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राति माछर नैं खाइ लई रे .....

Posted On: 24 Oct, 2013 Others में

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बहुत दिनों से ब्रज में विवाह के समय में गाये जाने वाले गीतों के विषय में आपसे बात करना चाह रहा था लेकिन वक्त के आगे सबको सर झुकाना पड़ता है , मैं भी झुकाए हुए खड़ा रहा ! अब कुछ फुर्सत मिली तो सोचा आज आपसे इस विषय पर बात करी जाए ! हालाँकि भारत में ये माना जाता है कि पग पग भाषा और कोस कोस पर बोली बदलती है ! एक कहावत भी है ब्रज भाषा में ! कोस कोस पर पानी बदले कोस कोस पर बानी ! बानी मतलब वाणी यानी बोली ! बहुत स्पष्ट रूप से इसे मेरे यहाँ से समझा जा सकता है ! मेरा गाँव उत्तर प्रदेश के जनपद अलीगढ में जिला मुख्यालय से 32 किलोमीटर दूर सिकतरा सानी है और मेरे गाँव से बस एक बम्बा (राजवाहा ) पार करके दूसरा गाँव नगला केसिया है ! परिचय देने का कोई मकसद नहीं है बस भूमिका बनानी है ! मेरा गाँव ब्राह्मण बहुल है जबकि अगला गाँव यादव बहुल ! मेरा गाँव बहुत छोटा है उनकी तुलना में लेकिन मेरे गाँव से हर परिवार से कम से कम एक व्यक्ति सरकारी नौकरी में है और ज्यादातर इंजिनियर हैं ! मैं भी उनमें शामिल हूँ ! लेकिन सरकारी नहीं ! बात बोली की ! केवल कुछ कदम पर दूर इन दौनों गाँव की बोली में जमीन आसमान का अंतर है ! जैसे मेरे गाँव में माँ को माँ या मम्मी बोलते हैं वहां जिया बोलते हैं ! मेरे गाँव में अगर किसी लड़की का नाम सुनीता है तो उसे सुनीता ही बोला जाएगा लेकिन वहां उसे सुनितनियाँ कहा जाएगा ! मेरे गाँव में हर शब्द में ‘ म ‘ मिला दिया जाता है जैसे खाना खाना है को कहेंगे मोए खानों खाम्नों ऐं या फिर खानों खाओनोन ऐं ! वो बाज़ार जामतु ऐ !


खैर ये बोली है और हर बोली बोलने वाला अपने आपको गर्वित महसूस करता है ! बोली बोली होती है अच्छी या बुरी नहीं ! विषय पर आते हैं ! ब्रज में अधिकांश विवाह 5 दिन के होते हैं ऐसे 3 दिन और 7 दिन के भी होते हैं लेकिन व्यस्तता और शायद आर्थिक कारणों की वजह से अब 3 दिन के भी होने लगते हैं ! चट मंगनी पट ब्याह भी खूब चल रहा है ! और जगहों की तरह यहाँ भी महिला संगीत की धुनें पूरे जोश और उत्साह में होता है ! मैं ज्यादा विस्तृत नहीं जाऊँगा ! इसमें ज्यादा वक्त लगेगा ! दो विशेष बातें ही कहूँगा !


जब महिला संगीत होता है तो लगभग हर महिला को नृत्य करना होता है जो ज्यादा कुशल होती हैं उनका लगभग प्रतिदिन होता है अन्यथा बारी बारी से ! ये संगीत जब समाप्त होता है तब घर की मुख्य महिला सहित सभी महिलाएं घर के द्वार (दरवाज़े ) तक आती हैं और फिर संगीत ख़त्म करने का रिवाज़ करती हैं ! ये रिवाज़ असल में एक ढोला (लोकगीत ) होता है ! उनमें से ही एक बहुत ज्यादा गाया जाने वाला ढोला है जिसकी कुछ पंक्तियाँ आज भी दिमाग और दिल में हैं जो हमेशा अच्छी लगती हैं !


मोरी पै बिछा इ लई खाट ……………………………रात माछर नैं खाइ लई रे ।

मुझे पूरा याद नहीं है ! किसी को याद हो तो कृपया पूरा करें ! आभारी होऊंगा !


एक और विशेष आयोजन याद आ रहा है ! जिस दिन बरात जाने को होती है उस दिन से एक दिन पहले मंडप (मढ़ा या माढौ ) होता है जिसमें दुल्हे को अपने सगे सम्बन्धियों से भिक्षा मांगनी होती है ! माताम भिक्षाम देइ ! मुझे नहीं मालुम इसका प्रयोजन क्या है !


एक विशेष, बहुत विशेष आयोजन और होता है ! घूरे का पूजन ! जो लोग घूरा नहीं जानते उनके लिए -वो जगह जहां मवेशियों का गोबर और अन्य मल पदार्थ डाले जाते हैं ! उसकी भी पूजा होती है ! और उस वक्त दुल्हे को आँखें बंद करके , यानी आँखों पर पट्टी बांधकर ले जाया जाता है पूजन के लिए ! उस समय एक गाना गया जाता है ! बहुत मधुर स्वर में लेकिन उससे भी ज्यादा इसके शब्द बहुत यथार्थ लगते हैं ! कुछ पंक्तियाँ देखें –

चिड़ी तोय चामडिया भावै ……………………घर में सुन्दर नारि तोय पर नारी भावै !


घूरे का पूजन मुझे इस सन्दर्भ में लगता है कि शायद हमारे त्यौहार और पर्व निर्माताओं ने हर चीज को महत्त्व दिया है और एक आम आदमी की जिंदगी में उसका पूजन एक दिन जरुर करने का प्रावधान किया है ! देखें – होली के एकदम बाद आने वाले पर्व बासौड़ा पर कुकुर (कुत्ते ) को पूजा जाता है और खाना खिलाया जाता है ! मतलब कुत्ते का एक दिन ! विवाह के अवसर पर घूरे का पूजन यानी घूरे के भी दिन बहुर (सुधर ) जाते हैं ! गोवर्धन पूजा यानी गोबर की पूजा ! अष्टमी के दिन पुत्र की लम्बी आयु की कामना और अभी अभी निकली करवा चौथ के दिन पति नाम के प्राणी की लम्बी आयु की कामना ! मतलब पति के लिए भी एक दिन ! तो इस हिसाब से पति कौन हुआ ? आप तय कर लें !

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करवा चौथ पर कुछ बात कर लें ! आमतौर पर साल में 365 दिन होते हैं और उनमें से एक दिन पति के लिए ! बाकी 364 दिन पत्नी के लिए ? यानी पत्नी 364 दिन पति को सताए और जब पाप का घड़ा भर जाए तो एक दिन उसे खाली कर लो ! जैसे लोग हजार कर्म करने के बाद गंगा नहा आते हैं ! बढ़िया है ! लेकिन फिर भी मैं अपने नीति निर्माताओं को धन्यवाद दूंगा कि उन्होंने कम से कम एक दिन तो पति को दिया ! जय हो ! करवा चौथ के ही दिन की बात है ! मैं पत्नी के लिए दूसरी गली से करवा चौथ के लिए ही करवा लेने गया था ! वहां दो महिलाएं एक आदमी को दौनों तरफ से खींच रही थी ! एक जोर जोर से चिल्ला रही थी ये मेरा पर्सनल पति है , तू कोई और देख ले ! हे भगवान् ! ये पर्सनल पति क्या होता है ? मामला समझ में आ गया था लेकिन आपको बताऊंगा नहीं ! रहने देते हैं ! लेकिन फिर भी -पति पर दया आ रही थी ! सींकिया पहलवान दो पाटों में पिस रहा था ! मैंने पहले पर्सनल कम्पुटर , पर्सनल गाडी तो सुना था ! ये पेर्सोनेल पति ? खैर मैं भी एक पति हूँ , समझ सकता हूँ पतियों का हाल !


बाकी बातें फिर कभी होंगी ! तब तक करवा चौथ को याद करते रहिये ! और अपने ग़मों को भूल जाइये , पत्नी के रूद्र रूप को भी भूल जाइये ! अगले साल फिर करवा चौथ आएगा !

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जय हो !

(सभी महिलाओं का मैं दिल से सम्मान करता हूँ और उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मेरा कोई इरादा नहीं है और न ही मैं हिन्दू रीति रिवाजों के खिलाफ हूँ इसलिए आप सभी से करबद्ध प्रार्थना है इसे दिल तक न जाने दें )

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22 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Suzy के द्वारा
October 17, 2016

Ja, som man lyssnade på Savage Garden en gång i tiden. Blir nästan sugen påa tt lpocka fram gamla CD-skivor..Tack Cecilia, förresten, jag satt och kollade igenom igår tills klockan blev alldeles för my.ket.c=)Pixie: Jag har ännu inte sett miniserien, men eftersom jag verkligen gillar första filmen kommer jag naturligtvis att göra det. Och ja, det här är en riktig höjdarbok i mitt tycke.=) Läs gärna, gärna!

harirawat के द्वारा
December 16, 2013

योगी जी बहुत सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई ! रतियन को खटियन पे मच्छर आयो रे, खटियन के नीचे रतियन बिताई रे !

    yogi sarswat के द्वारा
    December 18, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय श्री हरी रावत जी ! आशीर्वाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

seemakanwal के द्वारा
November 3, 2013

मज़ेदार लेख आभार .

    yogi sarswat के द्वारा
    November 6, 2013

    बहुत बहुत आभार आदरणीय सीमा कंवल जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! अतिशय धन्यवाद

manoranjanthakur के द्वारा
October 31, 2013

दोनों बर्ग के लिए ..umda …सोचनिये बहुत बहुत बधाई

    yogi sarswat के द्वारा
    November 6, 2013

    बहुत बहुत आभार श्री मनोरंजन ठाकुर जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! अतिशय धन्यवाद

aarti singh के द्वारा
October 30, 2013

अपने ब्रज क्षेत्र के विषय में बढ़िया जानकारी देते हुए आपने करवा चौथ के विषय में जो कुछ लिखा है वो तार्किक तो है किन्तु व्यवहारिक नहीं लगता ! लेकिन अंततः एक ही बात कहूँगी , बेहतरीन लेख है ! पढ़ने लायक है

    yogi sarswat के द्वारा
    October 30, 2013

    बहुत बहुत आभार आपका ! सहयोग बनाये रखियेगा आरती जी

prem के द्वारा
October 26, 2013

हालाँकि मैं ब्रज से नहीं हूँ किन्तु ब्रज के विषय में आपके द्वारा दी गयी जानकारी मोहक और बढ़िया लगती है ! गीतों के शब्द बहुत सुन्दर हैं और अगर पूरे होते तो और बात जमती ! पर्सनल पति का लफड़ा बहुत मस्त लगा ! बहुत सुन्दर , पढने लायक पोस्ट योगी जी

    yogi sarswat के द्वारा
    October 28, 2013

    बहुत बहुत आभार श्री प्रेम कुमार जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

sadguruji के द्वारा
October 26, 2013

आदरणीय योगी सारस्वत जी आप ने अपने क्षेत्र की वैवाहिक संस्कृति का बहुत सजीव वर्णन प्रस्तुत किया है.जीवन का रस वस्तुत: उत्सव में ही है और हर व्यक्ति के जीवन में विवाह से बड़ा उत्सव क्या हो सकता है.आप ने कार्टून “करवाचौथ के दिन” और “बाकी दिन” होठों पर मुस्कुराहट लाने के लिए बहुत अच्छा चुन है.बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    October 28, 2013

    बहुत बहुत आभार श्री सद्गुरु जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

Madan Mohan saxena के द्वारा
October 25, 2013

बहुत सुन्दर योगीजी सुदर प्रस्तुति . रोचक ,सार्थक और प्रभाबशाली . कभी इधर भी पधारें सादर मदन

    yogi sarswat के द्वारा
    October 28, 2013

    बहुत बहुत आभार श्री मदन मोहन सक्सेना जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! अतिशय धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
October 24, 2013

प्रणाम सर जी! आपने गागर में सागर डालने की कोशिश की है ..एक दिन घूरे के, गोबर के और पति के भी! ….समझ सकता हूँ मैं भी पति हूँ (पर्सनल या…) पर सर जी आपका यह ब्लॉग भी पर्सनल ही होना चाहिए कही गलती से भी भाभी जी की नजर इस पर पर गयी तो, वो ‘एक दिन’ भी गया हाथ से(?) बहरहाल गुजारिश थी कि कुछ गीतों का भावार्थ भी बता देते तो ज्यादा समझ में आती…..सादर!

    yogi sarswat के द्वारा
    October 28, 2013

    आगे के बीलोग में आपको अवशय भावार्थ से परिचित कराउंगा दरणीय श्री जवाहर सिंह जी और सम्भव हुआ तो और भी बातें आप तक पहुंचेंगी आदरणीय श्री जवाहर सिंह जी ! बहुत बहुत आभार आपका समर्थन मुझे लगातार मिल रहा है ! धन्यवाद

S.B.Sharma के द्वारा
October 24, 2013

मंडप में भिक्षा के सन्दर्भ में निवेदन है कि गृहस्थ आश्रम (विवाह) में प्रवेश से पूर्व इसमें प्रतीकात्मक रूप से विद्याध्ययन पूर्ण कराया जाता है. चारों वेदों का अध्ययन पूर्ण कराया जाता है . गुरुकुल पद्धति के अनुरूप दरवाजे-दरवाजे पर(यहाँ घर में ही) माता-बहनोंसे भिक्षा मांग कर गुरु को या आश्रम में दे दी जाती है. (आजकल समय के प्रभाव से इसे भी मान्य पक्ष में बांट दिया जाता है.)                                                  श्यामबाबू शर्मा(सारस्वत), चौहरी,मथुरा

    yogi sarswat के द्वारा
    October 28, 2013

    बेहतरीन जानकारी देने और मेरे शब्दों को अपना आशीर्वाद प्रदान करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय श्री श्याम बाबू शर्मा जी ! आशा है संवाद बनाये रखेंगे ! अनेक अनेक धन्यवाद


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