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जूता है कि ........ मानता नहीं

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हिंदी में जूता , अंग्रेजी में शूज़ , पंजाबी में ਸ਼ੂਜ਼ (जुत्त ) , जापानी में दोसोकू , संस्कृत में पादुका ! अरे नहीं ! मैं आपको जूता के विभिन्न भाषाओँ में नाम नहीं बता रहा हूँ ! मैं तो आपका ध्यान जूते की महिमा की तरफ ले जाना चाह रहा हूँ ! इसकी महिमा अमेरिका से लेकर भारत तक कितनी फैली हुई है , यही बताने की कोशिश करी है अपने इस लेख में !

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भारतीय फिल्मों के महान शोमैन राज कपूर ने जूते को समर्पित एक गाना गाकर भी इसकी महिमा को और भी बढाया है ! मेरा जूता है जापानी …..अब ये शोध का विषय हो सकता है कि उन्होंने ये जूता सच में जापान से मंगवाकर ही पहना था या मुंबई के भिवंडी बाज़ार के टिंडे वाली गली की राम स्वरुप की दूकान से तब के ज़माने में आठ आने में लेकर आये थे ! ये सवाल दिग्विजय सिंह जी के लिए छोड़ देते हैं कि वो इस पर रणधीर कपूर या ऋषि कपूर को अपनी प्रश्नावली भेजें !

जूते की बात चल रही है तो सीरिया के लेखक , साहित्यकार श्री खलील जिब्रान की एक कहानी याद आ रही है ! जिब्रान साब रेगिस्तान में नंगे पाँव चले जा रहे थे , ऊपर से तेज़ धूप और नीचे से तपती रेगिस्तान की ज़मीन ! भगवान् को कोसते हुए , एक एक कदम बढाए चले जा रहे थे ! थोडा आगे निकले होंगे कि क्या देखते हैं – एक बुजुर्गवार , जिनके पैर नहीं हैं , बड़े मस्त, हाथों को ज़मीन पर टिकाये चले आ रहे हैं ! उस बुजुर्गवार को देखकर खलील जिब्रान साब ने वहीँ अपने दोनो हाथ उठाकर ऊपर वाले का शुक्रिया किया , या अल्लाह ! मुझ पर तेरी बड़ी महर है ! तूने मुझे कम से कम दो पैर तो दिए ! जूते नहीं तो कोई बात नहीं !

जूते की बात कभी कभी मन को बड़ी प्रसन्नता देती हैं ! जब छोटा था , तब की एक घटना याद आती है ! हमारे गाँव में एक नवयुवक की शादी थी ! बरात कहीं दूर जानी थी ! उस वक्त बारात 2-3 दिन रूकती थी ! उस बारात में नए लड़के भी थे जो पूरी मस्ती में थे ! गर्मी का समय था , वहीँ जहां बारात रुकी हुयी थी , पानी पीने के लिए बड़ा सा ड्रम रख दिया गया था ! उन्हें पता नहीं रात को सोते समय क्या सूझी – उन्होंने सभी के जूते एक एक करके उस ड्रम में डाल दिए ! पूरी रात बाराती वोही पानी पीते रहे और सुबह तक वो ड्रम तो खाली हो गया लेकिन बारातियों के जूते फूल गए ! बाराती बिगड़ गए और उन्होंने वहीँ के गाँव वालों पर अपना गुस्सा निकाल दिया ! दूल्हा पिट -पिटा के बिना दुल्हन के वापस लौट आया !


आप देखेंगे -कहीं अगर हल्की फुल्की पड़ोसियों की लड़ाई बज जाए तो भाई लोग कभी ये नहीं कहेंगे कि लड़ाई हो रही है , ये कहेंगे -जूता चल रहा है ! कोई बाप , अपने बेटे को पीट दे तो दोस्त लोग कहेंगे – कल तो उस पर , उसके बाप ने जूता बजा दिया या कहेंगे जूता फेर दिया ! कभी कभी एक और शब्द सुनने को मिल जाता है – अरे , कल तो उधर जूतम पैजार हो रही थी ! मैंने बहुत कोशिश करी की देखूं – ये जूतम पैजार किस भाषा का शब्द है , लेकिन मुझे नहीं मिला !


मंदिर -मस्जिद या अन्य पूजा स्थलों के बाहर स्पष्ट लिखा होता है -कृपया जूते बाहर ही उतारें ! इससे दो काम सिद्ध हो जाते हैं ! मंदिर या पूजा स्थल की गरिमा बनी रहती है , साफ़ सफाई भी ! दूसरा – वो जो बाहर इसी ताक में सुबह से खड़े हैं कि कब कोई बढ़िया सा जूता ( जोड़ा ) मिले और ले चलें अपने थैले में ! उसका भी काम आसान ! कभी कभी ऐसा भी हुआ है कि हबड़ दबड़ में एक ही जूता उठा पाए तो फिर सारी महनत बेकार !

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हिन्दुओं के शादी विवाह में तो जूता अपना एक विशेष ही महत्व रखता है ! शादी हो गयी , फेरे भी हो लिए ! लेकिन अभी एक रस्म बाकी है ! जूता चुराने की ! साली या सालियाँ ( जैसा जिसका भाग्य ) आएँगी , वो कह के आपका जूता चुराएँगी ! आपका ही जूता , आप ही पैसे दो , तब जाकर वापस मिलेगा ! क्या व्यवस्था है ! जूता भी मेरे , सर भी मेरा ! लेकिन साब परंपरा है ! अच्छा लगता है ! आप ये भी देखिये की उस वक्त आपके साथ बहुमत नहीं होगा ! बहुमत होगा आपकी सालियों के साथ ! और तो और आपकी अभी अभी हुई नयी नवेली दुल्हन भी आपसे कहेगी – जितना छोटी कह रही है दे दीजिये न ! आहा हा !अब तो आप भी कुछ नहीं कर सकते ! जितना माँगा है , देना हो पड़ेगा ! आप भी तो साली साहिबा को खुश देखना चाह रहे हैं ! उसने प्यार से मुस्करा के एक बार जो बोल दिया -दीजिये न डिअर जीजू ! आप तो अपनी पॉकेट खाली कर दोगे ! गलत कह रहा हूँ तो कह दो सही कह रहा हूँ ?


तो साब अब भी आप कहेंगे कि जूता कोई मायने नहीं रखता ? इसी जूते ने तो अच्छे अच्छों की इज्ज़त को उतार के रख दिया ! ये कुछ घटनाएं आपको इस बात का प्रमाण देंगी !


14 दिसंबर 2008 को ईराक में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जोर्ज बुश पर भरी सभा में जब जूता फैंका गया तब से इसकी महत्ता और भी ज्यादा बढ़ गयी है !
अमेरिका की ही पूर्व विदेश मंत्री कोंडालिजा राइज़ को कुंडारा कहा जाने लगा था जिसका मतलब होता है जूता !
2 फरवरी 2009 को चीन के प्रधानमंत्री वेन जिआबाओ पर केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में भाषण देते समय एक जर्मन ने जूता फैंका !
7 अप्रैल 2009 को भारत के तत्कालीन गृह मंत्री पी . चिदंबरम पर दैनिक जागरण के पत्रकार जरनैल सिंह ने प्रेस कोंफ्रेंस में जगदीश टायटलर को सी .बी,आई द्वारा क्लीन चिट दिए जाने पर जूता फैंका !
16 अप्रैल 2009 को भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवानी पर कटनी में जूता फैका गया !
18 अक्टूबर 2011 को लखनऊ में अरविन्द केजरीवाल पर जूता फैंका गया और दोबारा ये घटना फरुक्खाबाद में दोहराई गयी जब भारत वर्ष के दामाद श्री रॉबर्ट वाड्रा के भाड़े के टट्टू ने अरविन्द पर जूता फैंकने की कोशिश करी और उसे लोगों न्र धुन दिया !


ये बहुत सी घटनाओं में से कुछ बड़े लेवल की घटनाएं हैं जो ये सिद्ध करती हैं कि जूता कोई आम चीज नहीं है !


ये जूता ही था जिसको हैदराबाद से लेने के लिए मायावती का एक स्पेशल हेलीकाप्टर एक ऑफिसर और दो सुरक्षा गार्ड के साथ लखनऊ से उड़ान भरता था ! ये जूता ही था , जिसके शौक और शान की वज़ह से तमिलनाडु में तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता और उसकी सखी को सत्ता से उखाड़ फैंका था !


जूता आपकी शान और आपकी औकात बताता है ! कोई 5000 हज़ार का जूता पहनता है , कोई 500 का ! कोई आदिदास का पहनता है कोई कालिदास का ! पहले लोग जूती पहनते थे अब जूती का लिंग परिवर्तन करके जूता कर दिया गया है !


जूते में सत्ता और सिंहासन चलाने की ताकत भी होती है ! भगवान् राम के वनवास के समय में उनके भ्राता श्री भरत ने उनके जूतों (पादुकाएं ) के बल पर ही चौदह वर्ष राज्य को संभाल लिया ! क्या बात है ! दिग्विजय सिंह को सवाल उठाना चाहिए कि कहीं उन जूतों में भगवान् राम ने कोई C programming तो नहीं की हुई थी जिससे भरत को दिशा निर्देश मिलता रहे ? आज की अगर बात होती तो न भगवान् के जूते मिल पाते और न ही उनका राज्य !

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भारत में जूतों का प्रचलन

भारत में जूतों का प्रचलन आदिकाल से है ! ऋग्वेद , युजुर्वेद में लिखे गए सूत्रों में इस बात का जिक्र है कि पुराने समय में लोग घास , लकड़ी और चमड़े से बने जूते पहनते थे जिन्हें उपनाह कहते थे ! इसका सबूत आज भी ब्रज भाषा में देखने को मिलता है जहां वृद्ध लोग आज भी जूतों को “पनाह” कहते हैं जो उपनाह का ही अपभ्रंश लगता है ! भगवान् राम के समय में अयोध्या और लंका दोनो में पादुकाएं प्रचलित थीं ! उस समय रावण के पास पादुकाएं और छाता दोनो ही वस्तुएं उपलब्ध थीं !

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आपको यह जानकार आश्चर्य होगा की आज के समय में भी भगवान् राम की पादुकाओं की पूजा रामेश्वरम (तमिलनाडु ) और रामटेक (महाराष्ट्र ) के मंदिरों में की जाती है !
दक्षिण भारत के चेंचारिमाली में भगवान् सुब्रमन्य (मुरुगन या कार्तिकेय ) के लिए भक्त लोग चमड़े के बने जूते लेकर जाते हैं ! ऐसा माना जाता है कि भगवान् सुब्रमन्य चमड़े के ही जूते पहनते हैं !
महाराष्ट्र के पंधारपुर मंदिर में आयोजित होने वाले विठोबा महोत्सव में भक्तजन अपने हाथ में संत तुकाराम और संत ध्यानेश्वर की पादुकाएं छंदी के बॉक्स में लेकर चले हैं !


तो , मित्रो इससे पहले कि पढने वाले मुझे गाली देने लगें और जूता उठा लें , मैं एक आखिरी वाक्य के साथ अपनी बात ख़त्म करता हूँ !


रहिमन जूता राखिये कांखन बगल दबाय
न जाने किस मोड़ पर भ्रष्ट नेता मिल जाय !!


जय राम जी की !!

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78 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shweta के द्वारा
April 1, 2013

ज़बर्जस्त लेखन …..!!

    yogi sarswat के द्वारा
    April 2, 2013

    स्वागत है आपका !

pooja sharma के द्वारा
December 10, 2012

ये जूता ही था जिसको हैदराबाद से लेने के लिए मायावती का एक स्पेशल हेलीकाप्टर एक ऑफिसर और दो सुरक्षा गार्ड के साथ लखनऊ से उड़ान भरता था ! ये जूता ही था , जिसके शौक और शान की वज़ह से तमिलनाडु में तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता और उसकी सखी को सत्ता से उखाड़ फैंका था ! जूते की कितनी औकात होती है , क्या स्पष्ट बताया है आपने ! अलग विषय और मजबूत विषय पर बढ़िया विचार लिखे हैं आपने ! हहहाआआआअ जूता भी इतना प्रभावी हो सकता है , कभी सोचा ही नहीं !

    yogi sarswat के द्वारा
    December 13, 2012

    बहुत बहुत आभार आपका , उत्साहित करने वाली प्रतिक्रिया के लिए ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

Y K Dwivedi के द्वारा
December 5, 2012

योगी जी ! ये सवाल दिग्विजय सिंह जी के लिए छोड़ देते हैं कि वो इस पर रणधीर कपूर या ऋषि कपूर को अपनी प्रश्नावली भेजें ! दिग्विजय सिंह को सवाल उठाना चाहिए कि कहीं उन जूतों में भगवान् राम ने कोई C programming तो नहीं की हुई थी जिससे भरत को दिशा निर्देश मिलता रहे ? आज की अगर बात होती तो न भगवान् के जूते मिल पाते और न ही उनका राज्य ! मजेदार क्या प्रस्तुति है………मजा गया |

    yogi sarswat के द्वारा
    December 6, 2012

    बहुत बहुत आभार श्री द्विवेदी जी ! मेरे शब्द आप तक पहुंचे और आपको पसंद आये ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

manoranjanthakur के द्वारा
December 1, 2012

श्री योगी भाई ….कमाल… बहुत खूब ये जूता महात्म… बहुत बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    December 1, 2012

    बहुत बहुत आभार श्री मनोरंजन ठाकुर जी ! मेरे शब्दों को आपका समर्थन मिला ! धन्यवाद

अजय यादव के द्वारा
November 23, 2012

योगी जी सादर प्रणाम , बड़ी शोध के पश्चात लिखा गया लेख हैं ,बधाई ,JUTE के बारे में पहली बार इतना जाना | http://avchetnmn.jagranjunction.com/

    yogi sarswat के द्वारा
    November 24, 2012

    बहुत बहुत आभार श्री अजय यादव जी , मेरे शब्द आप तक पहुंचे ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

ashishgonda के द्वारा
November 23, 2012

आदरणीय श्री! सादर अभिवादन. मैं आपका आलेख पढूं न पढूं क्या फर्क पड़ता है ? कौन सा मैं बहुत हुआ आदमी हूँ. पर फिर भी इतना कहना चाहता हूँ, मेरी रूचि कभी इतिहास पढ़ने में नहीं थी. बहुत ही बोरिंग विषय लगता था. पर आज मैंने जुते के इतिहास को पूरा पढ़ा है और सेव भी किया, इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं की लेख कितना रोचक है. भूतकाल भी ऐसे रोचकता से लिखा है पढ़ने वाला ऐसे पढ़ेगा जैसे अपनी भविष्यवाणी पढ़ रहा है. सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

    yogi sarswat के द्वारा
    November 24, 2012

    मित्रवर आशीष जी , ये तो आपका बड़प्पन है की आपने मुझ नाचीज को इतना मान और मेरे शब्दों को सम्मान दिया ! बहुत बहुत आभार आपका ! सहयोग बनाये रखियेगा , धन्यवाद

Amresh Bahadur Singh के द्वारा
November 20, 2012

रहिमन जूता राखिये कांखन बगल दबाय न जाने किस मोड़ पर भ्रष्ट नेता मिल जाय !!…. बहुत ही सुंदर …. जूते की हिस्ट्री बहुत ही रोचक लगी …..

    yogi sarswat के द्वारा
    November 21, 2012

    मित्रवर श्री अमरेश जी , आप मेरे ब्लॉग पर आये और अपने विचार दिए , बहुत बहुत शुक्रिया आपका ! सहयोग बनाये रखियेगा , धन्यवाद

vijay के द्वारा
November 20, 2012

योगी जी नमस्कार ,एक साधारण से विषय पर एक असाधारण लेख आपकी कल्पनाशीलता किसी पुराने मझे हुए गध लेखक की कल्पना पटल से मेल खा रही है बहुत ही सुंदर आलेख बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    November 20, 2012

    उत्साहित करने वाली प्रतिक्रिया ke लिए बहुत बहुत आभार श्री विजय जी ! उम्मीद है आगे भी आपका साथ और समर्थन मिलता रहेगा ! धन्यवाद

Lahar के द्वारा
November 20, 2012

प्रिय योगी जी सप्रेम नमस्कार अब क्या कहू ? आज पहली बार जूते पर इतना पढने का मौक़ा मिला | वाह ! जी वाह ! क्या बात है

    yogi sarswat के द्वारा
    November 20, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद श्री लहर जी , आपकी उत्साहित करती प्रतिक्रया मिली ! आगे भी आपके सहयोग की कामना करता हूँ ! धन्यवाद

utkarsh singh के द्वारा
November 19, 2012

अत्यंत रोचक लेख | साधुवाद !

    yogi sarswat के द्वारा
    November 20, 2012

    धन्यवाद उत्कर्ष जी आपका , आपने मेरे शब्दों को मान और समय दिया ! आभार

Tufail A. Siddequi के द्वारा
November 15, 2012

आदरणीय योगी जी, सादर अभिवादन, बहुत सुन्दर आलेख. बधाई. आपको एक बार फिर से दीपावली की बहुत-२ हार्दिक शुभकामनाये. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

    yogi sarswat के द्वारा
    November 19, 2012

    बहुत बहुत शुक्रिया तुफैल साब ! मेरे शब्दों को आपका साथ और समर्थन मिला ! धन्यवाद , सहयोग बनाये रखियेगा

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
November 14, 2012

मान्य भाई योगी जी , सप्रेम नमस्कार !……… दीपोत्सव की मंगल कामनाओं के साथ-साथ एक दमदार आलेख के लिए हार्दिक बधाई ! इन जूतों के लिए उपयुक्त और प्रतिष्ठित स्थान नेताओं के सर से बढ़कर और क्या हो सकता है ?

    yogi sarswat के द्वारा
    November 19, 2012

    बहुत बहुत आभार श्री आचार्य जी ! सहयोग बनाये रखियेगा , धन्यवाद

ajay kumar pandey के द्वारा
November 14, 2012

योगी जी नमस्कार जूते का बढ़िया महत्त्व चित्रित किया है आपने इस लेख के जरिये मुझे आपका लेख बढ़िया लगा बढ़िया लेख योगी जी धन्यवाद अजय कुमार पाण्डेय

    yogi sarswat के द्वारा
    November 19, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद श्री अजय कुमार पाण्डेय जी ! सहयोग की कामना करता हूँ , धन्यवाद

y kumar के द्वारा
November 13, 2012

gazab ka joota puran likha hai yogi ji

    yogi sarswat के द्वारा
    November 19, 2012

    शुक्रिया साब ! सहयोग बनाये रखियेगा

lovely के द्वारा
November 13, 2012

kya baat hai, joota kitna jaruri hai

    yogi sarswat के द्वारा
    November 19, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद आपका !

seemakanwal के द्वारा
November 12, 2012

आज जुटे को भी अपने उपर प्यार आया होगा ,आप को दुआए देता होगा .

    yogi sarswat के द्वारा
    November 19, 2012

    बहुत बहुत आभार आदरणीय सीमा कंवल जी , मेरे शब्दों को आपका साथ मिला ! सहयोग बनाये रखियेगा , धन्यवाद  

vasudev tripathi के द्वारा
November 12, 2012

एक रुचिकर लेख के लिए बधाई.! साथ ही दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें.!

    yogi sarswat के द्वारा
    November 19, 2012

    धन्यवाद श्री वासुदेव त्रिपाठी जी ! सहयोग बनाये रखियेगा

Madan Mohan saxena के द्वारा
November 12, 2012

उम्दा पंक्तियाँ ..बेह्तरीन अभिव्यक्ति .बहुत अद्भुत अहसास.सुन्दर प्रस्तुति. दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये आपको और आपके समस्त पारिवारिक जनो को ! मंगलमय हो आपको दीपो का त्यौहार जीवन में आती रहे पल पल नयी बहार ईश्वर से हम कर रहे हर पल यही पुकार लक्ष्मी की कृपा रहे भरा रहे घर द्वार..

    yogi sarswat के द्वारा
    November 19, 2012

    बहुत बहुत आभार श्री मदन मोहन सक्सेना जी ! मेरे शब्दों को आपका साथ मिला ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

anant singh के द्वारा
November 12, 2012

bahut khoob

    yogi sarswat के द्वारा
    November 19, 2012

    धन्यवाद

shashibhushan1959 के द्वारा
November 11, 2012

आदरणीय योगेन जी, सादर ! जूते पर किये गए आपके शोध के लिए हार्दिक बधाई ! आशा है जूता महाराज सदैव आपपर अपनी कृपा बरसाते रहेंगे ! हा…हा….हा…..! (क्षमा !) चाँद पंक्तियाँ अर्ज हैं………. “नेताजी को मंच पर जूता मारा फेंक ! हंसकर माँगा दूसरा, काम न आवे एक !! वंदन दिन राती करें, रानी के पग धोय ! जूती पूजन जो करें, मस्त-मस्त सो होय !! जूता नेता से कहे, भूल न मुझको तू ! एक दिन ऐसा आयगा, या तो मैं या तू !!”" जय हो ! जय हो !

    yogi sarswat के द्वारा
    November 19, 2012

    जूता नेता से कहे, भूल न मुझको तू ! एक दिन ऐसा आयगा, या तो मैं या तू !!” गज़ब के शब्द दिए आपने , आदरणीय श्री शशि भूषण जी ! आपने आशीर्वाद दिया मेरे शब्दों को ! बहुत बहुत आभार

ran vijay yadav के द्वारा
November 10, 2012

gazab ka joota puraan likha hai aapne

    yogi sarswat के द्वारा
    November 19, 2012

    धन्यवाद श्री रन विजय जी ! आभार

    Aspen के द्वारा
    October 17, 2016

    I’m imdpseser. You’ve really raised the bar with that.

rekhafbd के द्वारा
November 10, 2012

आदरणीय योगी जी रहिमन जूता राखिये कांखन बगल दबाय न जाने किस मोड़ पर भ्रष्ट नेता मिल जाय !!,बढ़िया मनोरंजक प्रस्तुति ,बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    November 19, 2012

    बहुत बहुत आभार आदरणीय रेखा जी ! आपका आशीर्वाद मिला ! धन्यवाद

yamunapathak के द्वारा
November 9, 2012

योगी जी आपके इस ब्लॉग में शूज की महिमा निखर गई hai. बहुत ही मनोरंजक रहा यह ब्लॉग

    yogi sarswat के द्वारा
    November 19, 2012

    बहुत बहुत आभार आदरणीय यमुना पाठक जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

Santlal Karun के द्वारा
November 8, 2012

दिलचस्प आलेख, नवीन विचारों की ध्यान खींचने वाली प्रस्तुति; हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! ज्योति पर्व की मंगल कामनाएँ ! “हमारे गाँव में एक नवयुवक की शादी थी ! बरात कहीं दूर जानी थी ! उस वक्त बारात 2-3 दिन रूकती थी ! उस बारात में नए लड़के भी थे जो पूरी मस्ती में थे ! गर्मी का समय था , वहीँ जहां बारात रुकी हुयी थी , पानी पीने के लिए बड़ा सा ड्रम रख दिया गया था ! उन्हें पता नहीं रात को सोते समय क्या सूझी – उन्होंने सभी के जूते एक एक करके उस ड्रम में डाल दिए ! पूरी रात बाराती वोही पानी पीते रहे और सुबह तक वो ड्रम तो खाली हो गया लेकिन बारातियों के जूते फूल गए !”

    yogi sarswat के द्वारा
    November 9, 2012

    बहुत बहुत शुक्रिया श्री संतलाल जी ! मेरे शब्दों को आपका समर्थन मिला ! सहयोग बांये रखियेगा

Sushma Gupta के द्वारा
November 8, 2012

आदरणीय योगी जी,आपका जूता-पुराण अत्यधिक मनोरंजक एवं शोध-पूर्ण है ;पर कांख में पुराना जूता ही रखने की सलाह दूंगी; इस सरकारी- महंगाई में नए जूते…….सुन्दर आलेख …बधाई |

    yogi sarswat के द्वारा
    November 9, 2012

    सही कहा आपने आदरणीय सुषमा जी ! आपका बहुत अभूत आभार , मेरे शब्दों तक आने के लिए ! सहयोग बनाये रखियेगा

vinitashukla के द्वारा
November 8, 2012

“रहिमन जूता राखिये कांखन बगल दबाय न जाने किस मोड़ पर भ्रष्ट नेता मिल जाय !!” बहुत ही रोचक शब्दों में जूते का ‘महिमामंडन’. बधाई योगी जी.

    yogi sarswat के द्वारा
    November 9, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय विनीता शुक्ला जी ! मेरे शब्दों को आपका समर्थन मिला ! सहयोग बनाये रखियेगा

alkargupta1 के द्वारा
November 8, 2012

योगी जी , वाह ये जूते और उनके किस्से-कहानी ! बहुत ही मनोहारी लगे … आभार

    yogi sarswat के द्वारा
    November 9, 2012

    आदरणीय अलका गुप्ता जी , सादर नमस्कार ! मेरे शब्दों को आपका आशीर्वाद मिला , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा , धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
November 8, 2012

जय राम जी की ! योगी जी, सादर अभिवादन! आपका जूता पुराण तो सचमुच अद्भुत है ! जूता बनाने और बेचने वाली जितनी भी कम्पनियाँ हैं सबको यह जूता पुराण उपहार स्वरूप अवश्य देना चाहिए! मुझे तो यह उपहार मिल गया, पर जूता कहाँ है! ५००० का न सही ५०० वाला ही दे दीजिए न! पर जोड़ी सही दीजिये, ताकि उसे हमेशा कांख में दबाकर रखूँ! बहुत सुन्दर शोधपूर्ण रोचक आलेख!

    yogi sarswat के द्वारा
    November 9, 2012

    जूता बनाने और बेचने वाली जितनी भी कम्पनियाँ हैं सबको यह जूता पुराण उपहार स्वरूप अवश्य देना चाहिए! मुझे तो यह उपहार मिल गया, पर जूता कहाँ है! ५००० का न सही ५०० वाला ही दे दीजिए न! श्री जवाहर सिंह जी , मैं भी इसी चक्कर में हूँ की कहीं से एक आड़ जोड़े का जुगाड़ हो जाए ! हम भी तो आपके ही जैसे हैं , आपसे दूर कहाँ जायेंगे ? खिलखिलाती प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

bebakvichar, KP Singh (Bhind) के द्वारा
November 7, 2012

योगीजी, जूते के लिए इतना अच्छा संगम जुटाकर उसका समापन आपने वर्तमान समय में प्रभावी दोहे के साथ किया है। अत्यंत सुंदर………

    yogi sarswat के द्वारा
    November 9, 2012

    बहुत बहुत आभार आपका श्री के . पी . सिंह जी ! मेरे शब्दों को आपका समर्थन और सहयोग मिला , धन्यवाद

akraktale के द्वारा
November 7, 2012

आदरणीय योगी जी                           सादर, बहुत सुन्दर जूता पुराण.वाह भाई मजा आ गया. मगर लगता है आपको उज्जैन के एक मंदिर कि जानकारी नहीं है क्योंकि यहाँ मंदिर के बाहर से जूते उठाने वाले नहीं बल्कि रखने वाले जरूर मिल जायेगें और कभी कभी  तो ट्रकों से भरकर जूते प्रशासन उठवाता है जिनकी बाकायदा नीलामी भी होती है. आपके सुन्दर मनोरंजक आलेख पर बधाई स्वीकारें.

    yogi sarswat के द्वारा
    November 9, 2012

    श्री रक्ताले साब , सादर नमस्कार ! आपका सहयोग और समर्थन मुझे लगातार मिलता रहता है ! इस ब्लॉग पर भी आपके समर्थन और आशीर्वाद के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

phoolsingh के द्वारा
November 7, 2012

योगी जी…… जूते का क्या बखान किया है आपने…..कमाल कर दिया आपने .. फूल सिंह

    yogi sarswat के द्वारा
    November 9, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद श्री फूल सिंह जी , मेरे शब्द आप तक पहुंचे और आपका समर्थन लेकर आये ! सहयोग बनाये रखियेगा ,

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
November 6, 2012

सुन्दर आलेख योगी जी।जूते की महिमा का बड़ा सुन्दर बखान किया है आपने। पर आजकल तो ये फेंकने के ही काम आ रहा है .इस पर भी शोध होना चाहिए कि लोग सचमुच पहनने वाले जूते फ़ेंक रहे हैं या कबाड़ी के लिए रखे जूते। वैसे दुकानों में फेंकने वाले जूते भी बिकने चाहिए।

    yogi sarswat के द्वारा
    November 9, 2012

    इस पर भी शोध होना चाहिए कि लोग सचमुच पहनने वाले जूते फ़ेंक रहे हैं या कबाड़ी के लिए रखे जूते। वैसे दुकानों में फेंकने वाले जूते भी बिकने चाहिए। बड़ी मस्त और सटीक प्रतिक्रया दी आपने श्री झा साब ! बहुत बहुत आभार ! आशा है , आगे भी आपका सहयोग और समर्थन ऐसे ही मिलते रहेगा ! धन्यवाद

satish3840 के द्वारा
November 6, 2012

योगी जी सादर / जूते की महता , इतिहास , उपयोग के बारे में विस्तार से पढ़ा / बहुत ही सुन्दर उदहारण देकर आपने अतीत व् वर्तमान का रेखा चित्र सजीव किया / सचमुच जूता किसी भी आदमी की फर्स्ट लाइन ऑफ़ डिफेंस हें / जूते से ही धनिये के बीजों को मसल कर बोया जाता हें / जिसकी महक सूंघते ही बंटी हें

    yogi sarswat के द्वारा
    November 9, 2012

    बहुत बहुत आभार श्री सतीश जी , मेरे शब्दों को आपका आशीर्वाद मिला ! सहयोग और समर्थन बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

bhanuprakashsharma के द्वारा
November 6, 2012

योगी जी जूते को लेकर शोध प्रस्तुत करने के साथ ही व्यंग्य भरे लेख में आपने वाकई कमाल कर दिया। इसके लिए तथ्य जुटाने के लिए काफी प्रयास किए होगे। ऐसे में बधाई स्वीकारें। 

    yogi sarswat के द्वारा
    November 9, 2012

    मेरी मेहनत आप तक पहुंची और आपका समर्थन लेकर आई , ख़ुशी हुई ! सहयोग बनाये रखियेगा ! बहुत बहुत धन्यवाद

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
November 6, 2012

जय हो . जूता पर शोध ग्रन्थ प्रस्तुत करने पर हार्दिक बधाई. वैसे में नेता बन्ने वाला था. पर इरादा बदल दिया है. क्यों न नेता बन जाऊं. पोस्ट तैयार है.

    yogi sarswat के द्वारा
    November 9, 2012

    आदरणीय श्री प्रदीप कुशवाहा जी , स्सदर नमस्कार ! बहुत बहुत आभार , मेरे शब्दों को आपका आशीर्वाद मिला ! सहयोग बनाये रखियेगा

November 6, 2012

योगी जी बहुत ही अच्छी प्रस्तुति के लिये बधाई ,,,,,,,,,,,,,,,,,,रहिमन जूता राखिये कांखन बगल दबाय न जाने किस मोड़ पर भ्रष्ट नेता मिल जाय !!

    yogi sarswat के द्वारा
    November 9, 2012

    धन्यवाद श्री हिमांशु शर्मा जी , आपका साथ मिला इस सफ़र में ! आगे भी आपके सहयोग की कामना करता हूँ ! धन्यवाद

sudhajaiswal के द्वारा
November 6, 2012

आदरणीय योगी जी, सादर अभिवादन, बहुत खूब! आपने तो जूता के महिमा पर शोध ही कर डाला, उम्दा लेखन, बहुत-बहुत बधाई|

    yogi sarswat के द्वारा
    November 9, 2012

    आभार और बहुत बहुत धन्यवाद आपका आदरणीय सुधा जैसवाल जी ! सहयोग बनाये रखियेगा

omdikshit के द्वारा
November 6, 2012

योगी जी, नमस्कार. ‘जूते’ की महत्ता को सार्वजानिक रूप से स्वीकारने के लिए मैं आप के साथ सभी पाठकों को बधाई देना चाहता हूँ.सबसे अच्छी बात है की ..जूता…से बड़ा धर्म-निरपेक्ष और समाजवादी कोई नहीं हो सकता.क्योंकि ..हर उम्र ,जाति,धर्म और वर्ग के लोग इसे धारण करते हैं.भ्रष्ट…नेताओं के परिप्रेक्ष्य में तो इसका महत्त्व और भी बढ़ जाता है.

    yogi sarswat के द्वारा
    November 9, 2012

    श्री दीक्षित जी , बहुत बहुत आभार ! आपकी उत्साहित करने वाली और सार्थक प्रतिक्रिया के लिए ! धन्यवाद


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