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"आप" के बहाने ही सही ………राजनीतिक समालोचना (कांटेस्ट)

Posted On: 27 Jan, 2014 Contest में

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लोकतान्त्रिक व्यवस्था में कितनी ही खामियां हों या रही हों , लेकिन फिर भी मुझे लगता है ये शासन की सर्व्श्रेस्थ प्रणाली है ! बहुत से लोग भारत में रहकर भारत की शासन प्रणाली को हेय दृष्टि से देखते हैं ! वो लोग भूल जाते हैं कि इसी प्रणाली की बदौलत किसान पुत्र श्री लाल बहादुर शास्त्री भारत के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे हैं और इसी प्रणाली के माध्यम से , भले ही सीधे नहीं , रामेश्वरम के एक गाओं से पैदा होकर वैज्ञानिक बनते हुए डॉ कलाम राष्ट्रपति भवन की सीढ़ियां चढ़ सके हैं ! हर व्यवस्था में कोई न कोई खामी होती है , व्यवस्था में ही क्यों , हर चीज में कोई न कोई खामी होती है लेकिन उन खामियों को लगातार सुधारा जाना भी एक प्रक्रिया है ! भारत के पड़ोस में देखिये तो , वो जिन्हें भारतीय लोकतंत्र में खामियां ही खामियां नजर आती हैं , उनकी आँखें खुल जाएंगी ! पाकिस्तान में आज़ादी के इतने सालों बाद पहली बार 2013 में लोकतान्त्रिक प्रक्रिया के तहत सरकार का बदलाव हुआ है ! बंगला देश में लोकतंत्र को मजाक बनाकर रख दिया है वहाँ की दोनों प्रमुख पार्टियों ने ! नेपाल में लोकतंत्र अपने बाल्यकाल में ही दम तोड़ देने को मजबूर दीखता है ! भूटान में लोकतंत्र आँखें खोल रहा है लेकिन आज भी वहाँ का लोकतंत्र राजशाही के चंगुल से निकलने के लिए फड़फड़ा रहा है ! चीन में लोकतंत्र की कोई कली भी नहीं खिलती और श्रीलंका का लोकतंत्र एक दिखावा मात्र है ! तो इतने बेहतर लोकतंत्र को अगर कोई सड़ी गली व्यवस्था कहता है तो लाजमी है कि उससे ये सवाल पूछा जाना चाहिए कि वो इससे बेहतर किस व्यवस्था की बात कर रहा है ?


पाकिस्तान और बांग्लादेश में जो लोकतंत्र है , उसका अध्ययन करने के लिए पैर बढ़ाएंगे तो आपको लगेगा इससे बदतर कुछ नहीं हो सकता ! पाकिस्तान में न विपक्ष का नेता सत्ता पक्ष से बात करता है न कोई सलाह लेता है , यही हाल बंगला देश में भी है ! जहां कई वर्षों से , अपने अपने हितों और अपने अपने अहम की वजहों से दौनों विपक्षी पार्टियों की नेता आपस में कभी बात नहीं करतीं , चाहे देश में कितना भी संकट क्यूँ न आ जाए ! अगर भारत की बात करें तो ऐसा कभी नहीं रहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष ने कभी भी इस तरह का बर्ताव किया हो , राजनीती अपनी जगह है लेकिन देश हित सबसे पहले ! इंदिरा गांधी से लेकर मनमोहन सिंह और अटल बिहारी वाजपायी तक , जब भी देश पर कोई , आपस में मिल बैठकर हल निकला है ! ये लोकतंत्र का एक बहुत सुदृढ़ और सुन्दर पहलु है ! भारत की मुख्य राजनीतिक पार्टियों का उद्देश्य और क्रियाकलाप भी इस तरह के नहीं रहे हैं कि नेताओं के व्यक्तिगत सम्बन्ध निम्न स्तर तक पहुँच गए हों ! राजनीतिक मतभेद होना और व्यक्तिगत मनभेद होना दोनों अलग अलग बातें हैं ! ये भारतीय लोकतंत्र की खूबी हैं ! भारतीय लोकतंत्र की खूबी ये भी हैं कि नरेंद्र मोदी के मंच पर जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दिखाई देते हैं तो ये सन्देश जरुर जाता है कि हम भारत के लोग भले ही राजनीतिक रूप से अलग परिपाटी के हों लेकिन हमारा मकसद सिर्फ एक है और वो है भारत की आन बान और शान को बनाये रखना ! मुझे ये परिपाटी हमेशा आकर्षित करती है !


हालाँकि ऐसा नहीं है कि सब कुछ अच्छा ही होता है या होता रहा है लोकतंत्र के नाम पर ! लेकिन ऐसा हमेशा होता आया है कि हर चीज में कोई न कोई एक छेद जरुर निकलेगा ही ! कुछ तिकड़मबाज , अपनी तिकड़मों के तिरपाल तानकर हर जगह बैठे होते हैं , तो यहाँ , इस प्रणाली में भी मिलेंगे ही ! लेकिन इसके साथ ही एक सम्भावना इस प्रणाली को मजबूत करने की भी बनी ही रहती है ! जापानी भाषा में एक शब्द होता है कैज़ेन ( KAIZEN) जिसके अनुसार हर चीज में निरंतर सुधार करने से उसकी गुणवत्ता में सुधार आता है ! यही कुछ लोकतंत्र के साथ भी है कि निरंतर और स्टेप बाई स्टेप हम एक बेहतर प्रणाली जो पहले से ही मौजूद है , को और ज्यादा पारदर्शी और मजबूत बनाएं !


करत करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान
रसरी आवत जात ते, सिल पर परत निसान


भारत में 2013 के शुरू में अरविन्द केजरीवाल ने ‘आप ” के माध्यम से निश्चित रूप से एक नयी बहस को जन्म दिया है ! हम अरविन्द के चाहे कितने भी बड़े विरोधी हों लेकिन हम इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि उनकी वजह से ही आज राजनीती में ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को एक पहिचान मिल रही है ! जिस तरह से आज विकास और स्वच्छ और बेहतर शासन का पर्याय नरेंद्र मोदी हैं उसी तरह ईमानदारी की पहिचान अरविन्द भी बन रहे हैं ! नरेंद्र मोदी या अरविन्द केजरीवाल अपने मकसद में कितने कामयाब होते हैं या ये कहा जाए जनता उनकी नीतियों का और उनका कितना समर्थन करती है ये एक अलग विषय हो सकता है लेकिन इस बात में कोई दोराय नहीं है कि जाति और धर्मों में बँटी भारतीय राजनीती को इन दौनों ने विकास और ईमानदारी की परिपाटी पर ला खड़ा किया है ! राजनीती में इन दौनों विशेषताओं पर बात होने लगी है , बल्कि ये विषय centralize भी हो गए हैं ! ईमानदारी के पुरोधाओं को एक नाम और सम्मान मिल रहा है ! सबको समझ आ रहा है कि अगर अपनी दूकान चलानी है या चलाये रखनी है तो नए जमाने के हिसाब से बदलना पड़ेगा ही अन्यथा मात खा जायेंगे ! इस बात में कोई शक नहीं कि ईमानदारी और विकास के पुरोधाओं को विशेष स्थान मिल रहा है अन्यथाआज तक ईमानदारी की मिसालें कायम कर चुके डॉ हर्षवर्धन , गोआ के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर या त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार को कौन भाव देता था ! “आप ” के बहाने ही सही लेकिन अब राजनीती में सफाई का काम शुरू तो हो ही चूका है , हो सकता है इसमें बहुत समय लगे किन्तु एक आवाज तो निकली है ये बहुत सार्थक और स्पष्ट सन्देश है भातरीय राजनीती के उन पुरोधाओं के लिए जिन्हें लगता था कि राजनीती कभी नहीं बदलेगी !


आखिर में , बस इतना कहना चाहूंगा कि नेता कोई मंगल गृह से नहीं आते हैं , ये हमारे बीच में से ही निकलतेहैं इसलिए सबसे पहले और सबसे बड़ी जिम्मेदारी हमारी बनती है कि हम अपने विवेक और समझ का पूरा उपयोग करते हुए पोलिंग बूथ पर जाकर अपने मत का प्रयोग करें , हमारे वोट से न केवल सरकार बनती है , बल्कि संसद भी बनती है और हमारे वोट से ही मजबूत लोकतंत्र बनता है ! हमारी राजनीतिक समझ हमें अलग अलग कर सकती है लेकिन हम सबका ध्येय मात्र एक होना चाहिए -मजबूत लोकतंत्र और मजबूत और साफ़ सुथरी सरकार  !

गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें !


जय हिन्द ! जय हिन्द की सेना !

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56 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Delonte के द्वारा
October 17, 2016

Jonas: "Vad jag förstår fattar svenska ministrar i rådet inga beslut som inte är förankrade i den svenska riksdagen."Frågan är hur väl detta funkar i praktiken..? &qttg;Regeringsduglitheo&quou; och allt?

pkdubey के द्वारा
July 1, 2014

बहुत उत्तम राजनैतिक विश्लेषण भाई.

mayankkumar के द्वारा
June 29, 2014

योगी जी, काफी दिन से आप से मुलाकात नहीं हो पाई। ना ही आपकी प्रतिक्रियाओं के माध्‍यम से और ना ही पोस्‍ट के द्वारा ही। हम फिर से इस प्‍लेटफॉमर् पर आए हैं। आप उन लोगों में से हैं, जिन्‍हें मैं इस ब्‍लॉग पर उनकी लेखनी पढ़कर पहचान सकता हूं। आइए, सादर आमंत्रत हैं हमारे ब्‍लॉग पर। सधन्‍यवाद

    yogi sarswat के द्वारा
    June 30, 2014

    मित्रवर मयंक जी , मैं इस मंच पर हूँ , आपने ही शायद लम्बा ब्रेक ले लिया था ! हाँ , मैंने इसके साथ एक नया ब्लॉग शुरू किया है उस पर ज्यादा समय दे रहा हूँ लेकिन यहाँ भी मैं पूर्ण रूप से उपस्थित हूँ ! आपके ब्लॉग पर अवश्य ही उपस्थिति दर्ज कराऊंगा ! आपकी प्रशानशा के लिए हार्दिक अभिनन्दन ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

    Carley के द्वारा
    October 17, 2016

    Such an imrvessipe answer! You’ve beaten us all with that!

Ravindra K Kapoor के द्वारा
June 17, 2014

बहुत ही सुन्दर लेख जिसमें आपने भारत की सबसे कीमती धरोहर को जिस मान और सम्मान की ऊचाईयों पर अपनी सुशल लेखनी से पहुँचाया है उसके लिए योगीजी आप को अनेकों साधुवाद. एक बात जो चुनाव में सबसे अधिक महत्वपूर्ण रही उसकी ओर हम ठीक से सायद ध्यान नहीं दे सके ओर वो है भारत के लाखों लाखों मतदाताओं ने फिर चाहे वो पढ़े लिखे न भी रहे हों देश को बचाने के लिए हज़ारों साल के बाद शायद पहली बार जाती दल ओर धर्म के धरातल से ऊपर उठ कर वोट दिया है ओर विघटनकारी लोगों को एक अच्छा सबक भी. सुभकामनाओं के साथ ….रवीन्द्र के कपूर

    yogi sarswat के द्वारा
    June 30, 2014

    स्पष्ट रूप से श्री रविन्द्र जी ! बहुत दिनों के बाद भारत के लोगों ने एक मजबूत सरकार के लिए वोट दिया है , और मजबूत सरकार क्या करती है ये देखना है ! बहुत बहुत आभार आपका श्री कपूर जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

harirawat के द्वारा
May 29, 2014

योगी सरस्वती जी आपने अपनी लेखनी को जरा ज्यादा ही विराम दे दिया है ! आपका योगदान की प्रवाहित गंगा में भाषा और ज्ञान की तरंगे उठती हैं जिसकी छींटे मात्र से जिज्ञासुओं की प्यास बुझ जाती है ! इस प्रवाहित धारा को बहने दीजिए, आशा है आपकी लेखनी फिर से सोए हुए देश भक्तों में जागृति का बिगुल बजाएगी ! आप ब्लॉग में आए अपनी सार्थक टिप्पणी से मोराल अफजाई किया ! हरेन्द्र

    yogi sarswat के द्वारा
    May 30, 2014

    आदरणीय श्री रावत जी आपने सही कहा की इस मंच पर मैंने अपनी लेखनी को विराम तो नहीं , लेकिन हाँ कुछ कम लिखना जरूर शुरू कर दिया है ! असल में आपके आशीर्वाद से एक नया यात्रा ब्लॉग बनाया है जहां बढ़िया रेस्पोंस मिल रहा है ! मैं आपको उस ब्लॉग की लिंक दे रहा हूँ और आशा करता हूँ आपका आशीर्वाद वहां भी मिलेगा ! बहुत बहुत आभार

Sushma Gupta के द्वारा
May 11, 2014

एक समसामयिक राजनीतिक परिवेश में लिखा गया सशक्त आलेख ..

    yogi sarswat के द्वारा
    May 30, 2014

    बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय सुषमा जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! अतिशय धन्यवाद

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
May 8, 2014

हमारी राजनीतिक समझ हमें अलग अलग कर सकती है लेकिन हम सबका ध्येय मात्र एक होना चाहिए -मजबूत लोकतंत्र और मजबूत और साफ़ सुथरी सरकार ! सार्थक ..सुन्दर व्याख्या और विश्लेषण योगी जी ….हम भी यही आपकी बात दोहराएंगे जिसको हम अपने बीच से चुन के भेजते हैं उन्हें जांच परख कर ही चुनें झेलना भी पांच साल क्या बाद में भी हम सब को ही है भ्रमर ५

    yogi sarswat के द्वारा
    May 9, 2014

    आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय भ्रमर साब ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

deepak pande के द्वारा
April 13, 2014

 aap ke bahane aapka sunder sargarbhit lekh aadarniya yogi jee

    yogi sarswat के द्वारा
    April 15, 2014

    हार्दिक आभार श्री दीपक जी ! संवाद बनाये रखियेगा !

shuklabhramar5 के द्वारा
March 31, 2014

राजनीती अपनी जगह है लेकिन देश हित सबसे पहले ! इंदिरा गांधी से लेकर मनमोहन सिंह और अटल बिहारी वाजपायी तक , जब भी देश पर कोई , आपस में मिल बैठकर हल निकला है ! ये लोकतंत्र का एक बहुत सुदृढ़ और सुन्दर पहलु है प्रिय योगी जी बहुत ही विचारणीय और सार्थक आलेख ,,सच में देश प्रेम की भावना से कुछ सोचा जाए किया जाए तो कितना अच्छा हो लेकिन अब देश और देश प्रेम भूलता ही जा रहा है .. भ्रमर ५

    yogi sarswat के द्वारा
    April 15, 2014

    बहुत बहुत आभार आपका श्री भ्रमर जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! अतिशय धन्यवाद !

jag mohan thaken के द्वारा
March 7, 2014

सुन्दर लेख लिखा है .

    Melloney के द्वारा
    October 17, 2016

    Noihtng I could say would give you undue credit for this story.

harirawat के द्वारा
March 6, 2014

बहुत सुन्दर शब्दों से सजा कर एक सार्थक और प्रजातंत्र की सही ब्याख्या देकर आपने कही नेताओं को चस्मे बदलने पर मजबूर कर दिया है, जो कुर्सी को अपनी विरासत समझ रहे थे ! बहुत बधाई !

gopesh के द्वारा
March 5, 2014

योगी सारस्वत जी बिलकुल ये तथ्य है कि आज ईमानदार राजनीती करने के लिए , राजनीति में शुचिता लाने के लिए जो सुगबुगाहट दिख रही है उसमें अरविन्द केजरीवाल जी का उल्लेखनीय योगदान है ,, किन्तु ,,,,,,,इतना ही काफी नही था अरविन्द जी के लिए कभी मेरे लेख को भी समय दीजियेगा http://gopesh.jagranjunction.com/2014/03/04/%E2%80%9C%E0%A4%97%E0%A4%A0%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%97/

jagojagobharat के द्वारा
February 22, 2014

बहुत सुन्दर

    yogi sarswat के द्वारा
    February 26, 2014

    बहुत बहुत आभार .संवाद बनाये रखिये

sarthak के द्वारा
February 9, 2014

बहुत सही

    yogi sarswat के द्वारा
    February 26, 2014

    आभार आपका

anant singh के द्वारा
February 8, 2014

एक सटीक और सार्थक आलोचना ! हालाँकि मैं आपकी इस बात से सहमत नहीं हूँ कि अरविन्द केजरीवाल ईमानदार व्यक्ति है , वो अभी चुप है क्योंकि उसे राजनीतिक महावाकंशा ऐसा नहीं करने देती अनयथा सिसोदिया के एनजीओ कि जांच कौन करेगा !

    yogi sarswat के द्वारा
    February 8, 2014

    आपके विचारों का हार्दिक अभिनन्दन श्री अनंत सिंह जी ! संवाद बनाये रखियेगा

sadguruji के द्वारा
February 5, 2014

आदरणीय योगी जी,सादर हरिस्मरण.बहुत अच्छी राजनितिक समीक्षा आप ने की है.अपने लेख में आपने बहुत सही कहा है- भारत में 2013 के शुरू में अरविन्द केजरीवाल ने ‘आप ” के माध्यम से निश्चित रूप से एक नयी बहस को जन्म दिया है ! हम अरविन्द के चाहे कितने भी बड़े विरोधी हों लेकिन हम इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि उनकी वजह से ही आज राजनीती में ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को एक पहिचान मिल रही है ! जिस तरह से आज विकास और स्वच्छ और बेहतर शासन का पर्याय नरेंद्र मोदी हैं उसी तरह ईमानदारी की पहिचान अरविन्द भी बन रहे हैं ! नरेंद्र मोदी या अरविन्द केजरीवाल अपने मकसद में कितने कामयाब होते हैं या ये कहा जाए जनता उनकी नीतियों का और उनका कितना समर्थन करती है ये एक अलग विषय हो सकता है लेकिन इस बात में कोई दोराय नहीं है कि जाति और धर्मों में बँटी भारतीय राजनीती को इन दौनों ने विकास और ईमानदारी की परिपाटी पर ला खड़ा किया है ! राजनीती में इन दौनों विशेषताओं पर बात होने लगी है आप को बहुत बहुत बधाई.कांटेस्ट के लिए मेरी ओर से आपको बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनायें.

    yogi sarswat के द्वारा
    February 5, 2014

    बहुत बहुत आभार आदरणीय श्री सद्गुरु जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

harirawat के द्वारा
February 4, 2014

योगी जी, काफी दिनों बाद आपका लोकतांत्रिक विचारधारा से जुड़ा लेख पढने को मिला ! बहुत सुन्दर ! सचमुच में भारत का लोक तंत्र सार्थकता कि एक मिशाल है, कुछ कुकर्मी राजनैतिक अपनी स्वार्थ सीधी के लिए इस तंत्र को मोड़ने की कोशीश करते हैं, लेकिन अरविन्द और मोदी जैसे लोकतंत्र सच्चे हिमायती इसको अपनी सही जगह पर फिर से बिठा देते हैं ! बहुत सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई ! हरेन्द्र जागते रहो !

    yogi sarswat के द्वारा
    February 5, 2014

    बहुत बहुत आभार आदरणीय श्री हरेन्द्र रावत जी ! आपके शब्द और आशीर्वाद एक नईऊर्जा का प्रवाह करते हैं ! बहुत बहुत धन्यवाद

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
February 3, 2014

बिलकुल सही रजनैतिक गवेषणा ! योगी जी बधाई !!

    yogi sarswat के द्वारा
    February 4, 2014

    बहुत बहुत आभार आपका श्री आचार्य जी !

jlsingh के द्वारा
January 31, 2014

आदरणीय योगी जी, सादर अभिवादन! २६ और २८ तारिख दोनों दिन आप दैनिक जागरण में छाये रहे. मैं कितन खुश हुआ, यह मैं ही जानता हूँ. तब से मैं आपके इस ब्लॉग को खोज रहा था, एक दिन दिखा भी तो पूरा पढ़ नहीं पाया और प्रतिक्रिया नहीं दे पाया … इसके लिए आप क्षमा करेंगे …पर दोनों दिन मैं आपके इसके मुख्यांश को फेसबुक पर अपलोड कर मैंने अपना कर्त्तव्य पूरा किया था. …बस बाकी सब कुछ आपने लिख दिया है. मुझे कुछ अलग से कहने की जरूरत नहीं है ..हमें अपने मत का इस्तेमाल सोच समझकर सही उम्मीदवार को देना है ..सादर!

    yogi sarswat के द्वारा
    February 3, 2014

    आपका अपने प्रति और अपने शब्दों के प्रति स्नेह जानकार अति प्रसन्नता हुई आदरणीय श्री जवाहर सिंह जी ! बहुत बहुत आभार , आपके विचारों का हमेशा अभिनन्दन करता हूँ ! संवाद बनाये रखियेगा ,बहुत बहुत धन्यवाद !

    Vinny के द्वारा
    October 17, 2016

    Stands back from the keyboard in amzmtaene! Thanks!

Madan Mohan saxena के द्वारा
January 31, 2014

बहुत ही बढ़िया प्रस्तुति आखिर में , बस इतना कहना चाहूंगा कि नेता कोई मंगल गृह से नहीं आते हैं , ये हमारे बीच में से ही निकलतेहैं इसलिए सबसे पहले और सबसे बड़ी जिम्मेदारी हमारी बनती है कि हम अपने विवेक और समझ का पूरा उपयोग करते हुए पोलिंग बूथ पर जाकर अपने मत का प्रयोग करें , हमारे वोट से न केवल सरकार बनती है , बल्कि संसद भी बनती है और हमारे वोट से ही मजबूत लोकतंत्र बनता है ! हमारी राजनीतिक समझ हमें अलग अलग कर सकती है लेकिन हम सबका ध्येय मात्र एक होना चाहिए -मजबूत लोकतंत्र और मजबूत और साफ़ सुथरी सरकार !

    yogi sarswat के द्वारा
    February 3, 2014

    आभार आपका श्री मदन मोहन जी ! सहयोग की कामना करता हूँ ! धन्यवाद

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
January 29, 2014

सटीक बात कही है आपने .आभार

    yogi sarswat के द्वारा
    February 3, 2014

    बहुत बहुत आभार आपका ! संवाद बनाये रखें ! धन्यवाद

nishamittal के द्वारा
January 27, 2014

इस पोस्ट पर पहले भी प्रतिक्रिया दी थी जो अब नहीं हैं पुनः यही कहूँगी कि विपक्ष MZBOO0T होना चाहिए जिससे सत्ता[पक्ष अपने कर्तव्य का पालन करे परन्तु नियत विपक्ष की गर खोटी है तो ये तो फिक्सिंग ही कहलाएगी

    yogi sarswat के द्वारा
    February 3, 2014

    आपका आशीर्वाद मिला , बहुत बहुत आभार आदरणीय निशा जी मित्तल ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

    Spud के द्वारा
    October 17, 2016

    Ik blijf echt zo enorm fan van dat shirt! Jammer dat het al zo oud is dat het niet meer in de winkels ligt! Gave combi met dat roaa.!wwwecrektivityandchocoljte.blogspot.com

ranjanagupta के द्वारा
January 27, 2014

योगी जी !आपको शतश:बधाई !बहुत सुन्दर आलेख !बहुत सुलझी विचार धारा !!

    yogi sarswat के द्वारा
    February 3, 2014

    आभार आपका आदरणीय रंजना गुप्ता जी ! सहयोग बनाये रखियेगा ! धन्यवाद

Sonam Saini के द्वारा
January 27, 2014

न्यूज़ पेपर में ब्लॉग छपने की बधाई भैया ………. आखिर में , बस इतना कहना चाहूंगा कि नेता कोई मंगल गृह से नहीं आते हैं , ये हमारे बीच में से ही निकलतेहैं इसलिए सबसे पहले और सबसे बड़ी जिम्मेदारी हमारी बनती है कि हम अपने विवेक और समझ का पूरा उपयोग करते हुए पोलिंग बूथ पर जाकर अपने मत का प्रयोग करें , हमारे वोट से न केवल सरकार बनती है , बल्कि संसद भी बनती है और हमारे वोट से ही मजबूत लोकतंत्र बनता है ! हमारी राजनीतिक समझ हमें अलग अलग कर सकती है लेकिन हम सबका ध्येय मात्र एक होना चाहिए -मजबूत लोकतंत्र और मजबूत और साफ़ सुथरी सरकार !…………….निश्चित ही हमे वोट करने के लिए जाना चाहिए ,,,,,,,,,,,

    yogi sarswat के द्वारा
    February 3, 2014

    आभार आपका प्रिय सोनम जी ! संवाद बनाये रखियेगा ! धन्यवाद


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