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​​दर्द की भी हद होती है

Posted On: 28 May, 2013 Others में

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छत्तीसगढ़ में जो कुछ हुआ , ह्रदय विदारक , निंदनीय और दुखी करने वाला वाकया था , मैं जानता हूँ कि हम सबको इस बात का दुःख है लेकिन क्या हमने कभी ये सोचने की जरुरत महसूस करी है की क्यों कोई अपना घर बार छोड़कर , अपने बीवी बच्चों से दूर जंगलों में हर पल मौत की लड़ाई में लड़ने को मजबूर हो जाता है ? आदमी जब भूखा होता है तो उसे कुछ नज़र नहीं आता ! लेकिन हमने अपने विकास और अपने भौतिक सुख की खातिर जिनको उजाड़ दिया , जिनको बेघर कर दिया , जिनसे उनकी रोटी और रोज़ी छीन ली , क्या हमारी आँखों से उनके लिए कभी आंसुओं की दो बूँद गिरीं ? क्या कभी किसी ने उनके लिए कोई राज्य या भारत बंद कराया ? इसी विषय पर कुछ कहने की कोशिश करी है :


मैं अपने एहसासों की एक कहानी लिखता हूँ
टूटे -फूटे वस्त्रों में छुपती जवानी लिखता हूँ
मेरे नायक हैं वो भूखे -नंगे लोग
मैं उनकी आँखों का पानी लिखता हूँ !!


इतिहास नहीं बन पाते वो
अपना दर्द नहीं कह पाते वो
जुल्म की काली करतूतें
मैं अपनी जुबानी लिखता हूँ !!


सरकारों को उनकी ​याद नहीं
उनको भी इनसे आस नहीं
ऊँची -ऊँची दीवारों के पीछे की
मैं बातें सयानी लिखता हूँ !!


उनके सपनों में कोई ताज नहीं
उनके पास कहने को , लम्बे चौड़े अल्फाज़ नहीं
जले हुए खेत खलिहानों पर
मैं जुल्मों की निशानी लिखता हूँ !!


नफरत की कोई दीवार नहीं
दिल से कोई बीमार नहीं
आँखों से दर्द का जो समंदर बहता है
मैं उन अश्कों की रवानी लिखता हूँ !!

​​

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80 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Janaye के द्वारा
October 17, 2016

>Thanks for the coNt!nmsemick, I agree! That is why I am struggling with this! Deirdre, I also thought that about more clock faces, but they are all white, and I think that would take away from the white headlights on my DeLorean!And, Mary, I appreciate your thoughts! YOu are very helpful! I completely agree! And now, I need to figure out what needs to be done…

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
June 21, 2013

मान्य भाई योगी सारस्वत जी , स्नेहिल नमन !….. दर्द भरी दास्ताँ के अनछुए पहलुओं पर भावाभिभूत कर देने वाली रचना के लिए हार्दिक बधाई ! पुनश्च !

    yogi sarswat के द्वारा
    June 24, 2013

    बहुत बहुत आभार ! श्री भ्रमर जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अतिशय धन्यवाद

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
June 15, 2013

जय श्री राधे प्रिय योगी जी सच में कितना सहा जाए कितना सहना होगा कुछ सीमा ही नहीं दिखती …हर चीज को हलके में लेना सो जाना सरकार की आदत बन गयी है आमूल चूल परिवर्तन की जरुरत है …..सुन्दर रचना …… भ्रमर ५

    yogi sarswat के द्वारा
    June 24, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय श्री सुरेन्द्र शुक्ल जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
June 15, 2013

प्रिय योगी जी सच में कितना सहा जाए कितना सहना होगा कुछ सीमा ही नहीं दिखती …हर चीज को हलके में लेना सो जाना सरकार की आदत बन गयी है आमूल चूल परिवर्तन की जरुरत है …..सुन्दर रचना …… भ्रमर ५

    yogi sarswat के द्वारा
    June 17, 2013

    मेरे शब्दों तक आने और उनका मर्म पहिचाने के लिए आपका बहुत बहुत आभार श्री भ्रमर जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

Sushma Gupta के द्वारा
June 7, 2013

योगी जी,यह रचना तो मन को अभिभूत करने बाली है ,इसकी उत्क्रष्टता हेतु आपको ह्रदय से वधाई ..

    yogi sarswat के द्वारा
    June 8, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय सुषमा गुप्ता जी ! सहयोग और संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

sudhir awasthi के द्वारा
June 7, 2013

बहुत प्रभावशाली कविता———-असली——-पीड़ा———-का—-चित्रण

    yogi sarswat के द्वारा
    June 8, 2013

    बहुत बहुत आभार श्री अवस्थी जी , मेरे शब्दों तक आने और अपने विचार रखने के लिए धन्यवाद

roshni के द्वारा
June 5, 2013

योगी जी नमस्कार बहुत अच्छी रचना लिखी आपने उनके सपनों में कोई ताज नहीं उनके पास कहने को , लम्बे चौड़े अल्फाज़ नहीं जले हुए खेत खलिहानों पर मैं जुल्मों की निशानी लिखता हूँ !!… दर्द को शब्द दिए है आपने युही लिखते रहिये आभार

    yogi sarswat के द्वारा
    June 6, 2013

    बहुत दिनों के बाद आपके विचार मिले हैं आदरणीय रौशनी जी ! बहुत बहुत आभार ! संवाद बनाये रखियेगा !

rashmisri के द्वारा
June 5, 2013

योगी जी , आदिवासियों के दर्द को बेहतर तरीके से दर्शाया ,सुन्दर रचना है !

    yogi sarswat के द्वारा
    June 6, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय रश्मि श्री जी ! मेरे शब्दों तक आने और अपने बहुमूल्य विचार देने के लिए ! संवाद बनाये रखियेगा ! अतिशय धन्यवाद

sonam saini के द्वारा
June 4, 2013

नमस्कार योगी सर जी आपकी रचना तो हमने फर्स्ट डे फर्स्ट शो में ही पढ़ ली थी लेकिन बस कमेंट करने में पीछे रह गयी अछि रचना हेतु बधाई ….

    yogi sarswat के द्वारा
    June 6, 2013

    बहुत बहुत आभार स्नेही सोनम जी आपका , आपने मेरे शब्दों और मेरी सोच का सम्मान किया ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

Shweta के द्वारा
June 4, 2013

aapki lekhni ka jabaab nhi

    yogi sarswat के द्वारा
    June 6, 2013

    आभार श्वेता जी , सहयोग और संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

Mohit Bisht के द्वारा
June 4, 2013

बहुत खूब लिखते है आप. वाह.

    yogi sarswat के द्वारा
    June 6, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका श्री मोहित बिष्ट जी ! सहयोग और संवाद बनाये रखियेगा !

    Carrie के द्वारा
    October 18, 2016

    you can download them again. But I’d like to see them package MP3 albums along w/ digital versions in a $10 max bundle. Chalk it up to old habits but buying mp34;82&2#s, to me, is still a foreign concept. But If I can get the physical copy along with a mp3 version I can download and copy at my leisure then I’d buy more records from them.

vinitashukla के द्वारा
June 3, 2013

काव्य विधा में आपकी रचना पहली बार पढ़ी. प्रभावी एवं सुंदर अभिव्यक्ति. बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    June 3, 2013

    धन्यवाद , आदरणीय विनीता शुक्ला जी ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा

    Journey के द्वारा
    October 17, 2016

    Hi Everyone this is Ryan Macdonald from bonnie Scotland hows everyone LOST what a tv programme best ever.A like the theory from jonny its sounds rather good the whole heaven & Hell would be great i think. I think that everyone died on the crash and the flshcbaaks are them just dreaming about thier life running up to before they died but i think that would be rather stupid if that was the case but u never know. I think the directors are better than that hopefully.

vilas raj के द्वारा
June 3, 2013

good one keep it up

    yogi sarswat के द्वारा
    June 3, 2013

    बहुत बहुत शुक्रिया

rajanidurgesh के द्वारा
June 1, 2013

नफरत की कोई दीवार नहीं दिल से कोई बीमार नहीं आँखों से दर्द का जो समंदर बहता है वाह क्या अभिव्यक्ति है. बधाई हो!

    yogi sarswat के द्वारा
    June 3, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय रजनी दुर्गेश जी ! संवाद बनाये रखियेगा

anant के द्वारा
May 31, 2013

बहुत सुन्दर

    yogi sarswat के द्वारा
    June 3, 2013

    धन्यवाद

    Billybob के द्वारा
    October 17, 2016

    We had a neat little yt player with many features and bulletins and real shares and, and, an..D.d.ream, dream, dream……I wish google would sell yt to someone more competent.

rashmisri के द्वारा
May 31, 2013

आदरणीय योगी जी ,आपकी रचना और कविता दोनों ही मर्म स्पर्शी है .हम वहाँ रह चुके है वहाँ के आदिवासी बहुत ही सरल और सौम्य है हालात ने और गन्दी राजनीति ने उनको बर्बर बना दिया है.

    yogi sarswat के द्वारा
    June 3, 2013

    बहुत सार्थक शब्दों में हकीकत बताने के लिए आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय रश्मि श्री जी ! सहयोग और संवाद बनाये रखियेगा ! अतिशय धन्यवाद

priti के द्वारा
May 31, 2013

आदरणीय योगी जी,सादर नमस्कार! जो हम बोते हैं ,वही काटते हैं ….ये प्रकृति का नियम है….कर्म और उसके फल का सिधांत भी इसी नियम पर आधारित है .नक्सलवाद…वही फल है ,जिसके बीज हमारे लोकनायकों और प्रशासकों की अदूरदर्शिता में छिपे थे. सत्य और सार्थक आलेख के साथ हृदयस्पर्शी कविता के लिए हार्दिक बधाई!

    yogi sarswat के द्वारा
    June 3, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय प्रीती जी ! सहयोग और संवाद बनाये रखियेगा !

aman kumar के द्वारा
May 31, 2013

मेरे नायक हैं वो भूखे -नंगे लोग मैं उनकी आँखों का पानी लिखता हूँ !! योगी भाई को सत- सत प्रणाम ! सच तो यही है सत्ता मे समाज की सबसे निम्न स्तर के चरित्र बाले लोग ही पहुच सकते है | क्युकी राजीनति मे सरे अब्गुन पैदा हो गए है ! फिर समाज सुधार कोण करेंगा ? कहाँ तो तय था चिराग़ाँ हर एक घर के लिए कहाँ चिराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए यहाँ दरख़तों के साये में धूप लगती है चलो यहाँ से चलें और उम्र भर के लिए न हो कमीज़ तो पाँओं से पेट ढँक लेंगे ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सफ़र के लिए ख़ुदा नहीं न सही आदमी का ख़्वाब सही कोई हसीन नज़ारा तो है नज़र के लिए आभार !

    yogi sarswat के द्वारा
    June 3, 2013

    इतनी सार्थक और विस्तृत प्रतिक्रिया पढ़कर हर्ष हुआ ! हम बहुत बात कर लेते हैं इस मंच पर ! हम मतलब ब्लोगर्स ! लेकिन कभी उनकी जिंदगी के करीब जाएँ तो लगता है जैसे वो नाक्साली कुछ भी गलत नहीं कर रहे ! कब तक आप उनको समाज से काट कर रखियेगा ? कब तक उनको मूलभूत जरूरतें पूरी करने के लिए तड़पते हुए देखिएगा ! हम उनकी गरीबी देखें तो समझ आ जायेगा की लोग ऐसे भी रहते हैं ? हम छोटी से छोटी समस्याओं पर आन्दोलन रत हो जाते हैं लेकिन जिनके पास कुछ नहीं है वो कैसे आन्दोलन करें ? बहुत बहुत आभार श्री अमन कुमार जी ! कहाँ तो तय था चिराग़ाँ हर एक घर के लिए कहाँ चिराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए यहाँ दरख़तों के साये में धूप लगती है चलो यहाँ से चलें और उम्र भर के लिए न हो कमीज़ तो पाँओं से पेट ढँक लेंगे ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सफ़र के लिए ख़ुदा नहीं न सही आदमी का ख़्वाब सही कोई हसीन नज़ारा तो है नज़र के लिए आभार !बहुत सुन्दर

jlsingh के द्वारा
May 31, 2013

आदरणीय योगी जी, सादर अभिवादन! काफी देर के बाद मेरी नजर आपके इस भाव प्रधान रचना पर गयी. इसके लिए मुझे आप क्षमा करेंगे, क्योंकि आप तो मुझे हर जगह ढूढ़ लेते हैं, मैं ही न जाने कहाँ खो जाता हूँ. आपकी-हमारी चिंता जायज है और नीचे हरीश रावत जी की कविता भी मार्मिक है! सरकारों को उनकी ​याद नहीं उनको भी इनसे आस नहीं ऊँची -ऊँची दीवारों के पीछे की मैं बातें सयानी लिखता हूँ !! आप की हर पंक्ति लाजवाब है. पर हल सरकार के ही पास है .. अब भी समय है. बहुत सारे निर्दोषों के साथ कुछ नेता भी मारे जा रहे हैं और इस बार की बर्बरता का चेहरा जो समाचारों में आया है निश्चित ही चिंतनीय है. हमारे नीति निर्धारक अभी भी आईपीएल पर ही झूठे तर्क देकर एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं, जैसे वे इसके दोषी नहीं हैं. सारे अपराध की जड़ में कहें तो आर्थिक विषमता का हिमालय और हिन्द महासागर है. जबतक हमारे नीति निर्धारक स्वयम ईमानदार नहीं होंगे इसी प्रकार की नक्सलवाद और आतंकवाद मुंह बाए निर्दोषों का खून करती रहेगी. हमारी न्याय ब्यवस्था भी वैसी ही जटिल और सुस्त है कि क्या कहने एक अपराधी को सजा देने में वर्षों बीत जाते हैं और अपराध दिन प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे हैं. एक अंतहीन सिलसिला चला आ रहा है, जो न जाने कब ख़त्म होगा! मैंने भी बहुत भाषण दे दिया…. आपने नक्सली के दर्द को महसूस किया और कराया इसके लिए आप बधाई के पात्र हैं! सादर!

    yogi sarswat के द्वारा
    June 3, 2013

    आदरणीय श्री जवाहर सिंह जी , सादर ! इतनी सार्थक और विस्तृत प्रतिक्रिया पढ़कर हर्ष हुआ ! हम बहुत बात कर लेते हैं इस मंच पर ! हम मतलब ब्लोगर्स ! लेकिन कभी उनकी जिंदगी के करीब जाएँ तो लगता है जैसे वो नाक्साली कुछ भी गलत नहीं कर रहे ! कब तक आप उनको समाज से काट कर रखियेगा ? कब तक उनको मूलभूत जरूरतें पूरी करने के लिए तड़पते हुए देखिएगा ! हम उनकी गरीबी देखें तो समझ आ जायेगा की लोग ऐसे भी रहते हैं ? हम छोटी से छोटी समस्याओं पर आन्दोलन रत हो जाते हैं लेकिन जिनके पास कुछ नहीं है वो कैसे आन्दोलन करें ? बहुत बहुत आभार

omdikshit के द्वारा
May 31, 2013

सारस्वत जी, बहुत सुन्दर .

    yogi sarswat के द्वारा
    June 3, 2013

    बहुत बहुत धन्यवाद श्री ओम दीक्षित जी ! संवाद बनाये रखियेगा !

bhanuprakashsharma के द्वारा
May 30, 2013

सुंदर अभिव्यक्ति व भावपूर्ण रचना। 

    yogi sarswat के द्वारा
    June 3, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय भानु प्रकाश जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

sudhajaiswal के द्वारा
May 30, 2013

उनके सपनों में कोई ताज नहीं उनके पास कहने को , लम्बे चौड़े अल्फाज़ नहीं जले हुए खेत खलिहानों पर मैं जुल्मों की निशानी लिखता हूँ !! आदरणीय योगी जी, सादर अभिवादन, सार्थक सन्देश देती हुई बहुत ही सुन्दर रचना, बधाई |

    yogi sarswat के द्वारा
    June 3, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय सुधा जयसवाल जी ! संवाद बनाये रखियेगा

ajay kumar के द्वारा
May 30, 2013

मैं अपने एहसासों की एक कहानी लिखता हूँ टूटे -फूटे वस्त्रों में छुपती जवानी लिखता हूँ मेरे नायक हैं वो भूखे -नंगे लोग मैं उनकी आँखों का पानी लिखता हूँ !! आपको दीखते हैं योगी जी ये नायक के रूप में , सरकारों को नहीं ! जिस दिन सरकारों को आम आदमी , फटेहाल आदमी नायक सा लगने लगेगा , समझ लेना सच्चा लोकतंत्र और राम राज्य आ गया ! बेहतरीन

    yogi sarswat के द्वारा
    June 3, 2013

    आपको दीखते हैं योगी जी ये नायक के रूप में , सरकारों को नहीं ! जिस दिन सरकारों को आम आदमी , फटेहाल आदमी नायक सा लगने लगेगा , समझ लेना सच्चा लोकतंत्र और राम राज्य आ गया ! बेहतरीन शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत बहुत आभार आपका श्री अजय कुमार जी ! संवाद बनाये रखियेगा

AMAR LATA के द्वारा
May 30, 2013

बहुत अच्छे योगी जी! “पा गए जो भरपेट भोजन तो भाग मानो जग गए…. मैं ऐसे भोले भालों के दर्द की मानी लिखता हूँ” शुक्रिया

    yogi sarswat के द्वारा
    June 3, 2013

    सुन्दर शब्दों में अपने विचार रखने के लिए आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय अमर लता जी ! सहयोग बनाये रखियेगा , धन्यवाद

sinsera के द्वारा
May 30, 2013

नफरत की कोई दीवार नहीं दिल से कोई बीमार नहीं आँखों से दर्द का जो समंदर बहता है मैं उन अश्कों की रवानी लिखता हूँ !! ​​काश ये लाइनें सच हो जायें…….

    yogi sarswat के द्वारा
    June 3, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय सरिता सिन्हा जी ! बिलकुल , शायद ये पंक्तियाँ सच हो जाएँ ! बहुत कुछ सरकार और उसके नुमैन्दों पर निर्भर करता है ! आशीर्वाद प्रदान करने के लिए धन्यवाद ! सहयोग और संवाद बनाये रखियेगा !

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
May 30, 2013

हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता / चाहे उद्देश्य जो भी हो हिंसा का सहारा लेना मानवता के बिरुद्ध है / इसे बढ़ावा नहीं देना चाहिए / आजकल कुछ संभ्रात परिवार के लोग भी एडभेन्चरस लाइफ़ जीने के लिए ऐसे हिंसा फ़ैलाने वाले संगठनों में शामिल हो रहे हैं / मैं हिंसा में बिस्वास नहीं रखता लेकिन आपकी कबिता हमेशा की भातीं अच्छी लगी/

    yogi sarswat के द्वारा
    June 3, 2013

    बहुत सुन्दर शब्दों में अपने कीमती विचार रखने के लिए आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय श्री राजेश श्रीवास्तव जी ! सहयोग और समर्थन बनाये रखियेगा

Madan Mohan saxena के द्वारा
May 30, 2013

simply superb. Good one. Plz visit my blog and give feedback.

    yogi sarswat के द्वारा
    June 3, 2013

    धन्यवाद मदन मोहन सक्सेना जी , सहयोग और समर्थन बनाये रखियेगा !

    Kayleen के द्वारा
    October 17, 2016

    Grneeitgs from Ohio! I’m bored to death at work so I decided to browse your website on my iphone during lunch break. I really like the knowledge you present here and can’t wait to take a look when I get home. I’m amazed at how quick your blog loaded on my mobile .. I’m not even using WIFI, just 3G .. Anyways, good site!

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 29, 2013

बहुत सुन्दर भाव की रचना. यदि उनका हक़ उन्हें मिल जाए तो वे देश की मुख्य धरा से क्यों भटकें. वो भी जीना चाहते हैं बधाई आदरणीय योगी जी सादर

    yogi sarswat के द्वारा
    June 3, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय श्री प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा जी , मुझे आपका आशीर्वाद और प्रोत्साहन लगातार मिल रहा है ! बहुत बहुत आभार

Malik Parveen के द्वारा
May 29, 2013

सरकारों को उनकी ​याद नहीं उनको भी इनसे आस नहीं ऊँची -ऊँची दीवारों के पीछे की मैं बातें सयानी लिखता हूँ !! उनके सपनों में कोई ताज नहीं उनके पास कहने को , लम्बे चौड़े अल्फाज़ नहीं जले हुए खेत खलिहानों पर मैं जुल्मों की निशानी लिखता हूँ !! नफरत की कोई दीवार नहीं दिल से कोई बीमार नहीं आँखों से दर्द का जो समंदर बहता है मैं उन अश्कों की रवानी लिखता हूँ !! ​​ बहुत ही उम्दा प्रस्तुति …. बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    June 3, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय परवीन मलिक जी ! सहयोग और संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

harirawat के द्वारा
May 29, 2013

मजा तब है जब बड़ा नेता नक्षलियों के निशाने पर हो, नौकरशाह मंत्री किसानो को बेघर करने वाला बिल्डर हो, अरे मार रहे हैं अपने जैसे ही सुरक्षा कर्मियों को, जो स्वयं पेट के खातिर नेताओं की सुरक्षा में खड़े हैं, पेट का सवाल है अपने भाइयों से लड़ रहे हैं ! गोली उन पर चला नहीं पाते गोली खाकर मर रहे हैं ! कब तक खेली जाएगी ये रक्त की होली, पुलिस का सिपाही बेचारा खा रहा है गोली ! बच्चे उसके अनाथ हो रहे हैं, जिन नेताओं से नक्षलियों की दुश्मनी है वे मजे से जिन्दगी जी रहे हैं ! योगी जी चिंता वाजिब है ! हरेन्द्र जागते रहो !

    yogi sarswat के द्वारा
    June 3, 2013

    सुन्दर शब्दों में अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए बहुत बहुत आभार आपका श्री हरी रावत जी ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा

Rajesh Dubey के द्वारा
May 28, 2013

सही प्रश्न है. जनता जबाब चाहती है.

    yogi sarswat के द्वारा
    June 3, 2013

    बहुत बहुत आभार श्री राजेश दुबे जी ! आपने मेरे शब्दों को अपने विचारों से नवाज़ा ! लेकिन जो जवाब देने लायक हैं वो चुप बैठे हैं ?

alkargupta1 के द्वारा
May 28, 2013

“उनके सपनों में कोई ताज नहीं उनके पास कहने को , लम्बे चौड़े अल्फाज़ नहीं जले हुए खेत खलिहानों पर मैं जुल्मों की निशानी लिखता हूँ !! नफरत की कोई दीवार नहीं दिल से कोई बीमार नहीं आँखों से दर्द का जो समंदर बहता है मैं उन अश्कों की रवानी लिखता हूँ !!” अति उत्तम भावनात्मक प्रस्तुति योगी जी,

    yogi sarswat के द्वारा
    June 3, 2013

    आपका आशीर्वाद मिला आदरणीय अलका गुप्ता जी , बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

nishamittal के द्वारा
May 28, 2013

बहुत दिन बाद एक भावपूर्ण रचना योगी जी .प्रभावी प्रस्तुति

    yogi sarswat के द्वारा
    June 3, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय निशा जी मित्तल ! मेरे शब्दों को आपका स्नेह और आशीष मिला ! धन्यवाद

bhagwanbabu के द्वारा
May 28, 2013

सही कहा… ये नक्सली भी तो भारतीय जनता ही है… क्या सरकार को मालूम नही कि ये नक्सली क्यों बने… ? जब सरकार उनकी फिक्र नही करता तो नक्सली क्यों फिक्र करने लगे… . हाँ मासूम लोगो के हत्या का अफसोस है… पर सरकारी नेताओ के मरने का मुझे कोई अफसोस नही… शायद सरकार के कान पर अब भी कुछ जूँ रेंगे…. और नक्सलियो के बारे मे सोचे और कोई ऐसा कदम उठाये जिससे इस देश कोई और नागरिक नक्सली बनने पर मजबूर न हो… .

    yogi sarswat के द्वारा
    June 3, 2013

    बहुत बहुत आभार श्री भगवान् बाबु जी , मेरे शब्दों और मेरे जेहन में चलने वाले सवालातों को आपका सहयोग और समर्थन मिला ! उत्साहित करने वाली प्रतिक्रिया के लिए दिल से आभार !

    Linda के द्वारा
    October 17, 2016

    I’m not easily impeessrd. . . but that’s impressing me! :)


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