kahi ankahi

Just another weblog

66 Posts

4144 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 5476 postid : 593001

उज्जवल भविष्य है हिंदी ब्लॉगिंग के लिए ( “नव परिवर्तनों के दौर में हिन्दी ब्लॉगिंग”) contest

Posted On: 5 Sep, 2013 Others,Contest में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

हिंदी की जब भी बात आती है , हमने उसके लिए रोने को एक दिन न जाने क्यूँ तय कर लिया है ! जैसे बड़े बड़े और महान लोगों का मरण दिन और श्रधांजलि देने का जो प्रचलन है कुछ उसी तरह हमने हिंदी को हर साल १४ सितम्बर को श्रधांजलि देने का कार्यक्रम बना रखा है ! मुझे नहीं मालुम लोग हिंदी के लिए क्यूँ इतना रोना रोते हैं ? मुझे सच कहूँ तो ये रोना हिंदी के लिए और भी खतरनाक लगता है ! हिंदी के अखबार हिंदी के विषय में लिखेंगे , स्कूल और कोलिज में प्रतियोगिताएं होंगी , सरकारी कार्यालयों में कार्यक्रम और चर्चाएं आयोजित होंगे ! ये धीरे धीरे हिंदी को मरणासन्न कर रहे हैं !


अब कुछ हिंदी ब्लॉग्गिंग की बात करें ! मात भाषा वो होती है जिसमें आप सोचते हैं , जिसमें आप बात करना पसंद करते हैं , जिसको आप बोलना पसंद करते हैं ! मुझे बताएं आप , आप कितने इंग्लिश ब्लॉग पढ़ते हैं ? और अगर पढ़ते हैं तो कितने ब्लॉग लेखकों के नाम याद हैं आपको जिनके अंग्रेजी के ब्लॉग पढ़े हैं आपने और कितना लगाव है आपको उनसे ? ब्लॉग पढना अलग बात है लेकिन उनसे कुछ सीख पाना , उनसे जुड़ पाना अलग बात ! हम ब्लॉग लिखते हैं तो अपने मन और अपने आत्मा की पुकार को परिभाषित करते हैं शब्दों में ! और क्यूंकि हमारी आत्मा और हमारा मन हिंदी में ही रचा बसा है इसलिए उन शब्दों को ग्रहण भी कर लेते हैं ! ये शब्द अगर हमें नयी जानकारियाँ उपलब्ध कराते हैं तो साथ ही साथ दिल में उतरते भी हैं ! आप दिल पर हाथ रख कर बताएं , क्या आपने कभी अंग्रेजी रचना पढ़ते हुए अपने आपको भाव विभोर महसूस किया है ? क्या आप खुलकर हंस पाए हैं , क्या कोई गंभीर रचना पढ़ते हुए आपकी आँखें गीली हुई हैं , नहीं न ! हम अंग्रेजी आर्टिकल को केवल ख़त्म करना चाहते हैं , पढना चाहते हैं किन्तु उससे जुड़ नहीं पाते ! लेकिन जब हम हिंदी ब्लॉग पढ़ते हैं , अपने आपको उससे जुड़ा हुआ महसूस करते हैं ! हसी की बात पर हँसते हैं , गंभीर बात पर गंभीर होते हैं ! मतलब अगर एक लाइन में कहूँ तो जहां अंग्रेजी ब्लॉग या अंग्रजी आर्टिकल पढने के दौरान आपका चेहरा भावहीन रहता है जबकि हिंदी या अपनी मात भाषा के ब्लॉग पढने का समय आपका चेहरा हर वो बात कहता है जो आप समझ रहे हैं , जो आप पढ़ रहे हैं ! जो आप महसूस कर रहे हैं !


हिंदी ब्लॉग पढने वाले और लिखने वाले शायद अपने आपको कमतर समझते हैं ! जबकि हकीकत कुछ अलग भी है ! जागरण जंक्शन के अलावा नवभारत टाइम्स के ब्लॉग पर जाकर देखें तो पता चलता है एक अच्छी खासी भीड़ हैं पढने वालों की भी और लिखने वालों की भी ! जागरण जंक्शन भी एक ऐसी ब्लॉग साईट है जो हर रोज़ नए नए आयाम स्थापित कर रही है ! अगर कुछ तकनीकी खामियों को दरकिनार कर दें तो एक बहुत सशक्त माध्यम है जागरण जंक्शन , अपने शब्दों , अपनी सोच , अपने उसूलों और अपने लिखने के हुनर को दुनिया के लोगों तक पहुंचाने का ! अगर मुझ जैसे हल्के फुल्के लेखक को मेरे किसी ब्लॉग पर 7 ,000 पढने वाले मिल जाते हैं तो मैं कैसे कह दूं कि हिंदी ब्लॉग्गिंग को कोई नहीं पूछता , कैसे कह दूं कि हिंदी ब्लॉग पढने वाले लोग नहीं हैं ? ब्लागस्पाट पर , देखिये एक से एक महान ब्लॉगर ऐसा है जिसको एक महीने में 40,000 हिट आराम से मिल जाते हैं ! जिनमें ऐसा भी देखा गया है कि बाहर के देशों के लोग भी हिट करते हैं ! भले ही वो विदेशी न हों शायद भारतीय हों किन्तु उनका भाषा के प्रति लगाव तो दीखता ही है ! फिर कैसे कहें कि हिंदी ब्लॉग कोई नहीं पढता ! हिंदी के लिए हल्ला मचाने वाले क्यूँ भूल जाते हैं कि इस देश में और भी भाषाएँ जिन्दा हैं लेकिन हिंदी फिर भी 85 करोड़ लोगों तक अपनी पहुँच बना रही है ! हिंदी में एक कहावत है ” घर की मुर्गी दाल बराबर ” ! शायद यही कहावत चरितार्थ करना चाहते हैं इस देश के लोग ! मुझे हिंदी ब्लॉग्गिंग का भविष्य बहुत उज्जवल नज़र आता है ! अभी हिंदुस्तान में केवल 17 प्रतिशत लोगों के पास इन्टरनेट की पहुँच है जिनमें से केवल 42 प्रतिशत हिन्ढी भाषी हैं ! उस दिन के विषय में सोचिये जिस दिन भारत के हर गाँव और हर घर में इन्टरनेट होगा , तब हिंदी ब्लॉग्गिंग अपने सुनहरे दौर में होगी ! तब इस पीड़ा को बाहर निकाल फेंकने का समय होगा कि हम हिंदी वाले हैं !


अगर हम हिंदी ब्लॉग्गिंग और अंग्रेजी ब्लॉग्गिंग की बात करें , तुलना करें तो आप पायेंगे कि अंग्रेजी में लिखने के लिए केवल दो ही विधा आपके पास हैं गध और पद्ध ! यानी आर्टिकल होगा या पोएम होगी ! लेकिन हिंदी में आप कई विधाओं में लिख पाते हैं , गध लिखिए , पद्ध लिखिए ! उसी में आप ग़ज़ल लिखिए , कविता लिखिए , सवैया लिखिए , हाइकू लिखिए ! कहानी लिखिए , लेख लिखिए , लघु कथा लिखिए ! संस्मरण लिखिए , यात्रा वर्णन लिखिए ! बहुत कुछ है लिखने को और पढने को ! हमरी ब्रज भाषा में एक कथन है ” घर कौ जोगी जोगना आन गाँव कौ सिद्ध “! यानी घर में कोई कितना भी विद्वान हो उसे भाव नहीं देते लेकिन बाहर का कोई ऐसा वैसा भी हो उसे सिद्ध यानी विद्वान मान लिया जाता है ! शायद अंग्रेजी की हिमायात करने वाले ऐसी ही कुछ मानसिकता के लगते हैं ! मुझे तो हिंदी ब्लोगिंग भविष्य के आईने में बहुत सुनहरी , उज्जवल और फलती फूलती , कुलांचें मारती नज़र आती है ! मैथली शरण गुप्त जी के शब्दों के साथ अपनी बात को विराम देता हूँ :


तेरे घर के द्वार बहुत हैं,
किसमें हो कर आऊं मैं?
सब द्वारों पर भीड़ मची है,
कैसे भीतर जाऊं मैं?


तेरी विभव कल्पना कर के,
उसके वर्णन से मन भर के,
भूल रहे हैं जन बाहर के
कैसे तुझे भुलाऊं मैं?
तेरे घर के द्वार बहुत हैं,
किसमें हो कर आऊं मैं?


जय हिन्द ! जय हिन्दी !

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (11 votes, average: 4.45 out of 5)
Loading ... Loading ...

73 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
September 25, 2014

श्री सारस्वत जी आपका अति उत्तम लेख मेरी आखँ में कैसे नहीं चढ़ा मुझे अपने पर अफ़सोस है आपकी एक एक बात ठीक है हिंदी का चलन कभी कम नही हो सकता विदेशों में भी लोग इन ब्लॉगों को पढ़ते हैं एक बार मैने एक लेख लिखा उस पर मेरी भांजी ने सिंघापर से बड़ी अच्छी पतिक्रिया थी उसने लिखा वह अक्सर कई ब्लॉग पढ़ती है आपने लेख बहुत मनन पूर्वक और ज्ञान वर्धक लिखा हैं पढ़ने पर बहुत सी बाते जो मैं नही जानती थी पता चली आप ठीक कहते हैं हिंदी में पाठको की कमी नही है आपने कविता भी बहुत खूबसूरत लिखी है अच्छे लेख के लिए आपका आभार shobha

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 7, 2014

बहुत खूब ,क्यों नहीं होगा हिंदी का वर्चस्व विश्व पर जब आप जैसे होनहार बिरवान मौजूद हैं ,सारस्वत जी आपने सही कहा है ,हिंदी हमारी रग रग में रची बसी है ,और इसी लिए जो लिखते हैं वो दिल से निकलता है ,अंग्रेजी उस स्तर को छू भी नहीं सकती ,बहुत बहुत बधाई इस उत्कृष्ट आलेख के लिए .

    yogi sarswat के द्वारा
    September 25, 2014

    बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय निर्मला जी ! संवाद बनाये रखियेगा , धन्यवाद

यदुवंशी नवीन के द्वारा
July 6, 2014

श्रीमान् जी , आपसे करबद्ध निवेदन है की आप हमारी मातृभाषा का प्रचार और प्रसार इसी तरह से करते रहियेI और एक बात मै भी हिंदी में लिखना चाहता हूँ पैसे कमाने के लिए नहीं इसमें आपनी सेवा के योगदान के लिए तो मै कैसे क्या करू मुझे इस बारे में ज्यादा ज्ञान नहीं है आपसे अनुरोध है की आप मेरा मार्ग दर्शन करे और देश को हिंदी से जोड़ने में मेरी सहायता करे क्योकि मेरा ये दृढ विश्वाश है की आने वाले समय में अगर कुछ रहेगा तो वो हिंदी हिन्दू और हिंदुस्तान ही रहेगा जय हिन्द जय हिन्दू जय हिंदुस्तान

    yogi sarswat के द्वारा
    September 25, 2014

    बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय श्री नवीन साब ! संवाद बनाये रखियेगा , धन्यवाद

सनिल मिश्रा के द्वारा
December 21, 2013

बहुत अच्छा लिखते सारस्वत जी आप …बहुत बहुत आभार

    yogi sarswat के द्वारा
    September 25, 2014

    बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय श्री मिश्रा जी ! संवाद बनाये रखियेगा , धन्यवाद

bdsingh के द्वारा
October 11, 2013

आपको बहुत-बहुत बधाई आपकी सफलता पर।

    yogi sarswat के द्वारा
    October 11, 2013

    आभार आपका , सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

hari sharma के द्वारा
September 27, 2013

हिंदी ब्लोगिंग अब भारत से बाहर भी लोग पढ़ रहे हैं इलिए भविष्य तो उज्जवल नज़र आता है

    yogi sarswat के द्वारा
    September 28, 2013

    बहुत बहुत धन्यवाद आपका , स्वागत है

Pooja के द्वारा
September 27, 2013

बेहतर कोशिश योगी जी ! बढ़िया लिखा है आपने

    yogi sarswat के द्वारा
    September 28, 2013

    हार्दिक अभिनन्दन पूजा जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

kokil के द्वारा
September 27, 2013

बिलकुल ! हिंदी ब्लोगिंग दिनोदिन बढ़ रही है

    yogi sarswat के द्वारा
    September 28, 2013

    हार्दिक आभार ! संवाद बनाये रखियेगा

shiv के द्वारा
September 27, 2013

हिंदी ब्लोगिंग की सशक्त तस्वीर पेश करती सार्थक पोस्ट लिखी है योगी जी आपने , बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    September 28, 2013

    स्वागत है आपके विचारों का

anant singh के द्वारा
September 25, 2013

bahut sundar aalekh yogi ji

    yogi sarswat के द्वारा
    September 26, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका !

prem के द्वारा
September 25, 2013

hindi bloging aaj desh ke kone kone mein pahunch rahi hai , mujhe bhi lagta hai yogi ji ki iska bhavishya ujjwal hai ! behatreen aalekh

    yogi sarswat के द्वारा
    September 26, 2013

    स्वागत है आपका ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

rekhafbd के द्वारा
September 23, 2013

योगी जी ,बहुत सुन्दर आलेख ,बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    September 24, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय रेखा जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

aarti singh के द्वारा
September 20, 2013

बहुत सही आलेख योगी जी !

    yogi sarswat के द्वारा
    September 21, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका ! संवाद बनाये रखियेगा

    Spud के द्वारा
    October 18, 2016

    - Great shoot Kelly and completely agree very cool mum!{really loved the crimped hair. I am channelling the 80s right now, I think I had the same hair when I saw INXS for the first ti}e108/22/20m1 – 9:25 pm

parveen panvar के द्वारा
September 20, 2013

लेकिन जब हम हिंदी ब्लॉग पढ़ते हैं , अपने आपको उससे जुड़ा हुआ महसूस करते हैं ! हसी की बात पर हँसते हैं , गंभीर बात पर गंभीर होते हैं ! मतलब अगर एक लाइन में कहूँ तो जहां अंग्रेजी ब्लॉग या अंग्रजी आर्टिकल पढने के दौरान आपका चेहरा भावहीन रहता है जबकि हिंदी या अपनी मात भाषा के ब्लॉग पढने का समय आपका चेहरा हर वो बात कहता है जो आप समझ रहे हैं , जो आप पढ़ रहे हैं ! जो आप महसूस कर रहे हैं !बहुत ही पते की बात कही आपने योगी जी ! हमेशा ही बढ़िया लिखते हैं आप !

    yogi sarswat के द्वारा
    September 21, 2013

    बहुत बहुत आभार मित्रवर ! संवाद बनाये रखियेगा

bdsingh के द्वारा
September 20, 2013

हिन्दी ब्लाग पर विचार पढ़ा , तर्कसंगत विचार,लेख के अंत में काव्य बहुत सुन्दर।

    yogi sarswat के द्वारा
    September 20, 2013

    बहुत बहुत आभार श्री बी. डी. सिंह जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! अतिशय धन्यवाद

vijay pratap के द्वारा
September 19, 2013

योगी जी ,अगर कम शब्दों में कहूँ तो हिंदी ब्लोगिंग के लिए बहुत बेहतर शब्द लिखे हैं आपने ! हाँ , एक बात और भी ! व्यवहारिक रूप से हिंदी कभी भी अंग्रेजी का मुकाबला नहीं कर सकती लेकिन हिंदी भारत में अपना स्थान बना रही है इसमें कोई शक नहीं और यर\इ दिन प्रतिदिन बढ़ रही है !

    yogi sarswat के द्वारा
    September 20, 2013

    आभार मित्रवर ! सुन्दर शब्दों में आपके विचार पढ़कर प्रसन्नता हुई ! संवाद कायम रखियेगा ! धन्यवाद

ajay kumar के द्वारा
September 19, 2013

हम अंग्रेजी आर्टिकल को केवल ख़त्म करना चाहते हैं , पढना चाहते हैं किन्तु उससे जुड़ नहीं पाते ! लेकिन जब हम हिंदी ब्लॉग पढ़ते हैं , अपने आपको उससे जुड़ा हुआ महसूस करते हैं ! हसी की बात पर हँसते हैं , गंभीर बात पर गंभीर होते हैं ! मतलब अगर एक लाइन में कहूँ तो जहां अंग्रेजी ब्लॉग या अंग्रजी आर्टिकल पढने के दौरान आपका चेहरा भावहीन रहता है जबकि हिंदी या अपनी मात भाषा के ब्लॉग पढने का समय आपका चेहरा हर वो बात कहता है जो आप समझ रहे हैं , जो आप पढ़ रहे हैं ! जो आप महसूस कर रहे हैं ! योगी जी , ऐसा हर अपनी भाषा में होता है की जिसे आप जन्म से पढ़ते आये हैं , बोलते आये हैं वो हर तरह से अच्छी लगने लगती है ! हिंदी क्यूंकि अधिकांश भारतियों की भाषा है इसलिए इसका बोलबाला निश्चित रूप से होना ही है लेकिन अंग्रेजी आज के समय की भाषा है , उसे इग्नोर नहीं किया जा सकता ! आपके लेख हमेशा ही बेहतरीन और पठनीय होते हैं , इसमें कोई शक नहीं !

    yogi sarswat के द्वारा
    September 20, 2013

    बहुत सटीक और प्रभावी शब्दों में अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए बहुत बहुत आभार आपका ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अनेक अनेक धन्यवाद

    Buckie के द्वारा
    October 17, 2016

    There are no words to describe how boacuiods this is.

sonam saini के द्वारा
September 19, 2013

हम अंग्रेजी आर्टिकल को केवल ख़त्म करना चाहते हैं , पढना चाहते हैं किन्तु उससे जुड़ नहीं पाते ! लेकिन जब हम हिंदी ब्लॉग पढ़ते हैं , अपने आपको उससे जुड़ा हुआ महसूस करते हैं ! हसी की बात पर हँसते हैं , गंभीर बात पर गंभीर होते हैं ! मतलब अगर एक लाइन में कहूँ तो जहां अंग्रेजी ब्लॉग या अंग्रजी आर्टिकल पढने के दौरान आपका चेहरा भावहीन रहता है जबकि हिंदी या अपनी मात भाषा के ब्लॉग पढने का समय आपका चेहरा हर वो बात कहता है जो आप समझ रहे हैं , जो आप पढ़ रहे हैं ! जो आप महसूस कर रहे हैं ! सभी के मन की बात जान ली आपने ……….. एक सच से परिपूर्ण लेख के लिए बधाई सर जी

    yogi sarswat के द्वारा
    September 19, 2013

    बहुत आभार प्रिय सोनम जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

yamunapathak के द्वारा
September 17, 2013

योगी जी बहुत सुन्दर आलेख है सच है ब्लोग्स तो मन की पुकार है. साभार

    yogi sarswat के द्वारा
    September 17, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय यमुना पाठक जी ! संवाद बानाए रखियेगा ! धन्यवाद

yogi sarswat के द्वारा
September 12, 2013

आप के विचारों से पूर्ण सहमती .बहुत सुन्दर भाव और भाषा है .बधाई .ये प्रतिक्रिया आदरणीय सीमा कँवल जी की तरफ से आई है !

    yogi sarswat के द्वारा
    September 12, 2013

    बहुत बहुत धन्यवाद आपका

yogi sarswat के द्वारा
September 12, 2013

आपका लेख बहुत कुछ सीखने के लिए पड़ता हु जिसमे सम्पूर्णता होती है ! ये विचार मेरे नहीं बल्कि मित्रवर अमन कुमार जी के हैं जो जागरण की तकनीकी समस्या की वजह से दखाई नहीं पड़ रहे हैं !

    yogi sarswat के द्वारा
    September 12, 2013

    बहुत बहुत आभार मित्रवर अमन कुमार जी , आपने मेरे शब्दों को मान दिया ! आशा है आगे भी संवाद बना रहेगा ! धन्यवाद

    Sunny के द्वारा
    October 17, 2016

    A ladyboy Cams blog featuring hot asian tresaaxunl, also knowns as ladyboys goes live and nude on their sex webcam. Showing their sexy hot body and nice great ts tools, keep updating with the hottest ladyboys.

seemakanwal के द्वारा
September 11, 2013

wah ,bahut खूब .आभार

    yogi sarswat के द्वारा
    September 12, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय सीमा कँवल जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    September 11, 2013

    धन्यवाद श्री अजय कुमार जी ! संवाद बनाये रखियेगा !

IndianTopBlogs के द्वारा
September 9, 2013

” जागरण जंक्शन के अलावा नवभारत टाइम्स के ब्लॉग पर जाकर देखें तो पता चलता है एक अच्छी खासी भीड़ हैं पढने वालों की भी और लिखने वालों की भी ! जागरण जंक्शन भी एक ऐसी ब्लॉग साईट है जो हर रोज़ नए नए आयाम स्थापित कर रही है !” आपके इस कथन से सहमत हैं हम. लेकिन यह कहना कि इंग्लिश से हिंदी में अधिक विधाएं हैं, उस भाषा के साथ अन्याय होगा. ITB टीम

    yogi sarswat के द्वारा
    September 11, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका नयी बात बताने के लिए और मेरे शब्दों तक आने के लिए ! संवाद बनाये रखियेगा ! अतिशय धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
September 9, 2013

तेरे घर के द्वार बहुत हैं … इस ब्लॉग में बात बहुत है किस किस को अपनाऊँ मैं! वाह योगी जी, क्या कहने हैं आपके – उस दिन के विषय में सोचिये जिस दिन भारत के हर गाँव और हर घर में इन्टरनेट होगा , तब हिंदी ब्लॉग्गिंग अपने सुनहरे दौर में होगी ! … और तब सुखिया के स्वर का लोकगीत और हरखू का विरहा भी हम ब्लॉग में पढ़ सकेंगे … खेतों में किसानों का आल्हा और बैलों के गले की घुँघरू के स्वर भी सुन सकेंगे. जुम्मन चाचा के मुंह से मनगढ़ंत किस्से भी पढ़ सकेंगे. फिर कैसे नहीं होगा हिंदी ब्लॉग्गिंग का स्वर्णिम भविष्य. वाह मजा आ गया … भुट्टा भूनने के खुशबू आ रही है … देखता हूँ, गरम गरम नरम नरम मकई के दाने क्या कहते हैं कोर्न फ्लेक्स … न मकई ही रहने दीजिये ‘मक्के की रोटी और सरसों की साग’!!!!

    yogi sarswat के द्वारा
    September 9, 2013

    बहुत सुन्दर शब्दों में हिंदी के प्रति प्रेम को दर्शाती प्रतिक्रिया पाकर अच्छा लगा आदरणीय श्री जवाहर सिंह जी ! आशा है एक दिन हिंदी अपना नाम करेगी ! बहुत बहुत आभार ! सहयोग की कामना करता हूँ

rajanidurgesh के द्वारा
September 7, 2013

सारस्वतजी, बधाई उत्कृष्ट लेख . आपने जो लिखा है वह हमें सोचने पर विवश कर रहा है. लेकिन ताज्जुब तब होता है जब हिंदी के कारण कड़ोरों कमाने वाली अभनेत्री “करीना कपूर खान” कहती है की उन्हें हिंदी बोलने में तकलीफ होती है और अंग्रेजी में सहज महसूस करती है!. ऐसे लोग लाखों में हैं और उन्हीं के वजह से शायद थोड़ी दिक्कत है.

    yogi sarswat के द्वारा
    September 9, 2013

    उन्हें अपने पैसे कमाने से मतलब है आदरणीय रजनी जी ! सुन्दर शब्दों में आपका प्रोत्साहन मिला ! आभार ! संवाद बनाये रखियेगा

    ajay kumar के द्वारा
    September 19, 2013

    इसमें कोई गलत बात नहीं है रजनी जी , ये लोग अन्तर नेशनल लेवल के लोग होते हैं और ज्यादातर बाहर ही होते हैं ऐसे में उन्हें यही भाषा ज्यादा बेहतर लगती है ! हिंदी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए की फलां व्यक्ति हिंदी जानते हुए भी हिंदी नहीं बोलता है !

    yogi sarswat के द्वारा
    September 20, 2013

    सहमत हूँ आपकी बात से मित्रवर अजय जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

Bhagwan Babu के द्वारा
September 7, 2013

बहुत सही कहा आपने.. हिंदी दिवस ही हिंदी को कमजोर बना रहे है… हमें हिंदी पर कार्य करने की जरुरत है न की हिंदी पर कोइ चर्चा करने की धन्यवाद एइसा भी होता है कभी कभी की किसी को बीमारी न हो और उसे बार बार कहा जाए की तुम बीमार हो तो वह जल्द ही बीमार हो जाएगा.. और एक बीमार को बार बार कहा जाए की तुम स्वस्थ हो तो मुमकिन की वह जल्द ही स्वस्थ हो जायगा..

    yogi sarswat के द्वारा
    September 9, 2013

    प्रभावी शब्दों में आपके विचारों का हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ श्री भगवान् बाबु जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! बहुत बहुत धन्यवाद

September 7, 2013

सही कहा योगी जी एक मरण दिन की तरह ही याद करते हैं हिंदी को भारतीय .

    yogi sarswat के द्वारा
    September 9, 2013

    बहुत बहुत आभार शालिनी जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

Rajesh Dubey के द्वारा
September 6, 2013

भावपूर्ण अभिव्यक्ति अपनी भाषा में ही हो सकती है. दूसरों की बोली या भाषा में बात कहा जा सकता है पर भावपूर्ण नहीं. आज के कम्प्यूटर के ज़माने में हिंदी अंग्रेजी से कम किसी मायने में नहीं है. हिंदी की प्रतिष्ठा है और रहेगी.

    yogi sarswat के द्वारा
    September 9, 2013

    सार्थक शब्दों में आपके विचारों का हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ श्री राजेश दुबे जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! अतिशय धन्यवाद

nishamittal के द्वारा
September 5, 2013

वाह सहमत

    yogi sarswat के द्वारा
    September 9, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय निशा जी मित्तल ! आपका आशीर्वाद मिला

    Wilhelmina के द्वारा
    October 17, 2016

    This aritlce is a home run, pure and simple!


topic of the week



latest from jagran