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बदलते भारत में मुस्लिम युवाओं की भूमिका

Posted On: 18 Feb, 2013 Others में

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दुनिया के सबसे अधिक मुस्लिमों की संख्या में इंडोनेशिया के बाद दूसरे स्थान पर आने वाले भारत में मुस्लिम लोगों की और विशेषकर युवाओं की क्या भूमिका हो सकती है और क्या भूमिका रही है इस पर गौर करें ! सन 1947 के विभाजन से पहले और उसके बाद में भारत में मुसलामानों की स्थति में बहुत ज्यादा कुछ परिवर्तन आया है ऐसा मुझे नहीं लगता ! लेकिन इधर 1990 के दशक के बाद अवश्य ही एक सुखद बदलाव देखने को मिल रहा है ! भारत में अधिकांश समय और क्षेत्रों में मुसलामानों को सिर्फ अपना वोट समझा गया है ! कभी किसी पार्टी विशेष को मुसलामानों का दुश्मन घोषित करके अपना उल्लू सीधा करा गया है और कभी अपना वोट बचाने के लिए या बढाने के लिए उनको भड़काया गया है ! इस देश के कर्णधारों को ये गुमान है कि मुस्लिम धर्मभीरु होता है और उसे धर्म के नाम पर भड़काना बहुत आसान होता है ! इसलिए जब जब पार्टियों को मुसलामानों का वोट चाहिए होता है तो वो सिर्फ उनके मज़हब की बात करती हैं ! ऐसे में विकास पीछे छूट जाता है ! किसी पार्टी विशेष को सांप्रदायिक बताकर , अपने अवगुण और अपनी अक्षमता और अपनी करतूतों को छुपा लिया जाता है ! यही कारण है कि आज भी भारत का मुसलमान उस विकास का हकदार नहीं बन पाया है जिसका उसे अधिकार था ! ” ये एक सर्वविदित और सर्वमान्य सत्य है कि अगर आदमी को अपना गुलाम बनाए रखना है तो उसे पढने मत दो ! उसे बढ़ने मत दो ! उसे जाहिल बना रहने दो ” ! और यही सब भारत में चल रहा है ! क्यूंकि अगर एक व्यक्ति शिक्षा ग्रहण करता है तो वो अपने स्तर से कुछ ऊपर उठकर समाज और दुनिया को देखने लगता है ! वो औरों के साथ चलने की कोशिश करता है ! इसलिए अगर उसका वोट चाहिए तो उसे पढने मत दो , उसे आगे मत बढ़ने दो ! यही कुछ कठमुल्लों की बात है ! अपने आप को सर्वशक्तिमान बनाए रखने और अपना दबदबा बनाये रखने के लिए हर बात में खुदा का खौफ दिखाना और एक निरीह को मज़हब के नाम पर डराए रखना ही जैसे इनका शगल हो गया है ! फतवों से डराना एक फैशन बन गया है ! लेकिन इन फतवों का अब कितना महत्त्व रह गया है ये अपने आप में एक चर्चा का विषय है ! मुझे लगता है फतवे न तो पढ़े लिखे इंसान को समझ आते हैं और न ही वो इन्हें समझने और मानने की कोशिश करता है ! जो एलीट वर्ग हैं उन्हें इनसे कोई मतलब ही नहीं होता ! तो फिर ये फतवे किसके लिए ? फतवे ज़ारी करने चाहिए लेकिन समाज की भलाई के लिए , मुल्क की तरक्की के लिए !


तुम पेट पे लात मार चुके अब कितने पाँव पसारोगे
तुम रोटी कपड़ा क्यूँ दोगे , तुम लोग कफ़न भी उतारोगे

ये बाज़ी भूख की बाज़ी है , ये बाज़ी तुम ही हारोगे
हर घर से भूखा निकलेगा , तुम कितने भूखे मारोगे ?


हम सबने देखा है कि अधिकाँश फिल्मों में या अखबारों में ज्यादातर आतंकवादी मुस्लिम ही होते हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं हो जाता है कि हर मुस्लिम आतंकवादी ही होगा ! मुस्लिम भी एक इंसान हैं और उन्हें भी आम इंसानों की तरह अपनी जिंदगी जीने का हक है ! कोई मुस्लिम नहीं चाहेगा कि उसका बेटा आतंकवादी बने और मानवता का दुश्मन बनकर उसके परिवार और देश की इज्जत पर दाग लगाए ! लेकिन जिनका ये धंधा है वो ऐसे गरीब और अनपढ़ लोगों की ताक में बैठे रहते हैं जिन्हें धर्म के नाम पर बरगलाया जा सके और आतंक के घिनोने और कष्टकारक संसार में धकेल जा सके ! लेकिन 100 फ़ीसदी ऐसा नहीं है कि सिर्फ अनपढ़ ही आतंकवादी बनते हैं , कभी कभी पढ़े लिखे भी कभी जिहाद के नाम पर तो कभी मज़हब के नाम पर इस अंधे कुँए में छलांग लगा देते हैं !


वक्त बहुत बड़ा मरहम होता है ! भारत के स्वर्ग कश्मीर में जो कुछ पिछले दशक में हुआ है उसे कौन भूल सकता है ! शायद वो आतंकवाद की पराकाष्ठ रही है ! अगर कश्मीर में वहां के पंडितों ने अपना घर और अपनी संपत्ति को छोड़ा है तो वहां के मुसलमानों ने भी अपनी जान गंवाई है ! क्यूंकि आतंकवादी आतंक फैलाना चाहते थे ! वो लाश हिन्दू की हो या मुसलमानों की ! इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता आतंक के आकाओं को ! भारत के स्वर्ग जैसे सुन्दर कश्मीर की खुशहाली जो देखते ही बनती थी उसे इतनी जल्दी लौटाया तो नहीं जा सकता लेकिन एक रास्ता बनता दीख रहा है ! वहां के लोग अब इस बात से आजिज़ आ चुके हैं और वो अपना पुराना खुशहाल कश्मीर देखना चाहते हैं ! यही बात आतंक के सौदागरों को रास नहीं आ रही है और अब वो दुखी हैं कि कैसे अपने आप को इस धंधे में बनाये रखा जाये ? बदलते कश्मीर का एक नमूना शाह आलम जैसे लोग प्रस्तुत कर रहे हैं जो भारतीय सिविल सेवा में प्रथम स्थान पा रहे हैं ! ये बदलता चेहरा है भारतीय मुसलमान का ! स्वागत है ! परवेज़ रसूल जैसा कश्मीरी जब क्रिकेट के मैदान पर विकेट चटकाकर हिन्द की ज़मीन को चूमता है तो सच में अच्छा लगता है !


मेरे लिए इतना काफी है की
मैं अपनी सरज़मीं पर मौत देखूं
और यहीं दफ़न हूँ
और इस मिटटी में पिघल कर फैल जाऊं
फिर फूल की तरह ज़मीन से बाहर निकलूं
मेरे देश के बच्चे इसके साथ खेलें
मेरे लिए इतना ही काफी है
की मैं अपने वतन की गोद में रहूँ
इस तरह जैसे मुट्ठी भर गर्द
बहार की घास की तरह
एक फूल की मानिंद !!


लेकिन केवल कुछ चेहरे ही भारत के मुसलामानों की तकदीर और तस्वीर बयान नहीं कर सकते हैं ! भारत के मुसलामानों को ये समझना होगा की रिक्शा चलाने या खराद मशीन चलाने से ही उनका भविष्य उज्जवल नहीं हो जाएगा ! ये खुदा की देन है कि मुस्लिम युवाओं को हाथ का कारीगर समझा जाता है ! लेकिन इससे भी आगे की दुनिया है ! ये देखकर अच्छा लगता है कि मुस्लिम युवा अब IT और BPO तक में अपनी पहुँच बना रहे हैं ! मैं जिस क्षेत्र में हूँ वहां अब मुस्लिम लडको और लड़कियों को इंजीनियरिंग की पढ़ाई में देखकर मन प्रसन्न होता है कि अब भारत बदल रहा है ! क्यूंकि मुझे ऐसा लगता है शिक्षा सबसे बड़ा हथियार है अपनी गरीबी हटाने का ! सरकारों को भी धन्यवाद कि वो गरीब तबके को स्कोलरशिप दे रही हैं और गरीब बच्चों को दुनिया की होड़ में आने के लिए प्रेरित कर रही हैं ! मैं व्यक्तिगत तौर पर ऐसा सोचता हूँ कि भारत का भविष्य उज्जवल है और भारत में रहने वाले अधिकांश मुस्लिम अपने आप को सौभाग्यशाली समझते हैं ! मैं जानता हूँ इस विषय पर विस्तृत लिखा जा सकता है और बहुत कुछ कहा जा सकता है लेकिन और बातें फिर कभी !


चाह रखने वाले मंजिलों को ताकते नहीं

बढ़ कर थाम लिया करते हैं …….

जिनके हाथों में हो वक्त की कलम

अपनी किस्मत वो खुद लिखा करते हैं !!


जय हिन्द ! जय हिन्द की सेना

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94 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Kyanna के द्वारा
October 18, 2016

Really beautiful card the sunset is awesome. I love the techniques and the amazing selection of colour you use. They always make me want to go out and try them. I’m from Vancouver British Columbia, we get some beautiful red/orange sunsets with the islands and mountains silhouetted in the background. Thanks for sharing your artistic taevnts.Hale a wonderful 2009 Christine

nggbmka के द्वारा
January 23, 2014

iihsrco

zzutozt के द्वारा
December 30, 2013

icgghbbi

    yogi sarswat के द्वारा
    October 25, 2013

    thnx

Bidyut Kumar के द्वारा
March 21, 2013

अति सुन्दर उपस्थापना ……… अगर भारत के मुस्लिम बंधू भारत को अपना मान कर चले तो ? भारत की सुख दुःख में भागिदार बन कर चले तो ?

    yogi sarswat के द्वारा
    March 21, 2013

    अत्यंत सार्थक और उर्जा प्रदान करने वाली प्रतिक्रिया का हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ श्री बिद्युत कुमार जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

Madan Mohan saxena के द्वारा
March 12, 2013

बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी …बेह्तरीन अभिव्यक्ति …!!शुभकामनायें.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 13, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका श्री सक्सेना जी

rajanidurgesh के द्वारा
March 9, 2013

सदा की तरह सार्थक एवं भावपूर्ण लेख . हार्दिक बधाई!

    yogi sarswat के द्वारा
    March 11, 2013

    बहुत बहुत आभार और धन्यवाद आदरणीय रजनी दुर्गेश जी ! सहयोग बनाये रखियेगा

mataprasad के द्वारा
March 6, 2013

आदरणीय योगी सारस्वत जी सादर नमस्कार !!! शिक्षा सबसे बड़ा हथियार है!! बहुत अच्छा लेख आभार !!

    yogi sarswat के द्वारा
    March 8, 2013

    बहुत बहुत आभार श्री माता प्रसाद जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

bebakvichar, KP Singh (Bhind) के द्वारा
March 5, 2013

भारत के मुसलामानों को ये समझना होगा की रिक्शा चलाने या खराद मशीन चलाने से ही उनका भविष्य उज्जवल नहीं हो जाएगा ! ये खुदा की देन है कि मुस्लिम युवाओं को हाथ का कारीगर समझा जाता है ! लेकिन इससे भी आगे की दुनिया है ! ये देखकर अच्छा लगता है कि मुस्लिम युवा अब IT और BPO तक में अपनी पहुँच बना रहे हैं ! मैं जिस क्षेत्र में हूँ वहां अब मुस्लिम लडको और लड़कियों को इंजीनियरिंग की पढ़ाई में देखकर मन प्रसन्न होता है कि अब भारत बदल रहा है ! क्यूंकि मुझे ऐसा लगता है शिक्षा सबसे बड़ा हथियार है अपनी गरीबी हटाने का ! सरकारों को भी धन्यवाद कि वो गरीब तबके को स्कोलरशिप दे रही हैं और गरीब बच्चों को दुनिया की होड़ में आने के लिए प्रेरित कर रही हैं ! मैं व्यक्तिगत तौर पर ऐसा सोचता हूँ कि भारत का भविष्य उज्जवल है और भारत में रहने वाले अधिकांश मुस्लिम अपने आप को सौभाग्यशाली समझते हैं ! योगीजी, निश्चित तौर पर कोई भी व्यक्ति अपने विकास में पीछे नहीं रहना चाहता और न ही वह आतंकवादी बनने का इच्छुक होगा। जाहिर है कि कुछ परिस्थितयां इसमें सामने आती हैं। इन पर जरूर विचार के साथ सही दिशा में कार्य की जरूरत है। उत्तम विचार,,,,धन्यवाद।

    yogi sarswat के द्वारा
    March 6, 2013

    निश्चित तौर पर कोई भी व्यक्ति अपने विकास में पीछे नहीं रहना चाहता और न ही वह आतंकवादी बनने का इच्छुक होगा। जाहिर है कि कुछ परिस्थितयां इसमें सामने आती हैं। इन पर जरूर विचार के साथ सही दिशा में कार्य की जरूरत है।बहुत सटीक और सार्थक विचारों से सुसज्जित प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार श्री सिंह जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
March 2, 2013

भारत का भविष्य उज्जवल है और भारत में रहने वाले अधिकांश मुस्लिम अपने आप को सौभाग्यशाली समझते हैं ! योगी जी बहुत सुन्दर और सार्थक लेख गर्व तो होना ही चाहिए इन सब को अपने देश पर और अपने को उन्नत बना कर देश को आगे ले जाने में हर संभव सहायता भी करना चाहिए भाईचारा बना रहे सदा भ्रमर ५

    yogi sarswat के द्वारा
    March 2, 2013

    आदरणीय श्री सुरेन्द्र शुक्ला “भ्रमर ” जी , सादर ! आपकी उत्साहित करने वाले विचार बहुत सार्थक लगते हैं ! सहयोग बनाये रखियेगा ! बहुत बहुत आभार और हार्दिक धन्यवाद !

sinsera के द्वारा
February 28, 2013

सहमत.. वास्तव में यह टॉपिक ऐसा है की इस पर पूरी किताब लिखी जा सकती है.. मैं ने देखा है की अधिकांश लोग पूर्वाग्रह से ग्रसित हो कर बात करते हैं,लेकिन आप अपने को इस दोष से बचा ले गए इस के लिए बधाई… इसी मंच पर ऐसे लेखक भी मौजूद हैं जो गंगाजली उठा कर मुस्लिमो को कोसते हैं, बिना ये सोचे हुए की सभी आतंक नहीं फैला रहे , बल्कि आम आदमी भी साँस लेने के लिए शुद्ध ऑक्सीजन ढूंढता है.. अगर हम हिदुत्व में जायें और “पाप से घृणा करो , पापी से नहीं “..के ब्रह्मवाक्य को मानें तो सिनेरिओ कुछ और ही हो गा…

    yogi sarswat के द्वारा
    March 2, 2013

    आदरणीय सरिता सिन्हा जी , सादर ! आपकी प्रतिक्रिया अपने आप में अलग और बिलकुल सार्थक होती है ! अगर हम हिदुत्व में जायें और “पाप से घृणा करो , पापी से नहीं “..के ब्रह्मवाक्य को मानें तो सिनेरिओ कुछ और ही हो गा…बहुत सही कहा आपने ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा ! बहुत बहुत आभार और धन्यवाद

    Livia के द्वारा
    October 18, 2016

    Snakk om vårprakt. Skulle gjerne hatt litt sol, vi også.Stemor er noen fantastiske blomster. Det er så gøy å studere &qqte;ansikott&uuot; på hver enkelt blomst.Klem

maksud के द्वारा
February 26, 2013

जनाब योगी जी , आपके लेख से लगता नहीं की आप को मुसलमानों की चिंता है …! दर हकीकत आप “बदलते भारत में मुस्लिम युवाओं की भूमिका ” के बहाने ये साबित करने में लगे है की १-आतंकवादी वारदातों के लिए मुस्लिम जिमेदार है २- मुस्लिमो के पिछड़े पण के लिए कठमुल्ले जिम्मेदार है ३- KASHMIR की समस्या आतंकवाद की समस्या है ४- मुस्लिम समाज धर्म भीरु और फतवों से डर डर के जीने वाला है योगी जी, १-मक्का मस्जिद , अजमेर, मालेगांव , समझौता एक्सप्रेस, दिल्ली बलास्ट जैसी आतंकवादी वारदातों में आप को कौनसा इस्लामी कट्टरता या जिहाद नजर आता है २- मुस्लिमो के पिछड़े पण की वजह ….कठमुल्लापन है, या ..सरकारी पक्षपात भरी नीतिया और स्कूल, कॉलेज और सोसाइटी में उनके साथ होने वाला भेदभाव. -जो समाज कुछ सालो पहले धनवान थी ..! अंग्रेजो के आखरी दौर में (१८५७ के बाद )और उनके जाने के बाद उस समाज की हालत बाद से बदतर कैसे हो गयी …? शासक नौकर कैसे बन गये …? जनता राजा कैसे बन गयी ..? महलो में रहने वाले झोपड़ियो में कैसे आ गये..? ३- कश्मीर के लोग आतंकवादी है लेकिन वैसा ही काम को अंजाम देने वाले,.. बोडो / गोरखा लैंड के नाम पर हजारो की जान लेने वाले आतंकवादी नहीं सिर्फ विद्रोही और भटके हुए है , …..क्युकी आतंवादी शब्द को आप जैसो ने मुस्लिमो का पर्यायवाची शब्द बना दिया है ४- मुस्लिम समाज धर्म भीरु या धर्म के नाम पर आपे से बहार होती है या गैर मुस्लिम …ये हिंदुस्तान में रोज बा रोज होने वाले दंगे और फसाद अच्छी तरह बयां करती है जब जब इलेक्शन नजदीक आता है राम मंदिर का मुद्दा और राम के भक्त हर गली हर मोहल्ले में नजर आने लगते है जो ये साबित करने के लिए कफ्ही है की धर्म के नाम पर कौन इस्तेमाल किये जाते है वैसे … मुस्लिम समाज के लिए चिंता …..अच्छा लगा… :- मकसूद

    yogi sarswat के द्वारा
    February 27, 2013

    आपके सवालात कहीं न कहीं इस बात की तरफ संकेत करते हैं की आप इस व्यवस्था से गुस्से में हैं ! सार्थक प्रतिक्रिया के लिए अत्यंत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा मकसूद जी ! बहुत बहुत धन्यवाद

utkarshsingh के द्वारा
February 26, 2013

भारत में हिन्दुओ और मुसलमानों का सहअस्तित्व एक अनिवार्य और एतिहासिक सत्यता है जिसे झुठलाया नहीं जा सकता | धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र ही हमारा वर्तमान है और वह ही हमारा भविष्य है – वह न तो हिंदू राष्ट्र में परिवर्तित हो सकता है और न ही दारुल इस्लाम में-यह बात सभी को समझ लेनी चाहिए | यहाँ एक बात विचारणीय है , नवजागरण के काल से अब तक भारतीय मुस्लिम समाज में कोई व्यापक धार्मिक पुर्नजागरण आन्दोलन नही चला सिवाय शुद्धतावादी आंदोलनों के ( यदि किसी बंधु के पास इसके विपरीत जानकारी हो अवगत कराने की कृपा करे ) एतिहासिक अनुभव बताते है कि मुसलमानों की दशा कोई मुस्लिम सामाजिक – धार्मिक नेता ही बदल सकता है | मेरे हिसाब से गांधी जी ने इस विषय में अधिकतम संभव प्रयास किये थे और असफल रहे | अब किसी मुस्लिम गांधी की प्रतीक्षा है | आमीन ! अधोलिखित लिंक पर आपकी मूल्यवान टिप्पडी की अपेक्षा है , कृपा करे- http://utkarshsingh.jagranjunction.com/2013/02/23/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%94/

    yogi sarswat के द्वारा
    February 27, 2013

    उत्कर्ष जी , बहुत सुन्दर विचारों से सजी आपकी सार्थक प्रतिक्रिया मिली ! बहुत बहुत आभार आपका ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अतिशय धन्यवाद

Bhagwan Babu के द्वारा
February 25, 2013

सही कहा आपने… भारत की दुर्दशा भारत के बेटे की किए जा रहे है… भारत के नेता…. पता नही ये कब ठीक होगा…. http://bhagwanbabu.jagranjunction.com/2013/02/22/%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A1%E0%A4%BC-%E2%80%93-jagran-junction-forum/

    yogi sarswat के द्वारा
    February 25, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका श्री भगवान् बाबु जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अनेक अनेक धन्यवाद

A kumar के द्वारा
February 25, 2013

ये jhoothe धर्म्निर्पेस्ख neta मुस्लिमों को उनका हक़ नहीं दिल सकते , ये बस उनका वोट पाने के लिए उलटी सीढ़ी बातें करते और कहते रहेंगे ! बढ़िया लेखन योगी जी !

    yogi sarswat के द्वारा
    February 25, 2013

    धन्यवाद आपका !

A kumar के द्वारा
February 25, 2013

झूठे धर्मनिरपेक्ष नेता मुस्लिमों को उनका हक़ नहीं दिला सकते ! बस उनका वोट पाने के लिए फ़ालतू की बातें कहते और करते रहेंगे ! सुन्दर लेख योगी जी

    yogi sarswat के द्वारा
    February 25, 2013

    सही कहा आपने ! सहमत हूँ आपके विचारों से ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

Syed Fahd के द्वारा
February 24, 2013

It’s a nice article and it truely gives a real picture of how could Muslims could contribute to the development of there beloved country India by getting educated. And truely said that terrorism has no religion.

    yogi sarswat के द्वारा
    February 25, 2013

    thanks ! for your appreciation to my words ! keep visiting my blog ! thanks again

achyutamkeshvam के द्वारा
February 23, 2013

मुस्लिम विकास की मुख्य धारा में शामिल हों तो विश्व और भारत का भला होगा पर तथाकथित धर्म निरपेक्ष नेता ऐसा होने नहीं देंगे। खैर आलेख पर हार्दिक बधाई ।

    yogi sarswat के द्वारा
    February 25, 2013

    सही बात ! बहुत बहुत आभार आपका

Lahar के द्वारा
February 23, 2013

प्रिय योगी जी सप्रेम नमस्कार एक सार्थक रचना के लिए बधाई ,

    yogi sarswat के द्वारा
    February 25, 2013

    बहुत बहुत आभार मित्रवर श्री लहर जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अनेक अनेक धन्यवाद

Santlal Karun के द्वारा
February 21, 2013

आदरणीय सारस्वत जी, आप ने भारतीय जिजीविषा और चेतना से कदमताल करते कुछ मुसलमान नव युवकों की सकारात्मक गतिविधि और उपलब्धियों को आधार बनाकर एक अनुकूलन करता विचार-लेख प्रस्तुत किया है | इस लेख में मुसलामानों की तकलीफ जड़ से नदारत करने और उनके जीवन की फुलबगिया की चहक-महक बढ़ानेवाले सही खाद-पानी की बात की गई है | एक अच्छी हवा को हवा देते इस लेख के लिए हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ |

    yogi sarswat के द्वारा
    February 23, 2013

    हमारे देश में आतंकवाद नहीं था। इसे किसने पनपाया ? जब भी इस सवाल का जवाब ढूंढा जाएगा तो किसी न किसी राजनेता का नाम ही सामने आएगा। आतंकवाद के असल ज़िम्मेदार को कभी सज़ा सुनाई गई हो, ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है। आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय श्री संतलाल जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

chaatak के द्वारा
February 21, 2013

एक अच्छी सोच के साथ लिखी गई पोस्ट के लिए आप बधाई के पात्र हैं और आपकी सोच के विपरीत सोच की तीखी प्रतिक्रिया के साथ सफल विस्फोट कर आतंकियों ने भी ‘अभी इसमें वक्त है’ का सन्देश देकर बधाई देने वाला काम किया है|

    yogi sarswat के द्वारा
    February 23, 2013

    बिलकुल श्री चातक जी ! शायद आतंकवादियों ने मेरा ब्लॉग पढ़ लिया होगा ? लेकिन जो कुछ भी हो रहा है वो बहुत कष्टदायक और दुखी करने वाला है ! आपके समर्थन के लिए अत्यंत आभारी हूँ ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

allrounder के द्वारा
February 21, 2013

नमस्कार भाई योगी जी, विशाल और बदलते भारतवर्ष मैं बदलती अल्पसंख्यक युवाओं की भूमिका पर अच्छे से प्रकाश डालते आलेख पर हार्दिक बधाई आपको !

    yogi sarswat के द्वारा
    February 23, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय श्री सचिन देव जी ! बहुत दिनों के बाद आपके दर्शन हुए हैं ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अनेक अनेक धन्यवाद

alkargupta1 के द्वारा
February 21, 2013

योगी जी , इस गंभीर विषय पर अति विस्तार से स्वतंत्र रूप में आपने अपने विचारों को प्रस्तुत किया है अर्थपूर्ण व सराहनीय प्रस्तुति के लिए निश्चित ही बधाई के पात्र हैं….साभार

    yogi sarswat के द्वारा
    February 23, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय अलका गुप्ता जी ! मेरे शब्दों को आपका आशीर्वाद और सहयोग मिला ! अतिशय धन्यवाद

Ravinder kumar के द्वारा
February 21, 2013

योगी जी, सादर नमस्कार. जिस खुले दिमाग से आपने भारत के मुस्लिम समाज पर चिंतन किया है, उसके लिए आपको बधाई. आपने बिल्कुल ठीक कहा के कोई नहीं चाहता के उसका बेटा या भाई आतंकी बने. सब एक सुखद जीवन की कामना करते हैं. लेकिन इन कट्टर पंथीओं का क्या करें ? जो ना तो अच्छा देखना चाहते हैं. ना ही अच्छा करना चाहते हैं. जिनके लिए धर्म अपना पेट भरने का और अपनी महत्त्वाकांक्षाओं की पूर्ति का साधन भर है . शुभकामनाएं .

    yogi sarswat के द्वारा
    February 21, 2013

    जो ना तो अच्छा देखना चाहते हैं. ना ही अच्छा करना चाहते हैं. जिनके लिए धर्म अपना पेट भरने का और अपनी महत्त्वाकांक्षाओं की पूर्ति का साधन भर है . सार्थक शब्दों में अपने विचार रखने के लिए बहुत बहुत आभार श्री रविन्द्र कुमार जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अनेक अनेक धन्यवाद !

manoranjanthakur के द्वारा
February 21, 2013

सुन्दरतम लेखन…. बहुत बहुत बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    February 21, 2013

    बहुत बहुत धन्यवाद आपका ! श्री मनोरंजन जी , सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

aman kumar के द्वारा
February 21, 2013

बहुत ही विचारपरक लेख , बास्तव मे राजनीती के कारन भारत मे मुस्लिम समाज को विकसित नही होने दिया जाता जिन दलों के ये वोट बैंक माने जाते है बही इनके दुसमन है | इन्हे सिक्षा की जरुरत नही सुरक्षा का डर बताया जाता है अगर ये समाज बिकास के राह पर आ जाये तो एस देश को आगे बदने से कोई नही रोक सकता | आप जैसे लेखक ही बास्तव मे समाज और देश के निर्माण को लगे है साधुबाद !

    yogi sarswat के द्वारा
    February 21, 2013

    बास्तव मे राजनीती के कारन भारत मे मुस्लिम समाज को विकसित नही होने दिया जाता जिन दलों के ये वोट बैंक माने जाते है बही इनके दुसमन है | इन्हे सिक्षा की जरुरत नही सुरक्षा का डर बताया जाता है अगर ये समाज बिकास के राह पर आ जाये तो एस देश को आगे बदने से कोई नही रोक सकता बहुत सार्थक विचार प्रस्तुत करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार मित्रवर श्री अमन कुमार जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

lovely anand के द्वारा
February 21, 2013

आप ऐसा कैसे कह सकते हैं योगी जी की इस देश में मुस्लिम को अधिकार नहीं थे ? डॉ. जाकिर हुसैन या डॉ. कलाम कहीं विदेश से नहीं थे ! लेकिन सोचने की बात ये हैं की कौन अपने अधिकार का किस तरह से उपयोग करता है !

    yogi sarswat के द्वारा
    February 21, 2013

    बहुत बहुत धन्यवाद आपका !

lovely anand के द्वारा
February 21, 2013

आप ऐसा कैसे कह सकते हैं योगी जी की पहले मुस्लिमों के लिए अवसर उपलब्ध नहीं थे ? डॉ. जाकिर हुसैन या डॉ. कलाम कहीं विदेशी नहीं थे ! इस देश में हर किसी को एक सामान अधिकार उप्लंध हैं लेकिन कोई उनका प्रयोग किस तरह करता है ये समझने की बात है ! सार्थक लेखन

    yogi sarswat के द्वारा
    February 21, 2013

    सहमत हूँ आपकी सोच से ! आभार ! आपका समर्थन लगातार मिल रहा है मेरे शब्दों को ! धन्यवाद

yatindrapandey के द्वारा
February 20, 2013

हैलो सर बेहद ही सुन्दर कृति है आपकी और बीच की वो पंक्तिया ह्रदय मे कही घर कर गयी है.

    yogi sarswat के द्वारा
    February 21, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका श्री यतीन्द्र पाण्डेय जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अतिशय धन्यवाद

vinitashukla के द्वारा
February 20, 2013

बहुत सुन्दर लेख. मुस्लिम समुदाय को, वोट की राजनीति के तहत, समाज की मुख्यधारा में आने ही नहीं दिया जाता है. उनकी एक अलग ही दुनिया है. गरीब और पिछड़ी हुई दुनिया. धार्मिक कट्टरता के चलते उनको भड़काना भी आसान होता है और फिर मोहरे की तरह इस्तेमाल करना भी. वोट- बैंक के लिए, आतंकवाद पर कोई कडा एक्शन नहीं लिया जाता. सार्थक एवं प्रभावी लेख पर बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    February 21, 2013

    मुस्लिम समुदाय को, वोट की राजनीति के तहत, समाज की मुख्यधारा में आने ही नहीं दिया जाता है. उनकी एक अलग ही दुनिया है. गरीब और पिछड़ी हुई दुनिया. धार्मिक कट्टरता के चलते उनको भड़काना भी आसान होता है और फिर मोहरे की तरह इस्तेमाल करना भी. वोट- बैंक के लिए, आतंकवाद पर कोई कडा एक्शन नहीं लिया जाता. आदरणीय विनीता शुक्ला जी सादर , बहुत सार्थक और सजीव विचारों से लेखन को समर्थन देने के लिए बहुत बहुत आभार आपका ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

ajay kumar pandey के द्वारा
February 20, 2013

योगी जी नमन हाँ यह सत्य है की बदलते भारत में मुस्लिम युवाओं की भूमिका है आपने यह बहुत ही सुन्दर लेख लिखा है भारत बदल रहा है तो मुस्लिम युवाओं की वजह से ही बहुत ही सुन्दर लेख है मुस्लिम युवा भी हमारी ही तरह भारत को बदलने में योगदान दे रहे हैं कुल मिलाकर हिन्दू युवा और मुस्लिम युवा दोनों का योगदान भारत को बदलने में अहम् है धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    February 21, 2013

    मित्रवर श्री अजय कुमार पाण्डेय जी , आपने मेरे शब्द और उनके मर्म को सही पहिचाना ! आभार आपका अपने व्यस्त समय में से कुछ समय निकलकर मेरे लेखन तक आने के लिए ! अतिशय धन्यवाद

munish के द्वारा
February 20, 2013

आदरणीय योगी जी आपने बहुत ही संतुलित लेख लिखा है, कहीं कहीं मुझे पढ़ते वक्त ऐसा लगा की अभी आप कुछ और लिखना चाहते थे परन्तु कहीं लेख पटरी से न उतर जाए इसलिए नहीं लिखा या ज्यादा लंबा होने का डर …… :) कुल मिला कर हम ज्ञान की उपयोगिता को कम करके नहीं आंक सकते, लेकिन एक बात ये भी सोचने की है की कितने प्रतिशत मुस्लिम युवाओं का झुकाव इस ओर है, क्योंकि इतिहास में झांकें तो प्रतिशत तो लगभग वाही आएगा जो पहले था और कम ही न हो गया हो, और उनकी इस साक्षरता का लाभ भी कभी नहीं हुआ जबकि इतिहास गवाह है की पढ़े लिखे मुस्लिमों ने भी कभी राष्ट्र हित में बात नहीं की एक आध को छोड़कर, इसलिए इस विषय में भी फिर से सोचने की ज़रुरत है की शिक्षा कैसी हो ……?

    yogi sarswat के द्वारा
    February 21, 2013

    कहीं कहीं मुझे पढ़ते वक्त ऐसा लगा की अभी आप कुछ और लिखना चाहते थे परन्तु कहीं लेख पटरी से न उतर जाए इसलिए नहीं लिखा या ज्यादा लंबा होने का डर ! बिलकुल सही पहिचान आपने आदरणीय श्री मुनीश जी ! ये विषय ही ऐसा है की इस पर बहुत कुछ लिखा जा सकता है किन्तु गुणवत्ता बनाए रखना भी जरुरी था ! बहुत बहुत आभार आपका ! सहयोग की कामना करता हूँ ! अनेक अनेक धन्यवाद

shashibhushan1959 के द्वारा
February 20, 2013

आदरणीय योगेन जी, सादर ! सच कहा जाय तो भारत के मुस्लिमों और हिन्दुओं में कहीं कोई भेद भाव नहीं है ! भेद भाव है तो इन दोनों सम्प्रदाय के कट्टर- पंथी नेताओं में ही है ! आम जनजीवन में ये दोनों ही सम्प्रदाय आपस में घुल मिल कर ही रहते हैं ! एक अच्छी रचना ! हार्दिक धन्यवाद !

    yogi sarswat के द्वारा
    February 21, 2013

    आदरणीय श्री शशि भूषण जी सादर नमस्कार ! सच कहा जाय तो भारत के मुस्लिमों और हिन्दुओं में कहीं कोई भेद भाव नहीं है ! भेद भाव है तो इन दोनों सम्प्रदाय के कट्टर- पंथी नेताओं में ही है ! आम जनजीवन में ये दोनों ही सम्प्रदाय आपस में घुल मिल कर ही रहते हैं ! सुन्दर और सार्थक प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! बहुत बहुत धन्यवाद

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
February 19, 2013

कलम बदल अपना तेवर जब दिशा बदलती है तब जाकरके कुछ अनुपम रचनाएँ होती हैं !……. योगी जी, बधाई !

    yogi sarswat के द्वारा
    February 20, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय श्री आचार्य जी ! मेरे शब्द आप तक पहुंचे और आपने समय और समर्थन दिया ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अतिशय धन्यवाद !

nishamittal के द्वारा
February 19, 2013

स्पष्ट देश की सभी समस्याओं की जड़ के समाधान पर ,विस्तृतरूप से और खुले दिमाग से लिखे गए लेख पर बधाई योगी जी.

    yogi sarswat के द्वारा
    February 20, 2013

    आदरणीय निशा जी मित्तल , सादर ! मेरे शब्द आप तक पहुंचे और आपका आशीर्वाद मिला ! बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अनेक अनेक धन्यवाद

SushmaGupta के द्वारा
February 19, 2013

आदरणीय योगी जी, आपके विचार बहुत सुन्दर उच्चकोटि के है , भारत में हिन्दू हो या मुस्लिम सवको ही उन्नति के सामान अधिकार मिलने चाहिए .. लेकिन यह भी सही है कि कुछ राजनीति करने वाले इनमें आसमानता उत्पन्न करने की कोशिश में लगें रहतें हैं , आज के युवा जाग्रत हो रहें हैं ..मुस्लिम युवा भी अपने भविष्य व् उन्नति की ओर अग्रसर हो रहें है ‘, आपने सही कहा है …. ”जिनके हाथों में हो वक्त की कलम , अपनी किस्मत वो खुद लिखा करतें हैं . आदरणीय योगी जी, आपके विचार बहुत सुन्दर उच्चकोटि के है , भारत में हिन्दू हो या मुस्लिम सवको ही उन्नति के सामान अधिकार मिलने चाहिए .. लेकिन यह भी सही है कि कुछ राजनीति करने वाले इनमें आसमानता उत्पन्न करने की कोशिश में लगें रहतें हैं , आज के युवा जाग्रत हो रहें हैं ..मुस्लिम युवा भी अपने भविष्य व् उन्नति की ओर अग्रसर हो रहें है ‘, आपने सही कहा है …. ”जिनके हाथों में हो वक्त की कलम , अपनी किस्मत वो खुद लिखा करतें हैं .

    yogi sarswat के द्वारा
    February 20, 2013

    आदरणीय सुषमा गुप्ता जी , सादर ! मेरे शब्द आप तक पहुंचे और आपका आशीर्वाद मिला ! बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अनेक अनेक धन्यवाद

Rajesh Dubey के द्वारा
February 19, 2013

बहुत सुन्दर लेख. बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    February 20, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय श्री राजेश दुबे जी ! मेरे शब्द आप तक पहुंचे और आपने समय और समर्थन दिया ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अतिशय धन्यवाद !

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 19, 2013

कहने को बहुत कुछ है मगर हम नहीं कहते अपनी ही धरती पर भटके हम नहीं सहते जो करते इस्तेमाल उनका हथियार की तरह वक्त अभी है समझें क्युओन न समझते बधाई. सादर योगी जी,

    yogi sarswat के द्वारा
    February 20, 2013

    आदरणीय श्री प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा जी , सादर ! मेरे शब्द आप तक पहुंचे और आपका आशीर्वाद मिला ! बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अनेक अनेक धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
February 19, 2013

आदरणीय योगी जी, सादर अभिवादन! अपने आप में सत्य और सम्पूर्ण आलेख! एक आह्वान भी तुम पेट पे लात मार चुके अब कितने पाँव पसारोगे तुम रोटी कपड़ा क्यूँ दोगे , तुम लोग कफ़न भी उतारोगे ये बाज़ी भूख की बाज़ी है , ये बाज़ी तुम ही हारोगे हर घर से भूखा निकलेगा , तुम कितने भूखे मारोगे ? जहाँ आप जैसे बुद्धिजीवी के विचार इस प्रकार के होंगे निश्चित ही भारत की तस्वीर दूसरी होगी … कुछ हद तक यही बात दलितों और महादलितों (गरीबों) के लिए भी लागू होती है, जो भटकावे में आकर नक्सली बन जाते हैं … सार्थक और सम्पूर्ण प्रयास अगर हो तो आज नालंदा का आलू और हजारीबाग को गोभी भी बहुत कुछ बदल सकता है! जरूरत है इमानदार पहल की, संभावनाएं बहुत है ! एक बार पुन: बधाई सकारात्मक सोच के साथ लिखे आलेख के लिए!

    yogi sarswat के द्वारा
    February 20, 2013

    आदरणीय श्री जवाहर सिंह जी , सादर ! मेरे शब्द आप तक पहुंचे और आपका आशीर्वाद मिला ! बहुत बहुत आभार !कुछ हद तक यही बात दलितों और महादलितों (गरीबों) के लिए भी लागू होती है, जो भटकावे में आकर नक्सली बन जाते हैं … सार्थक और सम्पूर्ण प्रयास अगर हो तो आज नालंदा का आलू और हजारीबाग को गोभी भी बहुत कुछ बदल सकता है! जरूरत है इमानदार पहल की, संभावनाएं बहुत है ! बहुत सार्थक और सजीव प्रतिक्रिया के लिए एक बार पुनः आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अनेक अनेक धन्यवाद

February 18, 2013

योगी जी , नमस्कार , बहुत पहले लगभग इसी विषय पर एक लेख लिखा था , समस्या तो यही है कि न तो मुस्लिम समाज और न ही मुस्लिम युवा इस सच्चाई को आत्मसात कर पा रहा है । उत्कृष्ट विचार के लिए साधुवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    February 20, 2013

    समस्या तो यही है कि न तो मुस्लिम समाज और न ही मुस्लिम युवा इस सच्चाई को आत्मसात कर पा रहा है । आदरणीय श्री सिन्हा जी सादर ! बहुत सार्थक और सजीव प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार आपका ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अनेक अनेक धन्यवाद

seemakanwal के द्वारा
February 18, 2013

आप ने बहुत सही कहा की शिक्षा ही इन्सान की उन्नति का मूल है .और ये मुस्लिम लोगों को अब धीरे धीरे समझ में आ रहा है .मुझे भी अपने भारतीय होने का गर्व है . हजरत मुहम्मद का कथन है की ज्ञान हासिल करो चाहे इसके लिए सात समंदर पार भी जाना पड़े . हार्दिक आभार . सादर ..

    yogi sarswat के द्वारा
    February 20, 2013

    आदरणीय सीमा कंवल जी सादर ! आपने लिखा -हजरत मुहम्मद का कथन है की ज्ञान हासिल करो चाहे इसके लिए सात समंदर पार भी जाना पड़े ! बहुत सार्थक और सजीव प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार आपका ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अनेक अनेक धन्यवाद

SYED Asifimam kakvi के द्वारा
February 18, 2013

आदरणीय योगी जी ,..सादर अभिवादन बहुत ही अच्छा सार्थक लेख के लिए कृपया हार्दिक अभिनन्दन स्वीकारें .

    yogi sarswat के द्वारा
    February 20, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय श्री सय्यद जी ! मेरे शब्द आप तक पहुंचे और आपने समय और समर्थन दिया ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अतिशय धन्यवाद !

आर.एन. शाही के द्वारा
February 18, 2013

अच्छे भाव को सही विस्तार भी दिया है योगी जी । बढ़िया लेख … बधाई !

    yogi sarswat के द्वारा
    February 20, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय श्री आर एन शाही जी ! मेरे शब्द आप तक पहुंचे और आपने समय और समर्थन दिया ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अतिशय धन्यवाद !

Y K Dwivedi के द्वारा
February 18, 2013

योगी भाई ! शुक्रिया समाज के तरफ से इस सकारात्मक रचना के लिए ………….! विशेष ये सभी पंक्तियाँ भी खूब है ………….. तुम पेट पे लात मार चुके अब कितने पाँव पसारोगे तुम रोटी कपड़ा क्यूँ दोगे , तुम लोग कफ़न भी उतारोगे ये बाज़ी भूख की बाज़ी है , ये बाज़ी तुम ही हारोगे हर घर से भूखा निकलेगा , तुम कितने भूखे मारोगे ? ……….मेरे लिए इतना काफी है की मैं अपनी सरज़मीं पर मौत देखूं और यहीं दफ़न हूँ और इस मिटटी में पिघल कर फैल जाऊं फिर फूल की तरह ज़मीन से बाहर निकलूं मेरे देश के बच्चे इसके साथ खेलें मेरे लिए इतना ही काफी है की मैं अपने वतन की गोद में रहूँ इस तरह जैसे मुट्ठी भर गर्द बहार की घास की तरह एक फूल की मानिंद !!

    yogi sarswat के द्वारा
    February 20, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय श्री द्विवेदी जी ! मेरे शब्द आप तक पहुंचे और आपने समय और समर्थन दिया ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अतिशय धन्यवाद !

Santosh Kumar के द्वारा
February 18, 2013

आदरणीय योगी जी ,..सादर अभिवादन बहुत ही अच्छा सार्थक लेख के लिए कृपया हार्दिक अभिनन्दन स्वीकारें . वन्देमातरम

    yogi sarswat के द्वारा
    February 20, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय श्री संतोष कुमार जी ! मेरे शब्दों को आपका समर्थन मिला ! सहयोग बनाये रखियेगा ! बहुत बहुत धन्यवाद


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