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चलते - चलते

Posted On: 24 Jun, 2013 Others में

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तेरी आरजू , तेरी जुस्तजू , तेरा इंतज़ार
ओह ! हमें कितना काम है आजकल ।


एक जेल में और एक ‘ बेल’ में
नेताओं का कितना नाम है आजकल ॥


छत पर एक झंडा लगा लिया जाए
पार्टियों के झंडे का क्या दाम है आजकल ?


काम से फुर्सत पाकर तुझे ही ढूँढता हूँ
तेरी जुल्फों के तले ही मेरी सुबहे-शाम है आजकल ॥


चलो इन उसूलों को कूड़े में डाल दें
इस मुल्क में सोच गुलाम है आजकल ॥


हुकूमत से कोई उम्मीद लगाना छोड़ दो
चोरों के हाथ में मुल्क का निजाम है आजकल ॥


अदीब-ओ-अमन के पैरोकार कहाँ गए
निठल्लों के हाथ में कलाम है आजकल ॥


अब छोड़ दी जाएँ ‘ योगी ‘ ज़मीर -ओ- ईमान की बातें
हिन्द में बस ताकत को सलाम है आजकल ॥


​मुझे ​ग़ज़ल कहनी नहीं आती , लेकिन दिल में शब्द उमड़ -घुमड़ रहे थे , बस उनको व्यक्त किया है !

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55 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Darence के द्वारा
October 17, 2016

THANK YOU! I have been waiting for a mobile app for a while. I’ve been keeping an account with another bank just for the convenience of having a mobile app. Time to considate it all with IB and get rid of the “Big Bank” once and for all. This new app is also super easy to use. Can’t thank you enough! Now if only we had the ability to deposit a check using a smart phone camera with the app or at the drive through ATM after hours. Hmm08m&#m23m;..

harirawat के द्वारा
August 17, 2013

सारस्वत जी, आजकल ब्लॉग में नजर नहीं आरहे हैं, रोज अलोट पलोट करता हूँ, योगी जी की योग निंद्रा कहीं भंग न हो जाय, इस बात पर भी गौर करता हूँ ! किस उधेड़ बुन में खोये हो, नयी पार्टियों को गिन रहे हो या पुरानो की लुटिया में सुरंग लगा रहे हो ! चुप तो आप रहते नहीं, भेद अपना खोलते नहीं ! हरेन्द्र जागते रहो

    yogi sarswat के द्वारा
    August 13, 2013

    बहुत बहुत आभार श्री अजय कुमार जी ! सहयोग बनाये रखियेगा

shuklabhramar5 के द्वारा
August 1, 2013

चलो इन उसूलों को कूड़े में डाल दें इस मुल्क में सोच गुलाम है आजकल ॥ हुकूमत से कोई उम्मीद लगाना छोड़ दो चोरों के हाथ में मुल्क का निजाम है आजकल ॥ प्रिय योगी जी क्या बात है ..सुन्दर गजल ….बहुत सुन्दर भाव ..तीर शायद ये लगे कहीं न कहीं ….कुछ गन्दा खून रिस जाए तो आनंद और आये आभार भ्रमर ५

    yogi sarswat के द्वारा
    August 5, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका श्री भ्रमर जी ! आगे भी आपके सहयोग और आशिउर्वद की चाहता है ! धन्यवाद

ajaykr के द्वारा
July 1, 2013

आदरणीय श्री योगी जी. सादर अभिवादन ….खूबसूरत गज़ल हुकूमत से कोई उम्मीद लगाना छोड़ दो चोरों के हाथ में मुल्क का निजाम है आजकल ॥ बेहतरीन शेर | http://avchetnmn.jagranjunction.com/2013/07/01/गन्ने-की-लूट-पर्दाफाश/

    yogi sarswat के द्वारा
    July 25, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका मित्रवर श्री अजय कुमार जी ! मेरे शब्द आप तक पहुंचे और आपका समर्थन लेकर आये ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

sonam saini के द्वारा
July 1, 2013

तेरी आरजू , तेरी जुस्तजू , तेरा इंतज़ार ओह ! हमें कितना काम है आजकल । वाह वाह क्या ग़ज़ल लिखी है, …….

    yogi sarswat के द्वारा
    July 25, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका सोनम सैनी जी ! आप मेरे ब्लॉग तक आये और अपने विचार प्रस्तुत किये ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
June 29, 2013

अब छोड़ दी जाएँ ‘ योगी ‘ ज़मीर -ओ- ईमान की बातें हिन्द में बस ताकत को सलाम है आजकल ॥ प्रिय योगी जी बहुत खूब ,,,बिभिन्न रंग जोरदार बातें …प्रभावी …भ्रमर ५

    yogi sarswat के द्वारा
    July 25, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय श्री भ्रमर जी ! सहयोग और संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

seemakanwal के द्वारा
June 29, 2013

न आते हुए भी इतनी अच्छी likhi mashaallah

    yogi sarswat के द्वारा
    July 25, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय सीमा कंवल जी ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

sudhajaiswal के द्वारा
June 28, 2013

योगी जी, भावों को क्या खूबसूरत शब्द दिए आपने अगर मन के भाव सच्चे हों तो ग़ज़ल खूबसूरत लगती है | बहुत खूबसूरती से भारत की स्थिति बयां की, बधाई |

    yogi sarswat के द्वारा
    June 29, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय सुधा जायसवाल जी ! मेरे शब्द आप तक पहुंचे और आपको पसंद आये ! संवाद बनाये रखियेगा !

yogi sarswat के द्वारा
June 28, 2013

बहुत बहुत आभार आपका श्री अजय कुमार जी ! मेरे शब्द आप तक पहुंचे और आपका समर्थन लेकर आये ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

harirawat के द्वारा
June 27, 2013

योगी सरस्वत जी, कमाल है आपको गजल नहीं आती लेकिन रसीले, अलंकारिक सज्जित शब्द आपके ह्रदय में कुल बुलाते हैं और गजल/कविता रूप में कागज़ के पन्नों में बिखर जाते हैं, इसमें आपका कुछ नहीं जाता न आता ! आपके अंदाजे बयान पर हम तो निशब्द हो जाते हैं ! बहुत सुन्दर रचना है और आप बधाई के पात्र हैं ! आप शायद मेरा दरवाजा खटकाना भूल गए ! भूले भटके ही सही कभी खटका दिया करो ! आस का पंछी हरेन्द्र जागते रहो !

    yogi sarswat के द्वारा
    June 29, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय श्री हरी रावत जी ! आपके आशीर्वाद के रूप में उत्साहित करती प्रतिक्रिया पाकर दिल प्रसन्न हो गया ! आगे भी आपके आशीर्वाद की कामना करता हूँ ! बहुत बहुत धन्यवाद

manoranjanthakur के द्वारा
June 27, 2013

सब्दो में बाजीगरी ऐसी की दिल बोल उठे हरीपा ….बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    June 29, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय श्री मनोरंजन ठाकुर जी , बहुत दिनों के बाद आपका प्रोत्साहन मिला है मेरे शब्दों को ! आगे भी आपके सहयोग की कामना करता हूँ ! धन्यवाद

bhanuprakashsharma के द्वारा
June 27, 2013

सुंदर अभिव्यक्ति, बधाई। 

    yogi sarswat के द्वारा
    June 29, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय श्री भानु प्रकाश शर्मा जी ! आगे भी आपके सहयोग की कामना करता हूँ ! धन्यवाद

    Cindy के द्वारा
    October 17, 2016

    Thanks for shagrni. Always good to find a real expert.

Rajesh Dubey के द्वारा
June 27, 2013

समयानुकूल रचना. वाकई सलाम पाने के हक़दार ताकतवर ही है. इमानदार और सच्चे लोगों की कोई पूछ नहीं है.

    yogi sarswat के द्वारा
    June 29, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय श्री राज्जेश दुबे जी ! सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत आभार ! आगे भी आपके सहयोग की कामना करता हूँ ! धन्यवाद

omdikshit के द्वारा
June 26, 2013

योगी जी, नमस्कार. बहुत सुन्दर.आप की व्यस्तता की सूची के हिसाब ,,,,जुल्फों के तले ,,,,का समय कब मिलता होगा?

    yogi sarswat के द्वारा
    June 29, 2013

    अब ऐसा लिख कर ही काम चला लेते हैं श्री ओम दीक्षित जी ! वो दिन तो कब के निकल गए , जब जुल्फों के तले हुआ करते थे ! सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत आभार ! आगे भी आपके सहयोग की कामना करता हूँ ! धन्यवाद

yamunapathak के द्वारा
June 26, 2013

बहुत खूब योगी जी साभार

    yogi sarswat के द्वारा
    June 29, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय यमुना पाठक जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

bhagwanbabu के द्वारा
June 26, 2013

बड़ी ईमानदारी से आपने कह दिया कि आपको ग़ज़ल कहनी नही आती… सच है… लेकिन आपने जो कोशिश की है उसकी तो दाद देनी पड़ेगी … वाह…

    yogi sarswat के द्वारा
    June 29, 2013

    बहुत बहुत आभार श्री भगवन बाबू जी ! आपको मेरे शब्द पसंद आये ! धन्यवाद ! सहयोग और संवाद बनाये रखियेगा

allrounder के द्वारा
June 26, 2013

बहुत बढ़िया योगी जी…. बहुत ही बढ़िया …. आपने तो हिन्दोस्तान की परिस्तिथि का स्पष्ट खाक खिंच कर रख दिया चंद पंक्तियों मैं ! आभार !

    yogi sarswat के द्वारा
    June 29, 2013

    बहुत बहुत आभार श्री सचिन जी आपका ! आपको मेरे शब्द पसंद आये ! धन्यवाद ! सहयोग और संवाद बनाये रखियेगा

    yogi sarswat के द्वारा
    June 29, 2013

    बहुत बहुत आभार शालिनी जी ! आपको मेरे शब्द पसंद आये ! धन्यवाद ! सहयोग और संवाद बनाये रखियेगा

alkargupta1 के द्वारा
June 26, 2013

`छत पर एक झंडा लगा लिया जाए पार्टियों के झंडे का क्या दाम है आजकल ? अब छोड़ दी जाएँ ‘ योगी ‘ ज़मीर -ओ- ईमान की बातें हिन्द में बस ताकत को सलाम है आजकल ॥’ वर्तमान व्यवस्था पर बहुत ही अच्छा तीक्ष्ण प्रहार किया है योगी जी आपने बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    June 29, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय अलका गुप्ता जी ! आपको मेरे शब्द पसंद आये ! धन्यवाद ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा

Jaishree Verma के द्वारा
June 26, 2013

अब छोड़ दी जाएँ ‘ योगी ‘ ज़मीर -ओ- ईमान की बातें हिन्द में बस ताकत को सलाम है आजकल ॥ सही कहा योगी जी आपने !

    yogi sarswat के द्वारा
    June 29, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय जय श्री वर्मा ! आपको मेरे शब्द पसंद आये ! धन्यवाद

YOHESH के द्वारा
June 26, 2013

हुकूमत से कोई उम्मीद लगाना छोड़ दो चोरों के हाथ में मुल्क का निजाम है आजकल ॥   योगी भाई लाजबाब …….मजेदार कटाक्ष !

    yogi sarswat के द्वारा
    June 28, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका मित्रवर योगेश जी ! सहयोग और संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

nishamittal के द्वारा
June 26, 2013

बहुत खूब मुझको उर्दू समझ नहीं आती परन्तु अर्थ देने से जितना समझ आया , सार्थक रचना पसंद आयी

    yogi sarswat के द्वारा
    June 28, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय निशा जी मित्तल ! मेरे शब्दों को आपका आशीर्वाद मिला ! सहयोग बनाये रखियेगा ! बहुत बहुत धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
June 24, 2013

मुझे ​ग़ज़ल कहनी नहीं आती , लेकिन दिल में शब्द उमड़ -घुमड़ रहे थे ये शब्द उमर घुमर कर अच्छी बरसात लाये हैं आजकल! अब छोड़ दी जाएँ ‘ योगी ‘ ज़मीर -ओ- ईमान की बातें हिन्द में बस ताकत को सलाम है आजकल ॥ क्या बात कही है योगी जी! मेरा सलाम है आपको!

    yogi sarswat के द्वारा
    June 28, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय श्री जवाहर सिंह जी , मेरे शब्दों को आपका साथ और आशीर्वाद मिला ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

priti के द्वारा
June 24, 2013

चलते-चलते बहुत ही सटीक और सधी हुई रचना ………. हार्दिक बधाई ! आदरणीय योगी जी …….

    yogi sarswat के द्वारा
    June 28, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय प्रीती जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

Sushma Gupta के द्वारा
June 24, 2013

सारस्वत जी,आजकल के हालात को वयां करती यह एक सुन्दर ‘ग़जल’ है, लगता है , यूं अकेले चले थे, शव्दों से कारवाँ बना दिया , मंजिलें दूर नहीं ,जब पा लिया ‘ग़जल’का पता . वधाई ..

    yogi sarswat के द्वारा
    June 28, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय सुषमा गुप्ता जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

AJAY KUMAR CHAUDHARY के द्वारा
June 24, 2013

तेरी आरजू , तेरी जुस्तजू , तेरा इंतज़ार ओह ! हमें कितना काम है आजकल । एक जेल में और एक ‘ बेल’ में नेताओं का कितना नाम है आजकल ॥ छत पर एक झंडा लगा लिया जाए पार्टियों के झंडे का क्या दाम है आजकल ? काम से फुर्सत पाकर तुझे ही ढूँढता हूँ तेरी जुल्फों के तले ही मेरी सुबहे-शाम है आजकल ॥ चलो इन उसूलों को कूड़े में डाल दें इस मुल्क में सोच गुलाम है आजकल ॥ हुकूमत से कोई उम्मीद लगाना छोड़ दो चोरों के हाथ में मुल्क का निजाम है आजकल ॥ अदीब-ओ-अमन के पैरोकार कहाँ गए निठल्लों के हाथ में कलाम है आजकल ॥ अब छोड़ दी जाएँ ‘ योगी ‘ ज़मीर -ओ- ईमान की बातें हिन्द में बस ताकत को सलाम है आजकल ॥ वाह! वाह! क्या ग़ज़ल कही है योगी जी आपने मज़ा आ गया बहुत बहुत बधाई !…

    yogi sarswat के द्वारा
    June 28, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका श्री अजय कुमार जी ! मेरे शब्द आप तक पहुंचे और आपका समर्थन लेकर आये ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अतिशय धन्यवाद


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