार

Santosh Kumar के द्वारा
June 19, 2012

योगी जी ,.सादर नमस्कार बहुत सार्थक सटीक लेख के लिए हार्दिक आभार आपका ,..दरअसल मोदी जी की काबिलियत और उनके लोकप्रिय राष्ट्रवादी व्यक्तित्व से से ये कांग्रेसी डरे हुए हैं,.तभी उनके खिलाफ दुष्प्रचार के लिए बाकायदा काम करते हैं ,..आपने लेख में गुजरात के किसानो के लिए कुछ नहीं लिखा है जो थोडा सा अखरता है ,..यदि कुछ तथ्यों का समावेश करें तो लेख और ज्यादा प्रभावी हो जायेगा ,..अच्छे लेख के लिए हार्दिक बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    June 20, 2012

    श्री संतोष जी , सादर नमस्कार ! आपको लेखन पसंद आया बहुत बहुत आभार ! सही कहा आपने की मुझे गुजरात के किसानों की बात लिखनी चाहिए थी किन्तु लेख ज्यादा बड़ा न हो जाए इस वज़ह से इस सन्दर्भ को नहीं लिया ! बहुत बहुत आभार ! सहयोग और समर्थन बनाये रखियेगा ! धन्यवाद


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