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हिंदी आन्दोलन और अभिव्यक्ति की भाषा है (हिन्दी बाजार की भाषा है, गर्व की नहीं) contest

Posted On: 13 Sep, 2013 Others,Contest में

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जागरण जंक्शन की ब्लॉग शिरोमणि प्रतियोगिता चल रही है ! ख़ुशी इस बात की है कि लोग बहुत अच्छी और जानकारी वाली पोस्ट लिख रहे हैं ! ये है हिंदी की ताकत ! ये बात हर मौके पर उठकर आती है कि हिंदी गर्त में जा रही है , हिंदी बोलने वाले कम हो रहे हैं या हिंदी जानने वाले हिंदी बोलना ही नहीं चाहते ! कुछ सच्चाई तो है इन बातों में लेकिन पूर्ण सच्चाई नहीं है ! हर एक आदमी की मानसिकता अलग होती है , कोई हिंदी बोलना शान के खिलाफ समझता है , कोई इसे गरीबों की भाषा समझता है तो कोई इसे अभिव्यक्ति और सम्मान की भाषा समझता है ! ये सही है कि हमारे हिंदी के फिल्म अभिनेता ज्यादातर सार्वजनिक स्थानों पर अंग्रेजी में वार्तालाप करते हुए दीखते हैं लेकिन यही लोग हिंदी फिल्में पाने और अपना प्रचार करने के लिए हिंदी का प्रयोग करते हैं ! इसमें उन्हें दोष देना गलत है क्योंकि पेट सबसे बड़ी जरुरत है वो चाहे किसान का हो , मजदूर का हो या एक अभिनेता का हो ! लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जो हमेशा ही हिंदी को वरीयता देते हैं ! निश्चित ही सबसे पहला नाम महानायक अमिताभ बच्चन का आता है जो न केवल हिंदी बोलते हैं बल्कि बहुत शुद्ध और उच्चकोटि की हिंदी बोलते हैं ! मनोज वाजपायी , आशुतोष राणा की हिंदी से कौन वाकिफ नहीं है ? इसी दौर में प्रकाश झा जैसे डाइरेक्टर हिंदी को बढ़ावा देते हुए दीखते हैं ! और क्यूंकि हम सब जानते हैं कि हिंदी फिल्मों का बाज़ार दिनों दिन भारत से निकलकर श्री लंका और दुबई के रास्ते होते हुए यूरोप और जापान तक की गलियों में पहुँच रहा है , तो ऐसे में हिंदी का बोलबाला स्वतः ही दिखने लगता है ! कभी कभी हिंदी को लेकर दक्षिण में जो कुछ दिखाई देता है असल में वो असली नहीं है वो पैदा किया हुआ होता है ! क्यूंकि अगर वो पैदा नहीं होगा तो वोट बटोरने की मशीन ख़त्म हो जायेगी और मुझे ये गलत भी नहीं लगता ! गलत यानी कि ये की उन पर हिंदी थोपी जाए ? आखिर क्यूँ थोपी जाए दक्षिण में हिंदी ? हिंदी भारतीय भाषाओँ की बड़ी बहन जैसी है और मुझे लगता है उसे छोटी बहनों को भी प्यार करना चाहिए ! हिंदी , क्यूंकि बड़ी बहन है तो उसे और दूसरी भाषाओँ को भी सम्मान और उचित स्थान देना चाहिए ! हिंदी स्वयं में ही इतनी सुन्दर भाषा है कि लोग खिचे आते हैं ! मुझे उत्तर पूर्व में बहुत बार यात्रा करने का अवसर प्राप्त हुआ है लेकिन मुझे कभी भी ऐसी समस्या नहीं आई कि मैं अपनी बात हिंदी में उन लोगों को नहीं समझा सका ! हाँ , ये जरुर है कि ग्रामीण इलाकों में जरुर कुछ मुश्किल आती है किन्तु ऐसा तो हर जगह होता है ! आपको भोजपुरी समझने में दिक्कत हो सकती है , आपको राजस्थानी समझने में दिक्कत हो सकती है और यहाँ तक कि आपको हरियाणवी समझने में भी परेशानी हो सकती है लेकिन ये सब हिंदी के साथ चलती रहती हैं !


आज़ादी से पहले या आज़ादी के बाद भारत में जब जब सामाजिक आन्दोलन हुए हैं उनमें हिंदी को प्राथमिकता मिली है ! लोगों ने अपने विचार , अपने आन्दोलन , अपनी क्रांति को हिंदी के माध्यम से व्यक्त किया है ! भगत सिंह ने हमेशा पंजाबी और हिंदी में लिखा है ! लोहिया , राज नारायण जी से लेकर अन्ना हजारे तक ने अपनी अभिव्यक्ति को हिंदी में ही व्यक्त किया है और हिंदी ने ही इन आंदोलनों और क्रांतियों को सांस दी हैं और अपने उच्चतम शिखर तक गयी हैं ! इसलिए मुझे लगता है हिंदी में वो ताकत है जो किसी भी आन्दोलन और सामाजिक परिवर्तन को आगे लेकर जा सकती है ! हिंदी का सौभाग्य है कि वो एक मुख्य भाषा बनकर आगे चल रही है और मुझे भरोसा है कि एक दिन संयुक्त राष्ट्र महासभा में में भी जरुर हिंदी को आधिकारिक भाषा का सम्मान मिलेगा ! ये मिल सकता है अगर हम इसकी पैरवी प्रभावी तरीके से करें ! संयुक्त राष्ट्र महासभा में माननीय अटल बिहारी वाजपायी जी द्वारा दिया गया भाषण किसे याद नहीं है ? इसलिए हिंदी के लिए ये जरुरी हो जाता है कि उसकी हिमायत प्रभावी तरीके से हो ! हिंदी के प्रति कुछ शब्द काव्य के रूप में लिखकर आपसे विदा लेता हूँ :


मन समर्पित तन समर्पित और यह जीवन समर्पित
चाहता हूँ मातृ-भू तुझको अभी कुछ और भी दूँ ॥

माँ तुम्हारा ऋण बहुत है मैं अकिंचन
किन्तु इतना कर रहा फिर भी निवेदन
थाल में लाऊँ सजाकर भाल जब
स्वीकार कर लेना दयाकर यह समर्पण
गान अर्पित प्राण अर्पित रक्त का कण-कण समर्पित ॥


माँज दो तलवार को लाओ न देरी
बाँध दो कसकर कमर पर ढाल मेरी
भाल पर मल दो चरण की धूलि थोड़ी
शीष पर आशीष की छाया घनेरी
स्वप्न अर्पित प्रश्न अर्पित आयु का क्षण-क्षण समर्पित ॥


जय हिन्द ! जय हिंदी

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59 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Kaiden के द्वारा
October 17, 2016

goodhello Buddies,i want some helps .who can teach me howto download some viodiees in youtube!i am a chinese boy for me,Ametian website is a new wordplease email or MSh1unNuqii@y63.com

hari sharma के द्वारा
September 27, 2013

आपको ऐसा लगता है क्यूंकि आप केवल उत्तर भारत की बात कर रहे हैं , हकीकत नहीं है ये योगी जी

    yogi sarswat के द्वारा
    September 28, 2013

    बहुत बहुत स्वागत है आपका श्री हरी शर्मा जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

Pooja के द्वारा
September 27, 2013

स्वागत है योगी जी एक बेहतरीन पोस्ट का , लिखते रहिये

    yogi sarswat के द्वारा
    September 28, 2013

    आभार आपका ! संवाद बनाये रखें

kokil के द्वारा
September 27, 2013

बहुत सटीक और सुन्दर आलेख

    yogi sarswat के द्वारा
    September 28, 2013

    हार्दिक अभिनन्दन ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

shiv के द्वारा
September 27, 2013

बिलकुल! इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता की हिंदी को भले ही राजनीती के चलते राष्ट्र भाषा का दर्ज़ा न मिला हो किन्तु ये राजनीतिकों की भाषा रही है और आज भी है

    yogi sarswat के द्वारा
    September 28, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका !

anant singh के द्वारा
September 25, 2013

bilkul . hindi andolan ki bhasha rahi hai ! chahe vo jay prakash hon ya anna hajare , sabne hindi ko apni abhivyakti ka madhyam banaya hai !

    yogi sarswat के द्वारा
    September 26, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

prem के द्वारा
September 25, 2013

ekdam sateek lekhan yogi ji

    yogi sarswat के द्वारा
    September 26, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका ! संवाद बनाये रखियेगा !

aarti singh के द्वारा
September 20, 2013

आखिर में कविता देकर आपने अपने लेख को और भी शोभायमान और प्रभावी बना दिया है योगी जी ! हार्दिक बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    September 21, 2013

    बहुत बहुत आभार आरती सिंह जी , आपने अपना समय और विचार दिए ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अनेक अनेक धन्यवाद

parveen panvar के द्वारा
September 20, 2013

कभी कभी हिंदी को लेकर दक्षिण में जो कुछ दिखाई देता है असल में वो असली नहीं है वो पैदा किया हुआ होता है ! क्यूंकि अगर वो पैदा नहीं होगा तो वोट बटोरने की मशीन ख़त्म हो जायेगी और मुझे ये गलत भी नहीं लगता ! गलत यानी कि ये की उन पर हिंदी थोपी जाए ? आखिर क्यूँ थोपी जाए दक्षिण में हिंदी ? हिंदी भारतीय भाषाओँ की बड़ी बहन जैसी है और मुझे लगता है उसे छोटी बहनों को भी प्यार करना चाहिए ! हिंदी , क्यूंकि बड़ी बहन है तो उसे और दूसरी भाषाओँ को भी सम्मान और उचित स्थान देना चाहिए ! ekdam sahi , bharat azad desh है और मुझे लगता है हर किसी को अपनी भाषा बोलने का हक़ है ! हम हिंदी को किसी पर थोप नहीं सकते लेकिन इसके सौंदर्य से औरों को प्रभावित कर सकते हैं ! बेहतरीन लेख योगी जी

    yogi sarswat के द्वारा
    September 21, 2013

    सार्थक शब्दों में अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए हार्दिक अभिनन्दन मित्रवर प्रवीण जी ! संवाद बनाये रखियेगा

Prasneet Yadav के द्वारा
September 20, 2013

मन समर्पित तन समर्पित और यह जीवन समर्पित चाहता हूँ मातृ-भू तुझको अभी कुछ और भी दूँ ॥ माँ तुम्हारा ऋण बहुत है मैं अकिंचन किन्तु इतना कर रहा फिर भी निवेदन थाल में लाऊँ सजाकर भाल जब स्वीकार कर लेना दयाकर यह समर्पण गान अर्पित प्राण अर्पित रक्त का कण-कण समर्पित ॥ वाह भाई क्या बात है सार्थक और सुंदर :)

    yogi sarswat के द्वारा
    September 20, 2013

    हार्दिक अभिनन्दन मित्रवर प्रस्नीत यादव जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! अनेक अनेक धन्यवाद

vijay pratap के द्वारा
September 19, 2013

आन्दोलन ज्यादातर अपनी भाषा में ही होते हैं योगी जी , ऐसा जरुरी नहीं की तमिल नाडू में या आंध्र में कोई आन्दोलन हो रहा है तो उसके लिए पहले हिंदी सीखने की जरुरत पड़े ! हाँ , ये जरुर कहूँगा की राष्ट्रिय स्तर के आन्दोलन के लिए हिंदी बोलना बहुत जरुरी हो जाता है जैसे अन्ना का आन्दोलन ! प्रभावी लेखन !

    yogi sarswat के द्वारा
    September 20, 2013

    बहुत सटीक और स्पष्ट शब्दों में अपने विचार रखने के लिए आपका बहुत बहुत अभिनन्दन मित्रवर विजय प्रताप जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

ajay kumar के द्वारा
September 19, 2013

हर एक आदमी की मानसिकता अलग होती है , कोई हिंदी बोलना शान के खिलाफ समझता है , कोई इसे गरीबों की भाषा समझता है तो कोई इसे अभिव्यक्ति और सम्मान की भाषा समझता है ! ये सही है कि हमारे हिंदी के फिल्म अभिनेता ज्यादातर सार्वजनिक स्थानों पर अंग्रेजी में वार्तालाप करते हुए दीखते हैं लेकिन यही लोग हिंदी फिल्में पाने और अपना प्रचार करने के लिए हिंदी का प्रयोग करते हैं ! इसमें उन्हें दोष देना गलत है क्योंकि पेट सबसे बड़ी जरुरत है वो चाहे किसान का हो , मजदूर का हो या एक अभिनेता का हो ! ये तो हकीकत है ! आदमी अंग्रेजी अपने काम के लिए और अपनी शान के लिए बोलता है ! बढ़िया लेख

    yogi sarswat के द्वारा
    September 20, 2013

    सार्थक शब्दों में अपने विचार रखने के लिए आपका बहुत बहुत आभार ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अतिशय धन्यवाद

ajay kumar के द्वारा
September 19, 2013

आखिर क्यूँ थोपी जाए दक्षिण में हिंदी ? हिंदी भारतीय भाषाओँ की बड़ी बहन जैसी है और मुझे लगता है उसे छोटी बहनों को भी प्यार करना चाहिए ! हिंदी , क्यूंकि बड़ी बहन है तो उसे और दूसरी भाषाओँ को भी सम्मान और उचित स्थान देना चाहिए !bahut pate ki baat kahi hai aapne yogi ji , har kisi ko apni bhasha se pyaar aur lagaav hota hai aise mein sirf hindi ko pyaar koi tamil bolne waala kaise de sakega ? bahut badhiya

    yogi sarswat के द्वारा
    September 20, 2013

    बहुत बहुत आभार मित्रवर अजय कुमार जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

    Jayce के द्वारा
    October 17, 2016

    There are no words to describe how boaicdous this is.

yogi sarswat के द्वारा
September 19, 2013

सुन्दर आलेख और कविता ने चार चाँद लगा दिए . सादर आभार . ये मेरी नहीं आदरणीय सीमा कंवल जी की प्रतिक्रिया है ! जागरण की तकनीकी समस्या की वजह से ये दिख नहीं पा रही है तो उनकी अनुमति लेकर मैं यहाँ चिपका दे रहा हूँ !

    yogi sarswat के द्वारा
    September 20, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय सीमा कंवल जी ! आपका समर्थन लगातार मिल रहा है ! आगे भी संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

sonam saini के द्वारा
September 19, 2013

सार्थक लेख योगी सर जी …..

    yogi sarswat के द्वारा
    September 19, 2013

    बहुत बहुत आभार प्रिय सोनम जी ! संवाद बनाये रखियेगा

sinsera के द्वारा
September 17, 2013

सार्थक और उपयोगी आलेख योगी जी…बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    September 17, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय सरिता सिन्हा जी , मेरे शब्दों को आपका समर्थन मिला ! सहयोग बनाये रखियेगा ! हार्दिक धन्यवाद

    Andie के द्वारा
    October 17, 2016

    Play inrtmfaoive for me, Mr. internet writer.

yamunapathak के द्वारा
September 17, 2013

योगी जी इस विषय पर आपके विचार बहुत ही सुन्दर और व्यवहारिक हैं .और हाँ, जो काव्य पंक्तियाँ आपने लिखी हैं ‘तन समर्पित…यह मैं बहुत दिनों से ढूंढ़ रही थी,बचपन में हमारे संगीत शिक्षक ने इसे गीत बना कर गणतंत्र दिवस पर गवाया था बहुत सुन्दर गीत संगीत बना था यह.आपको इसके लिए भी अतिशय धन्यवाद. साभार

    yogi sarswat के द्वारा
    September 17, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय यमुना जी ! एक और ब्लोगार बंधू श्री संतलाल जी ने बताया की ये गीत श्री राम अवतार त्यागी जी का लिखा हुआ है ! आपने मेरे शब्दों पर गौर किया और अपने विचार प्रस्तुत किया , हार्दिक अभिनन्दन ! संवाद बनाये रखियेगा

Pradeep Kesarwani के द्वारा
September 16, 2013

बहुत सुन्दर अभिलेख …. और पंक्तिया आभार

    yogi sarswat के द्वारा
    September 17, 2013

    बहुत बहुत आभार ! संवाद बनाये रखियेगा

rekhafbd के द्वारा
September 16, 2013

योगी जी , आज़ादी से पहले या आज़ादी के बाद भारत में जब जब सामाजिक आन्दोलन हुए हैं उनमें हिंदी को प्राथमिकता मिली है ! लोगों ने अपने विचार , अपने आन्दोलन , अपनी क्रांति को हिंदी के माध्यम से व्यक्त किया है ! भगत सिंह ने हमेशा पंजाबी और हिंदी में लिखा है ! लोहिया , राज नारायण जी से लेकर अन्ना हजारे तक ने अपनी अभिव्यक्ति को हिंदी में ही व्यक्त किया है और हिंदी ने ही इन आंदोलनों और क्रांतियों को सांस दी हैं और अपने उच्चतम शिखर तक गयी हैं ! इसलिए मुझे लगता है हिंदी में वो ताकत है जो किसी भी आन्दोलन और सामाजिक परिवर्तन को आगे लेकर जा सकती है बहुत सुन्दर आलेख ,बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    September 17, 2013

    सार्थक और प्रभावी शब्दों में हिंदी की हिमायत करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार ! आशीर्वाद

Bhagwan Babu के द्वारा
September 16, 2013

हिन्दी के लिए… आपने बहुत बढ़िया लेख लिखा है.. … बधाई..

    yogi sarswat के द्वारा
    September 17, 2013

    हार्दिक अभिनन्दन श्री भगवान् बाबु जी !

nishamittal के द्वारा
September 16, 2013

योगी जी मेरे विचार से राज्यों की अपनी भाषाओँ को महत्व म,इलना चाहिए परन्तु हिंदी सीखना अनिवार्यता होनी चाहिए सम्पर्क और राह्त्रिया भाषा का स्थान देने के लिए जरूरी है

    yogi sarswat के द्वारा
    September 17, 2013

    बिलकुल ! मैं आपकी बात से सहमत हूँ आदरणीय निशा जी मित्तल ! आपका बहुत बहुत आभार ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा ! हार्दिक धन्यवाद

amitsinha के द्वारा
September 15, 2013

योगी जी, बेहतर आलेख।

    yogi sarswat के द्वारा
    September 16, 2013

    बहुत बहुत आभार सिन्हा साब ! संवाद बनाये रखियेगा !

udayraj के द्वारा
September 14, 2013

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना । हिंदी है हम वतन हैं हिंदोस्ता हमारा ।। हिंदी किसी एक समाज, जाति अथवा राष्ट्रम की भाषा नहीं है । वह पूरे हिंदुस्तापन की भाषा है । वह सभी भाषा – भाषी के बीच सम्पर्क स्थापित करने वाली सरल, सहज भाषा है । यह आज आम लोगों की जरूरत बन गयी है । आज इसका विकस हो रहा है , यह विकास ही है कि हम कंप्यूटर पर हिंदी लिपि में साहित्य की रचना कर रहे हैं आदि । पर कुछ लोग हिंदी की रोटी खाकर विदेशी भाषा में बोलना अपनी शान समझते है । पर यह शत प्रतिशत सत्य हैं चाहे कितना ही अंग्रेजी आप बोलिए आपको अंग्रेज अपनाएंगे नहीं इंडियन ही बोलेगे ‍। धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का । अत: सभी भाषा जानना जरुरी है पर अपनी भाषा की अवहेलना करके नहीं ।

    yogi sarswat के द्वारा
    September 16, 2013

    अत: सभी भाषा जानना जरुरी है पर अपनी भाषा की अवहेलना करके नहीं ।बहुत सुन्दर शब्दों में आपने अपने विचार व्यक्त किये हैं श्री उदय राज जी ! बहुत बहुत आभार ! संवाद बनाये रखियेगा

Santlal Karun के द्वारा
September 13, 2013

आदरणीय सारस्वत जी, हिन्दी पर आप का आलेख प्रशंसनीय है, पर नीले रंग में प्रस्तुत गीत-छंद प्रख्यात स्वर्गीय गीतकार रामावतार त्यागी जी के हैं — ‘और भी दूँ’ नामक गीत के | उनके प्रति श्रद्धा-रूप में कहीं उनके नाम का उल्लेख होता, तो यह लेख और स्मरणीय हो जाता |

    yogi sarswat के द्वारा
    September 16, 2013

    आदरणीय श्री संतलाल जी सादर अभिनन्दन ! असल में मुझे गीतकार राम अवतार त्यागी जी का नाम पहले से पता नहीं था जब इस गीत को अंतरजाल से लेकर डाला तब उस पर उनका नाम नहीं था ! मैं पुनः आपका आभार व्यक्त करता हूँ की आपने मुझे एक जानकारी दी और ये भी मानता हूँ की उन्हें उनका क्रेडिट मिलना चाहिए ! आपका बहुत बहुत आभार ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा ! हार्दिक धन्यवाद

Ravindra K Kapoor के द्वारा
September 13, 2013

ये लेख एक सुन्दर लेख और सच है उन के लिए जो हिंदी को आगे तो बढ़ाना चाहते हैं पर दूसरी भाषाओं को आदर और प्यार के बिना. हिन्दी को आगे बढ़ाने मैं निश्चित तौर पर हमारी फ़िल्मी दुनिया का बहूत बढ़ा हाँथ है. मेरे विचार से हम हिन्दी को तभी दुनिया की सबसे समर्द्ध भाषा बना पाएंगे, जब हम केवल बातों से नहीं कुछ दूसरी भाषाओं के साहित्य को हिन्दी मैं अनुवाद कर इसे ज्यादा से ज्यादा समर्द्ध भाषा बनाने के कार्य को करना प्रारम्भ कर सकें. सुभकामनाओं के साथ …रवीन्द्र

    yogi sarswat के द्वारा
    September 16, 2013

    मेरी बातों को स्वर और समर्थन देने के लिए आपका बहुत बहुत आभार श्री रविन्द्र कपूर जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
September 13, 2013

वाह वाह योगी जी, वाह जितनी भे प्रशंशा की जाय कम है …. आपने वो हर पहलू की चर्चा की है जिससे हिंदी का सम्मान बढ़ा है और आगे भी बढ़ेगा… सिर्फ बढ़ेगा ही नहीं बल्कि सम्मान के अधिकार की मांग होने लगेगी. आपने माननीय अटल बिहारी के साथ अमिताभ बच्चन, मनोज बाजपेयी, आशुतोष राणाऔर प्रकाश झा की चर्चा की निश्चित ही और नाम जोड़े जा सकते हैं , सबका आशय यही है की हिंदी गरीबों के साथ साथ अभिजात वर्ग की भी भाषा है और इसके प्रयोग में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है … हम तन मन धन से हिन्दीके लिए समर्पित हैं … मन समर्पित तन समर्पित और यह जीवन समर्पित चाहता हूँ मातृ-भू तुझको अभी कुछ और भी दूँ ॥ माँ तुम्हारा ऋण बहुत है मैं अकिंचन किन्तु इतना कर रहा फिर भी निवेदन थाल में लाऊँ सजाकर भाल जब स्वीकार कर लेना दयाकर यह समर्पण गान अर्पित प्राण अर्पित रक्त का कण-कण समर्पित ॥

    yogi sarswat के द्वारा
    September 16, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय श्री जवाहर सिंह जी ! आगे भी आपके सहयोग और प्रेरणा की कामना करता हूँ ! अनेक अनेक धन्यवाद


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