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ये अंतर क्यों है ?

Posted On: 30 Jun, 2012 Others में

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ओ सर्वव्यापी , ओ सर्वशक्तिमान
जब सब में है तू विधमान
तो इस दुनियाँ में ये
ऊँच-नीच का अंतर क्यों है ?


कोई कहे तुझे खुदा , कोई कहे तुझे भगवान्
करते जब सब तेरा ही गुणगान
तो इस मृत्युलोक में
तेरे नाम में ये अंतर क्यों है ?


ओ सर्वरक्षक , सर्वगुणों की खान
कैसा है तेरा विधान
जब सब तेरे बनाये हुए हैं
तो ये गोरे काले का अंतर क्यों है ?


तू है सबका प्यारा , तू है सबसे महान
कोई पढ़े गीता यहाँ , कोई पढ़े कुरआन
पूजे जब हर कोई तुझको
तो ये हिन्दू -मुस्लिम का अंतर क्यों है ?

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106 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nibby के द्वारा
October 17, 2016

no, io parlo dei tablet pc classici.più o meno tutte le marche ormai hanno almeno un modello con schermo multitouch invece del classico solo penna (tecnologia wacom o n-trig): Dell, HP, Fujitsu, Toshiba, Le.oto.n.vutti notebook convertibili con schermo 12" in genere, come da tradizione consolidata nei tablet. ;)

Ranessa के द्वारा
October 17, 2016

Would love to know when your century rides are and where. I am looking for some century rides in Jan. Feb. March and April. Perhaps, May. Can you heNspThank?,lancy Schrader

December 8, 2012

बहुत खूब….!

    yogi sarswat के द्वारा
    December 10, 2012

    आभार श्री आनंद प्रिय राहुल जी ! मेरे शब्दों को आपका समर्थन मिला , धन्यवाद

Alka Gupta के द्वारा
July 12, 2012

योगी जी , इतने सुन्दर भावों से सजी यह रचना मैं क्यों और कैसे नहीं देख पायी स्वयं पर एक अनुत्तरित प्रश्न है …… यह अंतर क्यों है निसंदेह प्रश्न अनुत्तरित ही है…… आध्यात्म से सराबोर सुन्दर शब्दों और भावों से सजी उत्कृष्ट रचना

    yogi sarswat के द्वारा
    July 13, 2012

    आदरणीय लाका गुप्ता जी , सादर नमस्कार ! बहुत बहुत आभार , आपका आशीर्वाद मिला ! सहयोग बनाये रखियेगा !

    yogi sarswat के द्वारा
    July 13, 2012

    क्षमा चाहूँगा , आदरणीय अलका गुप्ता जी , नाम गलत टाइप हो गया है , कृपया अलका गुप्ता जी पढ़ें ! धन्यवाद

jalaluddinkhan के द्वारा
July 12, 2012

योगी जी, अच्छी रचना और अच्छा सन्देश.आपकी रचनाएँ समाज को मार्गदर्शन देने वाली होती हैं.यह रचना भी वैसी ही है.बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    July 13, 2012

    आदरणीय श्री जलालुद्दीन साब , सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये और आपका समर्थन मिला ! बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

    Carlye के द्वारा
    October 17, 2016

    I like to party, not look artciles up online. You made it happen.

D33P के द्वारा
July 10, 2012

योगी जी,नमस्कार देश से बाहर होने के कारण आपकी भाव पूर्ण रचना देरी से पढी ,बहुत संक्षिप्त पर बहुत सवालिया शब्द ,जिनका कोई जवाब नहीं ……..

    yogi sarswat के द्वारा
    July 11, 2012

    बहुत बहुत आभार आदरणीय दीप्ति जी ! आप मेरे ब्लॉग पर आये और अपना समय और विचार दिया ! धन्यवाद

    Shermaine के द्वारा
    October 18, 2016

    Performing sensation Adele is to team up with one of the primary hip hop celibreties on the world with regards to what could come to be a musical union Made in heaven, according to a tabloid news paper. The Sun noted that the 21-year-old star has met up with Jay-Z, who has been recently in the british isles to support his better half Beyonce during the Glastonbury Festival.

allrounder के द्वारा
July 10, 2012

नमस्कार भाई योगी जी, कविता के माध्यम से अच्छे प्रश्न उठाये आपने आखिर ये अंतर क्यों ? हालांकि उस सर्वशक्तिमान की इक्षा वो ही जाने की ये अन्तर आखिर क्यू ?

    yogi sarswat के द्वारा
    July 10, 2012

    नमस्कार श्री सचिन जी ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा , धन्यवाद

pritish1 के द्वारा
July 9, 2012

मित्रवर आपकी नयी रचना के प्रतीक्षा में हूँ………. एक प्रश्न का अवश्य उत्तर दीजिये क्यों बनाया हमने ऐसा समाज……………? http://pritish1.jagranjunction.com/2012/07/07/kyun-banaya-hamne-aisa-samaj/

    yogi sarswat के द्वारा
    July 9, 2012

    प्रीतिश जी नमस्कार ! अवश्य , लेकिन पधुने के बाद ही कुछ कह सकूँगा ! आभार

Chandan rai के द्वारा
July 6, 2012

योगी जी , कम शब्दों में आपकी कविता का मीठा असर आपकी कलम के स्वाद की चटुर्ता का रसपान करने की मेरी आदत को बिगाड़ चुका है ! हमेशा की तरह एक बेहतरीन रचना उद्देश्य !

    yogi sarswat के द्वारा
    July 6, 2012

    मित्रवर श्री चन्दन राय जी , सादर ! आपको मेरे शब्द पसंद आना बहुत बड़ी बात है क्योंकि आप स्वयं इतना बेहतर लिखते हैं की जवाब नहीं आपका ! और ऐसे महान व्यक्तित्व के अगर अपनी रचना पर विचार मिल जाते हैं तो निश्चय ही उत्साह वर्धन होता है ! बहुत बहुत आभार

Mohinder Kumar के द्वारा
July 6, 2012

योगी जी, सुन्दर भावनाओं से ओतप्रोत, एकता की भावना को प्रेरित करती रचना के लिये बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    July 6, 2012

    श्री मोहिंदर कुमार जी , सादर ! आपको शब्द पसंद आये , बहुत बहुत शुक्रिया ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

seemakanwal के द्वारा
July 6, 2012

योगी जी बहुत प्यारी कविता है .सच में ……राम कहो रहमान कहो या कहो अल्लाह ,..सबका खेवनहार है व्ही एक मल्लाह .

    yogi sarswat के द्वारा
    July 6, 2012

    आदरणीय सीमा कंवल जी , सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! आगे भी आपके सहयोग और समर्थन की उम्मीद करता हूँ ! धन्यवाद

anant singh के द्वारा
July 5, 2012

badhiya shabd

    yogi sarswat के द्वारा
    July 6, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद ! आपका , सहयोग बनाये रखियेगा

nishamittal के द्वारा
July 5, 2012

योगी जी,मैं अनुपस्थिति के कारण आपकी भाव पूर्ण रचना देर से देख सकी वास्तविकता है जिसका उत्तर नहीं मिलता

    yogi sarswat के द्वारा
    July 6, 2012

    आदरणीय निशा जी मित्तल , सादर नमस्कार ! आपका आशीर्वाद मिला , बहुत बहुत आभार !

jlsingh के द्वारा
July 5, 2012

आदरणीय योगी जी, सादर अभिवादन! तू है सबका प्यारा , तू है सबसे महान कोई पढ़े गीता यहाँ , कोई पढ़े कुरआन पूजे जब हर कोई तुझको तो ये हिन्दू -मुस्लिम का अंतर क्यों है ? बहुत बढ़िया ,बधाई हे मेरे और सबके भगवान्, जब हम सभी हैं चार दिनों के मेहमान कोई है निर्धन गरीब, तो कोई धनवान ये निर्धन और धनवान में अंतर क्यों है? बहुत ही बेहतर!

    yogi sarswat के द्वारा
    July 5, 2012

    aadarniya आदरणीय श्री जवाहर जी , सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये और आपकी उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली , बहुत बहुत आभार ! आशा करता हूँ आपका आशीर्वाद यूँ ही लगातार मिलता रहेगा ! बहुत बहुत शुक्रिया

    Chelsi के द्वारा
    October 18, 2016

    Hi, I saw your line was called &qios;outtude oslo" that is so funny!!! I live right outside oslo!! :) Where did you get the idea to call it that? Love K

bebakvichar, KP Singh (Bhind) के द्वारा
July 4, 2012

 काश इस अंतर को कोई समझ पाता। कम होने की बजाय लगातार बढ़ता ही जा रहा है।

    yogi sarswat के द्वारा
    July 5, 2012

    श्री के .पी. सिंह जी , सादर नमस्कार ! आपके विचारों से पूर्णतया सहमत हूँ ! आपने मेरे शब्दों को समय और अपने विचार दिए , बहुत बहुत आभार आपका ! सहयोग बनाये रखियेगा

y kumar के द्वारा
July 4, 2012

bahut sateek evam sarthak shabd yogi ji

    yogi sarswat के द्वारा
    July 5, 2012

    बहुत बहुत शुक्रिया कुमार साब ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

vishleshak के द्वारा
July 4, 2012

आदरणीय योगी जी,यद्यपि प्रत्यक्षतःयह तो नहीं कहा जा सकता कि यह अन्तर ईश्वर की संरचना है,लेकिन जैसा कि अधिकांश लोगों ने टिप्पणी दी है कि यह अन्तर मनुष्य का बनाया हुआ है,मैं पूछना चाहूंगा कि मनुष्य को किसने बनाया है ।मेरे बिचारसे यह अन्तर देश काल परिस्थितियों और लोगों की कर्मठता के कारण है और एक वास्तविकता है ।इसे स्वीकार कर समाप्त करने का प्रयास हम सबको करना चाहिए ।विश्लेषक&याहू .इन ।

    yogi sarswat के द्वारा
    July 4, 2012

    आदरणीय श्री विश्लेषक जी , सादर नमस्कार ! आपके विचारों का समर्थन करता हूँ और स्वागत करता हूँ आपकी सोच का ! बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

sinsera के द्वारा
July 4, 2012

योगी जी नमस्कार, ये अंतर भी असल में एक तरह का विज्ञान है.. क्या है, इसका पता तो चलता है लेकिन क्यूँ है इसका उत्तर नहीं दिया जा सकता…..

    yogi sarswat के द्वारा
    July 4, 2012

    आदरणीय सरिता जी , सादर नमस्कार ! मेरे शब्दों को आपका आशीर्वाद मिला , बहुत बहुत आभार ! सहयोग का आकांक्षी हूँ

D33P के द्वारा
July 3, 2012

योगी जी ……….नमस्कार सुंदर कविता आभार

    yogi sarswat के द्वारा
    July 4, 2012

    बहुत बहुत शुक्रिया , आदरणीय दीप्ति जी ! सहयोग बनाये रखियेगा

lovely के द्वारा
July 3, 2012

nice words

    yogi sarswat के द्वारा
    July 4, 2012

    thanx very much

    Ellie के द्वारा
    October 17, 2016

    I waentd to spend a minute to thank you for this.

rajuahuja के द्वारा
July 3, 2012

अंतर को देखा “अंतर” से, अंतर्बोध अव्यक्त ! राम-रहीम नहीं भेद है, सुजन मन है आसक्त !

    yogi sarswat के द्वारा
    July 4, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद आहूजा साब ! आपने मेरे शब्दों को समय और अपने विचार दिए ! आपके सहयोग की कामना करता हूँ ! धन्यवाद

yamunapathak के द्वारा
July 2, 2012

योगीजी रचना सुन्दर और प्रश्नात्मक शैली की वज़ह से ज़वाब देने को विवश करती है. ये सारे अंतर समाज ने बनाए अफ्रीका में काले वर्ण सुन्दरता की पहचान हैं.हिन्दू मुस्लिम का अंतर समाज ने बनाया,इश्वर ने तो नर नारी (शिव और शक्ति)को भी असमान नहीं किया था पर समाज ने वह अंतर भी बना दिया. maatee के अन्दर समा जाने पर किसकी हड्डियां हैं ये सब छुट जाता है. शुक्रिया.

    yogi sarswat के द्वारा
    July 3, 2012

    आदरणीय यमुना जी , सादर नमस्कार ! आपने सही कहा ! आपके विचारों का हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ ! आप मेरे ब्लॉग पर आये और मेरे शब्दों को समय एवं अपने विशिष्ट विचार दिए , आभारी हूँ आपका !

sonam के द्वारा
July 2, 2012

नमस्कार योगी सर ओ सर्वव्यापी , ओ सर्वशक्तिमान जब सब में है तू विधमान तो इस दुनियाँ में ये ऊँच-नीच का अंतर क्यों है ? ये उंच नीच का अंतर हमने ही तो पैदा किया है , इंसान गलत काम खुद करता है और दोष भगवान को दे देता है , कोई किसी का क़त्ल कर दे या कही चोरी करे तो इसका मतलब ये तो नहीं की भगवन ने उसे आकर कहा हो की बेटा तुम्हे उसका कत्ल करना है या चोरी करनी है! अपने कर्मो के हम खुद जिम्मेदार होते है ! वैसे आपने लिखा अच्छा है !

    yogi sarswat के द्वारा
    July 2, 2012

    सोनम जी , आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! आपके विचारों का स्वागत करता हूँ ! सहयोग बनाये रखियेगा , धन्यवाद

sadhna srivastava के द्वारा
July 2, 2012

ईश्वर ने अंतर करके नहीं भेजा था….. ये सब हम लोगों की बुद्धि है योगी जी…… बेकार में ही उसे दोष देते हैं हम अपने कर्मों का……. बुद्धि उसने दी परन्तु उसका सही उपयोग करने में हम असमर्थ रहे…… इसीलिए ये सब फैला हुआ है…… :) :)

    yogi sarswat के द्वारा
    July 3, 2012

    आदरणीय साधना जी , नमस्कार ! आपके विचारों से सहमत हूँ ! आप मेरे ब्लॉग पर आये aur अपने विचार दिए , बहुत बहुत आभार आपका ! सहयोग बनाये रखियेगा , धन्यवाद

ajay kumar pandey के द्वारा
July 2, 2012

योगी जी नमस्कार आपने इस रचना के माध्यम से बड़े ही सुन्दर प्रश्नों में यह व्यक्त किया है की हिन्दू मुस्लिम में भेदभाव क्यों है आप मेरे ब्लॉग पर देहरादून ऋषिकेश यात्रा शीर्षक वाली रचना देखिये यात्रा वृतांत है गया भी था तो तभी दिया है दरअसल में कही शादी में था तो आप लोगो से दूर था अब समय मिला आपकी रचना देखने का मेरी रचना जरुर देखें धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    July 2, 2012

    मित्र अजय पाण्डे जी नमस्कार !आप मेरे ब्लॉग पर लगातार अपना सहयोग दे रहे हैं ! बहुत बहुत आभार ! आपके ब्लॉग पर अवश्य जाऊंगा ! बहुत बहुत धन्यवाद

rajhans के द्वारा
July 2, 2012

नमस्कार योगी जी! मैंने अपने कमेंट्स २८ से २९ हुए देखे, समझ गया कि आप ही होंगे| प्रोत्साहन के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद| वो मेरी सबसे प्रिय कविता है| आपकी इस रचना का उद्देश्य इश्वर को एक दिखाना है| ये बिलकुल सही है| आज की तारीख में धर्म केवल धर्म नहीं है, वो एक राजनीतिक समाज है, पुजारी उसके शासक और ग्रन्थ उसका संविधान है| साम्राज्यवाद न कभी ख़तम हुआ है न लोग होने देंगे| धर्मं दुनिया को, दुनिया वालों को और दुनिया बनाने वालों को देखने का एक नजरिया बनता है| वो इश्वर तक पहुँचने की सीढ़ी बन गयी है, जो भिन्न-भिन्न दिशाओं से आती हैं और एक ही लक्ष्य तक पहुँचने के लिए भिन्न-भिन्न दिशाओं में जाती हैं! ये दिशाएं भी सच्चाई हैं और वो बिंदु भी सच्चाई है जहाँ तक उस रेखा का प्रश्न है, जहाँ समाजशास्त्र और धर्मशास्त्र मिलते हैं, वही रेखा धार्मिक समाज का मतलब और उनमे होने वाले टकराव को परिभाषित करती है|

    yogi sarswat के द्वारा
    July 2, 2012

    मित्रवर राजहंस जी , सादर नमस्कार ! आपकी उत्साहित करती प्रतिक्रिया पाकर दिल को प्रसन्नता हुई ! आपके विचारों का हार्दिक स्वागत करता हूँ ! बहुत बहुत आभार

roshni के द्वारा
July 1, 2012

योगी जी नमस्कार काश के ये अंतर न होता … काश एक सबका एक धर्म होता तो आज कोई दुश्मन न होता… हर तरफ राम जैसा राज्य होता … सुंदर कविता कही अपने आभार

    yogi sarswat के द्वारा
    July 2, 2012

    नमस्कार रोशनी जी ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग और समर्थन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

Santosh Kumar के द्वारा
July 1, 2012

आदरणीय योगी जी ,.सादर नमस्कार अच्छी रचना के लिए हार्दिक बधाई ,…आदरणीय सतीश जी से सहमत हूँ ,..भगवान ने इंसान बनाया था ,..उसको संयमित रखने के लिए देश काल पात्र के अनुसार अलग अलग धर्म बने ,.समस्या इसमें नहीं है ,..सबको अपनी परम्पराओं मान्यताओ के अनुसार पूजा इबादत करने का हक है ,..समस्या तब आती है जब कोई दुसरे को कमतर कहते हुए हर कीमत पर अपना विस्तार करना चाहता है या दूसरों की मर्यादा का हनन करता है ,..कोई धर्म पत्थर से नहीं बना है जो लकीर का फकीर रहेगा उसका विनाश सुनिश्चित है ,..हम समय रहते चेत जायं और आपसी रगड़ के बजाय सहयोगी भाव से एक साथ देश,विश्व और मानवता का विकास करें इसी में सभी धर्मों की सार्थकता है ,..सर्वव्यापी सर्वशक्तिमान यही चाहेंगे ,..सादर आभार सहित

    yogi sarswat के द्वारा
    July 2, 2012

    सबको अपनी परम्पराओं मान्यताओ के अनुसार पूजा इबादत करने का हक है ,..समस्या तब आती है जब कोई दुसरे को कमतर कहते हुए हर कीमत पर अपना विस्तार करना चाहता है या दूसरों की मर्यादा का हनन करता है आदरणीय श्री संतोष कुमार जी , सादर नमस्कार ! आपके विचार हमेशा उर्जा और प्रोत्साहन देते हैं ! बहुत बहुत आभार ! सहयोग की कामना करता हूँ

munish के द्वारा
July 1, 2012

आदरणीय योगी जी सादर, विषय अच्छा है सार्थक है पर फिर भी पता नहीं क्यों कुछ अधूरापन सा है……… ! पता नहीं क्यों ……

    yogi sarswat के द्वारा
    July 2, 2012

    आदरणीय श्री मुनीश जी , सादर नमस्कार ! मन के भाव हैं , संभव है कोई कमी रह गई हो ! आपका बहुत बहुत आभार , आपने मेरे शब्दों को समय दिया ! धन्यवाद

pritish1 के द्वारा
July 1, 2012

कविता अच्छी है……विषय भी आपने सही चुना किन्तु आपके लेखो के आधार पर शब्द उतने प्रभावी नहीं लगे………अच्छी कविता अच्छा प्रयास……..!

    yogi sarswat के द्वारा
    July 2, 2012

    मित्रवर प्रीतिश जी , नमस्कार ! आपकी स्पष्ट प्रतिक्रिया का हार्दिक स्वागत करता हूँ ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

    Jennylee के द्वारा
    October 17, 2016

    Awesome you should think of sontehimg like that

satish3840 के द्वारा
July 1, 2012

नमस्कार योगी जी / बहुत खूब पर ये अंतर भगवान् में नहीं इंसान ने अपने अहम् के लिए बनाया हें / बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    July 2, 2012

    आदरणीय श्री सतीश जी , सादर नमस्कार ! आपके विचारों का हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ ! आपका आशीर्वाद मिलता रहता है , बहुत बहुत आभार !

    Loree के द्वारा
    October 17, 2016

    Ho ho, who woudla thunk it, right?

rekhafbd के द्वारा
July 1, 2012

आदरणीय योगी जी तू है सबका प्यारा , तू है सबसे महान कोई पढ़े गीता यहाँ , कोई पढ़े कुरआन पूजे जब हर कोई तुझको तो ये हिन्दू -मुस्लिम का अंतर क्यों है ?बहुत बढ़िया ,बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    July 2, 2012

    आदरणीय रेखा जी , सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! बहुत बहुत शुक्रिया

umeshshuklaairo के द्वारा
July 1, 2012

ह्रदय से निकले इन शब्दों का उत्तर सभी सजग जन ढूंढ रहे है बाहर प्रकट कर अपने आगे चलने का मार्ग सुझाया सुन्दर रचना

    yogi sarswat के द्वारा
    July 2, 2012

    श्री उमेश शुक्ला जी , सादर ! आपको शब्द पसंद आये , लेखन सार्थक हुआ ! सहयोग बनाये रखियेगा , धन्यवाद

yogeshkumar के द्वारा
July 1, 2012

माफ़ करे ..मगर कुछ ख़ास नहीं ….. आपके लेख तो उम्दा होते हैं.. मगर कविता के लिए और मेहनत करनी पड़ेगी…. एक सुर या भाव होना चाहिए……….

    yogi sarswat के द्वारा
    July 2, 2012

    मित्रवर श्री योगेश कुमार जी , सादर नमस्कार ! आपकी स्पष्टवादिता के लिए आपका बहुत बहुत आभार ! दिल से चाहता हूँ की आप जैसे लोगों की प्रतिक्रियाएं मिलें जिससे अपने लेखन में कुछ सुधार कर सकूं ! बहुत बहुत धन्यवाद

ajaykr के द्वारा
July 1, 2012

उंच-नीच भेदभाव ईश्वर ने नही,यह हम इंसानों के खुराफाती दिमाग की उपज हैं ,हमारा दिमाग इतना उपजाऊ हैं की जो भी बोयें हम यह उसका उत्पादन कई गुणा कर के देता हैं , ईश्वर तो एक सकारात्मक उर्जा हैं ,ईश्वर क्या हैं ,लोग कहते हैं …..ईश्वर हमेशा था और हमेशा रहेंगा,और अविनाशी हैं ,उर्जा क्या हैं …इसे भी ना तो उत्पन्न कर सकते हैं ना ही नष्ट …..,ईश्वर को इसीलिए हमने सकारात्मक उर्जा कहाँ हैं , ईश्वर ने हर व्यक्ति को कुछ ना कुछ खूबी दी हैं ,सबको एक जैसा नही बनाया क्यूंकि आप सोचिये यदि सब श्रीमती ऐश्वर्याराय बच्चन जैसे खूबसूरत होते या आप जैसे  अच्छे इंसान होते तो सृष्टि कैसी होती …..ईश्वर ने हेर व्यक्ति को निखारने के लिए तरह-तरह की संघर्ष की परिस्थितिया उत्पन्न की ,     ईश्वर ने हर किसी के लिए अलग प्रकार के एक ही मार्ग बनाया ,जिससे हर कोई उसतक पहुंचे ……इसीलिए इंसानी जीवो के मध्य आपसी प्रेम विकसित करने के लिए उसने तरह तरह के धर्म बनाए और उनके पैगम्बर भेंजे ….. बहुत अच्छा ,लिखते रहिये ,पढ़ना अच्छा लगता हैं ………. आपका अजय

    yogi sarswat के द्वारा
    July 2, 2012

    श्री अजय कुमार जी , सादर नमस्कार ! अआपने ईश्वर के विषय में इतना सटीक लिखा , आपके विचारों से समर्थन जताते हुए आपका शुक्रिया अदा करता हूँ की आप मेरे ब्लॉग पर आये और अपने अहम् विचारो से इस नाचीज़ के अल्फाजों को अपना समय दिया ! शुक्रिया

chaatak के द्वारा
July 1, 2012

एक और खूबसूरत रचना पर हार्दिक बधाई!

    yogi sarswat के द्वारा
    July 2, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद , श्री चातक जी ! सहयोग बनाये रखियेगा

akraktale के द्वारा
July 1, 2012

योगी जी सादर, भाई जी अंतर न हो तो इनका महत्त्व ही कैसे जान सकेंगे हम जब दुःख ही ना होगा तो सुख को कौन समझेगा और जब गरीबी नहीं होगी तो अमीरी के मायने ही क्या रह जायेंगे. किन्तु मै आपको दोष नहीं दूंगा क्योंकि प्रकृति और फिर इंसान ने कुछ ऐसे फर्क कर दिए हैं कि लगता है क्या ऐसे अंतर कि जरूरत थी? सुन्दर मनोभावों का चित्रण. बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    July 2, 2012

    आदरणीय श्री रक्ताले जी , सादर नमस्कार ! आपके विचार मुझे प्रफुल्लित करते हैं ! आपके आशीर्वाद और सहयोग की कामना हमेशा रहती है ! बहुत बहुत आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
July 1, 2012

आदरणीय योगेन जी, सादर ! अंतर्मन से निकली प्रश्न करती पुकार !! पर ……. यह अंतर तो सृष्टि के आदिकाल से है ! और जो है सो है ! अच्छी भावपूर्ण रचना ! सादर !

    yogi sarswat के द्वारा
    July 2, 2012

    आदरणीय श्री शशिभूषण जी सादर नमस्कार ! मेरे शब्दों को आपका आशीर्वाद मिला , बहुत प्रसन्नता हुई ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

dineshaastik के द्वारा
June 30, 2012

योगी जी बहुत अच्छे सवाल उठाये हैं आपने, मैं भी पचास साल से ये अनुत्तरित सवाल  नहीं मिले आज तक। आपको मिल जायें तो मुझसे जरूर शेयर करें। 

    yogi sarswat के द्वारा
    July 2, 2012

    आदरणीय श्री आस्तिक जी , सादर नमस्कार ! मुझ जैसे व्यक्ति को तो शायद इसका जवाब न ही मिले , लेकिन विश्वास है की आप शायद जवाब अवश्य लायेंगे ! बहुत बहुत आभार मेरे शब्दों को समय देने के लिए और अपने ओजपूर्ण विचार प्रस्तुत करने के लिए ! बहुत बहुत धन्यवाद

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 30, 2012

जरा सोचो. बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    July 2, 2012

    बहुत बहुत आभार , आदरणीय श्री प्रदीप कुशवाहा जी !

vikaskumar के द्वारा
June 30, 2012

कविता के माध्यम से आपने एक खास सवाल उठाया है । इस धरती पर जो अंतर दिखता है वह ईश्वर के द्वारा नहीं , बल्कि मनुष्यों द्वारा बनाया गया है । ईश्वर द्वारा निर्मित हवा ,बारिश , सूरज की रोशनी इत्यादि क्या किसी के साथ कोई भेदभाव करते हैं ? पैसे या अन्य आधार पर किसी को ऊँचा या नीचा समझना इंसानों की कमजोरी है , ईश्वर की नहीं ।

    yogi sarswat के द्वारा
    July 2, 2012

    श्री विकास कुमार जी , आपके विचारों का हार्दिक अभिनन्दन ! सहयोग बनाये रखियेगा , धन्यवाद

    Pepper के द्वारा
    October 18, 2016

    Thank you both so much for your warm cotnartulagions and kind comments- we too are looking forward to welcoming you back to TerraVina. Neil is doing brilliantly well as head chef and you should be very proud of him!With warmest wishesNina and Gerard

Punita Jain के द्वारा
June 30, 2012

आदरणीय योगी जी , एक अच्छा सवाल उठाती बहुत ही सरल और सुन्दर रचना | इन सब अन्तरों के लिए खुद मनुष्य और उसका संकुचित दृष्टिकोण ही जिम्मेदार है |

    yogi sarswat के द्वारा
    July 2, 2012

    आदरणीय पुनीता जी , सादर नमस्कार ! आपको रचना पसंद आई , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद


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