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भारत "घंटा " देश है क्या ?

Posted On: 16 Mar, 2013 Others में

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विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत आज न जाने किन परिस्थितियों से मजबूर होता दीख रहा है ! विश्व परिद्रश्य पर निगाह डालें तो हम अपने आपको आज बहुत कमजोर महसूस कर रहे हैं ! कहने वाले कहते रहते हैं कि भारत एक मजबूत देश है लेकिन मुझे ऐसा कहीं नहीं लगता कि हम किसी भी देश पर भरी पड़ रहे हैं ! हालाँकि किसी भी देश को दबाने की हमारी न कभी मंशा रही है और न ही कभी नीयत ! लेकिन इस सबके बावजूद हम आजकल ये देख रहे हैं कि विश्व का सबसे ज्यादा जनसँख्या ( चीन के बाद ) वाला मुल्क , आस पड़ोस से भयभीत नजर आता है !


मुझे आज इस लेख को लिखते समय दो कहानियां याद आ रही हैं ! आपके साथ साझा करना चाहता हूँ !


जंगल में राजा शेर और शेरनी रहते थे ! एक दिन सुबह सुबह शेर बाहर बैठा अखबार पढ़ रहा था ! उसे दूर से एक चूहा उनके घर की तरफ आते हुए दिख रहा था ! जैसे ही शेर ने चूहे को देखा , वो उसे पहिचान गया और तुरंत अपने घर में घुस कर दरवाजा बंद कर लिया ! चूहा दरवाजे पर आकर चिल्लाने लगा , गालियाँ बकने लगा ! अबे निकल स्स्साले ……! बाहर निकल ! बहुत राजा बना फिरता है ! बाहर निकल के आ ! तेरी सारी हेकड़ी निकालता हूँ ! अबे निकल ……स्स्साले …..मादर …..! जैसे जैसे शेर , चूहे की आवाज़ सुनता , वो और अन्दर घुस जाता ! शेरनी ने ये माजरा देख लिया तो शेर को कहने लगी कि बाहर जाकर इसे पीटते क्यूँ नहीं ? शेर बोला -कोई बात नहीं ! रहने दे ! खुद ही चला जाएगा ! थोड़ी देर चिल्लाएगा फिर चला जाएगा ! चूहा गाली देता रहा , शेर सुनता रहा ! लेकिन शेरनी को गुस्सा चढ़ गया और अपनी चूड़ियाँ शेर की तरफ फैंककर वो गुस्से में चूहे को मारने बाहर निकल गयी ! जैसे ही चूहे ने शेरनी को गुस्से में आता हुआ देखा , उसने दौड़ लगा दी ! अब क्या , चूहा आगे आगे शेरनी पीछे पीछे ! जब शेरनी पूरे गुस्से में तमतमाए हुए थी , चूहा जंगल में पड़े एक पाइप में से निकल गया , शेरनी भी पीछे थी ! चूहा निकल गया लेकिन शेरनी पाइप में फस गयी ! चूहे ने मौका देख कर उठाया डंडा और बजा दिया शेरनी के पिछवाड़े पर ! चूहा तो अपना काम करके निकल लिया ! शेरनी बेचारी जैसे तैसे पाइप में से निकलकर घर पहुंची तो शेर बाहर ही बैठा था ! शेर ने पूछ लिया , पिट आई ? शेरनी बोली -तुम्हें कैसे पता ? शेर – वो मेरे साथ यही तो करता है ! तभी तो मैंने तुझे मना किया था !


ये तो थी बस एक काल्पनिक कहानी ! लेकिन ये कहानी हमारे अपने मुल्क पर घटित होती प्रतीत हो रही है ! हम , जो विश्व की महाशक्तियों से हर क्षेत्र में होड़ ले रहे हैं ! हम , जो स्पेस के क्षेत्र में महा शक्ति हैं ! हम जो आर्थिक महाशक्ति बनाने की तरफ अग्रसर हैं ! लेकिन वो हम ही हैं जिसको हर कोई हड़का देता है ! ऐसे तो काम नहीं चलता ! कभी हमारे एक जिले से भी छोटा मालदीव हमें आँख दिखा देता है और हमारा सौदा रद्द कर देता है ! कभी बंगला देश जैसा देश जो हमारे रहमो करम पर बना है , हमारे ही लोगों ( हिन्दुओं का ) का सर्वनाश करने पर अमादा हो जाता है ! पाकिस्तान ने हमें इन ६५ वर्षों में कभी चैन से नहीं रहने दिया ! चीन को अभी छोड़ ही दीजिये क्यूंकि वो बहुत तेज़ दिमाग वाला देश है ! वो जब करेगा तो कुछ बड़ा ही करेगा ! अब इटली के दो मामा हमें मामू बनाकर निकल लिए ! इसकी जवाबदेही किसकी बनती है ? क्या मेरी ? क्या आपकी ? मुझे नहीं याद कि कभी और देश से हमारे कैदी नागरिक होली, दीवाली या ईद मनाने के लिए अपने वतन वापस आये हों ? लेकिन क्यूंकि वो मामा थे इसलिए उन्हें इटली जाने दिया गया क्रिसमस मनाने को ! वाह ! अपने लोगों को कभी इज़ाज़त दी है भारत सरकार ने कि जाओ अपने घर दीवाली मना आओ फिर इसी जेल में आ जाना ! नहीं ! मैं एक बात कहना चाहता हूँ कि जिस देश की सरकार अपने लोगों की इज्ज़त नहीं करती उस देश की सरकार विदेशों में भी अपनी इज्ज़त बनाकर नहीं रख सकती ! अगर आज यही घटना उलटी हुई होती , यानी कि हमारे लोग इटली की जेल में होते तो क्या वहां की सरकार उन्हें दीवाली मनाने के लिए भेजती ? और क्या हमारी सरकार उन्हें रोक कर रख सकती थी ? नहीं ! बिलकुल नहीं ! हम तो न्याय के पुजारी हैं ! भले अपने लोगों को न्याय मिले या न मिले विदेशियों को न्याय अवश्य मिलना चाहिए ! इतना नरम रवैया क्यूँ ? इतना सॉफ्ट कार्नर क्यूँ ? और उसके बदले हमें क्या मिलता है ? यही कि श्री लंका और बंगला देश जैसे देश भी हमें जब मन करता है तब हड़का जाते हैं ? यही कि इटली जैसा मच्छर देश भी हमें आँखें दिखाता है ? विदेश नीति का परिणाम है ये या कुछ और ? कहीं मामा लोगों ने ये तो नहीं समझ लिया कि जैसे महारानी के दामाद का कोई कुछ नही उखाड़ सकता है ऐसे ही उनका कोई कुछ नहीं उखाड़ सकता है ? वैसे भी भारत में मायके वालों को हमेशा ही प्राथमिकता दी जाती है ! तो ऐसा तो नहीं कि महारानी के मायके की तरफ के लोगों को कोई विशेष छूट दी जाती हो ? आखिर वो मामा हैं हमारे युवराज के ! कोई क्या उखाड़ लेगा उनका ! ये बात शायद उन्हें मालूम है !


प्रधानमंत्री जी भी इस मसले पर बिल से बाहर आकर बात करते हैं , शायद दिखाने के लिए कि कहीं ये सन्देश न जाए कि मामाओं के साथ रियायत बरती जा रही है ! भाजपा भी थोड़े समय बाद चुप पड़ जायेगी जैसे जीजा जी के लिए एक दिन संसद ठप्प कराकर चुप हो गयी ? महारानी हैं ! उन पर या उनके सम्बन्धियों पर कोई कानून लागू नहीं होता ! अब इस बात को कानून बनाकर संविधान में लिखा जाना चाहिए कि महारानी या उनके परिवार पर कोई भी क़ानून लागू नहीं होगा !


यहाँ मैं सिर्फ कांग्रेस की बुराई नहीं करना चाहता बल्कि भारतीय समाज में खामी देखता हूँ ! जैसे हमारे यहाँ के व्यक्ति ( विशेषकर हिन्दुओं को ) को सभ्य , सौम्य और सहनशील समझा जाता है ऐसे ही कुछ भारत को भी ढीला , सज्जन , चुप रहने वाला , पिटने वाला देश समझ लिया जाता है ! लेकिन क्या अब ये बताने और जताने , दिखाने की आवश्यकता नहीं है कि व्यक्ति और देश में फर्क होता है ! हम गाँधी की तरह एक गाल पर थप्पड़ खाने के बाद दूसरा गाल आगे कर सकते हैं लेकिन देश पर तमाचा खाने के बाद चार तमाचे बदले में मारें तभी शायद अक्ल आये !

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एक कहानी और याद आ रही है ! हमारे गाँव में एक बहुत धनी व्यक्ति रहता था ! वो ज्यादातर ब्याज पर पैसा उठाता था ! लेकिन धनी होने के बावजूद वो बहुत कंजूस था इसलिए हमेशा ही धोती के दो टुकडे करके पहनता था ! जूते भी हमेशा हाथ में लेकर चलता था ! वो रहता भी बहुत गन्दा था ! शायद साबुन न खर्च हो जाए इसलिए नहाता भी कम ही था ! मैंने स्वयं देखा उसे ! सीधा आदमी था , किसी से लड़ता नहीं था ! उसे डर था कि कहीं किसी से सम्बन्ध न बिगड़ जाएँ ! और उसका ब्याज का काम मंदा न पड़ जाए ! एक दिन वो बरहा (जिसमें पानी चलता है ) में पड़ा था ,एक कुत्ता आया , वो उस आदमी के ऊपर मूत कर चला गया ! उस व्यक्ति की इज्ज़त नहीं थी , ऐसा कह सकता हूँ ! क्योंकि उसके परिवार की लडकियां बदनाम भी थीं ! लेकिन वो कभी किसी से कुछ नहीं कहता था कि कहीं सम्बन्ध खराब न हो जाएँ और उसके पैसे मारे न जाएँ !


यही हाल आज हिंदुस्तान का है ! सम्बन्ध बचाए रखने के लिए वो कभी पाकिस्तान से मार खा लेता है , कभी बंगला देश आँख दिखा देता है ! ऐसा कैसे चलेगा मेरे भाई ! तुम कश्मीर का एक हिस्सा पहले ही पाकिस्तान को दे चुके हो , भगवान् शिव का घर चीन को दे चुके हो , अब और कितना दयालु और सहनशील बनोगे मेरे भाई ? ये सहनशीलता नहीं , कमजोरी है ! कायरता है ! नपुंसकता है ! जो अपनी और अपने घर की इज्ज़त न बचा सके , उसे मर्द नहीं नामर्द कहते हैं ! तो क्या अब ये मान कर चला जाए कि अब माँ भारती के सपूत नामर्द हो गए हैं ?

भगवान् राम के शब्द याद करो !

भय बिन होए न प्रीत !


खून ठंडा पड़ गया है शायद तुम्हारा ! लेकिन याद रहे , हमारे सैनिकों का खून उबाल मार रहा है ! हमें नाज़ हैं उनकी फड़कती बाजुओं पर ! आदेश दो ! दुश्मन को नेस्तनाबूद करने का ! स्पष्ट कहो , और खुलकर जवाब दो , कि हम कोई ” घंटा ” देश नहीं हैं कि जो चाहे और जब चाहे हमें बजाकर चला जाये !

है लिये हथियार दुशमन ताक में बैठा उधर,
और हम तैय्यार हैं सीना लिये अपना इधर.
खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है !!

लेखन में कुछ अपशब्दों का उपयोग जानबूझकर नहीं किया गया है बल्कि विषय की मांग के अनुरूप लिखा गया है ! अगर आपको आपत्ति है तो करबद्ध होकर क्षमा चाहता हूँ !

रंगों के त्यौहार होली की हार्दिक शुभकामनाएं !


जय हिन्द ! जय हिन्द की सेना !

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63 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Dillian के द्वारा
October 17, 2016

Gostei do Desfreia..esse é tipicamente São Bentense,,e que saudades do bons rallyes…mas esqueceram de citar mais alguns personagens;tinha o Perez,a véia Schnaipa,o Pintei,o Roberto Carlos,a Frau Natzk(in memorian,e com muito respeito).Ah! e temos a miss Brasil Mundo..coisa para poucos…a Dona Nita,e agora também estamos recebendo visita dos alaaaígenes..Kiknkaka

Keyaan के द्वारा
October 17, 2016

Świetny z Ciebie chłopak. Naprawdę chiacłabym mieć tyle zapału do nauki jak Ty Może kiedyś będzie mi się chciało trochę pouczyć ale jak na razie to życzę Ci Dobranoc i słodkich Snów :*

    yogi sarswat के द्वारा
    July 25, 2013

    मित्रवर मैं समझ सकता हूँ आपके कहने का उद्देश्य ! बहुत बहुत आभार

south asia ka beta के द्वारा
April 25, 2013

लेखक जी, लेख अच्छा हे पर कभी कभी अपने बदन का भैस भी देखा करो जी, आप बंधे अछे हो, देशप्रेम भी अच्छा ही, पर क्या हे की कभी आपने यह समझने की कोसिस की कैसा लगता होगा जब यही चीज आपके लोग कोई दूसरी छिमेकी देसके साथ ऐसा करते हो? वह के देस वासियों जो अपने रास्त्र को प्रेम करते हे कैसा लगता होगा? क्या कभी अपने कलम चलाई हे? क्यों भारत गौतम बुद्धा को अपने देश में पैदा नहीं होते हुए भी होने की गलत प्रचार प्रसार कर रहा हे? क्यों वो नेपाल को ७२ से भी ज्यादा स्थान में सीमा अत्रिक्रमण कर रहा हे? क्यों वो अपने राव और कोई वि इंटेलिजेंस की मद्दद से दुसरे छिमेकी डेस्क अमन चैन को छीन ते आया हे? क्यों वोह लस्कर इ तोएबा जैसे अपराधिक संस्थान को आतंरिक तौर से सहयोग दे रहा हे? कही यो हतियार का ट्रेड तो नहीं हे? अपनी एंटी-वायरस बेचने के लिए वायरस बनान जैसा ही आजके दिन सरकारे टेररिज्म का बढावा कर रहे हे.

    yogi sarswat के द्वारा
    April 25, 2013

    स्वागत है आपका ! लेकिन आपने जो लिखा है , तार्किक नहीं लगता ! मैं न तो इस विषय में जानता हूँ और न ही मैंने कभी इस विषय में कुछ सुना है ! लेकिन फिर भी आपकी बातों पर गौर करना आवश्यक जान पड़ता है ! बहुत बहुत आभार , मेरे शब्दों तक आने और अपने स्पष्ट विचार रखने के लिए आपका धन्यवाद ! सहयोग बनाये रखियेगा

    Maud के द्वारा
    October 18, 2016

    à¸à:§¹à¸”ž¸¸à¹ˆà¸²àI have got 1 idea for your webpage. It appears like at this time there are a few cascading stylesheet troubles while opening a selection of web pages inside google chrome and internet explorer. It is running alright in internet explorer. Perhaps you can double check this.

yogi sarswat के द्वारा
March 28, 2013

बहुत बहुत आभार श्री वीरेंदर कुमार जी ! सार्थक प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद आपका !

ANAND SHARMA के द्वारा
March 25, 2013

आदिम काल के लोक जगत में अज्ञान और अभिशाप दोनों ही थे. आधुनिक काल के लोक जगत में लोग क्या गुमराही से महफूज हैं..? भलमनसाहत या नेकी को, दरिया में डालने के बाद बचेगा क्या..? ठग और बेईमान ही क्या इंसानियत की निशानी होंगे..!!

    yogi sarswat के द्वारा
    March 28, 2013

    बहुत बहुत आभार श्री आनंद शर्मा जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

virendra kumar rathore के द्वारा
March 25, 2013

योगी जी कहने के लिए शब्द नहीं पर इतना जरुर कहना है की बहुत ही बढीया है पर ये बात सरकार के कानो में तो नही पड़ती kyoki सरकार वे लोग चलाते है जिनको सिर्फ पैसो से मतलब होता है . पर यही बात यदि सेना को समझाया जाय तो शायद कुछ परिणाम निकल सकता है .

    yogi sarswat के द्वारा
    July 25, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका श्री वीरेंदर कुमार जी ! सहयोग बनाये रखियेगा

yatindrapandey के द्वारा
March 24, 2013

हैलो योगी जी बहुत समय बाद कुछ उत्साहित कर देने वाला लेख पढ़ा. सुन्दर सृजन है ये, आपके हाथो और कलम को नमन करता हु.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 28, 2013

    बहुत बहुत शुक्रिया यतीन्द्र जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

aman kumar के द्वारा
March 24, 2013

हम कोई ” घंटा ” देश नहीं हैं कि जो चाहे और जब चाहे हमें बजाकर चला जाये !पर यहा पर लोग चुनाव के समय तो घंटा ही तो बजाते है ………….फिर देश घंटा क्यों नही है ! देश को बर्बाद करने बाले , सदा सत्ता मे रहे है २०१४ मे यही हाल होने वाला है ! फिर लोकतंत्र है योगी भाःई !

    yogi sarswat के द्वारा
    March 28, 2013

    बहुत बहुत आभार श्री अमन कुमार जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

    Malerie के द्वारा
    October 17, 2016

    I Know it&1;2#78s April fools day, and this seems too good to be true. Imagine, a real life politician who is willing to stop this 21st century witch hunt! Thank you. LEAP member, NYPD, ret.

jyotsnasingh के द्वारा
March 23, 2013

रगों में दौड़ने फिरने के हम नहीं कायल,जो आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है.ये हमारी आदत में शुमार हो गया है की बिल्ली को देख कर हम कबूतर की तरह आँख मूँद लेते हैं ये सोच कर की बिल्ली भी हमें नहीं देखेगी अगर हम बिल्ली को न देखें.

    yogi sarswat के द्वारा
    March 28, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय ज्योत्सना जी ! मेरे शब्दों को आपका आशीर्वाद और सहयोग मिला ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

vidhayasagar के द्वारा
March 23, 2013

जय हिन्द !

    yogi sarswat के द्वारा
    March 28, 2013

    आभार श्री विद्यासागर जी ! सहयोग बनाये रखियेगा

Raj Narayan Singh के द्वारा
March 23, 2013

बहुत खूब योगी जी वाकई देश की परिस्थिति पर शर्म आती है. राज नारायण सिंह

    yogi sarswat के द्वारा
    March 28, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका श्री राज नारायण सिंह जी ! मेरे ब्लॉग पर प्रथम आगमन के लिए आपका हार्दिक स्वागत ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

bebakvichar, KP Singh (Bhind) के द्वारा
March 23, 2013

योगीजी,. सुंदर एवं सार्थक लेखन…कभी तो जवाब देना ही पड़ेगा वरना तो चूहे भी शेर बन जाते हैं। साभार…

    yogi sarswat के द्वारा
    March 28, 2013

    बहुत बहुत आभार श्री के . पी . सिंह जी ! आपने मेरे विचारों पर सहयोग और समर्थन दिया ! धन्यवाद ! संवाद बनाये रखियेगा

Bidyut Kumar के द्वारा
March 21, 2013

भावपूर्ण लेख के लिए सहर्ष धन्यवाद । सच कहा जाए तो भारत के तथाकथित बड़े बड़े हर्ता कर्ता भाग्यविधाता नेता लोग बैठे हैं इनमें संयमता इतनी कूट कूट कर भर गयी है कि ये लोग सच-मुच में नपुंसक बन गए हैं । इनसे साहसिकता,वीरता की आशा करना ही बेकार है ।

    yogi sarswat के द्वारा
    March 21, 2013

    बहुत बहुत आभार श्री बिद्युत कुमार जी , मेरे शब्द आप तक पहुंचे और आपका समर्थन मिला ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अतिशय धन्यवाद

parveen के द्वारा
March 20, 2013

कहानियों के माध्यम से आपने बहुत सही लेखन दिया है !

    A kumar के द्वारा
    March 21, 2013

    सही कहा परवीन जी ने

    yogi sarswat के द्वारा
    March 21, 2013

    धन्यवाद मित्रवर परवीन जी

    yogi sarswat के द्वारा
    March 21, 2013

    धन्यवाद कुमार साब

ajay kumar pandey के द्वारा
March 19, 2013

योगी जी नमस्कार सबसे पहले देर से आने के लिए शमा बोर्ड परीक्षा के कारण आपका लेख देखने से चुक गया आपका लेख मुझे बहुत अच्छा लगा जिस तरह से पाकिस्तान ने हमारे सैनिकों के सर काटे देखकर ही वोह दृश्य बहुत बुरा लगता है भारत को भी पाकिस्तान के इस कुकर्म का मुहतोड़ जवाब देना चाहिए पता नहीं ये पाकिस्तानी कब बाज आयेंगे अपनी हरकतों से यह हमारे सैनिकों के साथ ही नहीं बल्कि देश के साथ कुकर्म है अच्छा लेख आप मेरा लेख महाकुम्भ स्नान और भ्रमण के अनुभव पर अपनी प्रतिक्रिया जरुर दीजियेगा मेरा ब्लॉग जरुर देखें धन्यवाद अजय कुमार पाण्डेय

    yogi sarswat के द्वारा
    March 20, 2013

    मित्रवर अजय पाण्डेय जी , बहुत ही सारगर्भित प्रतिक्रिया मिली आपकी ! आभार एवं धन्यवाद ! सहयोग बनाये रखियेगा

nishamittal के द्वारा
March 19, 2013

वाह योगी जी ,कैसे ये लेख नहीं देखा  पता नहीं.कहाँ चूक हुई.खैर लेख जोरदार है जोश जगाने वाला है,लेकिन आश्चर्य जिनमें जोश आना चाहिए उनका खून क्यों नहीं उबलता क्यों पानी हो गया पानी भी नहीं क्योंकि पानी तो उबलता है .ऐसे लगता है कि खून पानी कुछ नहीं  ये तो रेतीली मिट्टी के माधो हैं और उन पर देश की आंतरिक वाह्य किसी समस्या का प्रभाव नहीं पड़ता .

    yogi sarswat के द्वारा
    March 20, 2013

    बहुत बहुत आभार परम आदरणीय निशा जी मित्तल ! मेरे शब्द आप तक पहुंचे और आपका आशीर्वाद लेकर आये ! धन्यवाद

bhanuprakashsharma के द्वारा
March 19, 2013

बहुत खूब। सुंदर अंदाज। कहानियों के जरिये भारत की छवि दिखाकर सच्चाई को बयां करना वाकई अच्छा प्रयोग है। 

    yogi sarswat के द्वारा
    March 20, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय श्री भानु जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अनेक अनेक धन्यवाद

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
March 19, 2013

बस कीजिए योगी जी ! यह सब किसको कह और सुना रहे हैं ? उन्हें जिन्हें गाली देना भी अपनी ही ज़ुबान को गंदा करने के सामान है | इन टुच्चों -लुच्चों और लूटेरों के दीदे का पानी बिलकुल गिर चुका है ! शर्म-हया सब ग़ायब ! साथ ही नपुंसकता तो इनकी नियति बन चुकी है ! अनेकशः आभार !!

    yogi sarswat के द्वारा
    March 20, 2013

    उत्साहजनक प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार आदरणीय श्री आचार्य जी ! सहयोग बनाये रखियेगा , dhanywad

Malik Parveen के द्वारा
March 19, 2013

योगी जी क्या खूब लिखा है … बहुत बढ़िया ! होली की आपको भी परिवार सहित बहुत सारी बधाइयाँ … सादर धन्यवाद…

    yogi sarswat के द्वारा
    March 20, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय परवीन मालिक जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
March 19, 2013

aadarniya योगी जी सादर लें नमस्कार घंटाघर चढ़ रहे भिन्न भिन्न आकार कथा शेर चूहे की लगी अति प्यारी इच्छा शक्ती दृढ नहीं पिटती माँ बेचारी बंगला देश पकिस्तान चीन हो या इटली रिश्तेदार बसते इनके जैसे घर में छिपकली रानी हो महारानी हों या हों इनके कांता देश हमारे भारत को बना रखा है घंटा जय हो बधाई हो

    yogi sarswat के द्वारा
    March 20, 2013

    जय हो ! आदरणीय श्री प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा जी ! आपका प्रतिक्रिया व्यक्त करने का विशिष्ट अंदाज़ मन लुभा गया ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा

surendra shukl bhramar5 के द्वारा
March 18, 2013

हमारे सैनिकों का खून उबाल मार रहा है ! हमें नाज़ हैं उनकी फड़कती बाजुओं पर ! आदेश दो ! दुश्मन को नेस्तनाबूद करने का ! स्पष्ट कहो , और खुलकर जवाब दो , कि हम कोई ” घंटा ” देश नहीं हैं कि जो चाहे और जब चाहे हमें बजाकर चला जाये ! गुरूजी विचारणीय और व्यंग्य पूर्ण लेख .सुन्दर .काश नजर पड़े इन सब पर ताजपोशों की ..आप के शीर्षक का भी जबाब नहीं …जय हिन्द जय भारत भ्रमर ५

    yogi sarswat के द्वारा
    March 20, 2013

    बहुत बहुत आभार श्री भ्रमर साब , मेरे शब्द और शीर्षक आपको पसंद आये ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अनेक अनेक धन्यवाद

alkargupta1 के द्वारा
March 18, 2013

“खून ठंडा पड़ गया है शायद तुम्हारा ! लेकिन याद रहे , हमारे सैनिकों का खून उबाल मार रहा है ! हमें नाज़ हैं उनकी फड़कती बाजुओं पर ! आदेश दो ! दुश्मन को नेस्तनाबूद करने का ! स्पष्ट कहो , और खुलकर जवाब दो , कि हम कोई ” घंटा ” देश नहीं हैं कि जो चाहे और जब चाहे हमें बजाकर चला जाये !” इनमें इतना सहस ही नहीं है कि ये खुलकर जवाब दे सकें …कमजोरी , कायरता और नपुंसकता जैसे बिलकुल सही शब्द इनके लिए प्रयोग किये हैं योगी जी बहुत अच्छा आलेख

    yogi sarswat के द्वारा
    March 20, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय अलका गुप्ता जी ! मेरे शब्दों को आपका आशीर्वाद मिला ! स्नेह बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

omdikshit के द्वारा
March 18, 2013

योगी जी ,नमस्कार . शायद आप ने ध्यान नहीं दिया है …..हमारे प्रधान -मंत्री जोर से नहीं बोल सकते ,हंस नहीं पाते इसीलिए …..सदैव समभावी दीखते हैं .अति का भला …न ..बोलना .आप को भी बधाई .

    yogi sarswat के द्वारा
    March 20, 2013

    आभार श्री ओम दीक्षित जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! बहुत बहुत धन्यवाद

ajay kumar के द्वारा
March 17, 2013

गज़ब की अंतर्वेदना और दिल से लिखा गया लेख

    yogi sarswat के द्वारा
    March 20, 2013

    आभार एवं धन्यवाद श्री अजय कुमार जी ! सहयोग बनाये रखियेगा

jlsingh के द्वारा
March 17, 2013

आदरणीय योगी जी, सादर अभिवादन! काफी अंतर्वेदना के साथ लिखी गयी मार्मिक पोस्ट! मुझे भी लतामंगेशकर का वो गीत याद आ रहा है – जब देश में थी दीवाली वो खेल रहे थे होली जैम हम बैठे थे घरों में वो झेल रहे थे गोली. ……. थी खून से लथ\-पथ काया फिर भी बन्दूक उठाके दस\-दस को एक ने मारा फिर गिर गये होश गँवा के जब अन्त\-समय आया तो कह गये के अब मरते हैं खुश रहना देश के प्यारों अब हम तो सफ़र करते हैं ….. बस अब बात उल्टी हो गयी है … हमने एक या दो को अरसे बाद फांसी लगाई और उनलोगों ने हमारे कितने लोगों को मार दिया अगर फिर भी हम चुप हैं तो क्या हम मर्द हैं ! वही घंटा…….

    yogi sarswat के द्वारा
    March 20, 2013

    बिलकुल सही कहा आपने आदरणीय श्री जवाहर सिंह जी ! यही तो नामर्दी है हमारी ! आपका आशीर्वाद लगातार मिल रहा है ! बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद

akant singh के द्वारा
March 16, 2013

यही हाल आज हिंदुस्तान का है ! सम्बन्ध बचाए रखने के लिए वो कभी पाकिस्तान से मार खा लेता है , कभी बंगला देश आँख दिखा देता है ! ऐसा कैसे चलेगा मेरे भाई ! तुम कश्मीर का एक हिस्सा पहले ही पाकिस्तान को दे चुके हो , भगवान् शिव का घर चीन को दे चुके हो , अब और कितना दयालु और सहनशील बनोगे मेरे भाई ? ये सहनशीलता नहीं , कमजोरी है ! कायरता है ! नपुंसकता है ! जो अपनी और अपने घर की इज्ज़त न बचा सके , उसे मर्द नहीं नामर्द कहते हैं ! तो क्या अब ये मान कर चला जाए कि अब माँ भारती के सपूत नामर्द हो गए हैं ? नामर्द नहीं हुए हैं योगी जी ! नामर्द बनाये गए हैं ! और नामर्द रहने के लिए कहा जाता है हमें ! आप स्वयं अंदाज़ा लगाइए , जहां आतंकवादियों के हाथ में AK 47 होती है वहां हमारे सैनिकों से लाठी से काम लेने को कहा जाता है ! ये नामर्द बनाने की बात नहीं तो और क्या है ?

    yogi sarswat के द्वारा
    March 20, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका श्री एकांत जी ! इस सफ़र में आप का साथ मिला ! आशा है ये सहयोग मिलता रहेगा ! धन्यवाद

आर.एन. शाही के द्वारा
March 16, 2013

श्रद्धेय योगी जी जबर्दस्त दहाड़ लगाई है । लेकिन इस दहाड़ का कोई फ़ायदा नज़र आए, इसकी सम्भावना नहीं है । इस खून को भ्रष्टाचार की गंगा बने वर्षों बीत चुके हैं, तो भला पानी में भी कभी खुद ब खुद उबाल आता है क्या ? कभी नहीं । आपने अपनी जिस ज़बान के लिये नीचे की पंक्तियों में सबसे क्षमा मांगी है, इस भलमनसाहत की भी घंटा बनाने में कम भूमिका नहीं है । साले को साला नहीं तो क्या बहनोई कहेंगे ? अब इनकी चमड़ी गाली प्रूफ़ भी हो चुकी है, इसलिये निकाल लीजिये जी भर कर भड़ास, जितनी निकाल सकें । यही खाया पिया ही आपके पल्ले रहेगा, शेष कोई आशा न करें । अच्छी पोस्ट ।

    yogi sarswat के द्वारा
    March 20, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय श्री शाही जी ! हम सिर्फ शब्दों के माध्यम से ही अपनी भड़ास निकल सकते हैं ! बहुत बहुत आअभार , इस सफ़र में आपका साथ मिल रहा है ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा


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