kahi ankahi

Just another weblog

66 Posts

4144 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 5476 postid : 583279

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर वर्ष ठेले ............

Posted On: 19 Aug, 2013 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

हर बार की तरह इस बार भी 15 अगस्त मन गया , हो गया , मना लिया ! मना लेते हैं जैसे तैसे , कैसे भी ! मनाना ही तो होता है ! मना लेते हैं ! 1947 से आज तक मनाते आ रहे हैं , आज भी मना लिया , आगे भी मनाएंगे ! हम आज़ाद हुए थे इस दिन ! मुझे नहीं मालूम कि आज़ाद हुए थे कि नहीं ! गोरे अंग्रेजों से आजाद हुए थे , लेकिन काले अंग्रेजों से ? शायद उनके गुलाम हुए थे ! एक गुलामी से छूटे और दूसरी गुलामी में जा अटके ! आसमान से अटके खजूर में नहीं , शायद नागफनी या शायद आग में गिर गए !


नेहरु जी से लेकर मनमोहन सिंह जी तक एक ही रवायत , अपनी अपनी सरकारों की उपलब्धि का बखान ! गरीबी मिटा देने का रोना , मिटती कभी नहीं ! आज तक नहीं मिटी ! मिट जायेगी तो वोट कौन देगा ? वैसे ही इतनी इज्ज़त खराब हो चुकी है कि अगर अब गरीबी मिटा दी तो वोट भी नहीं मिल सकेगा ! हिन्दू मुस्लिम थोड़े थोड़े समझदार हो रहे हैं , अब दंगा कम करते हैं , फिर वोट कैसे मिले ? इसके लिए जरुरी है कि वोट के कीड़ों , कीटाणुओं को हिंदुस्तान के वातावरण में रहने दिया जाए , गरीबी जिन्दा है तो वोट जिन्दा है ! गरीबी गयी तो वोट छूमंतर ! इसलिए कोई बेवकूफ ही होगा जो गरीबी हटाएगा , सच में हटाएगा ! 66 साल हो गए गरीबी हटते हटते ! हटाते हटाते ! जय हो गरीबी की ! अगर गरीबी न होती तो वोट न होता , वोट न होता तो नेता न होता , नेता न होता तो घोटाला न होता , घोटाला न होता तो लोकतंत्र मजबूत कैसे होता , लोकतंत्र मजबूत न होता तो पांचवी पास नेता , २० वाँ स्थान प्राप्त करने वाली महिला आई , ए. एस अधिकारी को सस्पेंड कैसे कराता ? सोचने की बात है !


सोचने की बात चली तो सोचा कि मैं भी सोच लूं ! हालाँकि सोचने के लिए दिमाग को खुला होना चाहिए जो मुझे नहीं लगता कि किसी के पास छोड़ा है हमने ! ज्यादा लिखने का सोचोगे तो आज़म खान पकडवा लेगा ! एक गीत याद आ रहा है जो हमेशा 15 अगस्त या 26 जनवरी को ही बजाया जाता है !


हम लाये हैं इस कश्ती को तूफ़ान से निकाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के


बच्चे तो संभाल के तभी रखेंगे जब तुम इसे छोड़ जाओगे संभालने लायक ? तुम तूफ़ान से निकाल लाये हो लेकिन अब ये कीचड में फंस गया है , बहुत मुश्किल हो रहा है कीचड में से निकाल कर लाना ! हालाँकि तूफ़ान से भी तुम नहीं निकाल कर लाये थे , जो निकालकर लाये थे वो गुमनाम हो गए हैं , उनकी मूर्तियाँ धुल खा रही हैं या फिर अपने लिए , खड़े होने के लिए जगह की तलाश कर रही हैं ! कुछ ऐसी हैं जिनको चेहरा दे पान मुश्किल है , नाम देना भी मुश्किल है ! कभी कभी तो लगता है एक ही परिवार ने सारी लड़ाई लड़ी होगी ! उसके या उसके लोगों के चेहरे हर जगह नज़र आते हैं तो लगता ही नहीं कि कोई और भी वीर इस देश में , इस जमीन पर पैदा हुआ होगा ? भगत सिंह तक को शहीद मानने से इनकार है ! इनकार क्यूँ न हो ? इस देश को आजाद कराने का ठेका सिर्फ एक ही परिवार को मिला था , आज भी मिला है गुलामी में रखने का ! फिर कौन आज़ाद हुआ ? कैसे आजाद हुआ ? कब आज़ाद हुआ ? जिनका कोई नाम तक न था आज़ादी में उनकी जिन्दा होते हुए भी मुर्तोयों पर फूल और बिजलियाँ चमकती हैं लेकिन जिन्होंने सर्वस्व निछावर कर दिया उनकी कब्रों और चिताओं पर माफिया डोरे डाले बैठे हैं ! सोचिये , अगर सोच सकें तो ! वैसे मुझे नहीं लगता आप सोच पायेंगे ! मेरे शब्द कहते हैं :


चलो इन उसूलों को कूड़े में डाल दें
इस मुल्क में सोच गुलाम है आजकल ॥

हुकूमत से कोई उम्मीद लगाना छोड़ दो
चोरों के हाथ में मुल्क का निजाम है आजकल ॥


मन दुखी हो जाता है जब शहीदों की इतनी बेकद्री होती है ! वो हमसे ज्यादा नहीं चाहते , बस इतना सा कि अगर उनकी मूर्ति पर माला नहीं डाल सकते तो कम से कम ****** भी मत करो !


आखिर में :

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस ठेले

वतन पर मरने वालों का नहीं कोई बाकी निशाँ होगा !!


जय हिन्द , जय हिन्द की सेना !!!!!!

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (9 votes, average: 4.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

67 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
September 3, 2013

बेहद बेबाकी से लिखा गया सटीक कथन हर शब्द भारतीयों की पुकार बन उभर रही है. आभार योगी जी.

    Kindsey के द्वारा
    October 18, 2016

    Nice ice cream! Love to have ice cram once in a while, palraculirty when we go to the beach.Nice treat for the hot summer days..I loved the cute chocolate sprinkles and the zebra chocolate scrapping! :)

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
August 28, 2013

बिलकुल सटीक ! मान्य भाई !

    yogi sarswat के द्वारा
    August 29, 2013

    बहुत बहुत आभार श्री आचार्य जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

Madan Mohan saxena के द्वारा
August 27, 2013

सार्थक प्रस्तुति.जन्माष्टमी की बहुत बहुत शुभकामनायें- कभी यहाँ भी पधारें

    yogi sarswat के द्वारा
    August 29, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका श्री मदन मोहन जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! अतिशय धन्यवाद

avdhesh के द्वारा
August 26, 2013

सारस्वत जी, बहुत ही अच्छा लिखा है ! एकदम दिल को छु जाता है !

    yogi sarswat के द्वारा
    August 28, 2013

    बहुत बहुत धन्यवाद श्री अवधेश जी आपका ! संवाद बनाये रखियेगा

Bhagwan Babu के द्वारा
August 23, 2013

ये दर्द है दिल का  सभी का…

    yogi sarswat के द्वारा
    August 26, 2013

    बहुत बहुत आभार श्री भगवान् बाबु जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

Ramprakash Agrawal के द्वारा
August 23, 2013

shahido ki chitao par sajaye mele jate h chand jaychando ke khatir desh dukh jhele jate h jo paloge sapole sarhado ki aastino me dasenge rashtr jivan ko ,vatan fir toot jate h !!

    yogi sarswat के द्वारा
    August 26, 2013

    बहुत बहुत धन्यवाद श्री राम प्रकाश अग्रवाल जी ! आगे भी संवाद बनाये रखियेगा ! बहुत बहुत धन्यवाद

sinsera के द्वारा
August 22, 2013

योगी जी नमस्कार, वन्दे मातरम… इतना क्यूँ दुखी हैं, खुश हो लीजिये कि कम से कम हम आप तो भ्रष्टाचारी नहीं हैं…लेकिन हाँ अगर शहीद हो जायें तो हमारी चिताओं पर भी ठेले लगेंगे ….. आलेख की अंतिम लाइन दिल को छू गयी…”जय हिन्द , जय हिन्द की सेना !!!!!!”

    yogi sarswat के द्वारा
    August 26, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय सरिता जी ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा , धन्यवाद

Ravinder kumar के द्वारा
August 22, 2013

योगी जी, सादर नमस्कार. देश और देश वासियों को लेकर आपकी चिंता उचित ही है. लेकिन हमारे नेताओं को इसके लिए फुर्सत ही कहाँ है ? सोचने की बात है जो सरकार अपने किये घोटालों को निपटाने में लगी हो ; वो देश के बारे में क्या सोचेगी ? रही बात शहीदों की, उन्होंने अपना कर्तव्य पूरा किया और चले गए. अब हमारी बारी है. हम इन नेताओं की तरफ देखें ही क्यों ? हम अपना कर्तव्य पूरा करें और देश को आगे बढ़ाएं. फिर इसका परिणाम चाहे निलंबन हो या स्थानान्तरण . योगी जी आपके लेख में व्यंग्य का पुट अच्छा लगा. आपको शुभकामनाएं. आपकी पंक्तियों को पढ़ कर मुझे भी कुछ पंक्तियाँ याद आ रही है. जिन्हें यहाँ प्रस्तुत करने के सुख से मैं वंचित नहीं होना चाहता. शहीद तेरी मौत ही तेरे वतन की जिंदगी तेरे लहू से जाग उठेगी इस वतन की जिंदगी खिलेंगे फूल जहाँ तू जहाँ शहीद हो योगी जी, नमस्कार.

    yogi sarswat के द्वारा
    August 26, 2013

    बहुत बहुत आभार श्री रविन्द्र कुमार जी ! बहुत सटीक और सुन्दर शब्दों में आपने मेरे शब्दों को सम्मानित किया ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

udayraj के द्वारा
August 22, 2013

जय हिंद… जय हिंद । हरिशंकर परसाई जी के शब्‍दों में - ठिठुरता हुआ गणतंत्र भिंगती हुई अजादी 

    yogi sarswat के द्वारा
    August 26, 2013

    बहुत सही ! आभार आपका

Ravindra K Kapoor के द्वारा
August 22, 2013

आप की इस बात में कटु सत्य है कि “बच्चे तो संभाल के तभी रखेंगे जब तुम इसे छोड़ जाओगे संभालने लायक ?” पर फिर भी हमें अपने देश को इस भंवर से निकाल है. मेरे स्वर्गीय पिता एक ऐसे स्वतंत्रता सैनानी थे जो १९२० से १९४७ तक बराबर गांधीजी के एक सिपाही बन बीसों बार जेल गए पर जब देश आज़ाद हो गया तो अपने दुसरे साथियों कि तरह वो कांग्रेस से चिपके नहीं रहे वरन अलग हो साहित्य में लग गए और लगभग १९९४ बिना किसी लोभ के अपना योगदान देश के लिए करते रहे. पर कौन पूछता है उन जैसे सैनानियों को. बावजूद इन बातों के हमें इन्हीं मुश्किलों से अपनी नई राह निकालनी है. ये देश इस समय बहूत कठिन परिस्थितियों से गुज़र रहा है अगर हम मिल कर और एक जुट नहीं चलेंगे तो हमारे दुश्मन इस नष्ट करने कि कोई कसार नहीं छोड़ेंगे. सुभकामनाओं के साथ ..रवीन्द्र

    yogi sarswat के द्वारा
    August 26, 2013

    बहुत सुन्दर और उत्साहजनक शब्दों में अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार श्री रविन्द्र कपूर जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! बहुत बहुत धन्यवाद

SATYENDRA KATYAYAN के द्वारा
August 22, 2013

बहुत बहुत संवेदनशील व्यंग …. चलो इन उसूलों को कूड़े में डाल दें इस मुल्क में सोच गुलाम है आजकल ॥ हुकूमत से कोई उम्मीद लगाना छोड़ दो चोरों के हाथ में मुल्क का निजाम है आजकल ॥………………….

    yogi sarswat के द्वारा
    August 22, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका मित्रवर ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

Nikhil के द्वारा
August 22, 2013

उम्दा लेख. बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    August 22, 2013

    धन्यवाद आपका ! संवाद बनाये रखियेगा मित्रवर

Jaishree Verma के द्वारा
August 22, 2013

बड़ा चुटीला और तीखा व्यंग्य योगी सारस्वत जी ! बहुत ढूंढ – ढूंढ कर शब्द लिखे हैं आपने देश की व्यवस्था पर !

    yogi sarswat के द्वारा
    August 22, 2013

    बहुत बहुत धन्यवाद आपका ! संवाद बनाये रखियेगा

Malik Parveen के द्वारा
August 22, 2013

बहुत बढिया पोस्ट योगी जी … कुछ तुम बदलो कुछ हम बदलेंगें ये तस्वीर तो बदलनी होगी..

    yogi sarswat के द्वारा
    August 22, 2013

    आभार आदरणीय परवीन मलिक जी , आप मेरे ब्लॉग तक आये और अपने विचार दिए ! धन्यवाद

कुमारेन्द्र सिंह सेंगर के द्वारा
August 21, 2013

देश बहुत ही गम्भीर दौर से गुजर रहा है…. और हम सब बेबस से हैं….

    yogi sarswat के द्वारा
    August 22, 2013

    बहुत बहुत आभार श्री सेंगर साब ! संवाद बनाये रखियेगा

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
August 20, 2013

एक कमी हम लिखने वालों की भी है / हममे से अधिकांश देश की नकारात्मक छबी ही नई पीढ़ी के सामने रखते है / हमारी भी सोच बदलनी होगी /

    yogi sarswat के द्वारा
    August 22, 2013

    बिलकुल सही कहा आपने श्री राजेश श्रीवास्तव जी ! सुन्दर शब्दों में अपने विचार रखने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ! संवाद बनाये रखियेगा

    Jimmy के द्वारा
    October 18, 2016

    raspberry_pd / Absolutely superb work. A genuine big step forward. Cognnatulatiors to all those contributors to the following projects:- Debian- Raspbian- Raspberry Pi firmware- Pulse-Eight libcec- XBMC 12- Confluence skin- XBian Superb work. With advances in software like this, the Raspi really continues to be the little computer that could!

SHUKLABHRAMAR5 के द्वारा
August 19, 2013

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस ठेले….अद्भुत योगी जी ..शीर्षक भी यही रखना था न ….दशा देश की और हमारे समाज की बड़ी नाजुक है संवेदना मर जा रही है ..व्यंग्य युक्त अच्छी व्याख्या ..अच्छा लेख भ्रमर ५

    yogi sarswat के द्वारा
    August 22, 2013

    अत्यंत सुन्दर शब्दों में अपने विचार रखने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया श्री भ्रमर साब ! स्नेह बनाये रखियेगा

seemakanwal के द्वारा
August 19, 2013

लाजवाब ,शानदार ,बहुत खूब .बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    August 22, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय सीमा कंवल जी ! आप मेरे ब्लॉग तक आये और अपने विचार दिए ! संवाद बनाये रखियेगा

    yogi sarswat के द्वारा
    August 22, 2013

    आभार आपका श्री भानु प्रकाश शर्मा जी ! सहयोग बनाये रखियेगा

harirawat के द्वारा
August 19, 2013

वाह क्या खूब बघिया उखाड़ी है आपने ऊंची ऊंची कुर्सी पर बैठने वालों ऊंची नाक वालों की, जिनको पता ही नहीं है की वे कितने भ्रष्ट और गरीबी के अम्बार पर अपनी कुर्सी टिकाये हुए हैं और कुर्सी बेचारी आफत की मारी आपके बढ़ते हुए वजन से दल दल में धंसती चली जा रही है ! जिस मंत्री को देखो इनके लडके लड़कियों को देखो कद की जगह वजन बढ़ा रहे हैं, और पापा मम्मी अपने बच्चों के बढ़ते वजन पर स्वयं फूल कर कुप्पा हो रहे हैं ज्यादा से ज्यादा रिश्वत ले रहे हैं, घोटाला कर रहे हैं, १५ अगस्त को जन गण मन का गाना गा कर प्रधान मंत्री के पीछे खड़े होकर अपने बढे हुए पेटों को जनता को दिखा कर अपनी उपलब्धियां गिना रहे हैं ! लेकिन योगी जी एक दिन जरूर आएगा जिस दिन गरीबी हट जाएगी और इन पेट वालों के पेट फट जाएंगे, वोट बैंक धरासाही हो जाएंगे, अरे जब रावण, कुम्भकरण, कंस, ताड़का, त्रिजटा द्रूमुखी, सुर्पंखान नहीं रहे तो ये मंत्री नेता किस खेत की मूली हैं, यमदूत आएँगे इन्हें अपनी बोरी में भर कर ले जाएंगे ! राम राम सत हो जाएगी ! शुभ शुभ बोलेंगे, शुभ शुभ सोचेंगे क्यों की हम जनता हैं, हम आम आदमी हैं !

    jlsingh के द्वारा
    August 19, 2013

    बस एक ही बात यहीं कहना चाहता हूँ- Don’t under-estimate the power of a common man! इसी आश में जिए जा रहे हैं हम … योगी जी की शानदार प्रस्तुति का अभिनन्दन! ….कलम चलती रहनी चाहिए, वह भी एक तेज तर्रार शिक्षक (प्राध्यापक) की कलम … कलम की ताकत को आप से बेहतर कौन जान सकता है योगेन बाबू! सादर आभार!

    yogi sarswat के द्वारा
    August 22, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय श्री जवाहर सिंह जी ! स्नेह बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    August 22, 2013

    बहुत उर्जा से भरे शब्दों में स्नेह आशीष देने के लिए आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय श्री रावत जी ! आशा है आगे भी स्नेह की बारिश होती रहेगी ! धन्यवाद

alkargupta1 के द्वारा
August 19, 2013

यथार्थ के धरातल पर खरी उतरती उत्कृष्ट कृति योगी जी

    yogi sarswat के द्वारा
    August 22, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय अलका गुप्ता जी ! मेरे शब्दों को आपका आशीर्वाद मिला ! धन्यवाद ! आगे भी आपका स्नेह चाहता हूँ !

nishamittal के द्वारा
August 19, 2013

बहुत बढ़िया और पैनी प्रस्तुति योगी जी किसी के कान पर जू तो रेंगें

    yogi sarswat के द्वारा
    August 22, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय निशा मित्तल जी ! मेरे शब्दों को आपका आशीर्वाद मिला ! धन्यवाद


topic of the week



latest from jagran